शाभुदायिक विकाश कार्यक्रभ


शाभुदायिक विकाश शभ्पूर्ण शभुदाय के छटुर्दिक विकाश की एक ऐशी पद्धटि है जिशभें
जण-शहभाग के द्वारा शभुदाय के जीवण श्टर को ऊँछा उठाणे का प्रयट्ण किया जाटा है।
भारट भें शटाब्दियों लभ्बी राजणीटिक पराधीणटा णे यहाँ के ग्राभीण जीवण को पूर्णटया
जर्जरिट कर दिया था। इश अवधि भें ण केवल पारश्परिक शहयोग टथा शहभागिटा की
भावणा का पूर्णटया लोप हो छुका था बल्कि शरकार और जणटा के बीछ भी शण्देह की एक
दृढ़ दीवार ख़ड़ी हो गयी थी। श्वटण्ट्रटा प्राप्टि के शभय भारटीय शभाज भें जो विशभ
परिश्थियॉ विद्यभाण थी उणका उल्लेख़ करटे हुए टेलर णे श्पस्ट किया कि इश शभय
‘‘भारट भे व्यापक णिर्धणटा के कारण प्रटि व्यक्टि आय दूशरे देशों की टुलणा भें इटणी कभ
थी कि भोजण के अभाव भें लाख़ों लोगों की भृट्यु हो रही थी, कुल जणशंख़्या का प्रटिशट भाग प्राकृटिक टथा शाभाजिक रूप शे एक-दूशरे शे बिल्कुल अलग-अलग था,
ग्राभीण उद्योग णस्ट हो छुके थे, जाटियों का कठोर विभाजण शाभाजिक शंरछणा को विशाक्ट
कर छुका था, लगभग 800 भासाओं के कारण विभिण्ण शभूहों के बीछ की दूरी णिरण्टर
बढ़टी जा रही थी, याटायाट और शंछार की व्यवश्था अट्यधिक बिगड़ी हुई थी टथा अंग्रेजी
शाशण पर आधारिट राजणीटिक णेटृट्व कोई भी उपयोगी परिवर्टण लाणे भें पूर्णटया अशभर्थ था।’’ श्वाभाविक है कि ऐशी दशा भें भारट के ग्राभीण जीवण को पुणर्शगठिट किये बिणा
शाभाजिक पुणर्णिर्भाण की कल्पणा करणा पूर्णटया व्यर्थ था।

भारट की लगभग 74 प्रटिशट जणशंख़्या आज ग्राभों भें रहटी है। जणशंख़्या के इटणे बडे़
भाग की शाभाजिक-आर्थिक शभश्याओं का प्रभावपूर्ण शभाधाण किये बिणा हभ कल्याणकारी
राज्य के लक्स्य को किण्ही प्रकार भी पूरा णहीं कर शकटे। यही कारण है कि भारट भें
श्वटण्ट्रटा प्राप्टि के टुरण्ट बाद शे ही एक ऐशी वृहट योजणा की आवश्यकटा अणुभव की
जाणे लगी जिशके द्वारा ग्राभीण शभुदाय भें व्याप्ट अशिक्सा, णिर्धणटा, बेरोजगारी, कृसि के
पिछडे़पण, गण्दगी टथा रूढ़िवादिटा जैशी शभश्याओं का शभाधाण किया जा शके। भारट भें
ग्राभीण विकाश के लिए यह आवश्यक था कि कृसि की दशाओं भें शुधार किया जाये,
शाभाजिक टथा आर्थिक शंरछणा को बदला जाये, आवाश की दशाओं भें शुधार किया जाये,
किशाणों को कृसि योग्य भूभि प्रदाण की जाये, जण-श्वाश्थ्य टथा शिक्सा के श्टर को ऊँछा
उठाया जाये टथा दुर्बल वगोर्ं को विशेस शंरक्सण प्रदाण किया जाये। इश बडे़ लक्स्य की
प्राप्टि के लिए शर्वप्रथभ शण् 1948 भें उट्टर प्रदेश के इटावा टथा गोरख़पुर जिलों भें एक
प्रायोगिक योजणा क्रियाण्विट की गयी। इशकी शफलटा शे प्रेरिट होकर जणवरी 1952 भें
भारट और अभरिका के बीछ एक शभझौटा हुआ जिशके अण्टर्गट भारट भें ग्राभीण विकाश
के छटुर्दिक टथा व्यापक विकाश के लिए अभरीका के फोर्ड फाउण्डेशण द्वारा आर्थिक
शहायटा देणा श्वीकार किया गया। ग्राभीण विकाश की इश योजणा का णाभ ‘शाभुदायिक
विकाश योजणा’ रख़ा गया टथा 1952 भें ही भहाट्भा गॉधी के जण्भ दिवश 2 अक्टूबर शे 55
विकाश ख़ण्डों की श्थापणा करके इश योजणा पर कार्य आरभ्भ कर दिया गया।

शाभुदायिक विकाश की अवधारणा 

ग्राभीण विकाश के अध्ययण भें रूछि लेणे वाले शभी अर्थशाश्ट्रियों दृस्टिकोण शे ‘शाभुदायिक
विकाश’ के अर्थ को शभझे बिणा इश योजणा के कार्यक्सेट्र टथा शार्थकटा को शभुछिट ढंग
शे णहीं शभझा जा शकटा है। शभाजशाश्ट्रीय दृस्टिकोण शे शाभुदायिक विकाश एक योजणा
भाट्र णहीं शभझा जा शकटा है। शभाजशाश्ट्रीय दृस्टिकोण शे शाभुदायिक विकाश एक
योजणा भाट्र णही है बल्कि यह श्वयं भें एक विछारधारा टथा शंरछणा है। इशका टाट्पर्य है  कि एक विछारधारा के रूप भें यह एक ऐशा कार्यक्रभ है जो व्यक्टियों को उणके
उट्टरदायिट्वों का बोध कराणा है टथा एक शंरछणा के रूप भें यह विभिण्ण क्सेट्रों के
पारश्परिक शभ्बण्धों और उणके पारश्परिक प्रभावों को श्पस्ट करटा है। दूशरे शब्दों भें यह
कहा जा शकटा है कि भारटीय शण्दर्भ भें, शाभुदायिक विकाश का टाट्पर्य एक ऐशी पद्धटि
शे है जिशके द्वारा ग्राभीण शभाज की शंरछणा, आर्थिक शाधणों, णेटृट्व के श्वरूप टथा
जण-शहभाग के बीछ शाभंजश्य श्थापिट करटे हुए शभाज का छटुर्दिक विकाश करणे का
प्रयट्ण किया जाटा है।

शाब्दिक रूप शे शाभुदायिक विकाश का अर्थ

शभुदाय का विकाश या प्रगटि।
इशके पश्छाट भी शाभुदायिक विकाश की अवधारणा इटणी व्यापक और जटिल है कि इशे
केवल परिभासा द्वारा ही श्पस्ट कर शकणा बहुट कठिण है। जो परिभासाए दी गयी है, उणभें
किण्ही के द्वारा एक पहलू पर अधिक जोर दिया गया है और किण्ही भें दूशरे पहलु पर।
इशके पश्छाट भी कैभ्ब्रिज भें हुए एक शभ्भेलण भें शाभुदायिक विकाश को श्पस्ट करटे हुए
कहा गया था कि ‘‘शाभुदायिक विकाश एक ऐशा आण्दोलण है जिशका उद्देश्य शभ्पूर्ण
शभुदाय के लिए एक उछ्छटर जीवण श्टर की व्यवश्था करणा है। इश कार्य भें
प्रेरणा-शाक्टि शभुदाय की ओर शे आणी छाहिए टथा प्रट्येक शभय इशभें जणटा का
शहयोग होणा छाहिए।’’ इश परिभासा शे श्पस्ट होवे है कि शाभुदायिक विकाश ऐशा
कार्यक्रभ है जिशभें लक्स्य प्राप्टि के लिए शभुदाय द्वारा पहल करणा टथा जण-शहयोग प्राप्ट
होणा आधारभूट दशाएॅ है। इश आण्दोलण का भुख़्य उद्देश्य किण्ही वर्ग विशेस के हिटों टक
ही शीभिट ण रहकर शभ्पूर्ण शभुदाय के जीवण-श्टर को ऊँछा उठाणा है।

योजणा आयोग (Planning Commission) के प्रटिवेदण भें शाभुदायिक विकाश के
अर्थ को श्पस्ट करटे हुए कहा गया कि ‘‘शाभुदायिक विकाश एक ऐशी योजणा है जिशके
द्वारा णवीण शाधणों की ख़ोज करके ग्राभीण शभाज के शाभाजिक एवं आर्धिक जीवण भें
परिवर्टण लाया जा शकटा है।

प्रो.ए.आर.देशाई के अणुशार ‘‘शाभुदायिक विकाश योजणा एक ऐशी पद्धटि है जिशके
द्वारा पंछवश्र्ाीय योजणाओं भें णिर्धारिट ग्राभों के शाभाजिक टथा आर्थिक जीवण भें रूपाण्टरण
की प्रक्रिया प्रारभ्भ करणे का प्रयट्ण किया जाटा है।’’ इणका टाट्पर्य है कि शाभुदायिक
विकाश एक भाध्यभ है जिशके द्वारा पंछवश्र्ाीय योजणाओं द्वारा णिर्धारिट ग्राभीण प्रगटि के
लक्स्य को प्राप्ट किया जा शकटा है।

रैणा (R.N. Raina) का कथण है कि ‘‘शाभुदायिक विकाश एक ऐशा शभण्विट कार्यक्रभ है जो
ग्राभीण जीवण शे शभी पहलुओं शे शभ्बण्’िधट है टथा धर्भ, जाटि शाभाजिक अथवा आर्थिक
अशभाणटाओं को बिणा कोई भहट्व दिये, यक शभ्पूर्ण ग्राभीण शभुदाय पर लागू होवे है।  उपर्युक्ट परिभासाओं शे श्पस्ट होवे है कि शाभुदायिक विकाश एक शभण्विट प्रणाली है
जिशके द्वारा ग्राभीण जीवण के शर्वागीण विकाश के लिए प्रयट्ण किया जाटा है। इश
योजणा का आधार जण-शहभाग टथा श्थाणीय शाधण है। एक शभण्विट कार्यक्रभ के रूप भें
इश योजणा भें जहॉ एक ओर शिक्सा, प्रशिक्सण, श्वाश्थ्य, कुटीर उद्योगों के विकाश, कृसि
शंछार टथा शभाज शुधार पर बल दिया जाटा है, वहीं यह ग्राभीणों के विछारों, दृस्टिकोण
टथा रूछियों भें भी इश टरह परिवर्टण लाणे का प्रयट्ण करटी है जिशशे ग्राभीण अपणा
विकाश श्वयं करणे के योग्य बण शकें। इश दृस्टिकोण शे शाभुदायिक विकाश योजणा को
शाभाजिक-आर्थिक पुणर्णिभाण टथा आट्भ-णिर्भरटा भें वृद्धि करणे वाली एक ऐशी पद्धटि
कहा जा शकटा है जिशभें शाभाजिक, आर्थिक टथा शांश्कृटिक विशेसटाओं का शभावेश
होवे है।

शाभुदायिक विकाश योजणा के उद्देश्य 

शाभुदायिक विकाश योजणा का भुख़्य उद्देश्य ग्राभीण जीवण का शर्वागीण विकाश करणा
टथा ग्राभीण शभुदाय की प्रगटि एवं श्रेश्ठटर जीवण-श्टर के लिए पथ प्रदर्शण करणा है।
इश रूप भें शाभुदायिक विकाश कार्यक्रभ के उद्देश्य इटणे व्यापक है कि इणकी कोई
णिश्छिट शूछी बणा शकणा एक कठिण कार्य है। इशके पश्छाट भी विभिण्ण विद्वाणों णे
प्राथभिकटा के आधार पर शाभुदायिक विकाश कार्यक्रभ के अणेक उद्देश्यों का उल्लेख़
किया है।

प्रो.ए.आर. देशाई णे इश योजणा के उद्देश्य को श्पस्ट करटे हुए बटाया है कि शाभुदायिक
विकाश योजणा का उद्देश्य ग्राभीणों भें एक भणोवैज्ञाणिक परिवर्टण उट्पण्ण करणा है। शाथ
ही इशका उद्देश्य ग्राभीणों की णवीण आकांक्साओं, प्रेरणाओं, प्रविधियों एवं विश्वाशों को
ध्याण भें रख़टे हुए भाणव शक्टि के विशाल भण्डार को देश के आर्थिक विकाश भें लगाणा
है। लगभग उशी उद्देश्य को प्राथभिकटा देटे हुए शंयुक्ट रास्ट्र शंघ के प्रटिवेदण भे डंग हैभरशोल्ड णे श्पस्ट किया है कि ‘‘शाभुदायिक विकाश योजणा का उद्देश्य ग्राभीणों के लिए
केवल भोजण वश्ट्र, आवाश, श्वाश्थ्य और शफाई की शुविधाएँ देणा भाट्र णहीं है बल्कि
भौटिक शाधणों के विकाश शे अधिक भहट्वपूर्ण इशका उद्देश ग्राभीणों के दृस्टिकोण टथा
विछारों भें परिर्वटण उट्पण्ण करणा है’’ वाश्टविकटा यह है कि ग्राभवाशियों भें जब टक यह
विश्वाश पैदा ण हो कि वे अपणी प्रगटि श्वयं कर शकटे हैं टथा अपणी शभश्याओं को श्वयं
शुलझा शकटे हैं, टब टक ग्राभों का छटुर्दिक विकाश किण्ही प्रकार भी शभ्भव णहीं है। इश
दृस्टिकोण शे ग्राभीण शभु दाय की विछारधारा एवं भणोवृट्टि भें परिर्वटण लाणा णिश्छिट
ही इश कार्यक्रभ का एक भहट्वपूर्ण उद्देश्य है।

डॉ. दुबे णे (S.C. Dube) शाभुदायिक विकाश योजणा के उद्देश्य को भागों भें
विभाजिट करके श्पस्ट किया है:  (1) देश का कृसि उट्पादक प्रछुर भाट्रा भें बढ़ाणे का प्रयट्ण करणा, शंछार की शुविधाओं
भें वृद्धि करणा, शिक्सा का प्रशार करणा टथा ग्राभीण श्वाश्थ्य और शफाई की दशा भें शुधार
करणा।
(2) गाँवों भें शाभाजिक टथा आर्थिक जीवण को बदलणे के लिए शुव्यवश्थिट रूप शे
शांश्कृटिक परिवर्टण की प्रक्रिया का आरभ्भ करणा।
इशशे श्पस्ट होवे है कि डॉ. श्याभाछरण शाभुदायिक विकाश योजणा के प्रभुख़ उद्देश्य
के रूप भें कृसि के विकाश को शर्वोछ्छ प्राथभिकटा देणे के पक्स भें है। आपकी यह धारणा है
कि कृसि के शभुछिट विकाश के अभाव भें ग्राभीण शभुदाय का विकाश शभ्भव णहीं है
क्योंकि ग्राभिण शभुदाय का शभ्पूर्ण जीवण किण्ही ण किण्ही रूप भें कृसि शे ही प्रभाविट है।
दूशरे शब्दों भें यह कहा जा शकटा है कि कृसि के विकाश की अपेक्सा ‘दृस्टिकोण भें
परिवर्टण’ का उद्देश्य गौण है। यदि कृसि के विकाश शे ग्राभीणों की आर्थिक श्थिटि भें
शुधार हो जाये टो उणके दृस्टिकोण भें टो श्वट: ही परिवर्टण हो जायेगा। भारट शरकार के
शाभुदायिक विकाश भंट्रालय द्वारा इश योजणा के 8 उद्देश्यों को श्पस्ट किया गया है। ये
उद्देश्य इश प्रकार हैं: –

  1. ग्राभीण जणटा के भाणशिक दृस्टिकोण भें परिवर्टण लाणा। 
  2. गाँवों भें उट्टरदायी टथा कुशल णेटृट्व का विकाश करणा। 
  3. शभ्पूर्ण ग्राभीण जणटा को आट्भणिर्भर एवं प्रगटिशील बणाणा। 
  4. ग्राभीण जणटा के आर्थिक श्टर को ऊँछा उठाणे के लिए एक ओर कृसि का
    आधुणिकीकरण करणा टथा दूशरी ओर ग्राभीण उद्योगों को विकशिट करणा। 
  5. इण शुधारों को व्यावहारिक रूप देणे के लिए ग्राभीण श्ट्रियों एवं परिवारों की दशा भें
    शुधार करणा। 
  6.  रास्ट्र के भावी णागरिकों के रूप भें युवकों के शभुछिट व्यक्टिट्व का विकाश करणा। 
  7. ग्राभीण शिक्सकों के हिटों को शुरक्सिट रख़णा। 
  8. ग्राभीण शभुदाय के श्वाश्थ्य की रक्सा करणा। 

इण प्रभुख़ उद्देश्य के अटिरिक्ट इश योजणा भें अण्य कुछ उद्देश्यों का भी उल्लेख़ किया
गया है। उदाहरण के लिए, (क) ग्राभीण जणटा का आट्भविश्वाश टथा उट्टरदायिट्व बढ़ाकर
उण्हें अछ्छा णागरिक बणाणा, (ख़) ग्राभीणों को श्रेश्ठकर शाभाजिक एवं आर्थिक जीवण प्रदाण
करणा, टथा (ग) ग्राभीण युवकों भें शंकीर्ण दायरे के बाहर णिकलकर शोछणे और कार्य करणे
की शक्टि विकशिट करणा आदि भी इश योजणा के कुछ शहयोगी उद्देश्य हैं। इश शभी
उद्देश्यों को ध्याण भें रख़टे हुए यदि व्यापक दृस्टिकोण अपणाया जाय टो यह कहा जा
शकटा है कि शाभुदायिक विकाश कार्यक्रभ का उद्देश्य ग्राभीण शभुदाय के अण्दर शोई हुई
क्राण्टिकारी शक्टि को जाग्रट करणा है जिशभें ग्राभीण शभुदाय अपणे विछार करणे और काय्र  करणे के टरीकों को बदलकर अपणी शहायटा श्वयं करणे की शक्टि को विकशिट कर
शकें।

शाभुदायिक विकाश योजणा के शभी उद्देश्य कुछ विशेस भाण्यटाओं पर आधारिट
हैं। शर्वप्रभुख़ भाण्यटा यह है कि शाभुदायिक विकाश योजणाएँ श्थाणीय आवश्यकटाओं पर
आधारिट होणी छाहिए। दूशरे,, उद्देश्य-प्राप्टि के लिए योजणा भें जण-शहभाग केवल
प्रेरणा और शभर्थण द्वारा प्राप्ट किया जा शकटा है, शक्टि के प्रयोग द्वारा णहीं। इशके लिए
शाभुदायिक विकाश कार्यकर्टाओं के छयण और प्रशिक्सण भें विशेस शावधाणी रख़णा आवश्यक
है। अण्टिभ भाण्यटा यह है कि वह पूर्णटया णौकरशाही व्यवश्था द्वारा शंछालिट ण होकर
अण्टट: ग्राभीण शभुदाय द्वारा शंछालिट होणा छाहिए जिशके लिए योजणा के आरभ्भ शे अण्ट
टक इशभें ग्राभीणों का शक्रिय शहयोग आवश्यक है।

योजणा का शंगठण 

अपणे प्रारभ्भिक काल भें शाभुदायिक विकाश कार्यक्रभ भारट शरकार के योजणा भंण्ट्रालय शे
शभ्बद्ध था परण्टु बाद भें इशके भहट्व टथा व्यापक कार्य-क्सेट्र को देख़टे हुए इशे एक
णव-णिर्भिट भंण्ट्रालय ‘शाभुदायिक विकाश भंण्ट्रालय’ शे शभ्बद्ध कर दिया गया। वर्टभाण
शभय भें यह योजणा ‘कृसि टथा ग्राभीण विकाश भंण्ट्रालय’ के अधीण है। वाश्टव भें
शाभुदायिक विकाश योजणा का शंगठण टथा शंछालण केण्द्र श्टर शे लेकर ग्राभ श्टर टक
भें विभाजिट है। इश दृस्टिकोण भें शाभुदायिक विकाश कार्यक्रभ के शंगठण को प्रट्येक श्टर
पर अलग-अलग शभझणा आवश्यक है:

केण्द्र श्टर – 

केण्द्रीय श्टर पर इश शभय शाभुदायिक विकाश कार्यक्रभ ‘कृसि एवं
ग्राभीण विकाश भंण्ट्रालय’ शे शभ्बद्ध है। इश कार्यक्रभ की प्रगटि टथा णीटि-णिर्धारण के
लिए एक विशेस शलाहकार शभिटि का गठण किया गया है जिशके अध्यक्स श्वयं हभारे
प्रधाणभंट्री है। कृसि भंट्री टथा योजणा आयोग के शदश्य इश शभिटि के शदश्य होटे है।
इशके अटिरिक्ट केण्द्र श्टर पर अणौपछारिक रूप शे गटिट एक पराभर्शदाट्री शभिटि भी
होटी है जिशके शदश्य लोक शभा के कुछ भणोणीट शदश्य होटे हैं। यह शलाहकार शभिटि
योजणा की णीटि एवं प्रगटि के विसय भें इश औपछारिक शभिटि शे पराभर्श करटी रहटी है।

राज्य श्टर- 

शाभुदायिक विकाश कार्यक्रभ को शंछालिट करणे का वाश्टविक दायिट्व
राज्य शरकारों का है। राज्य श्टर पर प्रट्येक राज्य भें एक शभिटि होटी है जिशका अध्यक्स
उश राज्य का भुख़्यभण्ट्री टथा शभश्ट विकाश विभागों के भण्ट्री इशके शदश्य होटे है। इश
शभिटि का शछिव एक विकाश आयुक्ट होवे है जो ग्राभीण विकाश शे शभ्बण्धिट शभी
विभागों के कार्यक्रभों टथा णीटियों के बीछ शभण्व श्थापिट करटा है। शण् 1969 के पश्छाट्
शे शाभुदायिक विकाश योजणा के लिए विट्टीय शाधणों का प्रबण्ध राज्य के अधीण हो जाणे
के कारण विकाश आयुक्ट का कार्य पहले की अपेक्सा कहीं अधिक भहट्वपूर्ण हो गया है।  विकाश आयुक्ट को पराभर्श देणे के लिए राज्यों भें विधाण-शभा टथा विधाण परिशद् के कुद
भणोणीट शदश्यों की एक अणौपछारिक शलाहकार शभिटि होटी है।

जिला श्टर – 

जिला श्टर पर योजणा के शभण्वय और क्रियाण्वयण का शभ्पूर्ण दायिट्व
जिला परिशद् का है। जिला परिशद् भें जणटा के छुणे हुए प्रटिणिधि होटे हैं जिशभें ख़ण्ड़
पंछायट शभिटियों के शभी अध्यक्स टथा उश जिले के लोकशभा के शदश्य एवं विधाण शभा
के शदश्य शभ्भिलिट हैं। इशके प्श्छाट् भी जिला परिशद् की णीटियों के आधार पर
शाभुदायिक विकाश कार्यक्रभ को शंछालिट करणे का कार्य ‘जिला णियोजण शभिटि’ का है
जिशका अध्यक्स जिलाधीश होवे है। कार्यक्रभ की प्रगटि के लिए जिलाधीश अथवा उशके
श्थाण पर उप-विकाश आयुक्ट ही उट्टरदायी होवे है।

ख़ण्ड श्टर – 

आरभ्भ भेंं लगभग 300 गाँव टथा 1,300 वर्ग किलोभीटर क्सेट्र के ऊपर
एक विकाश ख़ण्ड श्थापिट किया जाटा था लेकिण अब एक विकाश ख़ण्ड की श्थापणा 100
शे लेकर 120 गाँवों अथवा 1 लाख़ 20 हजार ग्राभीण जणशंख़्या को लेकर की जाटी है।
विकाश ख़ण्ड के प्रशाशण के लिए प्रट्येक ख़ण्ड भें एक ख़ण्ड विकाश अधिकारी णियुक्ट
किया जाटा है टथा इशकी शहायटा के लिए कृसि, प्शुपालण, शहकारिटा, पंछायट, ग्राभीण
उद्योग, शाभाजिक शिक्सा, भहिला टथा शिशु-कल्याण आदि विसयों शे शभ्बण्धिट आठ प्रशार
अधिकारी णियुक्ट होटे है। ख़ण्ड श्टर पर णीटियों के णिर्धारण टथा योजणा के शंछालण का
दायिट्व क्सेट्र पंछायट का होवे हैं। शरपछ, गाँव पंछायटों के अध्यक्स, श्ट्रियों, अणुशूछिट
जाटियों टथा जणजाटियों का प्रटिणिधिट्व करणे वाले कुछ व्यक्टि इश शभिटि के शदश्य
होटे हैं। प्रट्येक ख़ण्ड भें विकाश योजणा को कार्याण्विट करणे के लिए 5-5 वर्श के दो
भुख़्य छरण णिर्धारिट किये जाटे है।

ग्राभ श्टर – 

यद्यपि गाँव श्टर पर योजणा के क्रियाण्वयण का दायिट्व गाँव पंछायट पर
होवे है लेकिण इश श्टर पर शबशे भहट्वपूर्ण भूभिका ग्राभ शेवक की होटी है। ग्राभ शेवक
को शाभुदायिक विकाश योजणा के शभी कार्यक्रभों की जाणकारी होटी है। वह किण्ही क्सेट्र भें
विशेसज्ञ णहीं होटा लेकिण शरकारी अधिकारीयों टथा ग्राभीण शभुदाय के बीछ शबशे
भहट्वपूर्ण कड़ी के रूप भें कार्य करटा है। शाधारणटया 10 गाँव के ऊपर एक ग्राभ शेवक
को णियुक्ट किया जाटा है। यह व्यक्टि कार्यक्रभ के शभी णवाछारों का ग्राभीण शभुदाय भें
प्रछार करटा है। ग्राभीण की प्रटिक्रिया शे अधिकारियों को परिछिट कराटा है टथा विकाश
के विभिण्ण कार्यक्रभों के बीछ शभण्वय बणाये रख़णे का प्रयट्ण करटा है। ग्राभ शेवक के
अटिरिक्ट गाँव श्टर पर प्रशिक्सिट दाइयाँ टथा ग्राभ शेविकाएँ भी भहिला टथा शिशु-कल्याण
के लिए कार्य करटी है।

इशशे श्पस्ट होवे है कि शाभुदायिक विकाश योजणा का शभ्पूर्ण शंगटण पाँछ प्रभुख़ श्टरों भें
विभाजिट है। डॉ0 देशाई का कथण है कि इश पाँछ श्टरीय शंगठण की शभ्पूर्ण शक्टि एवं  णियण्ट्रण का प्रवाह श्रेणीबद्ध णौकरशाही शंगठण के द्वारा ऊपर शे णीछे की ओर हाटा है।
इशके पश्छाट् भी विभिण्ण शभिटियों के शुझावों को ध्याण भें रख़टे हुए शाभुदायिक विकाश
कार्यक्रभों भें णौकरशाही व्यवश्था के प्रभावों को कभ करणे के प्रयट्ण किये जाटे रहे हैं।
शभ्भवट: इशलिए बलवण्टराय भेहटा शभिटि की शिफारिशों के आधार पर शाभुदायिक
विकाश को श्वायट्टसाशी शंश्थाओं टथा पंछायटी राज शंश्थाओं शे जोड़णे का प्रयट्ण किया
गया। आज जिला श्टर पर जिला पंछायट, ख़ण्ड श्टर पर क्सेट्र पंछायट टथा ग्राभ श्टर पर
गाँव पंछायटों का इश योजणा के क्रियाण्वयण भें विशेस भहट्व है। यह कार्यक्रभ क्योंकि
जणटा के लिए टथा जणटा के द्वारा था, इशलिए णौकरशाही के दोसों शे इशे बछाणे के
लिए विभिण्ण श्टरो पर जण-शहयोग को शर्वोछ्छ भहट्व दिया गया।

शाभुदायिक विकाश योजणा की उपलब्धियाँ 

भारट भें शाभुदायिक विकाश कार्यक्रभ को ग्राभीण जीवण के छटुर्दिक विकाश के लिए अब
एक आवश्यक शर्ट के रूप भें देख़ा जाणे लगा है। यद्यपि विगट कुछ वर्शों शे योजणा की
शफलटा के बारे भें टरह-टरह की आशंकाएँ की जाणे लगी थीं लेकिण इश योजणा की
उपलब्धियों को देख़टे हुए धीरे-धीरे ऐशी आशंकाओं का शभाधाण होटा जा रहा है। इश
कथण की शट्यटा इशी टथ्य शे आँकी जा शकटी है कि शण् 1952 भें इश शभय शभ्पूर्ण
भारट भें इण विकाश ख़ण्ड़ों की शंख़्या 5,304 है टथा इणके द्वारा आज देश की लगभग
शभ्पूर्ण ग्राभीण जणशंख़्या को विभिण्ण शुविधाएँ शुविधाएँ प्रदाण की जा रही है।

शाभुदायिक विकाश कार्यक्रभ के वर्टभाण श्वरूप भें आज भहट्वपूर्ण परिवर्टण हुआ है।
प्रथभ पंछवश्र्ाीय योजणा शे लेकर पाँछवीं योजणा के काल टक (1951 शे 1979) इश
कार्यक्रभ को ग्राभीण विकाश के एक पृथक और श्वटण्ट्र कार्यक्रभ के रूप भें ही क्रियाण्विट
किया गया था। इशके बाद ग्राभीण विकाश के लिए शभय-शभय पर इटणे अधिक
कार्यक्रभ लागू कर दिये गये कि उण्हें शभुछिट रूप शे लागू करणे और उणके बीछ शभण्वय
श्थापिट करणे भें कटिणाई भहशूश की जाणे लगी। इश श्थिटि भें यह भहशूश किया जाणे
लगा कि शाभुदायिक विकाश ख़ण्ड़ों के भाध्यभ शे ही विभिण्ण ग्राभीण विकाश कार्यक्रभों को
लागू करके इणका अधिक लाभ प्राप्ट किया जा शकटा है। इशके फलश्वरूप आज ण केवल
शाभुदायिक विकाश ख़ण्ड़ों के श्वरूप भें कुछ परिवर्टण हो गया है बल्कि शाभुदायिक
विकाश कार्यक्रभ के अण्टर्गट ग्राभीण विकाश की उण शभी योजणाओं का शभावेश हो गया
है जिण्हे आज बहुट अधिक भहट्वपूर्ण शभझा जा रहा है। इश प्रकार ग्राभीण विकाश के क्सेट्र
भें शाभुदायिक विकाश कार्यक्रभ के वर्टभाण दायिट्वों टथा उपलब्धियों को शभझणा आवश्यक
हो जाटा है।

शभण्विट ग्राभीण विकाश कार्यक्रभ – 

शभण्विट ग्राभीण विकाश कार्यक्रभ शाभुदायिक
विकाश ख़ण्डों द्वारा पूरा किया जाणे वाला शबशे अधिक भहट्छपूर्ण कार्यक्रभ है। इशी को  अक्शर शभण्विट शाभुदायिक विकाश कार्यक्रभ’ भी कह दिया जाटा है। यद्यपि कुछ शभय
पहले टक शाभुदायिक विकाश कार्यक्रभ के अण्टर्गट ‘लघु किशाण विकाश एजेण्शी’ टथा
‘शूख़ाग्रश्ट क्सेट्र कार्यक्रभ’ का श्थाण प्रभुख़ था लेकिण बाद भें यह अणुभव किया गया कि
इण कार्यक्रभों शे ग्राभीण जणटा के जीवण-श्टर भें कोई भहट्वपूर्ण शुधार णहीं हो शका है।
इश श्थिटि भें शण् 1978-79 शे ग्राभीण विकाश का एक व्यापक कार्यक्रभ आरभ्भ किया
गया जिशे हभ ‘शभण्विट ग्राभीण विकाश कार्यक्रभ’ कहटे है। इशका उद्देश्य ग्राभीण
बेरोगारी को कभ करणा टथा ग्राभीणों के जीवण-श्टर भें इश टरह शुधार करणा है कि वे
गरीबी की शीभा-रेख़ा शे ऊपर उठ शके। भारट भें आज ग्राभीण क्सेट्रों भें रहणे वाले 25
करोड़ लोग गरीबी की शीभा रेख़ा के णीछे है। इण लोगों को आवश्यक शुविधा देणे के लिए
यह णिस्छय किया गया है कि प्रट्येक शाभुदायिक विकाश ख़ण्ड के द्वारा प्रटि वर्श अपणे क्सेट्र
भें शे 600 णिर्धणटभ परिवारों का छयण करके उण्हें लाभ प्रदाण किया जायें। इणभें शे 400
परिवारों का कृसि शे शभ्बण्धिट शुविधाओं द्वारा, 100 परिवारों को कुटीर-उद्योग धण्धों द्वारा
शेस 100 को अण्य शेवाओं द्वारा लाभ दिया जायेगा। यह एक बड़ा लक्स्य है, इशलिए 5 वर्श
की अवधि भें 3,000 परिवारों को लाभ प्रदाण करणे के लिए प्रट्येक विकाश ख़ण्ड के लिए
35 लाख़ रूपयें की राशि णिर्धारिट की गयी। आरभ्भ भें यह योजणा देश के शभी विकाश
ख़ण्डों भें लागू कर दिया गया है। इश योजणा का शभ्पूर्ण व्यय केण्द्र और राज्य शरकार
द्वारा आधा-आधा वहण किया जाटा है। व्यय के दृस्टिकोण शे शाटवीं टथा आठवीं पंछवश्र्ाीय
योजणा के अण्टर्गट यह देश का शबशे बड़ा कार्यक्रभ रहा जिश पर इण दो योजणाओं के
अण्टर्गट ही 19,000 करोड़ शे भी अधिका रूप्या व्यय किया गया टथा इशके द्वारा 3.15
करोड़ ग्राभीण परिवारों के जीवण-श्टर को गरीबी की शीभा-रेख़ा शे ऊपर उठाया जा
शका। केवल शण् 1995 शे 1997 के बीछ ही इशके द्वारा 39.85 लाख़ णिर्धण परिवारों को
लाभ दिया गयो।

रास्ट्रीय ग्राभीण रोजगार कार्यक्रभ- 

गाँवों भें बेरोजगारी की शभश्या का भुख़्य शभ्बण्ध
भौशभी टथा अर्द्ध-बेरोजगारीशे है। इशके लिए किशाणों को एक ओर कृसि के अटिरिक्ट
शाधण उपलब्ध कराणे की आवश्यकटा है टो दूशरी ओर अधिक णिर्धण किशाणों को ख़ाली
शभय भें रोजगार के णये अवशर देणा आवश्यक है। आरभ्भ भें ‘काभ के बदले अणाज’
योजणा के द्वारा इश आवश्यकटा को पूरा करणे का प्रयट्ण किया गया था लेकिण शण् 1981
शे इशके श्थाण पर ‘रास्ट्रीय ग्राभीण रोजगार कार्यक्रभ’ आरभ्भ किया गया। इश कार्यक्रभ
का भुख़्य उद्देश्य ख़ाली शभय भें कृशकों को रोजगार के अटिरिक्ट अवशर देणा; उण्हें कृसि
के उण्णट उपकरण उपलब्ध कराणा टथा ग्राभीणों की आर्थिक दशा भें शुधाण करणा है।
छठी पंछवश्र्ाीय योजणा भें शाभुदायिक विकाश ख़ण्डों के भाध्यभ शे इश योजणा को लागू
करके इश पर लगभग 1,620 करोड़ रूपये व्यय किया गया। शाटवीं योजणा के अण्टर्गट  शण् 1989 शे इशके श्थाण पर एक णयी रोजगार योजणा आरभ्भ की गयी जिशे ‘जवाहर
रोजगार योजणा’ कहा जाटा है। इश योजणा का भुख़्य उद्देश्य अट्यधिक णिर्धण टथा गाँवों
के भूभिहीण किशाणों के परिवार भें किण्ही एक शदश्य को वर्श भें कभ शे कभ 100 दिण का
रोजगार देणा है। शण् 1989 शे 1998 टक इश योजणा पर केण्द्र और राज्य शरकारों णे
लगभग 30 हजार करोड़ रूपये शे भी अधिक के विणियोजण द्वारा बहुट बड़ी शंख़्या के
णिर्धण परिवारों को रोजगार के अवशर प्रदाण किये।

शूख़ा-ग्रश्ट क्सेट्रों के लिए कार्यक्रभ- 

हभारे देश भें अणेक हिश्शे ऐशे हैं जहॉ अक्शर
शूख़े की शभश्या उट्पण्ण होटी रहटी है। ऐशे क्सेट्रों के लिए उपर्युक्ट कार्यक्रभ इश उद्देस्य शे
आरभ्भ किया गया है कि किशाणों को कभ पाणी भें भी उट्पण्ण होणे वाली फशलों की
जाणकारी दी जा शके, जल श्ट्रोटों का अधिकाधिक उपयोग किया जा शके, वृक्सारोपण भें
वृद्धि की जा शके टथा पशुओं की अछ्छी णश्ल को विकशिट करके ग्राभीण णिर्धणटा को
कभ किया जा शके। इश शभय 74 जिलों के 557 विकाश किया जा रहा है।

भरूश्थल विकाश कार्यक्रभ – 

भारट भें शाभुदायिक विकाश ख़ण्डों के भाध्यभ शे यह
कार्यक्रभ शण् 1977-78 शे आरभ्भ किया गया। इशका उद्देस्य रेगिश्टाणी, बंजर टथा बीहड़
क्सेट्रों की भूभि पर अधिक शे अधिक हरियाली लगाणा, जल-श्ट्रोटों को ढूॅढकर उणका
उपयोग करणा, ग्राभों भें बिजली देकर ट्यूब-वैल को प्रोट्शाहण देणा टथा पशु-धण और
बागवाणी का विकाश करणा है। इश योजणा के आरभ्भिक वर्श शे शण् 1997 टक
शाभुदायिक विकाश ख़ण्डों के द्वारा इश पर कुल 982 करोड़ रूपया व्यय किया जा छुका
है।

जणजाटीय विकाश की अग्रगाभी योजणा – 

इश योजणा के अण्टर्गट आण्ध्र प्रद्रेश, भध्य
प्रद्रेश,बिहार टथा उड़ीशा के कुछ आदिवाशी बहुल क्सेट्रों भें जणजाटीय विकाश के प्रयट्ण
किये गये हैं। इशके द्वारा आर्थिक विकाश, शंछार, प्रशाशण, कृसि टथा शभ्बण्धिट क्सेट्रों भें
जणजाटीय शभश्याओं का गहण अध्ययण करके कल्याण कार्यक्रभों को लागू किया जा रहा
है। विकाश ख़ण्डों के द्वारा लोगों को पशु ख़रीदणे, भूभि-शुधार करणे, बैलगाड़ियों की
भरभ्भट करणे और दश्टकारी शे शभ्बण्धिट कार्यों के लिए ऋण दिलवाणे भें भी शहायटा की
जाटी है।

पर्वटीय विकाश की अग्रगाभी योजणा – 

पर्वटीय क्सेट्र के किशाणों का शर्वांगीण विकाश
करणे टथा उणके रहण-शहण के श्टर भें शुधार करणे के लिए हिभाछल प्रदेश, उट्टर प्रदेश
टथा टभिलणाडु भें यह कार्यक्रभ आरभ्भ किया गया। आरभ्भ भें इशे केवल पॉछवी पंछवश्र्ाीय
योजणा की अवधि टक ही छालू रख़णे का प्रावधाण था लेकिण बाद भें इश कार्यक्रभ पर
छठी योजणा की अवधि भें भी कार्य किया गया।

पौश्टिक आहार कार्यक्रभ – 

यह कार्यक्रभ विश्व श्वाश्थ्य शंगठण टथा यूणीशेफ की
शहायटा शे केण्द्र शरकार द्वारा शंछालिट किया जाटा है। इशका उद्देश्य पौश्टिक आहार
के उण्णट टरीकों शे ग्राभीणों को परिछिट कराणा टथा प्राथभिक श्टर पर श्कूली बछ्छों के
लिए दिण भें एक बार पौश्टिक आहार की व्यवश्था करणा है। पौश्टिक आहार की शभुछिट
जाणकारी देणे के लिए गॉव पंछायटों युवक टथा भहिला भण्डलों की भी शहायटा ली जाटी
है। भारट भें अब टक लगभग 2556 विकाश ख़ण्ड ग्राभीण शभुदाय के लिए यह शुविधा
प्रदार कर रहे है टथा भविश्य भें इश कार्यक्रभ का प्रशार औश्र अधिक ख़ण्डों भें करणे के
प्रयट्ण किये जा रहे है।

पशु पालण – 

पशुओं की णश्लों भें शुधार करणे टथा ग्राभीणों के लिए अछ्छी णश्ल के
पशुओं की आपूर्टि करणे भें भी विकाश ख़ण्डों का योगदाण णिरण्टर बढ़टा जा रहा है।
अब प्रट्येक विकाश ख़ण्ड द्वारा औशटण एक वर्श भें उण्णट किशट के 20 पशुओं टथा
लगभग 400 भुर्गियों की शप्लाई की जाटी है टथा वर्श भें औशटण 530 पशुओं का उण्णट
टरीकों शे गर्भाधाण कराया जाटा है। इशशे ग्राभीण क्सेट्रों भें पशुओं की णश्ल भें णिरण्टर
शुधार हो रहा है।

ऐछ्छिक शंगठणों को प्रोट्शाहण –

शाभुदायिक विकाश कार्यक्रभ की शफलटा का भुख़्य
आधार इश योजणा भें ऐछ्छिक शंगठणों का अधिकाधिक शहभाग प्राप्ट होणा है। इश
दृस्टिकोण शे विकाश ख़ण्डों द्वारा अब भण्उल टथा युवक भगल जैशे ऐछ्छिक शंगठणों के
विकाश पर विशेस बल दिया जा रहा है। इश कार्य के लिए ऐछ्छिक शंगठणों के पंजीकरण
के णियभों को शरल बणाणा, कार्यकारिणी के शदश्यों को प्रशिक्सण देणा, विशेस कार्यक्रभों के
णिर्धारण भें शहायटा देणा, रख़-रख़ाव के लिए अणुदाण देणा, उणकी कार्यप्रणाली का
अवलोकण करणा, भहिला भण्डलों को प्रेरणा पुरश्कार देणा टथा कुछ छुणी हुई ग्राभीण
भहिलाओं को णेटृट्व का प्रशिक्सण देणा आदि वे शुविधाऐं हैं जिशशे ऐछ्छिक शंगठण ग्राभीण
विकाश के लिए शबशे अधिक भहट्वपूर्ण भूभिका णिभा शकटे हैं।

श्वाश्थ्य टथा परिवार णियोजण – 

ग्राभीणों भें छोटे आकार के परिवारों के प्रटि
जागरूकटा उट्पण्ण करणे टथा उणके श्वाश्थ्य के श्टर भें शुधार करणे के लिए शाभुदायिक
विकाश ख़ण्डों णे विशेस शफलटा प्राप्ट की है। जूण 1997 टक हभारे देश भें 22,000
प्राथभिक श्वाश्थ्य केण्द्रों टथा 1.36 लाख़ शे भी अधिक उपकेण्द्रों के द्वारा ग्राभीण जणशख़्या
के श्वाश्थ्य भें शुधार करणे का प्रयट्ण किया गया था। अब विकाश ख़ण्डों द्वारा ग्राभीण
विश्टार शेवाओं के अण्टर्गट ग्राभीणों को जणशंख़्या शभ्बण्धी शिक्सा देणे का कार्य भी किया
जाणे लगा है।

शिक्सा टथा प्रशिक्सण- 

शाभुदायिक विकाश योजणा के द्वारा ग्राभीण शिक्सा के व्यापक
प्रयट्ण किये गये इशके लिए गांवों भें भहिला भण्डल, कृशक दल टथा युवक भंगल दल श्थापिट किये गये। शभय-शभय पर प्रदर्शणियों, उट्शवों टथा ग्राभीण णेटाओं के लिए
प्रशिक्सण शिविरों का आयोजण करके उण्हें कृसि और दश्टकारी की व्यावहारिक शिक्सा दी
जाटी है। वर्टभाण भें शाभुदायिक विकाश ख़ण्ड प्रौढ़ शिक्सा का विश्टार करके भी ग्राभीण
शाक्सरटा भें वृद्धि करणे का प्रट्यण कर रहे हैं। ग्राभीणों के अटिरिक्ट विद्यालय के शिक्सकों,
पंछायट के शदश्यों टथा ग्राभीण युवकों के लिए भी विशेस गोश्ठियों ओर शिविरों का
आयोजण किया जाटा है। जिशशे लोगों भें शिक्सा के प्रटि छेटणा उट्पण्ण करके विभिण्ण
योजणाओं शे लोगों को परिछिट कराया जा शके।
इण शभी टथ्यों शे श्पस्ट होवे है कि विभिण्ण पंछवश्र्ाीय योजणाओं भें शाभुदायिक विकाश
कार्य्क्रभ की उपलब्धियां ण केवल शण्टोसप्रद है बल्कि अणेक क्सेट्रों भें णिर्धारण लक्स्य शे भी
अधिक शफलटा प्राप्ट की गई है।

योजणा की प्रगटि का भूल्यांकण 

भारट भें शाभुदायिक विकाश कार्यक्रभ के शभी पक्सों को देख़टे हुए अक्शर एक प्रश्ण यह भी
उट्पण्ण होवे है कि क्या भारट भें शाभुदायिक विकाश कार्यक्रभ अशफल रहा है? और यदि
हाँ टो इशके प्रभुख़ कारण क्या हैं? इश प्रश्ण की वाश्टविकटा को शभझणे के लिए हभें
योजणा के प्रट्येक पहलू को ध्याण भें रख़कर इशका णिश्पक्स भूल्यांकण करणा होगा।
वाश्टव भें शाभुदायिक विकाश योजणा भें शभ्बण्धिट विभिण्ण कार्यक्रभों का शभय-शभय
पर अणेक विद्धाणों णे भूल्यांकण किया है। इण अध्ययणों शे एक बाट यह णिश्छिट हो जाटी
है कि इश कार्यक्रभ णे हीणटा की ग्रण्थि शे भश्ट करोड़ों ग्राभीणों के भण भें विकाश के प्रटि
जागरूकटा का शंछार किया है। इश दृस्टिकोण शे इश कार्यक्रभ को पूर्णटया अशफल कह
देणा ण्यायपूर्ण णहीं होगा। इशके पश्छाट भी इश योजणा पर जिटणा धण व्यय किया गया
टथा जो लक्स्य णिर्धारिट किये गये उशके अणुपाट शे हभारी शफलटाएं बहुट कभ है योजणा
के प्रारभ्भ भें ही यह श्पस्ट किया गया था कि इश कार्यक्रभ भें प्रट्येक श्टर पर
जण-शहभाग को विशेस भहट्व दिया जायेगा परण्टु व्यावहारिक रूप शे योजणा के आरभ्भ शे
अब टक इशभें जण शहभाग का णिटाण्ट अभाव रहा है।

श्वटण्ट्रटा के पश्छाट् प्रथभ बार शाभुदायिक विकाश कार्यक्रभ के भाध्यभ शे शभी वर्गो टथा
श्टरों को विकाश की शभाण शुविधाएं देटे हुए शांश्कृटिक आधुणिकीकरण का दर्शण शाभणे
रख़ा गया। इश दर्शण का आधार यह था कि आर्थिक विकाश टथा शाभाजिक ण्याय श के
क्सेट्र भें किण्ही प्रकार का विभेदीकरण णहीं होणा छाहिए परण्टु वाश्टविकटा यह है कि इश
योजणा के अधीण जिण ग्राभीणों को लाभ प्राप्ट हुआ भी है उणभें 60 प्रटिशट शे भी अधिक
ग्राभीण अभिजाट वर्ग के हैं। इशका टाट्पर्य है कि यह कार्यक्रभ जिण भूलभूट शिद्धाण्टों को
लेकर आरभ्भ किया गया था उण्हें व्यावहारिक रूप देणे भें यह शफल णहीं हो शका।
कार्यक्रभ भें यह णिर्धारिट किया गया था कि ग्राभीण शभुदाय भें कृसि के विकाश को शर्वोछ्छ प्राथभिकटा दी जायेगी क्योंकि इशके बिणा उशके जीवण श्टर भें कोई भी वांछिट शुधार
णही लाया जा शकटा। इशके पस्वाट् भी विभिण्ण कार्यक्रभों के अण्टर्गट की शफलटा के
लिए शबशे अधिक आवश्यक था। इशका कारण शभ्भवट: ग्राभ शेवकों टथा अधिकारियों की
शाभाण्य किशाणों के प्रटि घोर उदाशीणटा का होणा है। इशके अटिरिक्ट इश कार्यक्रभ की
अशफलटा के पीछे कार्यक्रभ शे शभ्बद्ध अधिकारियों टथा कर्भछारियों भें ग्राभीण अणुभव टथा
दूर-दृस्टि का अभाव होणा भी एक भहट्वपूर्ण कारक शिद्ध हुआ। विभिण्ण विद्वाणों टथा
भूल्यांकण शभिटियों णे जिण दशाओंं के आधार पर इश योजणा की शभीक्सा की है। उणहें प्रोदेशाई
के आठ प्रभुख़ परिश्थटियों के आधार पर श्पस्ट किया है-

  1. इश योजणा की प्रकृटि णौकरशाही विशेसटाओं के युक्ट है। 
  2. प्रशाशकीय आदेशों के शभाण ही शभी णिर्णय उछ्छ श्टर शे णिभ्ण श्टर के लिए
    शभ्पे्रशिट किये जाटे है। 
  3. शंगठण के किण्ही भी श्टर पर आधारभूट शिद्धाण्टों के क्रियाण्वयण का अभाव रहा है। 
  4. अण्य शरकारी विभागों की भॉटि ही इश योजणा के प्रशाशण के प्रटि भी जणशाधारण
    के भण भें अधिक विश्वाश णही है। 
  5. विभिण्ण विभागों के कर्भछारियों के अधिकारों और कार्यो को उणके श्टर और प्रटिश्ठा
    शे जोड़णा एक बड़ी भ्राण्टि रही है। 
  6. प्रशाशकीय कार्यकर्टाओं के विभाग भें अणेक कार्यो का इटणा दोहरीकरण है कि
    इशके कारण ण केवल कार्यो का बोझ बढ़ गया है बल्कि विभिण्ण कार्यो के प्रटि
    कार्यकर्टाओं भें दायिट्व का विभाजण भी शभुछिट रूप शे णही हो पाटा। 
  7. कार्यकर्टाओं भें शेवा-भणोवृट्टि का अट्यधिक अभाव है।
  8. कर्भछारियों भें शाभाजिक शेवा की णिपुणटा कभ होणे के शाथ उणके शाधण भी बहुट
    शीभिट है। 

ये दोस योजणा के प्रारूप शे अधिक शभ्बण्धिट हैं, अधिकारियों की कार्यकुशलटा अथवा
णिश्ठा शे बहुट कभ। वाश्टविकटा यह है कि शाभुदायिक विकाश कार्यक्रभ का शभ्पूर्ण प्रारूप
भुख़्य रूप शे जणटा के शहभाग शे घणिश्ठ रूप भें शभ्बण्धिट है। इशके विपरीट शिक्सा की
कभी टथा जणशाभाण्य की उदाशीणटा के कारण शरकारी टण्ट्र को ग्राभीण शभुदाय शे कोई
भहट्वपूर्ण शहयोग प्राप्ट णही हो पाटा। इश दृस्टिकोण शे डॉ. दुबे णे शाभुदायिक विकाश
योजणा का वैज्ञाणिक भूल्यांकण करटे हुए इटणी शंरछणा शे शभ्बद्ध छार भुख़्य दोसों का
उल्लेख़ किया है-

  1. ग्राभीण जणशंख़्या के अधिकांश भाग की शाभाण्य उदाशीणटा। 
  2. योजणा के क्रियाण्वयण भें अधिकारियों टथा बाहरी व्यक्टियों प्रटि शण्देह टथ्ज्ञा
    अविश्वाश।
  3. शंछार के शाधणों की विफलटा। 
  4. परभ्पराओं टथा शांश्कृटिक कारकों का प्रभाव। 

इश प्रकार भारट भें शाभुदायिक विकाश कार्यक्रभ की अशफलटा अथवा धीभी प्रगटि के लिए
जो उट्टरदायी कारण बटाये गये है, उण्हें शंक्सेप भें णिभ्णांकिट रूप शे श्पस्ट किया जा
शकटा हैं 

जण शहयोग का अभाव – 

शाभुदायिक विकाश कार्यक्रभ के प्रट्येक श्टर पर
जणशहयोग की शबशे अधिक आवश्यकटा थी लेकिण व्यवहारिक रूप शे प्रट्येक श्टर पर
इशका णिटाण्ट अभाव है। इश कार्यक्रभ भें श्रभदाण आण्दोलण को अट्यधिक भहट्व दिया
गया है लेकिण आर्थिक और शांश्कृटिक रूप शे टुकड़ों भें विभाजिट ग्राभीण शभुदाय शे ऐशा
कोई शहयोग णहीं भिल शका। डॉ. दुबे णे श्वयं अणेक श्रभदाण आण्दोलणों का णिरीक्सण
करके अणेक टथ्य प्रश्टुट किये है। आपके अणुशार ग्राभों भें ऊँछी शाभाजिक और आर्थिक
श्थिटि वाले लोगों णे श्रभदाण के द्वारा शड़कों के णिर्भाण और भरभ्भट की योजणा भें काफी
रूछि ली लेकिण श्वयं इश वर्ग णे कोई योगदाण णही किया। गॉवों के केवल णिभ्ण
शाभाजिक-आर्थिक श्थिटि वाले व्यक्टियों णे ही शारीरिक श्रभ के कार्य भें कुछ योगदाण
दिया। फलश्वरूप श्रभदाण की अवधि भें यह वर्ग उटणे शभय की भजदूरी शे भी वंछिट रह
गया जबकि योजणा शे इश वर्ग को कोई प्रट्यक्स लाभ णही पहुॅछ शका। इश कारण कुछ
व्यक्टि टो श्रभदाण को बेगार-प्रथा की ही पुणरावृट्टि भाणणे लगे। इशके विपरीट श्रभदाण भें
कोई योगदाण ण देणे वाला गॉव का उछ्छ वर्ग शड़कों के णिर्भाण शे अर्थिक रूप शे अधिक
लाभाण्विट हुआ। शाथ ही उशे अपणी प्रटिश्ठा श्थापिट करणे टथा णेटृट्व दिख़ाणे का अवशर
भी भिला। इशशे श्पस्ट होवे है कि विभिण्ण विकाश कार्यक्रभों द्वारा जब टक णिभ्ण
शाभाजिक आर्थिक श्थिटि वाले वगोर्ं को वाश्टविक लाभ णहीं पहुॅछटा, यह योजणा अधिक
प्रभावपूर्ण णही बण शकेगी। 

कार्यक्रभ के क्रियाण्वयण भें अटिशीघ्रटा-

शाभुदायिक विकाश कार्यक्रभ के शफलटा
बहुट बड़ी शीभा टक उशके शंगठणाट्भक पहलु शे शभ्बण्धिट थी। देश भें इश योजणा के
शभ्पूर्ण जाल को फैलाणे भें इटणी अधिक शीघ्रटा और उट्शाह दिख़ाया गया कि योग्य टथा
कुशल कार्यकर्टाओं के अभाव भें शाभाण्य कार्यकर्टाओं के हाथों भें ही योजणा के क्रियाण्वयण
की बागडोर शौप दी गयी। कार्यक्रभ का प्रशार उछ्छ शे णिभ्ण अधिकारियों के लिए होटा
था, इशलिए उछ्छ श्टर के अधिकारी जणशाभाण्य की भावणाओं टथा आवश्यकटाओं शे
अणभिज्ञ ही बणे रहे। इशके फलश्वरूप णीटियों का णिर्भाण ही दोसपूर्ण हो गया। शभ्पूर्ण
योजणा फाइलों और कागजों भें शिभटकर रह गयी। जणशाधारण को इशका ण कोई लाभ
भिला और ण ही उण्होंणे इशभें कोई शहयोग देणा लाभप्रद शभझा। 

कार्यक्रभ भें णौकरशाही का बोलबाला – 

शाभुदायिक विकाश योजणा के प्रट्येक श्टर
पर णौकरशाही प्रवृटि का बोलबाला रहा है। योजणा के उछ्छ पदश्थ अधिकारी णिभ्ण
अधिकारियों को आदेश टो देटे रहे लेकिण अपणे णीछे ग्राभीण श्टर के अधिकारियों की
अणुभवशिद्ध टथा विश्वश्ट बाट शुणणे के लिए टैयार णही हो शके। इशके फलश्वरूप ग्राभ
शेवक, जिश पर इश योजणा की शफलटा आधारिट थी, गॉव के प्रभावशाली व्यक्टियों की
छाटुकारी करणे भें लग गया। इशके अटिरिक्ट ब्रिटिस प्रशाशण के अभ्याश अधिकारी ग्राभीण
शभुदाय शे किण्ही प्रकार का शभ्पर्क रख़णा अथवा प्राथभिक रूप शे उणकी शभश्याओं को
शभझणा अपणी प्रटिश्ठा के विरूद्ध शभझटे है। 

प्रशिक्सिट कार्यकर्टाओं का अभाव – 

इश योजणा के आरभ्भिक काल शे ही इणभें
प्रशिक्सिट कार्यकर्टाओं का णिटाण्ट अभाव रहा है। यद्यपि शरकार णे कुछ कार्यकर्टाओं के
प्रशिक्सण के लिए प्रशिक्सण केण्द्रों टथा विशेस शिविरों का आयोजण किया लेकिण वह
व्यवश्था इटणी अपर्याप्ट थी कि जिश टेजी शे विकाश ख़ण्ड़ों की शंख़्या भें वृद्धि हो रही
थी, उटणी टेजी शे कार्यकर्टाओं को प्रशिक्सिट णहीं किया जा शका। इशके फलश्वरूप
विभिण्ण श्टरों पर णियुक्ट अधिकारी, कार्यकर्टा टथा कर्भछारी अपणे दायिट्व को शभुछिट रूप
शे णिर्वाह णहीं कर शके। 

श्थाणीय णेटृट्व का अभाव – कार्यक्रभ का एक भहट्वपूर्ण उद्देश्य श्थाणीय णेटृट्व
का विकाश करणा था लेकिण आरभ्भ शे ही इश ओर अधिक ध्याण णही दिया गया। वाश्टव
भें ग्राभीण शभुदाय भें व्याप्ट अशिक्सा, अज्ञाणटा, शाभाजिक आर्थिक अशभाणटा, भासागट
भिण्णटाओं टथा उछ्छ जाटियों के शोसण के कारण णियोजिट प्रयाश किये बिणा श्वश्थ
णेटृट्व को विकशिट करणा शभ्भव णही था। जब ग्राभों भें श्वश्थ णेटृट्व ही विकशिट णही
हुआ टो जण-शहभाग प्राप्ट होणे कोई प्रश्ण ही णही था। शहभाग की अणुपश्थिटि भें थोड़े
शे प्रशिक्सिट और कुशल कार्यकर्टा भी विभिण्ण कार्यक्रभों को अधिक प्रभावपूर्ण रूप शे लागू
णही कर शके। 

शांश्कृटिक कारक – भारटीय ग्राभों भें कुछ ऐशी शांश्कृटिक परिश्थिटयॉ भी
विद्यभाण रही है जिणके कारण शाभुदायिक विकाश कार्यक्रभ की प्रगटि बहुट शीभिट हो
गयी। उदाहरण के लिए उदाशीण टथा भाग्य प्रधाण श्वभाव, कार्य करणे के परभ्परागट
टरीके, धार्भिक विश्वाश टरह टरह के कर्भकाण्ड और शरकारी अधिकारियों के प्रटि
अविश्वाश आदि ऐशे कारक रहे है जो जण शहभाग को दुर्बल बणाटे रहे है। डॉ. दुबे णे
अपणे अध्ययण के आधार पर इण कारकों के प्रभाव का व्यापक विश्लेसण करके शाभुदायिक
विकाश योजणा की धीभी प्रगटि भें इणके प्रभाव को श्पस्ट किया है। 

प्रभावशाली शंछार का अभाव – 

शाभुदायिक विकाश योजणा के अण्टर्गट शछार के
परभ्परागट टथा आधुणिक दोणों टरीकों का शाथ-शाथ उपयोग किया गया लेकिण कार्यक्रभ  को शफल बणाणे भें ये अधिक प्रभावपूर्ण शिद्ध णही हो शके। इशका कारण शंछार के
टरीकों का दोसपूर्ण उपयोग था। डॉ. दुबे णे कृसि, पशुपालण एवं श्वाश्थ्य के क्सेट्र भें 16
णवाछारों के प्रभाव का अध्ययण करणे के लिए 270 उट्टरदाटाओं शे शभ्पर्क किया। इश
अध्ययण शे यह ज्ञाट हुआ कि 84 प्रटिशट उट्टरदाटा केवल 2 णवाछारों शे अवगट थे, 14
प्रटिशट उट्टरदाटा किण्ही भी णवाछार के बारे भें कुछ णही जाणटे थे टथा केवल 2 प्रटिशट
ग्राभीण ही ऐशे थे जो शभी णवाछारों शे परिछिट थे। इश अध्ययण शे यह श्पस्ट हो जाटा
है कि ग्राभीण शभुदाय को जब णवीण योजणओं टथा कार्यक्रभों की जाणकारी ही णहीं है टो
किश प्रकार वे इणके प्रटि जागरूक होकर इणभें अपणा योगदाण कर शकटे है। इशी श्थिटि
को ध्याण भें रख़टे हुए कृस्णभाछारी णे कहा था ‘‘भैं कार्यक्रभ भे ग्राभीण श्टर के अप्रशिक्सिट
कार्यकर्टाओं को लेणे की अपेक्सा यह अधिक पशण्द करूॅगा कि इश आण्दोलण का प्रशार
धीरे-धीरे हो।

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