सामुदायिक संगठन की प्रक्रिया

By | February 15, 2021


ग्रामीण जीवन पर सामुदायिक योजना के प्रभाव 

सामुदायिक विकास योजना ,ग्रामीण जीवन के आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृति विकास में
अत्यधिक महत्वपूर्ण सिद्ध हुई है। इस योजना के सामाजिक प्रभावों को केवल इसी तथ्य से
समझा जा सकता है कि एक सामान्य ग्रामीण का जीवन पहले की अपेक्षा न केवल काफी
खुशहाल और सम्पन्न दिखाई देता है बल्कि जीवन और समाज के प्रति उसकी धारणाओं
और विचारधाओं में काफी परिवर्तन हो गया है। ग्रामीण समुदाय में स्वास्थ्य के सतर को
सुधारने, शिक्षा का प्रसार करने, स्त्रियों तथा बच्चों का कल्याण करने, एक नवीन चेतना
उत्पन्न करने तथा आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में भी सामुदायिक विकास योजना के
महत्व की अवहेलना नहीं की जा सकती। विभिन्न क्षेत्रों में सामुदायिक विकास कार्यक्रम के
सामाजिक प्रभावों को इस प्रकार समझा जा सकता है।

लोकतान्त्रिक विकेन्द्रीकरण 

इस योजना के फलस्वरूप आज लोकतात्रिक व्यवस्था का गांवों में विकेन्द्रीकरण हुआ है।
ग्रामों में जिला परिशद्, ग्राम पंचायत तथा पंचायत समितियों द्वारा ग्रामीण विकास में
अधिकाधिक योगदान इन लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण को ही एक मूर्त अभिव्यक्ति है। इसके
फलस्वरूप विकास योजनाओं में ग्रामीण जनता की रूचि निरन्तर बढ़ रही है तथा वह
आत्मनिर्भर की दिशा में आगे बढी है। सामुदायिक विकास योजना का यह वह महत्वपूर्ण
प्रभाव है जिसे प्रचार के किसी भी साधन अथवा प्रशिक्षण की किसी दूसरी योजना के द्वारा
इतना सफल नहीं बनाया जा सकता है।

आर्थिक विकास

आर्थिक विकास के क्षेत्र में तो सामुदायिक विकास योजना ने ग्रामीण समुदाय के परम्परागत
स्वरूप को पूर्णतया बदल दिया है। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत किसानों को न केवल उत्तम  किस्म के ख्ेाती के उपकरण, बीज, रासायनिक खाद तथा कीटनाशक दवाइयों का वितरण
किया गया बल्कि वर्शा पर खेती की निर्भरता को कम करने के लिए कुओं का निर्माण,
नलकूपों की व्यवस्था तथा नहरें बनाने के कार्य को भी विशेष महत्व दिया गया। ग्रामीणों
की आर्थिक स्थिति में सुधार करने के लिए भूमिहीन मजदूरों के लिए रोजगार के अतिरिक्त
अवसरों की व्यवस्था की गई, भूमि सुधार कार्यक्रमों को लागू किया गया तथा अनाज को
मण्डियों तक ले जाने के लिए नई सडकों का निर्माण किया गया। सहायक व्यवसाय के
रूप में मछली पालन, मुर्गी पालन, पशुपालन तथा कुटीर उद्योग धन्धों को विशेष प्रोत्साहन
दिया गया जिससे ग्रामीण अपने अतिरिक्त समय से उपयोगी रम कर सकें। इन सभी
प्रत्यनों के फलस्वरूप ग्रामीण जनता के रहन-सहन के स्तर में पहले की अपेक्षा बहुत
अधिक सुधार हो सका है।

मनोवृत्तियों में परिवर्तन 

भारत में सैकड़ों वर्शो से उदासीनता और शोषण के वातावरण में पलते हुए ग्रामीण समुदाय
के जीवन में तब तक कोई सुधार सम्भव नहीं था जब तक उनके दृष्टिकोण, विचारधारा या
वास्तविक अर्थो में उनकी मानसिकता में कोई परिवर्तन न किया जाता। सामुदायिक विकास
योजना के फलस्वरूप विभिन्न विकास कार्यक्रमों में जैसे-जैसे ग्रामीणों का सहभाग बढता
गया, उसी अनुपात में उनमें हीनता की भावना भी कम होती गयी। आज एक औसत
ग्रामीण स्वयं को किसी वर्ग या व्यक्ति के अधीन मानकर कोई शोषण सहन करने के लिए
तैयार नहीं है। उसमें आत्मनिर्भरता और स्वािभान इस सीमा तक पहंचु चुका है कि वह
अपने व्यवसाय और जीवन को किसी से नीचा नहीं मानता। इस योजना ने ग्रामीणों के
विश्वास को बढ़ाया है उन्हें अपनी क्षमता का अधिकतम उपयोग करने का अवसर प्रदान
किया है तथा उनमें एक ऐसी नव-चेतना उत्पन्न की है जो भविश्य में उनके जीवन को
कहीं अधिक सूखी एवं सम्द्ध बना सकती है।

स्वास्थ्य तथा सफाई 

अतीत की अपेक्षा ग्रामीण अपने स्वास्थ्य तथा स्वच्छता के प्रति आज कही अधिक जागरूक
है। सामुदायिक विकास कार्यक्रम के प्रभाव से अब गन्दे तालाबों की जगह पीने के लिए
स्वच्छ पानी का उपयोग किया जाता है। सड़कों को गन्दा करने की अपेक्षा “ाौचालयों के
उपयोग को अच्छा समझा जाने लगा है। संक्रामक बिमारियों को देवी प्रकोप न समझकर
ग्रामीण जनता चिकित्सक तथा बच्चे की देखभाल में अधिक रूचि लेने लगी है। तथा
परिवार नियोजन के प्रति ग्रामीणों के उत्साह में भी वृद्धि हुई है। इस योजना का ही यह
प्रभाव है कि गांवों में मृत्यु दर घटी है, जीवन अवधि में वृद्धि हुई है। परिवार का औसत
आकार घट गया है, तथा स्वास्थ्य का सामान्य स्तर पहले की तुलना में कहीं अधिक  सन्तोषपद दिखायी देता है। इसी सुधार के फलस्वरूप ग्रामीणों की कार्यक्षमता में भी
कल्पनातीत वृद्धि हुई है।

साक्षरता में वृद्धि 

सामुदायिक विकास कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण प्रभाव भारत की ग्रामीण जनसंख्या में तेजी
से साक्षरता का बढ़ना है। सामुदायिक विकास खण्डों की सहायता से आज गांव-गांव में
शिक्षा का प्रसार किया जा रहा है। प्रौढ स्त्री-पुरूशों को साक्षर बनाने के लिए विशेष केन्द्रों
की स्थापना की गयी है। पुस्तकालयों तथा वाचनालयों के द्वारा बाह जगत से ग्रामीणों को
जोड़ा गया है। तथा साक्षरता अभियान की सफलता का मूल्यांकन करने के लिए
समय-समय पर प्रत्यन किये जाते हैं। इन प्रयासों के फलस्वरूप पिछले 20 वर्शो में ग्रामीण
साक्षरता में 72 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

संप्रेशण द्वारा चेतना 

गांवों में आज सम्प्रेशण अथवा संचार की सुविधाएं कहीं अधिक उन्नत स्थिति में हैं।
सामुदायिक विकास कार्यक्रम के अन्तर्गत नयी सड़कों का निर्माण पुरानी सड़कों की मरम्मत,
मनोरंजन के लिए रेडियो, हाटों, खेलों तथा मेलों की व्यवस्था आदि के कारण ग्रामीणों को
अन्य समूह से सम्पर्क में आने का अवसर मिला। नये बाजारों में ज्ञान तथा सरकार की
योजनाओं से परिचित हो जाने के कारण उन्हें अपने श्रम का अधिक अच्छा मूल्य प्राप्त
करने का अवसर मिला तथा अपनी समस्याओं के प्रति उनका दृष्टिकोण धीरे-धीरे बदलने
लगा। संचार की सुविधाओं के प्रभाव से ही ग्रामीण जीवन में सामाजिक समस्याओं, रूढ़ियों
अन्धविश्वासों और स्वार्थ समूह के प्रति शोषण का प्रभाव दिन-प्रतिदिन कम होता जा रहा
है।

ग्रामीण नेतृत्व का विकास 

ग्रामीण समुदाय में नेतृत्व की एक नया रूप देने में भी सामुदायिक विकास कार्यक्रम का
महत्व कम नहीं है। वास्तव में नेतृत्व का प्रत्यक्ष सम्बन्ध सामूहिक क्रियाओं में व्यक्ति के
अधिकाधिक सहभाग से है। सामुदायिक विकास कार्यक्रम के अन्तर्गत ग्राम और खण्ड स्तर
पर अधिक कुशल और और उत्साही व्यक्तियों को अपने समूह को नेतृत्व देने का अवसर
मिला, नवीन योजनाओं के क्रियान्वयन में नेतृत्व के अवसरों में वृद्धि हुई तथा ग्रामवासियों
के जीवन स्तर में सुधार होने के साथ ही उन्होंने नेतृत्व की आवश्यकता तथा इसके महत्व
को महसूस किया। आज ग्रामीणों द्वारा अपने उचित अधिकारों की मांग, शोषण के विरूद्ध
संगठित प्रदर्शनों का आयोजन तथा समूह कल्याण के प्रति बढ़ती हुई रूचि जैसे-विशेषताएं
ग्रामीण नेतृत्व के विकासशील स्वरूप का प्रतिनिधित्व करती है।

मातृत्व तथा शिशु कल्याण 

सामुदायिक विकास कार्यक्रम के फलस्वरूप ग्रामीण समुदाय में स्त्रियों, माताओं तथा बच्चों
के जीवन में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। ग्राम सेविकाएं, ग्रामीण महिलाओं को घर-घर
जाकर स्वच्छता, पोशण, स्वास्थ्य, बच्चों की देख-रेख तथा भोजन के पौश्टिक तत्वों की
जानकारी देती है। जिससे ग्रामीण महिलाओं के दृष्टिकोण में अब काफी परिवर्तन आ गया
है। स्वयं गांव में ही आयोजित विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से स्त्रियों ने अपने दैनिक
जीवन, रहन-सहन तथा दूसरों समूहों से सम्बन्धों का पुनर्मूल्याकन करना आरम्भ कर दिया
है। ग्रामों में महिला मण्उलों की स्थापना ने स्त्रियों में भी नेतृत्व की कुशलता उत्पन्न की
है। सामुदायिक विकास से सम्बन्धित कल्याण कार्यक्रमों के प्रभाव से ग्रामीण स्त्रियों का
शोषण कम होता जा रहा है। स्त्रियां अपने अधिकारों के प्रति सजग हो रही है। उनके
स्वास्थ्य सतर में सुधार हुआ है तथा बच्चों की देख-रेख में अब पहले से अधिक कुशल हो
चुकी है।

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