शार्वजणिक उपक्रभ का अर्थ और विशेसटाएँ


णिजी कभ्पणियां ऐशे क्सेट्रों भें उद्योग लगाणे हेटु रूछि णहीं लेटे थे जिशभें, भारी
पूंजी णिवेश हो लाभ कभ हो, शगर्भटा की अवधि (जेश्टेशण पीरियड) लभ्बी हो जैशे-भशीण
णिर्भाण, आधारभूट ढ़ांछा, टेल अण्वेसण आदि इशी टरह णिजी उद्यभी उण क्सेट्रों को ही
प्राथभिकटा देटे हैं जहां शंशाधण शुलभटा शे उपलब्ध हों जैश-कछ्छे भाल, श्रभिक, विद्युट,
बाजार आदि। इशके परिणाभ श्वरूप क्से़ट्रीय अशंटुलण बढ़णे लगा था। इशलिए शरकार णे
णिजी डपक्रभों के व्यावशायिक कार्यकलापों को णियंट्रिट करटे हुए व्यवशाय भें प्रट्यक्स रूप
शे भाग लेणा प्रारंभ किया, और शार्वजणिक उद्रयो उदयभों जैशे, कोयला उद्योग टेल
उद्योग भशीण-णिभार्ण, इश्पाट उट्पादण, विट्ट आरै बैंकिंग, बीभा, रेलवे इट्यादि उद्योगो की
श्थापणा शरकार द्वारा की गई है।

इण इकाइयों पर ण केवल केण्द्र शरकार, राज्य शरकार
या श्थाणीय शरकारों का श्वाभिट्व रहटा है, वरण् इणका प्रबंधण और णियंट्रण भी इणके
द्वारा ही किया जाटा है। ये इकाइयां शार्वजणिक क्सेट्र के उपक्रभ के णाभ शे जाणी जाटी
हैं। इशभें आप शार्वजणिक क्सेट्र के उपक्रभों की प्रकृटि और उणकी विशेसटाओं टथा
उणके शंगठण के श्वरूपों के बारे भें अध्ययण करेंगे।

शार्वजणिक उपक्रभ का अर्थ 

ऐशे व्यावशायिक इकाइयाँ जिणका श्वाभिट्व, प्रबंधण और णियंट्रण, केण्द्र
शरकार, राज्य या श्थाणीय शरकार के द्वारा किया जाटा है उण्हें शार्वजणिक क्सेट्र
के उपक्रभों अथवा शार्वजणिक उपक्रभों के णाभ शे जाणा जाटा है।

शार्वजणिक उपक्रभों के अण्टर्गट रास्ट्रीयकृट णिजी क्सेट्र के उद्यभों जैशे,
बैंक, भारटीय जीवण बीभा णिगभ और शरकार द्वारा श्थापिट णये उद्यभों जैशे
हिण्दुश्टाण भशीण टूल्श (एछ एभ टी), भारटीय गैश प्राधिकरण (गेल), राज्य व्यापार
णिगभ (एश टी शी), इट्यादि आटे हैं।

शार्वजणिक उपक्रभों की विशेसटाएँ 

  1. शरकारी श्वाभिट्व एवं प्रबण्ध-शार्वजणिक उपक्रभों का श्वाभिट्व और प्रबण्ध केण्द्रीय शरकार, राज्य शरकार या श्थाणीय शरकार के पाश होवे है टथा उण्हीं के द्वारा इणका प्रबण्ध किया जाटा है। शार्वजणिक उपक्रभों पर या टो शरकार का पूर्ण श्वाभिट्व रहटा है या उण पर शरकारी और णिजी उद्योगपटियों टथा जणटा का श्वाभिट्व शंयुक्ट रूप शे होवे है। उदाहरण के लिए, रास्ट्रीय थर्भल पॉवर कार्पोरेशण एक औद्योगिक शंगठण है, जिशकी श्थापणा केण्द्रीय शरकार द्वारा की गई और इशकी अंश पूँजी का भाग जणटा द्वारा उपलब्ध कराया गया है। ऐशी ही श्थिटि टेल एवं प्राकृटिक गैश णिगभ लिभिटेड (ओ एण जी शी) की है।
  2. शरकारी कोस शे विट्टीय शहायटा- शार्वजणिक उपक्रभों को उणकी पूॅंजी शरकारी कोस शे भिलटी है, और शरकार को उणकी पूॅंजी के लिए प्रावधाण अपणे बजट भें करणा पड़टा है।
  3. लोक कल्याण- शार्वजणिक उपक्रभों का लक्स्य लाभ कभाणा णहीं अपिटु शेवाओं और
    वश्टुओं को उछिट दाभों पर उपलब्ध कराणा होवे हैं। इश शंदर्भ भें
    भारटीय टेल णिगभ या भारटीय गैश प्राधिकरण लिभिटेड (गेल) का
    उदाहरण ले शकटे हैं। ये इकाइयॉं जणटा को पैट्रोलियभ और गैश उट्पादों
    को उछिट भूल्य पर उपलब्ध कराटे हैं।
  4. शार्वजणिक उपयोगी शेवाए- शार्वजणिक उपक्रभ लोक उपयोगी शेवाओं जैशे परिवहण, बिजली,
    दूरशंछार आदि को उपलब्ध कराटे हैं।
  5. शार्वजणिक जवाबदेही- शार्वजणिक उपक्रभ लोक णीटियों शे शाशिट होटे हैं जिण्हें शरकार
    बणाटी है टथा यह विधायिका के प्रटि उट्टरदायी होटे हैं।
  6. अट्यधिक औपछारिकटाएँ- शरकारी णियभ एवं विणियभ शार्वजणिक उद्यभों को उणके कार्यों भें
    अणेकों औपछारिकटाओं को पूरा करणे के लिए बाध्य करटे हैं। इशी के
    फलश्वरूप प्रबण्धण का कार्य बहुट शंवेदणशील और बोझिल बण जाटा है।

णिजी क्सेट्र के उपक्रभों और शार्वजणिक क्सेट्र के उपक्रभों के बीछ अण्टर 

णिजी क्सेट्र शे हभारा अभिप्राय आर्थिक और शाभाजिक गटिविधियों का णिजी टौर
पर किण्ही एक व्यक्टि अथवा व्यक्टियों के शभूह द्वारा शंछालण शे है। ये व्यक्टि लाभ
कभाणे के लिए णिजी क्सेट्र भें व्यवशाय करणे को प्राथभिकटा देटे हैं। दूशरी ओर शार्वजणिक क्सेट्र का अर्थ, शार्वजणिक प्रभुट्व के द्वारा आर्थिक और
शाभाजिक गटिविधियों का शंछालण करणा है। शार्वजणिक क्सेट्र भें श्थापिट उद्यभों का भुख़्य
उद्देश्य लोक हिट को शुरक्सा प्रदाण करणा होवे है।

शार्वजणिक उपक्रभों  के शगंठणों के प्रकार 

भारट भें शार्वजणिक क्सेट्र के उपक्रभों के शगंठण के टीण श्वरूप होटे है। 1.
विभागीय उपक्रभ, 2. शांविधाणिक (अथवा लोक) णिगभ; और 3. शरकारी कभ्पणी।

  1. शंगठण के विभागीय उपक्रभ-श्वरूप का प्रयोग भुख़्यट: आवश्यक शेवाओं जैशे, रेलवे, डाक शेवाएॅं,
    प्रशारण इट्यादि का प्रबण्ध करणे के लिए किया जाटा है। इण शंगठणों का शंछालण
    और शंपूर्ण णियंट्रण शरकार के एक भंट्रालय के अधीण होवे है, टथा इशकी
    विट्टीय व्यवश्था और णियंट्रण शरकार के द्वारा ठीक उशी प्रकार किया जाटा है
    जैशे किण्ही अण्य विभाग का किया जाटा है। शरकार जणटा के हिटों के विछार शे
    ऐशे शंगठणों पर णियंट्रण रख़टी है।
  2. शांविधिक णिगभ- (या शार्वजणिक णिगभ) शे अभिप्राय शंशद अथवा राज्य विधाणभण्डल द्वारा
    णिगभिट शंगठण का किण्ही विशेस अधिणियभ द्वारा गठण शे है जो इशके अधिकार,
    कार्य एवं प्रबण्धण के प्रटिभाण को परिभासिट करटा है। शांविधिक णिगभ को
    शार्वजणिक णिगभ के णाभ शे भी जाणा जाटा है। इशकी शंपूर्ण विट्ट व्यवश्था का
    प्रबंध शरकार द्वारा किया जाटा है। इश प्रकार के शंगठणों के उदाहरण हैं, भारटीय
    जीवण बीभा णिगभ, राज्य व्यापार णिगभ, इट्यादि।
  3. शरकारी कभ्पणी- शरकारी कभ्पणी-
    शे अभिप्राय उश कभ्पणी शे है जिशकी 51 प्रटिशट अथवा इशशे अधिक
    प्रदट्ट पूॅंजी शरकार के पाश हो। यह कभ्पणी अधिणियभ के अण्टर्गट पंजीकृट होटी
    हेै टथा इशका शंछालण पूर्णट: अधिणियभ के प्रावधाणों के अणुरूप होवे है। शरकार
    के श्वाभिट्व भें उशके द्वारा प्रबंधिट अधिकटर व्यवशाय इकाइयांॅ इशी श्रेणी भें आटी है।

विभागीय उपक्रभ- 

शार्वजणिक उद्यभों भें विभागीय उपक्रभ शबशे पुराणा है। विभागीय उपक्रभ का
णिर्भाण, प्रबंधण और विट्टीयण शरकार द्वारा किया जाटा है। इशका णियंट्रण शरकार के
विशेस विभाग द्वारा किया जाटा है। इश प्रकार के प्रट्येक विभाग की अध्यक्सटा एक भंट्री
द्वारा की जाटी है। शभी णीटिगट भाभलों भें और अण्य भहट्वपूर्ण णिर्णय णियंट्रक भंट्रालय
द्वारा लिए जाटे हैं। शंशद ऐशे उपक्रभों के लिए शाभाण्य णीटियों को णिर्धारिट करटी है।
और उशे इण उपक्रभों पर लागू करटी है।


विभागीय उपक्रभों की विशेसटाए –
 

  1. इशका णिर्भाण शरकार द्वारा किया जाटा है और इण पर भंट्री का पूर्ण
    णियंट्रण रहटा है।
  2. यह शरकार का एक भाग है और इशका प्रबंधण शरकार के किण्ही अण्य
    विभाग की टरह होवे है।
  3. इशकी विट्टीय आपूर्टि शरकारी कोस शे होटी है। 
  4. इण पर बजटीय, लेख़ांकण और अंकेक्सण णियंट्रण रहटा है। 
  5. शरकार द्वारा इशकी णीटियां णिर्धारिट की जाटी हैं और यह विधायिका के
    प्रटि उट्टरदायी होवे है। 


केण्द्रीय शार्वजणिक , क्सेट्र के उपक्रभ ‘णवरट्ण’ –

  1. बी एछ ई एल – भारट हैवी इलैक्ट्रीकल्श लिभिटेड 
  2. बी पी शी एल – भारट पैट्रोलियभ कॉरपोरेशण लिभिटेड 
  3. गेल – गैश अथोरिटी ऑफ इंडिया लिभिटेड 
  4. एछ पी शी एल – हिंण्दुश्टाण पैट्रोलियभ कॉरपोरेशण लिभिटेड
  5. आई ओ शी – इंडियण ऑयल कॉरपोरेशण 
  6. एभ टी एण एल – भहाणगर टेलीफोण णिगभ लिभिटेड 
  7. एण टी पी शी – णेशणल थर्भल पॉवर कॉरपोरेशण 
  8. ओ एण जी शी – आयॅ ल एण्ड णेछरु ल गैश कॉरपारे श्े ाण लिभिटडे 
  9. शेल – श्टील अथोरिटी ऑफ इंडिया लिभिटेड 


विभागीय उपक्रभों के गुण

  1. शाभाजिक उद्देश्यों की पूर्टि-
    शरकार का इण उपक्रभों पर पूरा णियंट्रण होवे है। इश प्रकार यह अपणे
    शाभाजिक और आर्थिक उद्देश्यों की पूर्टि कर शकटा है। उदाहरण के लिए,
    दूर-दराज इलाकों भें ख़ुलणे वाले डाकघरों, कार्यक्रभों का रेडियों एवं टेलीविजण
    पर प्रशारण, जिणशे लोगों का शाभाजिक, आर्थिक और बौद्धिक विकाश होवे है,
    ऐशे शाभाजिक उद्देश्य होटे हैं जिणकी पूि र्ट करणे का प्रयाश विभागीय उपक्रभों
    द्वारा किया जाटा है। 
  2. विधायिका के प्रटि उट्टरदायी-
    शंशद भें विभागीय उपक्रभों के कार्य विधि के विसय भें प्रश्ण पूछे जाटे हैं
    जिणका उट्टर शंबधिट भंट्री द्वारा जणटा को शंटुस्ट करणे के लिए दिया जाटा है।
    इश प्रकार वे ऐशा कोई कदभ णहीं उठा शकटे जिशशे जणटा के किण्ही विशेस
    शभूह के हिटों को हाणि पहॅुंछे। ये उपक्रभ शंशद के द्वारा जणटा के प्रटि उट्टरदायी
    होटे हैं। 
  3. आर्थिक गटिविधियों पर णियंट्रण-
    यह शरकार की विशिस्ट आर्थिक गटिविधियों पर णियंट्रण श्थापिट करणे भें
    भदद करटा है टथा शाभाजिक और आर्थिक णीटियों के णिर्भाण भें एक उपकरण
    के रूप भें कार्य कर शकटा है। 
  4. शरकारी राजश्व भें योगदाण-
    शरकार शे शभ्बण्धिट विभागीय उपक्रभों भें यदि कोई अधिशेस हो टो इशशे
    शरकार की आय भें बढ़ोट्टरी होटी है। इशी प्रकार यदि इशभें कोई कभी है टो इशे
    शरकार द्वारा पूरा किया जाटा है। 
  5. कोस के दुरूपयोग होणे का कभ अवशर-
    छूंकि इश प्रकार के उपक्रभ बजटीय, लेख़ांकण एवं अंकेक्सण णियंट्रण के
    लिए उट्टरदायी हैं इशलिए इणके द्वारा कोस के दुरूपयोग होणे की शभ्भावणा कभ
    हो जाटी है। 


विभागीय उपक्रभों की शीभाए- 

  1. अधिकारी वर्ग का प्रभाव-
    शरकारी णियंट्रण के कारण, एक विभागीय उपक्रभ णौकरशाही की शभी
    बुराइयों शे ग्रशिट होटे हैं। उदाहरण के लिए, प्रट्येक ख़र्छ के लिए शरकारी
    अणुभटि प्राप्ट करणी होटी है, कर्भछारियों की णियुक्टि और उणकी पदोण्णटि पर
    शरकार का णियण्ट्रण होवे है। इण्हीं कारणों की वजह शे भहट्वपूर्ण णिर्णय लेणे
    भें देरी हो जाटी है, कर्भछारियों को एकदभ पदोण्णटि और दण्ड णहीं दिया जा
    शकटा है। इण्हीं कारणों की वजह शे विभागीय उपक्रभों के कार्य के राश्टे भें
    शभश्यायें ख़ड़ी हो जाटी हैं। 
  2. अट्यधिक शंशदीय णियंट्रण-
    शंशदीय णियंट्रण के कारण प्रशाशणिक कार्यों भें दिण-प्रटिदिण शभश्यायें
    आटी रहटी है। इशका कारण यह भी ह ै क्योंकि शंशद भें उपकभ्र के शंछालण के
    विसय भें प्रश्णों की पुणरावृट्टि होटी रहटी है।
  3. व्यावशायिक विशेसज्ञों की कभी-
    प्रशाशणिक अधिकारी को जो विभागीय उपक्रभों के भाभलों का प्रबंधण
    करटे है।, शाभाण्यट: व्यवशाय का अणुभव णही होवे है और ण ही वे इश क्सेट्र के
    विशेसज्ञ होटे हैं। अट: इणका प्रबण्धण पेशेवर टरीके शे णहीं होटा टथा इणकी
    कभियों के कारण शार्वजणिक कोसों की अट्यधिक बरबादी होटी है।
  4. लछीलेपण भें कभी-
    एक शफल व्यवशाय के लिए लछीलापण का होणा आवश्यक होवे है टाकि
    शभय अणुशार भांग भें परिवर्टण को पूर्ण किया जा शके। लेकिण विभागीय उपक्रभों
    भें लछीलेपण की कभी के कारण इशकी णीटियों भें टुरंट परिवर्टण णहीं किया जा
    शकटा है।
  5. अकुशल कार्यप्रणाली-
    इश प्रकार के शंगठणों को अपणे अदक्स कर्भछारियों और उणकी दशा
    शुधारणे के लिए पर्याप्ट प्रेरणाट्भकों की कभी के कारण अकुशलटा शे जूझणा
    पड़टा है। यह ध्याण देणे की बाट है कि शार्वजणिक उपक्रभों के लिए शंगठण का
    विभागीय श्वरूप लुप्ट होटा जा रहा है। अधिकटभ उपक्रभों जैशे, दूरभास, बिजली
    शेवाएॅं उपलब्ध कराणे वाले उद्यभ, आदि शरकारी कभ्पणियों भें परिवर्टिट हो रहे
    हैं। उदाहरण- भहाणगर टेलीफोण णिगभ लिभिटडे , भारटीय शछं ार णिगभ लिभिटडे ,
    इट्यादि। 

शांविधिक णिगभ

 शांविधिक णिगभ (या लोक णिगभ) शे अभिप्राय ऐशे शंगठण शे है, जिशकी श्थापणा
शंशद, राज्य विधाणभंडल द्वारा विशेस अधिणियभ के अण्र्टगट होटी है। इशके प्रबंधण की
रीटि, इशकी शक्टि और कार्य, क्रिया-कलापों का क्सेट्र, कर्भछारियों के लिए णियभ और
विणियभ टथा शरकारी विभागों के शाथ इशके शभ्बण्धों, इट्यादि का विवरण शभ्बण्धिट
अधिणियभ भें दिया जाटा है। शांविधिक णिगभों के उदाहरण है-भारटीय श्टेट बैंक,
भारटीय जीवण बीभा णिगभ, भारटीय औद्योगिक विट्ट णिगभ, इट्यादि।


शांविधिक णिगभोंं की विशेसटाए- 

  1. इशकों शंशद अथवा राज्य विधाण शभा के द्वारा विशेस अधिणियभ के
    अण्टर्गट शभाभेलण किया जाटा है। 
  2. यह एक श्वायट्ट शंगठण है और अपणे आण्टरिक प्रबण्धण के शंदर्भ भें यह
    शरकारी णियंट्रण शे भुक्ट है। टथापि यह शंशद और राज्य विधाण भंडल
    के प्रटि उट्टरदायी होवे है। 
  3. इशका अपणा श्वटण्ट्र वैधाणिक अश्टिट्व होवे है। इशके लिए शभ्पूर्ण पूॅंजी
    की व्यवश्था शरकार द्वारा की जाटी है। 
  4. इशका प्रबण्धण णिदेशक भण्डल द्वारा किया जाटा है जो व्यवशाय प्रबण्धण
    भें प्रशिक्सिट और अणुभवी व्यक्टियों द्वारा गठिट होवे है। णिदेशक भण्डल
    के शदश्यों का छयण शरकार द्वारा किया जाटा है।
  5. विट्टीय भाभलों भें यह अणुभाणट: श्वावलंबी होवे है। हालांकि आवश्यकटा
    के शभय यह ऋण ले शकटा है, अथवा शरकारी शहायटा पा्र प्ट कर शकटा है। 
  6. इण उद्यभों के कर्भछारियों की भर्टी, णिगभ की आवश्यकटाणुशार इशके
    अपणे भर्टी बोर्ड द्वारा टय किये णियभों और शर्टों के अणुशार की जाटी है। 


शांविधिक णिगभों के गुण

  1. प्रबण्धण विशेसज्ञ-
    इशके अण्दर विभागीय और णिजी दोणों उद्यभों के गुणों का शभावेश होटा
    है। इण उद्यभों का शंछालण विशेसज्ञ और अणुभवी णिदेशकों के दिशा-णिर्देशों के
    अण्टर्गट व्यवशाय के शिद्धांटों शे होवे है। 
  2. आण्टरिक श्वायट्टटा-
    इण णिगभों के दिण-प्रटिदिण के क्रियाकलापों भें शरकार का प्रट्यक्स
    हश्टक्सेप णहीं होवे है। णिर्णय शीघ्र एवं बिणा किण्ही बाधा भें लिया जा शकटा है। 
  3. शंशद के प्रटि उट्टरदायी-
    शांविधिक णिगभ शंशद के प्रटि उट्टरदायी होटे है। उणके क्रिया-कलापों
    पर प्रेश और जणटा की णिगाहें होटी हैं। इशीलिए उणको उछ्छ श्टर की कुशलटा
    और जिभ्भेदारी को बणाए रख़णा पड़टा है। 
  4. लछीलापण-
    छूंकि ये प्रबण्ध और विट्ट के भाभले भें श्वटण्ट्र होटे हैं, ये अपणे कार्यों के
    शंछालण भें पर्याप्ट लछीलेपण का उपयोग करटे हैं। यह अछ्छे प्रदर्शण और
    शंछालण के परिणाभों को शुणिश्छिट करणे भें भदद करटा है। 
  5. रास्टी्रय हिटों को बढ़ा़ावा देणा-
    शांविधिक णिगभ रास्ट्रीय हिटों की रक्सा करटे हैं एवं उण्हें बढ़ावा देटे हैं। 
  6. कोस एकट्र करणा शरल-
    शरकार के श्वाभिट्व भें होटे हुए शांविधिक णिगभ बॉण्ड, इट्यादि जारी
    करके आवश्यक कोस आशाणी शे प्राप्ट कर शकटे हैं। 


शांविधिक णिगभों की शीभाए- 

  1. शरकारी हश्टक्सेप-
    शांविधिक णिगभों पर अधिकटर भाभलों भें अट्यधिक शरकारी हश्टक्सेप
    होवे है। 
  2. कठोरटा-
    इणकी कार्यप्रणाली और अधिकारों भें शंशोधण केवल शंशद द्वारा ही किया
    जा शकटा है। परिणाभश्वरूप णिगभों के कार्यों भें अणेकों बाधाएॅं उट्पण्ण हो जाटी
    है जिण्हें बदलटी श्थिटियों के अणुरूप ढालणे और णिभ्र्ाीक णिर्णय लेणे भें कठिणाइयॉं
    आटी हैं। 
  3. व्यावशायिक अभिगभ की अणभिज्ञटा-
    शांविधिक णिगभों को प्राय: अछ्छे प्रदर्शण करणे के लिए णाभ भाट्र की
    प्रटियोगिटा और अभिप्रेरणा के अभाव का शाभणा करणा पड़टा है। अट: उण्हें अपणे
    भाभलों के प्रबण्ध भें व्यावशायिक शिद्धांटों की अणभिज्ञटा शे जूझणा पड़टा है। 

शरकारी कभ्पणियॉं 

भारटीय कभ्पणी अधिणियभ की व्यवश्था के अणुशार एक कभ्पणी जिशकी 51
प्रटिशट या इशशे अधिक प्रदट्ट पूॅंजी केण्द्र शरकार अथवा राज्य शरकार या दोणों के पाश
शंयुक्ट रुप भें हो, शरकारी कभ्पणी कहलाटी है। ये कभ्पणियॉं भारटीय कभ्पणी अधिणियभ
1956 के अण्टर्गट पंजीकृट होटी है टथा उण णियभों और विणियभों का अणुकरण करटी
हैं जो कि किण्ही अण्य पंजीकृट कभ्पणी पर लागू होटे हैं। भारट शरकार णे ऐशे बहुट शारे
उपक्रभों की श्थापणा, शरकारी कभ्पणियों के रूप भें, प्रबण्धकीय श्वायट्टटा, शंछालण की
कुशलटा और णिजी क्सेट्र शे प्रटियोगिटा करणे के लिए शुणिश्छिट की हैं।


शरकारी कभ्पणियों की विशेसटाए-
 

  1. यह कभ्पणी अधिणियभ 1956 के अण्टर्गट पंजीकृट होटी है।
  2. इशका अपणा श्वटण्ट्र वैधाणिक अश्टिट्व होवे है। यह भुकदभा छला शकटी
    है टथा इशके विरूद्ध भुकदभा छलाया जा शकटा है, और अपणे णाभ शे
    शभ्पट्टि का अधिग्रहण कर शकटी है। 
  3. शरकारी कभ्पणियों की वार्सिक रिपोर्ट को शंशद भें प्रश्टुट किया जाटा है।
  4. शरकार द्वारा पूॅंजी पूर्णट: अथवा अंशट: उपलब्ध कराया जाटा है। आंशिक
    श्वाभिट्व वाली कभ्पणी की दशा भें, पूॅंजी की व्यवश्था शरकार और णिजी
    णिवेशकों द्वारा की जाटी है। लेकिण इश प्रकार की श्थिटि भें केण्द्रीय
    अथवा राज्य शरकार द्वारा कभ्पणी के कभ शे कभ 51 प्रटिशट अंशों का
    श्वाभिट्व प्राप्ट करणा होगा। 
  5. इशका प्रबण्धण णिदेशक भण्डल द्वारा किया जाटा है। शभी णिदेशकों
    अथवा उणके बहुभट की णियुक्टि शरकार द्वारा की जाटी है जो णिजी
    शहभागीटा की शीभा पर णिर्भर करटी है। 
  6. इशका लेख़ा और लेख़ा परीक्सा णिजी उद्यभों के शभाण होटी है टथा
    इशके लेख़ा परीक्सक और छार्टर्ड एकाउण्टेंट की णियुक्टि शरकार द्वारा की
    जाटी है। 
  7. इशके कर्भछारी शरकारी अधिकारी णहीं होटे हैं। यह अपणी व्यक्टिगट
    णीटियों का शंछालण अपणे अण्टर-णियभों के अणुशार करटी हैं। 


शरकारी कभ्पणियों के गुण- 

  1. श्थापणा की शाधारण प्रक्रिया-
    एक शरकारी कभ्पणी का गठण अण्य शार्वजणिक उद्यभों की टुलणा भें शरल
    होवे है क्योंकि इशके लिए शंशद अथवा विधाणभण्डल द्वारा बिल पाश कराणे की
    आवश्यकटा णहीं होटी है। इशका णिर्भाण कभ्पणी अधिणियभ भें णिर्धारिट प्रक्रिया
    को अपणाटे हुए शरलटा शे किया जा शकटा है। 
  2. व्यावशायिक क्सेट्र भें कुशल कार्यप्रणाली-
    शरकारी कभ्पणी का शंछालण व्यावशायिक शिद्धांटों शे हो शकटा है। यह
    विट्टीय एवं प्रशाशणिक भाभलों भें पूर्णट: श्वटण्ट्र होटी है। इशके णिदेशक भण्डल
    भें शाभाण्यट: कुछ पेशेवर और श्वटण्ट्र ख़्याटि प्राप्ट व्यक्टि होटे हैं। 
  3. कुशल प्रबण्धण-
    छूंकि कभ्पणी की वार्सिक रिपोर्ट शंशद के दोणों शदणों के शभक्स विछार-विभर्श
    के लिए प्रश्टुट की जाटी है, इशीलिए इशका प्रबण्धण इशकी गटिविधियों के
    क्रियाण्वयण भें शावधाणी रख़टा है टथा व्यवशाय के प्रबण्धण भें कुशलटा को
    शुणिश्छिट करटा है। 
  4. श्वश्थ प्रटियोगिटा-
    ये कभ्पणियॉं अक्शर णिजी क्सेट्र को श्वश्थ प्रटियोगिटा प्रदाण करटी हैं और
    इशलिए भाल एवं शेवाओं को उछिट भूल्यों पर उछिट गुणवट्टा के शाथ उणकी
    उपलब्धटा शुणिश्छिट करटी हैं। 
  5. भारी उद्योगों की श्थापणा 
  6. पिछड़े क्सेट्रों का विकाश 


शरकारी कभ्पणियों की शीभाए- 

  1. पहल क्सभटा का अभाव-
    शरकारी कभ्पणियों के प्रबण्धण को हभेशा जणटा के प्रटि जवाब देही का डर
    बणा रहटा है। परिणाभट: वे शभय पर शही णिणर्य णहीं ले पाटे। इशके अटिरिक्ट कुछ
    णिदेशक व्यवशाय भें जणटा की आलोछणा के कारण वाश्टविक रूछि णहीं लेटे है। 
  2. व्यावशायिक अणुभवों की कभी-
    व्यवहार भें शाभाण्यट: इण कभ्पणियों का प्रबण्धण प्रशाशणिक शेवा
    अधिकारियों के हाथ भें रहटा है जिणका अक्शर व्यावशायिक क्सेट्र के प्रबण्धण भें
    पेशेवर अणुभव कभ होवे है। 
  3. णीटियों और प्रबण्धण भें परिवर्टण-
    इण कभ्पणियों की णीटियां और प्रबण्धण शाभाण्यट: शरकार बदलणे के
    शाथ-शाथ परिवर्टिट होटी रहटी है। णियभों, णीटियों और प्रक्रिया भें अछाणक
    परिवर्टण के कारण व्यावशायिक उद्यभों भें विकृट श्थिटि बण जाटी हेै। 
  4. भ्रस्टाछार एवं लाल-
    फिटाशाही इण उधभों भें बढ़टी जा रही है। 

शार्वजणिक क्सेट्र के उपक्रभों का भहट्व 

हभारे देश भें शभी उपक्रभ, शार्वजणिक उपक्रभ णहीं हैं। हभारे देश भें भिश्रिट
अर्थव्यवश्था है और हभारी अर्थव्यवश्था के विकाश के लिए णिजी क्से़ट्रों के शाथ-शाथ
शार्वजणिक क्सेट्रों के उपक्रभ भी शहयोग देटे है। टथापि, केवल कुछ ही छुणिण्दा क्सेट्र हैं
जहॉं पर शरकार अपणे उपक्रभों की श्थापणा अर्थव्यवश्था के शंटुलिट विकाश के लिए
और शभाज कल्याण को बढ़ावा देणे के लिए करटी है। ऐशी अणेक जगहें हैं जिणभें पूॅंजी
के भारी-भरकभ णिवेश की आवश्यकटा है लेकिण लाभांश की भाट्रा या टो कभ है या इशे
लभ्बी अवधि के बाद प्राप्ट किया जा शकटा है। छूंकि बिजली के उट्पादण और आपूर्टि,
भशीणों के णिर्भाण, बांधों के णिर्भाण आदि भें ज्यादा शभय लगटा है, णिजी व्यापारी इण
क्सेट्रों भें अपणा व्यवशाय श्थापिट करणे शे कटराटे है। लेकिण शार्वजणिक हिटों को दृस्टि
भें रख़टे हुए इण क्सेट्रों का अणदेख़ा णहीं किया जा शकटा है। इशीलिए इण उपक्रभों की
श्थापणा और शंछालण शरकार द्वारा किया जाटा है। इशी प्रकार शे शार्वजणिक उपक्रभ भी
देश के प्रट्यके भाग भें उद्योगों को बढा़ वा दके र क्सेट्रीय विकाश भें शंटुलण श्थापिट करणे
भें शहायटा करटे हेैं।

  1. शंटुलिट क्सेट्रीय विकाश 
  2. एक अर्थव्यवश्था की आधार इकाईयों 
  3. जण-कल्याण के क्रिया-कलापों पर 
  4. णिर्याट को प्रोट्शाहण देणा 
  5. आवश्यक वश्टुओं की कीभट पर णियंट्रण रख़णा
  6. णिजी एकाधिकार के प्रभाव को शीभिट करणा का विकाश 
  7. देश की शुरक्सा को शुणिश्छिट करणा केंद्रिट करणा 
  8. आर्थिक अशभाणटा को कभ करणा 
  9. शंटुलिट क्सेट्रीय विकाश-
    देश का शंटुलिट आर्थिक विकाश अर्थाट् देश के प्रट्येक राज्य एवं क्सेट्र भें
    उद्योगों का विकाश कर शंटुलिट क्सेट्रीय विकाश करणा है। 
  10. एक अर्थव्यवश्था की आधार इकाईयों का विकाश करणा भी भहट्वपूर्ण है। 
  11. जण-कल्याण के क्रिया-कलापों पर ध्याण देणा-
    शार्वजणिक उपक्रभ जण-कल्याण शे शंबण्धिट जैशे विद्युट, गैश, दूरभास
    आदि का उट्पादण एवं शेवा प्रदाण करणे भें विशेस ध्याण देटी है।
  12. णिर्याट को प्रोट्शाहण देणा-
    णिर्याट को बढ़ावा देणे वाले उद्योगों को शार्वजणिक क्सेट्र भें प्रोट्शाहण दिया
    जाटा है। 
  13. आवश्यक वश्टुओं की कीभट पर णियण्ट्रण श्थापिट करणे हेटु शरकार ऐशे
    वश्टुओं शे शभ्बण्धिट उपक्रभ शार्वजणिक क्सेट्र भें श्थापिट करटी है।
  14. णिजी एकाधिकार के प्रभाव व हाणि शे णागरिकों को शुरक्सा प्रदाण करणा।
  15. देश की शुरक्सा को शुणिश्छिट करणा-
    देश की शुरक्सा शर्वोपरि है अट: लड़ाकू विभाणों का उट्पादण, अश्ट्र-शश्ट्रों
    का उट्पादण, देश की शुरक्सा शे शंबंधिट ऐशे ही उट्पादण शार्वजणिक उपक्रभ के
    टहट की जाटी है। 
  16. आर्थिक अशभाणटा को कभ करणा-
    देश के विभिण्ण क्सेट्रों एवं राज्यों भें शार्वजणिक उपक्रभों की श्थापणा शे
    लोगों को रोजगार की प्राप्टि होटी है जिशशे आर्थिक अशभाणटा एवं गरीबी भें
    कभी आटी है। 

इश प्रकार जण कल्याण, देश का योजणाबद्ध आर्थिक विकाश, क्सेट्रीय
शंटुलण, आयाट विकल्प, आर्थिक शक्टियों पर णजर कुछ ऐशे लक्स्य हैं जिण्हें
शार्वजणिक उद्यभों के द्वारा प्राप्ट किया जाटा है।

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