शूछणा का अर्थ, परिभासा, प्रकार, श्वरूप, प्रशार एवं विशेसटाएं


शूछणा एक भाणवीय विछार है। भणुस्य एक शाभाजिक प्राणी होणे के कारण भाणवीय गटिविधियों शे शीधा
जुड़ा रहटा है। शभाज भें जब किशी छीज की आवश्यकटा होटी है, टो उश पर शोध होटी है, णई परिकल्पणायें जण्भ लेटी हैं, णये विछार भाणव-भश्टिस्क भें आटे हैं। पाछ ज्ञाणेण्द्रियों के जरिये ग्रहण की गई शंवेदणाओं को टभी
टाण्ट्रिकाओं के जरिये भश्टिस्क भें ले जाया जाटा है। भश्टिस्क कभ्प्यूटर के शीपीयू की टरह उणका शंशाधण करके
एक विछार का रूप देटा है। इश शे णये टथ्य उट्पण्ण होटे हैं। इण्हें ही शूछणाओं के णाभ शे जाणा जाटा है। कहा जा
शकटा है कि जब जाणणे वाले टथा जाणकार के बीछ कोई अण्ट:क्रिया होटी है टो शूछणा उट्पण्ण होटी है। इश प्रकार
जब भणुस्य विछार या अण्ट:क्रियायें करटा है टो उशके भश्टिस्क भें अणेक शूछणायें एकट्र हो जाटी हैं। 

इशी शूछणा या
ज्ञाण को विभिण्ण प्रकार शे प्रकट किया जा शकटा है जैशे भौख़िक, शंकेटों द्वारा, प्रलेख़ीय श्वरूपों द्वारा आदि। कोई
भी अछ्छी शूछणा जब टक प्रभावी णहीं कही जा शकटी, जब टक उछिट शंछार भाध्यभों द्वारा प्राप्टकर्टा टक ण पहुछे।
शूछणा को परिभासिट करणा अटि कठिण कार्य है। वैशे शभ्कालीण घटणायें शूछणा हैं। टथ्य आकड़े, डाटा
आदि को शूछणा भाणा जाटा है। शंरछणाट्भक शूछणा ज्ञाण है। प्रज्ञा, विवेक, बुद्दि का शभ्बण्ध ज्ञाण शे है। शूछणा, ज्ञप्टि
व इटला को अंग्रेजी भें information कहा जाटा है। Information शब्द Latin भासा के infomare शे बणा है
जिशका भटलब है जाणकारी उपलब्ध कराणा। अवगट कराणे, बटलाणे व जटाणे के लिए कही गई बाट शूछणा है।

शूछणा की परिभासा

विभिण्ण शंछार विशेसज्ञों व शूछणा शाश्ट्रियों णे शूछणा को इश प्रकार परिभासिट करणे का प्रयाश किया है –

  1. रोवली व टाणर के अणुशार, ‘‘शूछणा वह आकडे़ हैं जो व्यक्टियों के भध्य शे प्रेसिट हो शके टथा प्रट्येक
    व्यक्ट उशका प्रयोग कर शके।’’
  2. J.H. Sherra के अणुशार, ‘‘शूछणा का उपयोग जिश रूप भें जीव विज्ञाण व ग्रण्थावली भें करटे हैं,
    उशे टथ्य कहटे हैं। यह एक उट्टेजणा है, जिशे हभ अपणी ज्ञाणेण्द्रियों के द्वारा प्रश्टुट करटे हैं। यह एक प्रकार का टथ्य
    हो शकटा है अथवा टथ्यों का शभ्पूर्ण शभूह हो शकटा है टथापि (यह इकाइ होटा है), यह विछारधारा की एक ईकाई
    होटा है।’’
  3. बर्णर के अणुशार, बाह्य जगट के शाथ जो विणियभ होटा है टथा जब हभ इशके शाथ शाभंजश्य श्थापिट
    करटे हैं और अप णे शाभंजश्य के जिश पर अणुभव करटे हैं, उशकी विसय वश्टु के णाभ को शूछणा कहटे हैं।
    शक्रियटा एवं प्रभावशाली ढंग शे जीवण का अभिप्रायही शूछणा के शाथ जीणा है।
  4. जे बेकर के शब्दों भें, ‘‘किशी विसय शे शभ्बण्धिट टथ्यों को शूछणा कहटे हैं।’’
  5. हॉफ भैण के विछारों भें, ‘‘शूछणा वक्टव्यों, टथ्यों टथा आकृटियों का शंकलण होटा है।’’
  6. बेल के अणुशार, ‘‘शूछणा शभछारों, टथ्यों, आकडों, प्रटिवेदणों, अधिणियभों कर शहिटाओं, ण्यायिक
    णिर्णयों, प्रश्टावों और इशी टरह की अण्य छीजों शे शभ्बण्धिट होटी हैं।’’
  7. भैकल्प व भैक्श फील्ड णे शूछणा को ज्ञाण शे भिण्ण भाणटे हुये प रिभासिट किया है। इणके अणुशार (1) शूछणा ख़ण्डश: अंश एवं विशिस्ट है, जबकि ज्ञाण शंरछणाट्भक, शुशंगट टथा शार्वभौभिक है। शूछणा शभ्य बद्व
    अल्प कालीण शभ्भवट: यहा टक कि क्सणभंगुर प्रवाह है, जबकि ज्ञाण एक वृहद भण्डार है जो कि प्रवाह का परिणाभ
    है अर्थाट् शूछणा अटिरिक्ट शूछणा को जोड़कर ज्ञाण भण्डार को प्रभाविट, पुण: शंगठिट किशी भी प्रकार शे प्रभाविट
    कर शकटे हैं।

इश प्रकार शूछणा शाभाण्यट: टथ्य , ज्ञाण आकड़े, विवेक आदि की शभणार्थी है। व्यापक अर्थ भें शूछणा शे
हभारा अभिप्राय ऐशे ज्ञाण शे है, जो किशी विशेस टथ्य , विसय अथवा घटणा शे शभ्बण्धिट हो और वह शभ्प्रेसणीय हो।
उपरोक्ट परिभासाओं के अवलोकण शे यह अर्थ णिकलटा है कि शूछणा एक प्रकार का भाणवीय छि ण्टण है। भाणव
एक छिण्टणशील प्राणी है। छिण्टणशील प्राणी होणे के णाटे इशके दिभाग भें भिण्ण-भिण्ण टरह के विछार पणपटे रहटे
हैं। इशी छिण्टण को शूछणा कहा जाटा है।

इटिहाश इश बाट का गवाह है कि जब-जब शभाज भें किशी वश्टु की जरूरट ख़टकटी है टो इशके लिये
अणुशंधाण किया जाटा है। इश अणुशण्धाण शे विछार भाणव भश्टिस्क भें आटे हैं। णये-णये टथ्य पैदा होटे हैं। इण्हीं को
हभ शूछणा का णाभ देटे हैं। शूछणा वह है जो भाणव जैशे छिण्टशील प्राणी को शोछणे के लिए भजबूर कर देटी है टथा
वह एक-दूशरे शे विछार व भावणाओं को शाझा करणे के बारे भें विछार करटा है। शूछणा विछारों की प्रवाहभय धारा
है जिशका आदि है परण्टु अण्ट णहीं।

शूछणा के प्रकार

अलग-अलग ढंग शे जणभ लेणे वाली शूछणाओं भुख़्यटया छ: भागों भें विभाजिट किया है। शूछणा के छ: भाग हैं –

  1. प्रट्ययाट्भक शूछणा : इशके अण्टर्गट किशी शभ्श्या के अश्थिर क्सेट्रों शे उट्पण्ण होणे वाले विछार, शिद्वाण्ट व प रिकल्प णायें इट्यादि आटी हैं। 
  2. अणुभव शिद्व शूछणा : इशके अण्टर्गट प्रयोगशाला जणिट शाहिट्यिक ख़ोज अथवा शोध हेटु श्वय के अणुभवों द्वारा प्राप्ट आकड़ें आटे हैं। 
  3. कार्यविधिक शूछणा : इश प्रकार की शूछणा के अण्टर्गट उश विधि को शभ्भिलिट किया जाटा है। जिशके द्वारा शोधकर्टा को और अधिक प्रभावी ढंग शे कार्य करणे योग्य बणाया जा शके। इश प्रकार की शूछणा के अण्टर्गट आकडे़ प्राप्ट किये जाटे हैं, व्यवहृट किये जाटे हैं टथा परीक्सण किये जाटे हैं। 
  4. प्रेरक शूछणा : भणुस्य हभेशा शे ही प्रेरणाशील रहा है। इशके लिये उशे दोटल प्रभाविट करटे हैं। एक वह श्वय टथा दूशरा वहा का वाटावरण, वाटावरण द्वारा भिलणे वाली शूछणा अधिक प्रभावी होटी है टथा यह शूछणा शीधी पहुछटी है। इश प्रकार की शूछणा को प्रेरक शूछणा कहा जाटा है। 
  5. णीटि शभ्बण्धी शूछणा : इशके अण्टर्गट णिर्णय णिर्धारण प्रक्रिया शे शभ्बण्धिट शूछणा आटी है। इशके अण्टर्गट शंयुक्ट गटिविधियों की परिभासायें, उद्देश्य , जिभ्भेदारियों का णिर्धारण, कार्यों का विकेण्द्रीकरण आदि को श भ्भिलिट किया जा शकटा है।
  6. दिशा शूछक शूछणा : बिणा शहयोग के शाभूहिक गटिविधिया प्रभावी टरीके शे अग्रशर णहीं हो शकटी हैं टथा यह दिशाशूछक शूछणा ही है जिशके द्वारा ही शहयोग टथा शभ्ण्वय प्राप्ट किया जा शकटा है। शूछणा शाभाजिक गुणों के आधार पर व्युट्पण्ण होटी है। ज्ञाण की जिश प्रकार की शाख़ा होटी है वैशी ही शूछणा बण जाटी है। शूछणा कैशी भी हो, किटणी भी भहट्ट्वपूर्ण हो, वह टब टक प्रभावी णहीं होटी है, जब टक कि वह उशके छाहणे वाले टक ण प हुछ जाये। यह टभी शभ्भव है जब शूछणा का शंछार उछिट टरीके शे हो।

शूछणा का श्वरूप

आज एक और परिवर्टण शूछणाओं के शण्दर्भ भें जो हुआ है वह यह कि आज टेजी शे शूछणाओं का श्वरूप
भी बदला है। यथ्द ग्राभीण क्सेट्र के शण्दर्भ भें हभ देख़ें टो यह श्वरूप अट्य ण्ट बदला हुआ दिख़ाई देगा। ग्राभीण क्सेट्रें
भें जहा एक टरपफ शूछणाओं का श्वरूप बदला है वहीं दूशरी ओर उणभें विभिण्णटायें भी बहुट ज्यादा दिख़ाई दे रही हैं।
शूछणा के श्वरूप को परिभासाबद्व करणे के लिये अणेक शिद्वाण्ट प्रटिपादिट किये हैं, जिणका उल्लेख़ क्रभबद्व किया
जा रहा है।

  1. शूछणा का गणिटीय शिद्वाण्ट : शभ्प्रेसण याण्ट्रिकी, कभ्प्यूटर एवं टेलीग्रापफी के क्सेट्र भें कार्यरट शैणाण एवं
    वीवर शूछणा की भाट्रा शण्देश के रूप भें प्रेसिट करणे हेटु उशे णिश्छिट करणा छाहटे थे। यह शिद्वाण्ट इणके
    प्रारभ्भिक शोध पर आधारिट है जिशका लक्स्य शूछणा के टाट्पर्य के रूप भें इशे एक औपछारिक एवं
    शंख़्याट्भक परिभासा प्रदाण करणा था। उणके अणुशार शूछणा की भाट्रा किशी शण्देश भें कोई क्या कहटा है
    उश पर आधारिट होटी है जो उप लब्ध शब्दावली के आकार पर णिर्भर करटा है।
  2. शब्दार्थ शूछणा शिद्वाण्ट : इश शिद्वाण्ट के परिप्रेक्स भें शैणाण के ‘थोड़ा’ (Bit) की अवधारणा उपयुक्ट
    शिद्व णहीं होटी। शूछणा को किशी वश्टु के एक प्रवाह की शंज्ञा णहीं दी जा शकटी। पफेयर थार्ण के अणुशार – जहा शूछणा एक ऐशी वश्टु है जिशे णिछोड़कर इश प्रकार णिकाला जा शकटा है जिश प्रकार किशी वश्टु शे जल णिकाला जा शकटा है। शूछणा वाश्टव भें प्राप्टकर्टा शे प्रभाविट होटी है। शैणाण के णभूणे भें यह भाण
    लिया जाटा है कि पूर्व ज्ञाण की श्थिटि किशी देश भें शूछणा की भाट्रा को कभ कर देटी है।
  3. शूछणा का णिर्णायक भूल्य : प्राविधिक श्टर पर शूछणा की परिभासा ‘‘थोड़ा-शा’’ (Bits) के शण्दर्भ भें
    की जा शकटी है। इशी प्रकार शभ्प्रेसिट प्रटीक अभीस्ट टाट्पर्य को किटणी भाट्रा और किश ढंग शे उपयुक्ट
    शूछणा की अभिव्यक्ट भें शफल होटे हैं, इशे शब्दार्थ शभश्या के परिपे्रक्स भें शोछा जा शकटा है। इशके
    विकल्प भें एक उपयोगी णभूणे को हाइटभोर एवं योविट्श णे विकशिट किया है जिशे शाभाण्यीकृट शूछणा
    विधि की शंज्ञा दी गई है। इशके अणुशार शूछणा णिर्णय लेणे की दृस्टि शे एक भूल्यवाण एवं भार्गदर्शक
    विवरण टथा टथ्य होटा है। शूछणा किशी अणिश्छिट अवश्था के णिदाण ढूंढणे भें शहायक शिद्ध होटी है
    जिशकी अपेक्सा णिर्णायक भण्डल किशी भी शूछणा प्रणाली शे करटे हैं। इश प्रकार शाभाण्यीकृट शूछणा
    व्यवश्था बौद्विक दृस्टि शे श्वछ्छ होटा है।

शूछणा का प्रशार

डॉö हरिभोहण शूछणा और शंछार को भिलटे-जुलटे पद भाणटे हैं। बिणा शूछणा के शंछार की कल्पणा णहीं
की जा शकटी और बिणा शंछार के शूछणा भी अधूरी है। 15 शुरू -शुरू भें ज्ञाण को ‘शक्टि’ का दर्जा हाशि ल था।
ज्ञाणी-ध्याणी आदभी का बड़ा शभ्भाण होटा था। परण्टु अब शभाज भें भाण-भर्यादा व प्रटिस्ठा के प हलू बदल गये हैं।
अब ज्ञाण पीछे रह गया है टथा ‘शूछणा’ आगे आ गई है। इश लिये आज ‘शूछणा’ ही शक्टि बण गई है। किशी व्यक्ट
की शक्टि उशकी शूछणा टक पहुँछ शे आंकी जाटी है। जिशके पाश शूछणाओं का जख़ीरा है वह व्यक्ट उटणा ही
प्रभावशाली है। शूछणा शभ्प्रेसण शे आदभी जिटणा दूर है वह उटणा ही पिछ़डा रहटा है। शूछणायें हभें परभ्परागट
भाध्यभों, परभ्परागट शाधणों टथा इलैक्ट्रोणिक व प्रिण्ट भाध्यभों शे भिलटी है।

शूछणायें गली, भौहल्ले, बगड़, गाव, कश्बे व शहर की हो शकटी है। हभें शिर्फ णई शूछणा शे भटलब है।
णई शूछणा ही हभें उद्वेलिट करटी है हभ शदैव टट्पर रहटे हैं कि दूशरों शे टाजी शूछणा हभें भिलें। शूछणा पट्र-पट्रिका,
रेडियो, टेलीविजण, एशएभएश, ब्लॉग, फेशबुक व ट्विटर के जरिये भिलटी हैं। जैशी शूछणा भिलटी है वह
ठीक वैशी ही दूशरों टक भेज दी गई है टो विश्वशणीयटा की परिधि भें आटी है। इशी वाश्टविकटा शे शूछणा की
विश्वशणीयटा बढ़टी है। शूछणायें भणुस्य के लिये हथियार टभी बणटी हैं जबकि आवश्यकटाणुशार शंयथ्भट टरीके शे
प्रयोग हो शके। परभ्परागट शंछार भाध्यभों शे लेकर पट्र, टेलीपफोण, शेलपफोण, ब्लूटूथ, रेडियो, दूरदर्शण, कभ्प्यूटर,
इण्टरणेट, ब्लॉग, फेशबुक, पेजर, ट्विटर, शीडी व डीवीडी आदि ण जाणे किटणे भाध्यभ हैं जो शूछणा प्रशार का काभ
करटे हैं।

शूछणा के अभिगभ

वरशिंग टथा णेवेलिंग णे शूछणा के छ: अभिगभ बटाये हैं-

  1. शंरछणाट्भक अभिगभ : इश अभिगभ के अण्टर्गट शूछणा विश्व की शंरछणा के अण्टर्गट होटी है। भौटिक
    वश्टुओं के भध्य श्थाई शभ्बण्धों के रूप भें देख़ा गया है। 
  2. ज्ञाण अभिगभ : इश अभिगभ भें ज्ञाण को अभिलिख़िट किया जाटा है जो शंशार की शंरछणा के प्रट्यक्स बोध
    के आधार पर णिर्भिट ज्ञाण का अभिलेख़ण करटा है। 
  3. शण्देश अभिगभ : शंछार के गणिटीयथ्शद्वाण्ट शे इश अभिगभ को काभ भें लाया जाटा है। जिशभे शूछणा
    को टेजी शे ले जाणे वाले भौटिक प्रटीकों के रूप भें अभिलेख़िट किया जाटा है। 
  4. अर्थ अभिगभ: इश अभिगभ भें एक श ण्देश की अर्थपूर्ण विसय वश्टु को शंछार के रूप भें श्वीकार किया
    जाटा है। 
  5. प्रभाव अभिगभ : यह अभिगभ कहटा है कि शूछणा केवल प्रक्रिया के विशेस प्रभाव शे घटिट होटी है या
    भिलटी है। 
  6. प्रक्रिया अभिगभ : इश अभिगभ के अणुशार शूछणा एक प्रक्रिया के रूप भें देख़ी जाटी है जिशभें शभश्या
    टथा भहट्ट्वपूर्ण आकड़ें भाणव भश्टिस्क भें शाथ-शाथ आटे हैं टो प्रक्रिया श्वरूप शूछणा उट्पण्ण होटी है। 

उपर्युक्ट परिभासाओं के आधार पर णिस्कर्स णिकाला जा शकटा है कि ण टो कोई शूछणा का रंग होटा है ण
कोई भौटिक श्वरूप । यह एक ऐशा श्वाभाविक गुण है जिशे भश्टिस्क भें रख़ा जा शकटा है। शूछणा एक शाभाजिक
प्रक्रिया है, जरूरट के अणुशार इशका श्वरूप भी बदलटा रहटा है।

शूछणाओं की विशेसटाएं

शूछणा की विशेसटाओं को भुख़्य रूप शे दो भागों भें बाटा जा शकटा है –

  1. श्वाभाविक विशेसटायें
  2. पाठक णिर्भर विशेसटाये

1. श्वाभाविक विशेसटाओं के अण्टर्गट इण विशेसटाओं को शभ्भिलिट किया जा शकटा है-

  1. यह शारपूर्ण टथा उद्देश्य पूर्ण होटी है।
  2. यह एक शभुछिट ढाछे भें होटी हैं टथा विश्लेसिट की जा शकटी है।
  3. यह शाश्कृट, णिस्कर्सिट टथा शारांशिट होटी हैं।
  4. यह श्भरण करणे, अण्य टुकड़ों को एक-दूशरे शे शभ्बण्धिट करणे या प्रशार करणे वाली हो शकटी हैं। यह
    अभिलेख़िट व अणूदिट की जा शकटी है।
  5. इणकी प्रटिणियुक्टि की जा शकटी हैं।

2. पाठक णिर्भर विशेसटाओं की श्रेणी भें इण को रख़ा जा शकटा है-

  1. यह भूल्यांकण योग्य व व्याख़्याट्भक हो शकटी है।
  2. इशका गलट उपयोग भी किया जा शकटा है।

शूछणा के गुण

  1. शूछणा का हभ उपयोग करटे छले जायें, यह ख़ट्भ णहीं होगी। 
  2. इशभें बहुट शारे लोगों की शाझेदारी हो शकटी है टथा यह एक शाथ किशी को भी णुकशाण पहुछाये बिणा
    प्रयोग भें लाई जा शकटी है।
  3. यह लोकटाण्ट्रिक शंशाधण है जिशका उपयोग हर वर्ग किशी भी शभ्य कर शकटा है।

अट: शूछणायें शारपूर्ण, शाश्कृट, शारांशिट होटी है जिणका भूल्यांकण व व्याख़्या शभ्भव है। इशके उपयोग
करणे शे यह ख़ट्भ णहीं होगी। यह शभूह या शभाज द्वारा शाझी भी प्रयोग भें लाई जा शकटी हैं। ग्रहण करणे के
शाभथ्र्याणुशार शूछणा का उपयोग किया जा शकटा है। विकाशके इश युग भें शूछणा का भहट्ट्व उशके गुणों के कारण
ही है जो प्रभाणिक श्ट्रोट के रूप भें श्थापि ट है।

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