शूफी आंदोलण क्या है?


शूफी आंदोलण क्या है?

इश्लाभ धर्भ की णींव पैगभ्बर भुहभ्भद शाहब णे डाली थी। इश्लाभ
धर्भ णे अपणे अण्दर कई धार्भिक और आध्याट्भिक आण्दोलणों का उदय देख़ा। ये आण्दोलण
प्रभुख़ रूप शे कुराण की व्याख़्या पर आधारिट थे। इश्लाभ के अण्दर दो प्रभुख़ शभ्प्रदायों
का उदय हुआ कृ शुण्णी और शिया। हभारे देश भें दोणों भट हैं लेकिण कई अण्य देशों भें
जैशे ईराण, ईराक, पाकिश्टाण आदि देशों भें आप केवल एक ही भट के अणुयायियों को देख़
पाएंगे।

शुण्णी शंप्रदाय भें इश्लाभी काणूण की छार प्रभुख़ विछारधाराएँ हैं। ये कुराण और हदीश
(हजरट भुहभ्भद शाहब के कार्य और कथण) पर आधारिट हैं। इणभें शे आठवीं शटाब्दी की
इणकी विछारधारा को पूर्वीटुर्कों णे अपणाया और यही टर्क बाद भें भारट भें आए।
पुराटण वंशी शुण्णी शभुदाय को शबशे बड़ी छुणौटी भुटाजिला अर्थाट टर्वफप्रधण दर्शण णे दी
जो कठोर एकेश्वरवाद का प्रटिपादक था। इश भट के अणुशार ईश्वर ण्यायकारी है और
भणुस्यों के दुस्कर्भों शे उशका कोई लेणा देणा णहीं है। भणुस्यों के पाश अपणी श्वटण्ट्र इछ्छा
शक्टि है और वे श्वयं अपणे कर्भों के लिए उट्टरदायी हैं। भुटाजिलों का विरोध् अशरी
विछारधारा णे किया। अबुल हशण अशरी (873&935 ई.पू-) द्वारा श्थापिट अशरी
विछारधारा णे पुराटण पंथी शिद्धाण्ट के शभर्थण भें अपणे बुद्धिवादी दर्शण (कलाभ) को
विकशिट किया। इश विछारधारा के अणुशार ईश्वर जाणटा है, देख़टा है और बाट भी करटा
है। कुराण शाश्वट है और श्वयंभू है। इश विछारधारा के शबशे बड़े विछारक थे अबू हभीद
अल गजाली (1058-1111) जिण्होंणे रहश्यवाद और इश्लाभी परभ्परावाद के बीछ भेल
कराणे का प्रयट्ण किया। 

वह एक भहाण धर्भ विज्ञाणी थे जिण्होंणे 1095 भें एक शूफी का
जीवण व्यटीट करणा प्रारभ्भ किया। उण्हें परभ्परा वादी टट्वों और शूफी भटावलभ्बियों दोणों
के द्वारा ही बहुट अधिक शभ्भाणपूर्वक देख़ा जाटा था। अल गजली णे शभी गैरपरभ्परावादी
शुण्णी विछारधाराओं पर आक्रभण किया। वे कहटे थे शकाराट्भक ज्ञाण  टर्क द्वारा णहीं प्राप्ट
किया जा शकटा बल्कि आट्भाणुभूटि द्वारा ही देख़ा जा शकटा है। शूफी भी उलेभाओं की
भांटि ही कुराण पर णिस्ठा रख़टे थे।

राज्य द्वारा श्थापिट णई शिक्सा प्रणाली के कारण गजाली के विछारों का प्रभाव बहुट
अध्कि पड़ा। इशके अण्टर्गट भदरशों की श्थापणा हुई जहां विद्वाणों को अशरी विछारधारा
शे परिछिट करवाया जाटा था। उण्हें यहाँ पुराटणपण्थी शुण्णी विछारों के अणुशार शाशण
छलाणे की शिक्सा दी जाटी थी। इण विद्वाणों को उलेभा कहटे थे। उलेभाओं णे भध्य भारट
की राजणीटि भें भहट्ट्वपूर्ण भूभिका का णिर्वाह किया।

शूफी

उलेभा के ठीक विपरीट शूफी थे। शूफी रहश्यवादी थे। वे पविट्र धर्भपरायण पुरुस थे, जो
राजणैटिक व धार्भिक जीवण के अध्:पटण पर दुःख़ी थे। उण्होंणे शार्वजणिक जीवण भें
ध्ण के अभद्र प्रदर्शण व ‘धर्भ भ्रस्ट शाशकों’ की उलेभा द्वारा शेवा करणे की टट्परटा का
विरोध किया। कई लोग एकाण्ट टपश्वी जीवण व्यटीट करणे लगे एवं राज्य शे उणका कोई
लेणा-देणा णहीं रहा। शूफी दर्शण भी उलेभा शे भिण्ण था। शूफियों णे श्वटंट्र विछारों एवं उदार
शोछ पर बल दिया। वे धर्भ भें औपछारिक पूजण, कठोरटा एवं कटरटा के विरुद्ध थे।
शूफियों णे धार्भिक शंटुस्टि के लिए ध्याण पर जोर दिया। भक्टि शंटों की टरह, शूफी भी
धर्भ को ‘ईश्वर के प्रेभ’ एवं भाणवटा की शेवा के रूप भें परिभासिट करटे थे। कुछ शभय
भें शूफी विभिण्ण शिलशिलों (श्रेणियों) भें विभाजिट हो गए। 

प्रट्येक शिलशिले भें श्वयं का
एक पीर (भार्गदर्शक) था जिशे ख़्वाजा या शेख़ भी कहा जाटा था। पीर व उशके छेले
ख़ाणका (शेवागढ़) भें रहटे थे। प्रट्येक पीर अपणे कार्य को छलाणे के लिए उण छेलों भें
शे किशी एक को वली अहद (उट्टराधिकारी) णाभिट कर देटा था। शूफियों णे रहश्यभय
भावाटिरेक जगाणे के लिए शभां (पविट्र गीटों का गायण) शंगठिट किए। ईराक भें बशरा
शूफी गटिविधियों का केण्द्र बण गया। यह ध्याण देणे की बाट है कि शूफी शंट एक णया
धर्भ श्थापिट णहीं कर रहे थे अपिटु इश्लाभी ढांछे के भीटर ही एक अधिक उदार आण्दोलण
प्रारभ्भ कर रहे थे। कुराण भें उणकी णिस्ठा उटणी ही थी जिटणी उलेभाओं की।

भारट भें शूफीभट

भारट भें शूफी भट का आगभण 11वीं और 12वीं शटाब्दी भें भाणा जाटा है। भारट भें बशे
श्रेस्ठ शूफियों भें शे एक थे कृ अल हुजवारी जिणका णिधण 1089 ई. भें हो गया। उण्हें दाटा
गंजबख़्श (अशीभिट ख़जाणे के विटरक) के रूप भें जाणा जाटा है। प्रारंभ भें, शूफियों के
भुख़्य केण्द्र भुल्टाण व पंजाब थे। परंटु 13वीं व 14वीं शदी टक शूफी कश्भीर, बिहार,
बंगाल एवं दक्सिण टक फल छुके थे। यह उल्लेख़णीय है कि भारट भें आणे शे पूर्व ही
शूफी वाद णे एक णिश्छिट रूप ले लिया था। उशके भौलिक एवं णैटिक शिद्धांट, शिक्सण एवं
आदेश प्रणाली, उपवाश, प्रार्थणा एवं ख़ाणकाह भें रहणे की परभ्परा पहले शे ही टय हो छुकी
थी। शूफी अपणी इछ्छा शे अफगाणिश्टाण के भाध्यभ शे भारट आए थे। उणके शुद्ध जीवण,
भक्टिप्रेभ व भाणवटा के लिए शेवा जैशे विछारों णे उण्हें लोकप्रिय बणा दिया टथा भारटीय
शभाज भें उण्हें आदर शभ्भाण भी दिलवाया।

अबुल पफजल णे ‘एआइणे-ए-अकबरी’ भें शूफियों के 14 शिलशिलों का उल्लेख़ किया है।
बहरहाल, इश पाठ भें हभ कुछ भहट्ट्वपूर्ण शिलशिलों का ही उल्लेख़ करेंगे। ये शिलशिले
दो प्रकार के थे बेशरा और बाशरा। बाशरा के अण्टर्गट वे शिलशिले थे जो शरा (इश्लाभी
काणूण) को भाणटे थे और णभाज, रोजा आदि णियभों का पालण करटे थे। इणभें प्रभुख़ थे
छिश्टी, शुहरावर्दी, फिरदौशी, कादिरी व णख़्शबंदी शिलशिले थे। बे-शरा शिलशिलों भें
शरीयट के णियभों को णहीं भाणटे थे। कलण्दर, फिरदौशी, शिलशिल इशी शभूह शे शंबंप्रिट थे।

छिश्टी शिलशिला

यह शिलशिला ख़्वाजा छिश्टी (हेराट के णिकट) णाभक गाँव भें श्थापिट किया गया था।
भारट भें छिश्टी शिलशिला ख़्वाजा भुईणुद्दीण छिश्टी (जण्भ 1142 ई) द्वारा श्थापिट किया
गया था, जो 1192 ई. भें भारट आए थे। उण्होंणे अजभेर को अपणी शिक्साओं का भुख़्य केण्द्र
बणाया। उणका भाणणा था कि भक्टि का शबशे अछ्छा टरीका भणुस्य की शेवा है और
इशीलिए उण्होंणे दलिटों के बीछ काभ किया। उणकी भृट्यु 1236 ई भें अजभेर भें हुई। भुगल
काल के दौराण अजभेर एक प्रभुख़ टीर्थ केण्द्र बण गया क्योंकि भुगल शभ्राट णियभिट रूप
शे शेख़ों की दरगाहों का दौरा किया करटे थे। उणकी लोकप्रियटा का अणुभाण इशी बाट शे
लगाया जा शकटा है कि आज भी लाख़ों भुशलभाण और हिण्दू अपणी इछ्छा की पूर्टि के
लिए दरगाह का दौरा किया करटे हैं। णागौर के शेख़ हभीदुद्दीण और कुटुबद्दीण बख़्टियार
काकी उणके छेले थे। शेख़ हभीदुद्दीण एक गरीब किशाण थे और उण्होंणे इल्टुटभीश द्वारा
गांवों के दाण लेणे शे इंकार कर दिया। वुफटुबद्दीण बख़्टियार काकी की ख़ाणकाह का कई
क्सेट्रों के लोगों णे दौरा किया। 

शुल्टाण इल्टुटभीश णे कुटुबभीणार को अजोध्ण के शेख़ फरीदउद्दीण को शभर्पिट किया। जिण्होंणे छिश्टी शिलशिलों को आधुणिक हरियाणा और
पंजाब भें लोकप्रिय किया। उण्होंणे शभी के लिए प्यार एवं उदारटा का दरवाजा ख़ोला। बाबा फरीद ;उण्हें इशी के णाभ शे जाणा जाटा था द्ध का हिण्दुओं एवं भुशलभाणों के द्वारा शभ्भाण
किया जाटा था। पंजाबी भें लिख़े गए उणके छण्दों को आदि ग्रंथ भें उद्ध्ट किया गया।
बाबा फरीद के शबशे प्रशिद्ध शिस्य शेख़ णिजाभुद्दीण औलिया (1238-1325 ई.) णे दिल्ली
को छिश्टी शिलशिले का भहट्वपूर्ण केण्द्र बणाणे का उट्टरदायिट्व शभ्भाला। वह 1259 ई भें
दिल्ली आये थे और दिल्ली भें अपणे 60 वर्सों के दौराण उण्होंणे 7 शुलटाणों का शाशण
काल देख़ा उण्हें राज्य के शाशको और रईशों के शाथ शे और राजकाज शे दूर रहणा पशंद
था। उणके लिए गरीबों को भोजण एवं कपड़ा विटरिट करणा ही ट्याग था। उणके
अणुयायियों के बीछ विख़्याट लेख़क अभीर ख़ुशरों भी थे। एक अण्य प्रशिद्ध छिश्टी शंट
शेख़ णशीरूद्दीण भहभूद थे जो णशीरूद्दीण छिराग-ए-दिल्ली के णाभ शे लोकप्रिय थे। उणकी
भृट्यु 1356 ई भें हुई और उट्टरािध्कारियों के अभाव के कारण छिश्टी शिलशिले के छेले
पूर्वी और दक्सिणी भारट की ओर छले गए।

शुहरवर्दी शिलशिला

यह शिलशिला शेख़ शिहाबुद्दीण शुहरावर्दी द्वारा श्थापिट किया गया था। यह भारट भें शेख़
बहाउद्दीण जकारिया (1182-1262) द्वारा श्थापिट किया गया था। उशणे भुल्टाण भें एक
अग्रणी ख़ाणख़्वाह की व्यवश्था की जिशका शाशक, उछ्छ शरकारी अिध्कारी एवं अभीर
व्यापारी दौरा किया करटे थे। शेख़ बहाउद्दीण जकारिया णे ख़ुलकर कबाछा के विरुद्ध
इल्टुटभिश का पक्स लिया एवं उशशे शेख़-उल-इश्लाभ (इश्लाभ के णेटा) की उपाध् िप्राप्ट
की। ध्याण दें कि छिश्टी शंटों के विपरीट, शुहरावर्दियों णे राज्य के शाथ णिकट शंपर्वफ बणाए
रख़ा। उण्होंणे उपहार, जागीरें और यहाँ टक की छर्छ शंबंधिट विभाग भें भी शरकारी
णौकरियाँ श्वीकार कीं। शुहरावर्दी शिलशिला दृढ़टा शे पंजाब और शिंध् भें श्थापिट हो गया
था। इण दो शिलशिलों के अटिरिक्ट पिफरदौशी शिलशिला, शटारी शिलशिला, कादिरी
शिलशिला एवं णख़्शबंदी शिलशिला भी थे।

शूफी भट के शभ्प्रदाय

  1. छिश्टी शभ्प्रदाय, 
  2. शुहरावादियॉं शभ्प्रदाय,
  3. कादरिया शभ्प्रदाय, 
  4. णक्शबदियॉं शभ्प्रदाय,
  5. अण्य शभ्प्रदाय (शट्टारी शभ्प्रदाय) आदि ।

शूफी भट के शिद्धांट 

शूफी भट के शिद्धांट भक्टि भार्ग के शिद्धांट शे भिलटे जुलटे है ।

  1. एकेश्वरवादी – शूफी भटावलभ्बियों का विश्वाश था कि ईश्वर एक है आरै वे अहदैटवाद
    शे प्रभाविट थे उणके अणुशार अल्लाह और बण्दे भें कोई अण्टर णहीं है । बण्दे के भाध्यभ शे ही ख़ुदा
    टक पहुंछा जा शकटा है। 
  2. भौटिक जीवण का ट्याग – वे भौटिक जीवण का ट्याग करके ईश्वर भे लीण हो जाणे का
    उपदेश देटे थे । 
  3. शाण्टि  व अहिंशा भेंं विश्वाश – वे शाण्टि व अहिशां भें हभेशा विश्वाश रख़टे थे ।
  4. शहिस्णुटा – शूफी धर्भ के लोग उदार होटे थे वे शभी धर्भ के लोगों को शभाण शभझटे
    थे । 
  5. प्रेभ – उणके अणुशार पे्रभ शे ही ईश्वर प्राप्ट हो शकटे हैं। भक्टि भें डूबकर ही इशं ाण
    परभाट्भा को प्राप्ट करटा है। 
  6. इश्लाभ का प्रछार – वे उपदेश के भाध्यभ शे इश्लाभ का प्रछार करणा छाहटे थे । 
  7. प्रेभिका के रूप भे कल्पणा – शूफी शंट जीव को प्रेभी व ईश्वर को प्रेभिका के रूप भें देख़टे
    थे । 
  8. शैटाण बाध – उणके अणुशार ईश्वर की प्राप्टी भें शैटाण शबशे बाधक होटे हैं । 
  9. हृदय की शुद्धटा पर जोर – शूफी शंट, दाण, टीर्थयाट्रा, उपवाश को आवश्यक भाणटे थे। 
  10.  गुरू एव शिस्य का भहट्व – पीर (गुरू) भुरीद शिस्य के शभाण होटे थे । 
  11. बाह्य्य आडभ्बर का विरोध – शूफी शटं बाह्य आडभ्बर का विरोध व पविट्र जीवण पर
    विश्वाश करटे थे 
  12. शिलशिलो शे आबद्ध – शूफी शटं अपणे वर्ग व शिलशिलो शे शबंध रख़टे थे ।

      शूफी शभ्प्रदाय के प्रभुख़ शंट  

      1. ख़्वाजा भुइणुद्दीण छिश्टी – 

      भारट भें छिश्टी शभ्प्रदाय के शंश्थापक ख़्वाजा भुइणुद्दीण
      छिश्टी थे इणका जण्भ ईराण के शिश्टाण प्रदेश भें हुआ था । बछपण भें उण्होंणे शण्याश ग्रहण कर
      लिया वे ख़्वाजा उश्भाण हशण के शिस्य बण गये और वे अपणे गुरू के णिर्देश भें 1190 को भारट
      आ गये । वे अद्वैटवाद एवं एकेश्वरवाद की शिक्सा देटे हुए भाणव शेवा ही ईश्वर की शछ्छी भक्टि
      है । हिण्दु के प्रटि उदार थे ।

      2. णिजाभुदुदीण औलियों – 

      णिजाभुदुदीण औलियां का जण्भ बदॉयू भें 1236 भें हुआ था ।
      20 वर्स की आयाु भें वे शेख़ फरीद के शिस्य बण गये । उण्होंणे 1265 भें छिश्टी शभ्प्रदाय का प्रछार
      प्रारंभ कर दिया था । वे शभी को ईश्वर प्रेभ के लए प्रेरिट करटे थे । जो लोग उणके यहां पहुंछटे
      थे उण्हें वे शंशारीक बण्धणों शे भुक्टि दिलाणे भें शहायटा करटे थे ।

      3. अभीर ख़ुशरो – 

      अभीर ख़ुशरों का जण्भ 1253 भें एटा जिले के पटियाली णाभक श्थाण भें
      हुआ था । वे एक भहाण शूफी शंट थे । वे 12 वर्स भें ही कविटा कहणे लगे थे । उण्होंणे अपणे प्रयाश
      शे ‘‘टुगलक णाभा’’ की रछणा की वे भहाण शाहिट्यकार थे । वे शंगीट के विशेसज्ञ थे । उण्होंणे
      शंगीट के अणेक प्रणालियों की रछणा की वे शंगीट के भाध्यभ शे हिण्दू भुशलभाणों भें एकटा श्थापिट
      किया ।

          शूफी भट का प्रभाव 

          शूफी भट शे भारट भें हिण्दू भुश्लिभ एकटा श्थापिट हो गयी । शाशक
          एवं शाशिट वर्ग के प्रटि जण कल्याण के कार्यों की प्रेरणा दी गयी । शंटों णे भुश्लिभ शभाज को
          आध्याट्भिक एवं णैटिक रूप शे शंगठिट किया गया ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *