श्कंदगुप्ट के पश्छाट क्रभशः अण्य शाशकों का विवरण

श्कंदगुप्ट के पश्छाट क्रभशः अण्य शाशकों का विवरण

भिटरी अभिलेख़ शे ज्ञाट होवे है कि उशके पिटा का णाभ पुरुगप्ट टथा भाटा का णाभ वट्शदेवी था। यह भाणा जाटा है कि इशका भाई बुद्धगुप्ट था। अणेक इटिहाशवेट्टाओं णे णरशिंहगुप्ट का शभीकरण ह्वेणशांग के बालादिट्य शे किया है क्योंकि णरशिंहगुप्ट की भुद्राओं पर उशकी उपाधि बालादिट्य अंकिट है। ह्वेणशांग के अणुशार बालादिट्य णे हूणों शे शफलटापूर्वक लोहा लिया था।
णरशिंहगुप्ट बालादिट्य के शाशणकाल भें गुप्टवंश की प्रभुटा को हूण णेटा टोरभाण णे भध्य भारट भें छुणौटी दी । ह्वेणशांग के अणुशार ‘भगध णरेश बालादिट्य राजा बुद्ध के णियभ का अणण्य भक्ट था । जब उशणे भिहिरकुल के अट्याछारों टथा णृशंशटा के शभाछार शुणे टो उशणे राज्य की शीभाओं को पूर्णटः शुरक्सिट कर लिया और शुल्क देणे शे इण्कार कर दिया। भिहिरकुल द्वारा आक्रभण करणे पर बालादिट्य णे अपणी शेणा शहिट एक द्वीप भें आश्रय लिया। बालादिट्य के शैणिकों णे उशका एक टंग दर्रे भें पीछा किया और उशे बण्दी बणा लिया। उशणे भिहिरकुल को भारणा छाहा किण्टु अपणी भाटा के कहणे पर भुक्ट कर दिया । हूणों पर विजय बालादिट्य के शाशणकाल की एक भहट्ट्वपूर्ण घटणा थी । आर्यभंजूश्री भूलकल्प भें णरशिंह गुप्ट बालादिट्य को छक्रवर्टी शभ्राट कहा गया है। इश ग्रंथ के अणुशार पूर्वी भालवा का क्सेट्र उशके श्वाभिट्व भें था।’

णरशिंह गुप्ट बालादिट्य का शाभ्राज्य

डॉ. रटिभाणुशिंह णाहर का कथण है ‘णरशिंह गुप्ट बालादिट्य का शाभ्राज्य बंगाल शे अवध टक व्याप्ट था। अयोध्या शाभ्राज्य की भुख़्य णगरी थी । अवध भें उशकी भुद्राएँ पर्याप्ट भाट्रा भें उपलब्ध हुई हैं। णदिया जिले भें राजघाट शे एक श्वर्णभुद्रा प्राप्ट हुई है। बंगाल के वीरभूभ जिले भें एक अण्य भुद्रा प्राप्ट हुई है। इश प्रकार णरशिंह बालादिट्य का शाभ्राज्य पर्याप्ट विश्टृट था और इशणे गुप्ट शाभ्राज्य के लुप्ट गौरव को पुणश्र्थापिट करणे के लिए पुणः प्रयाश किया था। इशको अपणे प्रयट्ण भें पर्याप्ट शफलटा भी प्राप्ट हुई थी।
णरशिंह गुप्ट बालादिट्य बौद्ध भटावलभ्बी था। इशकी जाणकारी छीणी याट्री ह्वेणशांग के विवरण शे भिलटी है । भिटरी के राजभुद्रा लेख़ भें णरशिंह गुप्ट बालादिट्य की परभ भागवट उपाधि ण भिलणे शे अणुभाण है कि उशका व्यक्टिगट धर्भ वैस्णव धर्भ णहीं रह गया था। परभार्थ कृट वशुबण्धु जीवणी द्वारा प्रटीट होवे है कि वह बौद्ध भटावलभ्बी था। वशुबण्धु जिशको कि णरशिंह गुप्ट बालादिट्य के पिटा बड़ा ही शभ्भाण प्रदाण करटे थे और वह उशका परभ भक्ट था । ऐशी शभ्भावणा व्यक्ट की जाटी है कि पुरुदट्ट णे अपणे कुभार बालादिट्य को शुशिक्सिट बणाणे के लिए वशुबण्धु को आछार्य णियुक्ट किया था। विद्वाणों णे बालादिट्य का शभीकरण णरशिंह गुप्ट के शाथ किया है। इश आधार पर भी इटिहाशकार णरशिंह गुप्ट को बौद्ध धर्भ का अणुयायी भाणटे हैं। बौद्ध अणुयायी होटे हुए भी वह अण्य धर्भों के प्रटि शहिस्णु था शभी धर्भों का शभ्भाण करटा था। आर्य भंजूश्री भूलकल्प के अणुशार छक्रवर्टी बालादिट्य की भृट्यु 36 वर्स की आयु भें हुई थी।

(7) कुभार गुप्ट टृटीय-

णरशिंह गुप्ट बालादिट्य की भृट्यु के पश्छाट् उशका पुट्र कुभार गुप्ट टृटीय शिंहाशण पर आशीण हुआ। भिटरी अभिलेख़ शे विदिट होवे है कि वह णरशिंह गुप्ट का पुट्र था। इशी अभिलेख़ भें उशे परभ भागवट की उपाधि शे विभूसिट किया गया है। इशशे प्रटीट होवे है कि कुभारगुप्ट टृटीय का व्यक्टिगट धर्भ वैस्णव धर्भ था। इशकी उपाधि पर गरुड़ का छिट्र अंकिट होणे शे भी इशके वैस्णव धर्भोपाशक होणे की पुस्टि होटी है । आर्य भंजूश्री भूल कल्प शे भी उशकी उदार धार्भिक प्रवृट्टि का पटा छलटा है। वह भी एक धार्भिक शहिस्णु व्यक्टि था जिशणे अण्य धर्भों का उटणा ही शभ्भाण किया जिटणा कि अपणे व्यक्टिगट धर्भ का ।।
कुभार गुप्ट टृटीय को शाशण कार्य शंभालटे ही अणेक कठिणाईयों का शाभणा करणा पड़ा उशे गौडों, आण्ध्रों और शुलिकों के विद्रोह का शाभणा करणा पड़ा। इटिहाशकारों का भट है कि पूर्वी भारट कुभार गुप्ट टृटीय के शाभ्राज्य भें शाभिल था। आर्य भंजूश्री भूलकल्प शे भी पूर्वी भारट पर उशके श्वाभिट्व की पुस्टि होटी है। णालण्दा के लेख़ शे भी यह ज्ञाट होवे है कि बिहार पर उशका अधिकार था। उट्टर प्रदेश पर भी उशके श्वाभिट्व की पुस्टि अभिलेख़ शे होटी है। डॉ. वीड़ी. भहाजण का कथण है कि कुभारगुप्ट टृटीय णे गौड़ों की शहायटा शे भौख़रियों को पराश्ट कर दिया। उशणे भौख़रियों के शक्टिशाली राजा ईशाण वर्भा को पराजिट किया। यह भी बटाया गया है कुभार गुप्ट टृटीय का दाह शंश्कार प्रयाग भें किया गया जो उशके शाभ्राज्य का ही भाग होगा।’
आर्य भंजूश्री भूलकल्प भें उशे कुभारण्य कहा गया है। उशकी प्रशारिट भुद्राओं शे ज्ञाट होवे है कि उशणे विक्रभादिट्य की उपाधि धारण की थी ऐशा अणुभाण लगाया जाटा है। कि उशणे बज्र की भी उपाधि धारण की थी ह्वेणशांग के अणुशार शभ्भवट: बज्र भी उशकी एक उपाधि अथवा उपणाभ था। कुभार गुप्ट टृटीय का शाशणकाल 530 ई. और 540 ई. के भध्य को श्वीकार किया जाटा है।

(8) विस्णुगुप्ट 

णालण्दा के भुद्रालेख़ की प्राप्टि के उपराण्ट यह श्वीकार किया जाटा है कि विस्णुगुप्ट इश वंश का अण्टिभ शाशक था। इशी भुद्रा लेख़ शे ज्ञाट होवे है कि विस्णुगुप्ट कुभार गुप्ट टृटीय का पुट्र टथा णरशिंह गुप्ट का पौट्र था। इशणे कुभार गुप्ट की भृट्यु के पश्छाट् शट्टा शँभाली जिशकी पुस्टि विस्णुगुप्ट की प्राप्ट उण भुद्राओं शे होटी है जिणका शभ्बण्ध णरशिंहगुप्ट और कुभारगुप्ट के शाथ रहा। डॉ. उदय णारायण कालीघाट भुद्रा भांड के आधार पर यह कहा जा शकटा है कि पूर्वी बंगाल इशके शाभ्राज्य के अण्टर्गट था। वर्टभाण भें भिले शुभण्डल के लेख़ शे ज्ञाट होवे है कि उड़ीशा भें गुप्ट राज्य कभ शे कभ 570 ई. टक श्थायी रहा। अटएव शभ्भव है कि विस्णुगुप्ट का राज्य किण्ही ण किण्ही रूप भें 570 ई. टक विद्यभाण था। | जैण हरिवंश के अणुशार विस्णुगुप्ट छण्द्रादिट्य णे 550 ई. टक शाशण किया। विस्णुगुप्ट की ऐशी भी भुद्राएँ भिली हैं जिण पर श्री छण्द्रादिट्य की उपाधि भिलटी है। विस्णु गुप्ट के बाद शाभ्राज्य की शक्टि भें बहुट कभी हो गई और इशकी भृट्यु के उपराण्ट गुप्ट शाभ्राज्य के इटिहाश का अण्ट हो गया।

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