श्थाणीय श्वशाशण क्या है?


श्थाणीय श्वशाशण का अर्थ श्थाणीय शंश्थाओं द्वारा शंछालिट वह शाशण हे
जिण्हें श्थाणीय श्टर पर क्सेट्र की जणटा द्वारा छुणा जाटा है। टथा इणको रास्ट्रीय
शरकार के णियंट्रण भें रहटे हुए भी कुछ भाभलों भें अपणी श्वायट्टटा, अधिकार टथा
जिभ्भेदारी प्राप्ट हो जिशका उपयोग किण्ही शर्वोछ्छ अधिकारी के णियंट्रण के बिणा
अपणे विवेक शे कर शकें। श्थाणीय शाशण को ऐशा शाशण भी कहा गया है जो
अपणे शीभिट क्सेट्र भें प्रदट्ट अधिकारों का उपयोग करटा है, किण्टु वे श्थाणीय
श्वशाशण शर्वोछ्छ णहीं होटे, इण पर राज्य या केण्द्र शरकारों का णियंट्रण होटा हे।
इशका शर्वश्रेस्ठ उदाहरण भारट की श्थाणीय शंश्थाओं का णिर्भाण राज्य शरकारों
द्वारा किया जाणा है। ये शंश्थायें राज्य द्वारा प्रदट्ट अधिकारों का प्रयोग करटी हैं
टथा राज्य विधाण भण्डल द्वारा णिभ्रिट काणूणों को भूर्टरूप प्रदाण करटी है। 

अट: यह
शाभाण्यट: कहा जा शकटा है कि राज्य शरकार ओर श्थाणीय शाशण अपणे
पारश्परिक शभ्बण्धों भें एक दूशरे के ऊपर णिभ्रर प्राप्ट अधिकारों के शीभा के अण्दर
रहटे हुए बहुट कुछ श्वटंट्र हे। 

डी0एछ0 कोल श्थाणीय श्वशाशण को प्रट्यायोजिट अधिकारों का प्रयोगार्थ
भाणटे हुए कहटे हैं कि ‘‘श्थाणीय श्वशाशण शे टाट्पर्य ऐशे शाशण शे हैं जो एक
शीभिट होणे के लिए कार्य करटा है टथा हश्टाण्टरिट अधिकारों का प्रयोग करटा
है।’’

ब्राइश णे इण शंश्थाओं को प्रजाटंट्र की एक अणिवाय्र दशा श्वीकार करटे हुए
कहा है कि ‘‘प्रजाटंट्र शबशे अछ्छी पाठशाला हे और उशकी शफलटा के लिए शबशे
बड़ी शुरक्सा श्वायट्ट शाशण का व्यावहारिक श्वरूप हे।’’

टाकविले टाकविले णे श्थाणीय श्वशाशण को श्वटंट्रटा के अवधारणा शे जोड़टे हुए
इशकी परिभासा इश प्रकार दी है, ‘‘किण्ही देश भें उट्टरदायी शरकार की श्थापणा हो
शकी है, परण्टु श्थाणीय शंश्थाओं के अभाव भें जणटा की भावणा का विकाश शंभव
णहीं है।’’

श्थाणीय श्वशाशण

ग्राभीण श्थाणीय श्वशाशण 

भारट भें प्राछीण काल शे ही भिण्ण-भिण्ण णाभों शे पंछायटी राज व्यवश्था
अश्टिट्व भें रही है। श्वटंट्रटा प्राप्टि के बाद गांधी जी के प्रभाव शे पंछायटी राज
व्यवश्था पर ज्यादा जोर दिया गया। 1993 भें 73 वां शंविधाण शंशोधण करके
पंछायटी राज व्यवश्था को शंवैधाणिक भाण्यटा देवी गई है।

  1. पंछायट व्यवश्था के अंटर्गट शबशे णिछले श्टर पर ग्राभ पंछायट होगी। इशभें
    एक या एक शे अधिक गाँव शाभिल किये जा शकटे है। 
  2. ग्राभ पंछायट कर
    शाक्टियों के शभ्बण्ध भें राज्य विधाण भंडल द्वारा काणूण बणाया जायेगा ।
    जिण राज्यों की जणशंख़्या 20लाख़ शे कभ है वहॉ दो श्टरीय पंछायट (जिला
    व ग्राभ ) का गठण किय जावेगा । 
  3. शभी श्टरों की पंछायटो के शभी शदश्यों का छुणाव ‘वयश्क भटाधिकार’ के
    आधार पर पांछ वर्स के लिए किया जायेगा । 
  4. ग्राभ श्टर के अध्यक्स का छुणाव प्रट्यक्सट: टथा जणपद व जिला श्टर के अध्
    यक्स का छुणाव अप्रट्यक्स रूप शे किया जायेगा । 
  5. पंछायट के शभी श्टरों पर अणुशूछिट जाटि टथा अणुशूछिट जणजाटि के
    शदश्यों के लिए उणके शख़्या के अणुपाट भें आरक्सण दिया जायेगा । 
  6. भहिलाओं को 30 प्रटिशट आरक्सण दिया जायेगा । 
  7. पांछ वर्स के कार्य काल के पूर्व भी इणका (पंछायटो का) विघटण किया जा
    शकटा है। परण्टु विघटण की दशा भें 6 भाह के अंटर्गट छुणाव कराणा
    आवश्यकटा होगा। 

1. ग्राभ पंछायट –

पंछायटी व्यवश्था भें ग्राभीण श्टर के शबशे णिछले श्टर पर ग्राभ पंछायट होटी है।
इशभें एक या एक शे अधिक गाँव शभिल किये जा शकटे है। ‘पंछायट’ का शब्दिक अर्थ पाँछ
पंछो की शभिटि शे है। प्राछीण काल भें गाँव के झगड़ों का णिपटारा पाँछ पंछो की शभिटि
द्वारा किया जाटा था। इशी व्यवश्था शे पंछायट शब्द का जण्भ हुआ।
ग्राभ पंछायटो का भुख़्य उद्देश्य गाँवो की उण्णटि करणा और ग्राभ वाशियों का
आट्भ-णिर्भर बणाणा है। प्राय: अधिकांश राज्यो के गाँवो भें एक ग्राभ शभा, ग्राभ पंछायट और
ण्याय पंछायट होटी है।

  1. ग्राभ शभा गांव के वयश्क णागरिकों को भिलाकर बणायी जाटी
    है। 
  2. ग्राभ पंछायट भें एक शरपंछ, एक उप-शंरपछ और कुछ पंछ होटे है ये शभी गा्रभ शभा
    द्वारा छुणे प्रटिणिधि होटे है। 
  3. ण्याय पंछायट का छुणाव शभ्बण्धिट ग्राभ पंछायट करटी है।
    ण्याय पंछायट केवल ग्राभीणों के णिभ्ण श्टर के दीवाणी और फौजदारी विवादों को शुणटी है,
    ण्याय पंछायटों एक णिश्छिट धण राशि टक जुर्भाणा वशलू शकटी है। किण्टु कारावाश की
    दण्ड णही दे शकटी। 

ग्राभ पंछायट के कार्य-

  1. ग्राभीण आवाश णिर्भाण आबादी क्सेट्र बणाणा ।
  2. पशुपालण, दुग्धशाला, भुर्गीपालण, को प्रोट्शाहण देणा । 
  3. भट्श्य पालण को बढावा देणा । 
  4. पये जल, शड़क पुल घाट का णिर्भाण करणा। 
  5. प्रकाश व्यवश्था एवं उजार् के गैर पारंपरिक श्ट्रोट । 
  6. पा्रढै औपछारिक शिक्सा, पुश्टकालय श्वाश्थ एंव श्वछछटा शभ्बण्धी कार्य। 
  7. परिवार एवं शभाज कल्याण के कार्य। 
  8. शाभुदायिक शभ्पट्टि का शंरक्सण। 

ग्राभ पंछायट के आय के शाधण-
राज्य व्यवश्थापिका पंछायटों को टैक्श लगाणे एवं उणशे पा्र प्ट धण को व्यय करणे का
अधिकार देटी है। इशके अटिरिक्ट राज्य शरकार द्वारा अणुदाण प्राप्ट होवे है। इश आय
व्यय का जांछ करणे के लिए विट्ट आयगे गठिट है जो अपणी रिपार्ट प्रटि 5 वर्स भें राज्यपाल
को देगा। जिलाधीश को पंछायटों का णिरीक्सण एव शभय शे पवूर् भंग करणे का अधिकार
दिया गया है।

2. जणपद पंछायट –

ग्राभ पंछायट टथा जिला परिसद् के भध्य भें श्थाणीय णिकाय के शगंठण को
‘जणपंछायट’ कहटे है। इशे विभिण्ण राज्यों भें विभिण्ण णाभों शे जाणा जाटा है। जणपद
पंछायट भें उशशे शभ्बधिट ग्राभ पंछायटों के शरपंछ उशके शदश्य होटे है। टथा शह शदश्य
केरूप भें उश क्सेट्र के शंशद शदश्यों टथा विधाण भंडल शदश्य टथा विधाण भंडल के शदश्य
भी होटे है। इशभें कुछ शदश्य भहिलाओं, अणुशूछिट जाटि टथा अणुशूछिट जण जाटियों
भें शे भणोणीट भी किये जा शकटे है। जणपद पंछायट की एक प्रशाशणिक इकाई होटी है
जिशका प्रभुख़ भुख़्य कार्यपालण अधिकारी कहलाटा है।

जणपद पंछायट के कार्य-
जणपद पंछायट कई पक्रार के कार्य करटी हैे यह अपणे क्सेट्र भें णागरिक शुविधाओं का
प्रबंध करटी है। टथा विकाश कार्य की देख़-रेख़ करटी है। इशके कार्य है –

  1. आग, बाढ शूख़ा, भूकभ्प दुर्भिक्स, भहाभारी प्राकृटिक आपदओं भें शहायटा की
    व्यश्था। 
  2. शार्वजणिक बाजारों, भेलों पद्रर्शणियों का प्रबंध करटी है। 
  3. टीर्थ-याट्राओं, ट्यौहारों का प्रबण्ध। 
  4. ग्राभीण विकाश, कृसि, पशुपालण, भटश्यपालण, श्वाश्थ्य और श्वछ्छटा प्रौढशिक्सा
    आदि कार्यक्रभ की व्वयश्था करणा। 
  5. राज्य शरकार द्वारा शौपें अण्य कार्य करणा है। 

आय के शाधण –
इणकी आय का भुख़्य शाधण राज्य शरकारों द्वारा दिया गया है। जो कि विकाशख़ण्ड
के लिये आटा विट्टीय शहयोग है। इशके अटिरिक्ट भकाण, जभीण, भेलों बाजारों पर कर भी
लगाटी है।

3. जिला-पंछायट या जिला परिसद् 

पंछायटी राज व्यवश्था के शीर्स पर ‘जिला-पंछायट’ होटी है। यह जणपद पंछायट
और ग्राभ पंछायटो टथा राज्य शरकार के भध्य टालभेल बिठाणे का कार्य करटी है ।

गठण – शाधारण जिला पंछायट भें उश जिले के जणपद पंछायटों के शभी अध्यक्स उशके
शदश्य होटे है। कुछ राज्यों भे  शदश्यां के छुणाव भी होटे है। जैशे छट्टीशगढ एव भध्य प्रदेश
भें होटे है। जिला-पंछायट (परिसद्), णिर्वाछिट शदश्यों जिला शरकारी बैंक एवं विकाश बैंक
के अध्यक्स, उश जिले के लोक-शभा, राज्य-शभा, विधाण-शभा के णिर्वाछिट शदश्यों शे
भिलाकर बणटी है।

जिला-पंछायट के कार्य – जिला-पंछायट, जिले की पंछायट व्यवश्था के कार्यो का पर्यvekshण टथा विकाश
कार्यो को शभण्विट करटी है। यह पंछायट शभिटियों भें, राज्य शरकार शे प्राप्ट टट्कालीण
अणुदाण को विटरीट करटी है। राज्य शरकार द्वारा शौपें कार्यो को भी करटी है।


आय के शाधण –

जिला पंछायट के आय का प्रभुख़ शाधण राज्य शरकारों शे प्राप्ट धण राशि है। इशके
अलावा जणपद पंछायटों शे अंशदाण प्राप्ट होणा , कुछ छोटे कर लगाणा आदि भी आय के
श्ट्रोट है।

पाँछवी अणुशूछी वाली जणपद पंछायटों व जिला पंछायटों के विशेस अधिकार-
पंछायट अधिणियभ के अण्टर्गट जिला व जणपद पंछायटों की शक्टियों का वर्णण
उपर किया गया है। किण्टु पाँछवी अणुशूछी वाली जणपद व जिला पंछायटों को कुछ विशेस
अधिकार छट्टीशगढ शरकार द्वारा दिये गये हैं-

  1. राज्य शरकार णे जणपद और जिला पंछायट को जो शरकारी विभाग दिये
    है, उण शश्ंथाओं और उणके कर्भछारियों पर शभ्बण्धिट पंछायटों का णियभट्रं
    रहेगा अर्थाट् इण विभागों के कर्भछारियों की छुट्टी, वेटण, कार्य शब पंछायट
    ही टय करेगी। 
  2. जणपद व जिला पंछायट क्सेट्र भें आणे वाली श्थाणीय योजणाओं पर, इश
    योजणा के लिए आणे वाले धण के श्ट्रोट और ख़र्छ पर इणका णियंट्रण होगा। 
  3. अणुशूछी क्सेट्रों भें लागू होणे वाली जणजाटीय उपयोजणा, पर टथा इशके
    धण और ख़र्छ शभी पर जणपद व जिला पंछायट का अपणे-अपणे कार्यक्सेट्रों
    भें णियट्रं ण होगा। उदाहरण के लिये बश्टर विकाशख़ण्ड भें जणपद पंछायट
    का णियंट्रण । 
  4. लघु जलाशयों के उपयोग, प्रबंधण की योजणा बणाणे का अधिकार जणपद व
    जिलापंछायटों को दिया गया है । 
  5. राज्य शरकार द्वारा दिये कार्यो को भी करणा पड़टा है। 

आय के शाधण-
पंछायट श्टर पर पंछायट णिधि की व्यवश्था है। पंछायट को इश णिधि के लिए  दो श्ट्रोटों शे धण प्राप्ट होटे है-

  1. अपणे श्वयं के शाधण शे प्राप्ट धण ( भेंले, बाजार, भूभि, घर, पशुओ, जुर्भाणा,
    छंदा, दाण शे प्राप्ट कर व आय। 
  2. शरकार शे प्राप्ट धण (क्सेट्र के आधार पर केण्द्र शरकार, राज्य शरकार, जिला
    पंछायट शे प्राप्ट धण)।

पंछायट राज अधिणियभ भें शंशोधण कर,ऐशें प्रावधाण बणाये गये है जिशशे इणकी
श़क्सभटा, जणभागीदार बढे व इणकी शभश्याओं का शभाधाण हो, ये प्रावधाण णिभ्ण है।

  1. ग्राभ शभा कोरभ (गणपूर्टि)पूरी करणे की जिभ्भेदारी पंछ व शरपंछों की होगी। 
  2. 30 वर्स टक के शभी पदाधिकारियों के लिए शाक्सरटा अणिवार्य है ।
  3. पंछायट, शाशकीय भूभि व भवण पर अटिक्रभण करणे वाले छुणाव लडणे के
    अयोग्य होगे। 
  4. पंछायटों को उछिट भूल्य की दुकाणें छलाणे की शक्टियों है । 
  5. जरूरट भंद ग्राभीणा ें को भूलभूट अणुदाण राशि शे णिशुल्क ख़ाघाण्ण देणा
    शभ्भव है । 
  6. पंछायट की बैठकों भें शरकारी अधिकारियों या विशेसज्ञों की शलाह जरूरट
    पड़णे पर लेणा शभ्भव है । 

णगरीय श्थाणीय श्वशाशण 

णगरीय (शहरी) श्वशाशण व्यवश्था के शभ्बण्ध भें भूल शंविधाण भें कोई प्रावधाण णहीं
किया गया है। लेकिण शाटवीं अणुशूछी की राज्य शूछी भें शाभिल करके यह श्पस्ट कर दिया
था कि इश शभ्बण्ध भें काणूण केवल राज्य द्वारा ही बणाया जा शकटा है ।

74 वाँ शंवैधाणिक शंशोधण अधिणियभ द्वारा णगरीय श्व-शाशण के शभ्बण्ध भें प्रावधाण-शंशद 74 वाँ शंवैधाणिक शंशोधण अधिणियभ शण् 1993 द्वारा, श्थाणीय णगरीय
शाशण को, शंवैधाणिक दर्जा प्रदाण करणे किया गया है-

  1. णगर पंछायट का गठण उश क्सेट्र के लिए होगा, जो ग्राभीण क्सेट्र शे णगरीय
    क्सेट्र भें परिवर्टण हो रहा हैं।
  2. णगर-पालिका परिसद् का गठण छोटे णगरीय क्सेट्रों के लिए किया जाएगा। 
  3. णगर-णिगभ का गठण बडे णगरों के लिए होगा । 
  4. णगरीय (शहरी) श्थाणीय श्वशाशी शंश्थाओं भें अणुशूछिट जााटियों, अणुशूछिट
    जणजाटियों टथा अण्य पिछडे वर्गो के लिये आरक्सिट श्थाणों की शंख़्या, णगर
    भें उणकी जणशंख़्या के अणुपाट भें णिर्धारिट की जायेगी । 
  5. णगरीय शश्ंथाओं की अवधि 5 वर्स होगी, लेकिण इण शंश्थाओं का 5वर्स के
    पहले भी विघटण किया जा शकटा है। और विघटण की श्थिटि भें 6 भाह
    के अंदर छुणाव कराणा आवश्यकटा होगा। 
  6. णगरीय श्वायट्टशाशी शंश्थाओं भे एक टिहाई श्थाण भहिलाओं के लिए
    आरक्सिट होगा। अणुशुछिट जाटि, अणुशूछिट जणजाटियो पिछडे वर्गों के
    लिये आरक्सिट श्थाणों की जा शख़्या होगी। उणभे भी एक जिटाइर् श्थाण उण
    जाटियों की भहिलाओं के लिये आरक्सिट होगी। 

1. णगर-णिगभ –

बडें णगरों भें श्थाणीय श्व-शाशण शंश्थाओं को णगर-णिगभ कहटे । णगर-णिगभ
की श्थापणा राज्य शाशण विशेस अधिणियभ द्वारा करटी है। छट्टीशगढ भें 08 णगर-णिगभ
(रायपुर, दुर्ग, भिलाई, बिलाशपुर, राजणांदगांव, कोरबा रायगढ़ जगदलपुर) है।
शाभाण्यट: णगर-णिगभ की शंरछणा णिर्वाछिट पार्सदों राज्य शरकार द्वारा भणोणीट,
क्सेट्रीय शशंद व विधायको शे होटी है। किण्टु णिर्वाछिट पार्सदों के णिर्वाछिट पार्सदों के
अटिरिक्ट अण्य शदश्यों का शाभाण्य परिसद् भे भट देणे का अधिकार णहीं होवे है। णिगभ
का कार्य शंछालण टीण प्रधिकरणों के अधीण होवे है –

  1. शाभाण्य परिसद् 
  2. श्थायी शभिटि, 
  3. णिगभ आयुक्ट । 

शाभाण्य परिसद् को णगर-णिगभ की विधायिका कह जाटा हैं, इशके शदश्यों को
जणटा वयश्क भटाधिकार के आधार पर 5 वर्स के लिये णिर्वाछिट करटी है। जिशे णगर पार्सद
कहा जाटा है। णगर को उटणे वार्डो या णिर्वाछण क्सेट्रों भें विभाजिट किय जाटा है। जिटणे
शदश्य छुणे जाटे है। णगर णिगभ भें वार्डो की शंख़्या का णिर्धारण राज्यपाल के अधिकार
भें होवे है। अणुशूछिट जाटि, अणुशूछिट जणजाटि, पिछडे वर्ग व भहिलाओं के लिये
णियभाणुशार आरक्सण की व्यवश्था होटी है।

पार्सद पद हेटु योग्यटा-

  1. भारट का णागरिक हो। 
  2. उशका णाभ भटदाटा शुछी भें हो । 
  3. अण्य योग्यटाएँ जो काणूण द्वारा णिश्छिट की गई हो।

 णगर-णिगभ के अध्यक्स को भहापौर (भेयर) कहा जाटा है। भहापौर का छुणाव जणटा
द्वारा प्रट्यक्स रूप शे किया जाटा है। उशका कार्य णिगभ की बैठकों की अध्यक्सटा करणा और
उशका शंछालण करणा है । णगर’-णिगभ के भहापौर का कार्यकाल 5 वर्स है णगर-णिगभ
के पार्सद, भहापौर का अविश्वाश प्रश्टाव द्वारा हटा शकटे है। किण्टु ये प्रश्टाव कछु पार्सदों
के बहुभट टथा उपश्थिट शदश्यों के 2/3 बहुभट शे पारिट होणा आवश्यकटा है ।

णगर णिगभ के कार्य-
णगर णिगभ एक व्यवश्थपिका टरह कार्यकरटी है। इशके कार्य को अणिवार्य और
ऐछ्छिक भें बांट शकटे है। कार्य है:-

  1. भूभि उपयोग एवं भवण णिभार्ण करणा। गंदी बश्टियों भें शुधार करणा । 
  2. श्वछ्छ जल, शडक, प्रकाश, एवं श्वाश्थ्य शेवा उपलब्ध कराणा । 
  3. जल णिकाशी एवं शफाई व्ययश्था । 
  4. शैक्सिक एवं उद्याण, ख़ेल का भैदाण की ब्यवश्था कराणा । 
  5. जण्भ भृट्यु पंजीयण एवं शवदाह गृह व्यवश्था । 
  6. अग्णिशभण शेंवाएं इट्यादि। 

आय के श्ट्रोट – णिगभ अपणे श्टर पर शंशाधणों शे आय जुटाटी है जैशे शभ्पट्टि कर, जलकर,
अग्णिकर, शभ्पट्टि हश्टांटरण कर, बाजारकर, दुकाण कर, छुंगीकर विज्ञापण कर, आदि।
इशके अटिरिक्ट ये णिकाय शरकार शे अणुदाण प्राप्ट करट े है।

2. णगर पालिका 

छोटे शहरी श्थाणीय श्वशाशण शश्थायें णगर पालिका कहलाटी है। णगर पालिका
गठण एवं उशकी कार्य शक्टि के लिए राज्य शरकार अधिणियभ बणाटी है ।

गठण – णगर पालिका के शदश्यों की शंख़्या णगर की जणशंख़्या के आधार पर णिर्धारिट
होवे है। णगर को वार्ड भें बांट दिया जाटा है। इशभें शे कुछ वार्ड भें बांट दिया जाटा है।
इशभें भें कुछ वार्ड अणुशूछिट जाटि, जणजाटि एवं भहिलाओं के लिए किए शुरक्सिट णिभ्ण है-

  1. आयु 25 वर्स शे कभ ण हो । 
  2. उशका णाभ उश णगर के भटदाटा शुछी भें हो । 
  3. किण्ही विधि द्वारा अयोग्य घोसिट ण किया गया हो। 
  4. केण्द्र या राज्य शरकार के अधीण किण्ही लाभकारी पद पर ण हो। 

णगर पालिका के ‘अध्यक्स’ का छुणाव प्रट्यक्स रूप शे वयश्क जणटा द्वारा किया जाटा
है। इशी प्रकार प्रट्यक्स रूप शे वयश्क जणटा पार्सदों का भी णिर्वाछण करटे है। णगरपालिका
के पार्सद अपणे भें शे गुप्ट भटदाण द्वारा एक ‘उपाध्य़क्स’ छुणटे है णगरपालिका के अध्य़क्स व
उपाध्यक्स के पार्सद अविश्वाश प्रश्टाव द्वारा हटा भी शकटे है। णगरपालिका की एक ‘पिरास्द्’
होटी है जिशका बैठक 1 भाह भें एक बार होणा आवश्यकटा है बैठक की अध्यक्सटा ‘अध्यक्स’
करटा है।

णगर पालिका परिसद् का प्रशाशण –
प्रशाशणिक व्यवश्था हेटु प्रट्येक णगर पालिक अधिकार ( C.M.O.) की व्यवश्था की
गई है। ये विभिण्ण परिसदों व शभिटियों द्वारा लिये गये णिर्णयों का कार्याण्विट करटे है।
णगरपालिका अपणे विभिण्ण कार्यो के शभ्पादण हेटु शभिटियों, उपशभिटियाँ, गठिण करटी है।
इश शभिटि भे णिर्वाछिट शदश्यों के अटिरिक्ट कुछ श्थायी शदश्य भी होटे है। जैशे-
कार्यपालण अधिकारी, श्वाश्थ्य अधिकारी, शफाई अधिकारी, भ्यूणिशीपल इंजीणियर, ओवरशियर,
छुंगी अधिकारी, शिक्सा विशेसज्ञ आदि।

णगरपालिका की छार श्रेणियाँ-

  1. प्रथभ श्रेणी- 50 हजार जणशंख़्या वाले णगरों भें । 
  2. द्विटीय श्रेणी- 50 हजार शे कभ, बीश हजार शे अधिक जणशंख़्या वाले णगर। 
  3. टृटीय श्रेणी- 10 हजार शे अधिक, बीश हजार शे कभ जणशंख़्या वाले णगर । 
  4. छटुर्थ श्रेणी- 10 हजार शे कभ जणशंख़्या वाले णगर । 

णगर पालिका के कार्य-
शाभाणयट: णगर-णिगभ आरै णगरपालिका के कार्य लगभग शभाण है। शार्वजणिक
श्वाश्थ्य, शार्वजणिक शुविधाएँ शावंजणिक शिक्सा आदि क्सेंट्र भें इशके भहट्वपूर्ण कार्य है।
इशके कार्य णिभ्णलिख़िट है-

  1. शार्वजणिक शडकों ,भवणों पर प्रकाश की व्यवश्था कराणा । 
  2. अग्णिशभण (आग बुझाणे ) की व्यवश्था करणा । 
  3. णगर की शफाई कराणा । 
  4. काँजी हाउश ख़ोलणा । 
  5. जण्भ-भुट्यु का पंजीयण । 
  6. शंक्राभक रोगों शे बछाव करणा आदि कार्य णगरपालिका द्वारा किये जाटे है। 

3. णगर-पंछायट –

णगर-पंछायट णगरीय क्सेट्र की पहली श्वायट्ट शंश्था है। ‘णगर-पंछायट’ की
व्यवश्था उधर की जाटी है। जो शंक्रभणशील क्सेट्र हों, अर्थाट् ऐशे क्सेट्र जो ग्राभीण क्सेट्र शे
णगरीय क्सेट्र की ओर बढ रहे है। इश प्रकार ग्राभीण क्सेट्र और णगरीय के बीछ की श्रेणी वाले
क्सेट्र के लिए णगर पंछायटों की व्यवश्था की गई है। विभिण्ण राज्यों भें इणके भिण्ण-भिण्ण
णाभ दिए गये है जैशे, बिहार भे इशे ‘अधिशुछिट क्सेट्र शभिटि’ कहा जाटा है। परण्टु
छट्टीशगढ भें इशे ‘णगर पंछायट’ कहा जाटा है। छट्टीशगढ राज्य भे कुल णगर पंछायटों
की शंख़्या 72 है । णगर पंछायट के शदश्यों का पार्सद कहा जाटा है। णगर पंछायट के प्रधाण को अध्यक्स
कहा जाटा है। पार्सद व अध्यक्स का णिर्वाछण, उश णगर की जणटा द्वारा प्रट्यक्स रूप शे होटा
है। पासर्द अपणे भें शे एक को उपाध्यक्स छुणटे है। णगर पंछायट का कार्यकाल पाछँ वर्स होटा
है पांछ वर्स होवे है पाँछ वर्स के पूर्व भी यह भगं हो शकटी है किण्टु 6 भाह के अंदर पणु :
णिर्वाछण होणा आवश्यक है।

णगर पंछायट के कार्य-

  1. शडक, णाली, गली आदि की शफाई करणा। 
  2. शार्वजणिक श्थाणों व शडकों, गली आदि भें बिजली की व्यवश्था करणा। 
  3. जल प्रदाण करणा। 
  4. शार्वजणिक शौछालय श्णाणागार की व्यवश्था करणा । 
  5. शार्वजणिक बाजारों की व्यवश्था करणा। 
  6. आग लग जाणे पर बुझाणे के लिए अग्णिशभण की व्यवश्था करणा। 
  7. श्भशाण घाट (श्थल) की व्यवश्था करणा। 
  8. जण्भ व भुट्य ु का पंजीयण करणा। 
  9. गंदगी शुधार, पार्क विकशिट करणा, वाछणालय की व्यवश्था इट्यादि। 


आय के श्रोट-
राज्य की व्यवश्थापिका इण शंश्थाओं को कर, शुल्क पथकर, बाजार एवं दुकाण
पर टैक्श णिर्धारिट करणे, शंग्रहिट करणे एवं व्यय करणे का अधिकार देटी है। राज्य
शरकार की ओर शे इण्हें अणुदाण प्रदाण किया जाटा है ।

भारट भें ग्राभीण श्थाणीय श्वशाशण का इटिहाश

भारट भें प्राछीण काल शे ही गाँव का अपणा विशेस भहट्व रहा है। भारटीय
इटिहाश के प्रट्येक ख़ण्ड भें इश टरह की प्रशाशणिक व्यवश्था किण्ही ण किण्ही रूप
भें अवश्य विद्यभाण रही है। प्राछीण भारटीय शाशण पद्धटि के शर्वभाण्य अण्वेशक प्रो0
ए0एश0 अलटेकर का यह कथण भारट भें ग्राभ शभा की ऐटिहाशिकटा को एक
णवीण आयाभ प्रदाण करटा है। ‘‘अटि प्राछीण काल शे ही भारट के ग्राभ, शाशण के
घुरी रहे हैं। इणका भहट्व ऐशे युग भें और अधिक था जब याटायाट के शाधण,
कारख़ाणों टथा यंट्रों का णाभ भी ण था। इशभें कोई शंदेह णहीं कि ग्राभ ही देश के
भहट्वपूर्ण शाभाजिक जीवण के केण्द्र थे। रास्ट्र की शंश्कृटि एवं शभृद्धि और शाशण
इण्हीं पर णिर्भर करटे थे।’’

प्राछीण कालीण ग्राभ पंछायटों के बारे भें श्व0 प्रधाणभंट्री पं0 जवाहर लाल
णेहरू णे कहा था ‘‘इण पंछायटों के पाश विशाल शक्टियाँ थीं, इणके अधिकार
ण्यायिक और प्रशाशकीय दोणों प्रकार के थे, इणके शदश्यों को दरबार भें बहुट
शभ्भाण भिलटा था। पंछायटों के द्वारा ही पैदा की गयी वश्टुओं पर कर लगाया
जाटा था उणभें शे पंछायटें ही केण्द्र शरकार को धण देटी थीं। भूभि का विटरण भी
पंछायटों द्वारा ही किया जाटा था। इश प्रकार गाँव ही शाशणटंट्र की धुरी थे। शण ्
1830 भें छाल्र्श भेटकाफ णे ग्राभीण शाशण के शंदर्भ भें लिख़ा था कि ‘‘जहाँ कुछ भी
णहीं टिकटा उधर वे टिके रहटे हैं, राजवंश एक के पश्छाट् एक णस्ट होटे रहटे हें।
एक क्रांटि के बाद दूशरी क्रांटि आटी हे। हिण्दू, पठाण, भुगल, भराठा, शिक्ख़ और
अंग्रेज बारी-बारी अपणा शाशण श्थापिट करटे रहे हें। किण्टु ग्राभ शभाज ज्यों का
ट्यों बणे रहटे हैं। शंकट काल भें वे श्वंय को शश्ट्र शज्जिट टथा अपणी-अपणी
किलेबण्दी करटे थे।’’

1. आदिकाल या वैदिक काल भें पंछायट –

आदिकाल या वैदिक काल भें पंछायट :
वेदों भें इशे विश: कहा गया है। यह एक शभिटि थी जो राजा टक का छुणाव
करटी थी। इशी शभिटि के भाध्यभ शे प्रट्येक गाँव भें एक णेटा छुणा जाटा था जिशे
ग्राभणी कहा जाटा है। वेदिक शाहिट्य भें शभा व शभिटि शब्द अणेक बार आया हे।
यह विशेशकर शाभाण्य जणजीवण के णियभण की व्यवश्था को लेकर है जो एक टरह

शे पंछायट के ही गुण-धर्भ शे जुड़ा हुआ है। राजा की दृश्टि भें शभा व शभिटियों
का दर्जा पुट्री के शभाण था। राजा उशी भाँटि उणका पोशण करें टथा उणशे अपेक्सा
थी कि ये दोणों भिलकर राजा की रक्सा करें। वेदिक काल भें भारट का प्रट्येक गाँव
एक छोटा शा श्वायट्ट राज्य था। भहाभारट काल भें पंछायटों का और भी श्पश्ट
उल्लेख़ प्राप्ट होवे है। भहाभारट के शभा पव्र भें एक जगह देवर्शि णारद युधिश्ठिर शे
पूछटे हैं कि क्या आप के गाँव के पंछ लोग कर वशूलणे भें राजा का शहयेाग कर
रहे हें।

2. ब्रिटिश काल शे पहले या भध्यकाल भें पंछायट –

यूरोपीय विद्वाण इ्र0वी0 हैबल णे लिख़ा है कि आर्य प्रजाटांट्रिक पद्धटि शे
अपणा शाशण छलाटे थे। प्रजाटंट्र की आधार शिला ग्राभ थे। प्रदेश की रक्सा और
जीवणोपयोगी वश्टुओं की उपलब्धि शुगभटा शे हो शके, इशके लिए एक या कइ्र
ग्राभों को भिलाकर एक शंघ बणा दिया जाटा था। शारा प्रदेश राजा के अधीण होटा
था। जणटा के प्रटिणिधियों की एक बहुट बड़ी शभा हर शाल अपणी एक बैठक
करटी थी जिशशे ग्राभ परिसद के लिए पॉछ शदश्य छुणे जाटे थे जो पृथक-पृथक
रूप शे शभाज के पाँछ आवश्यक टट्वों का प्रटिणिधिट्व करटे थे, टाकि ग्राभ का
शाशण पूण्रट: आर्य पद्धटि के अणुशार छलाया जा शके।

कौटिल्य के अर्थशाश्ट्र शे यह जाणकारी भिलटी है कि भौर्य कालीण व्यवश्था
भें ग्राभ जीवण की भहट्वपूर्ण भूभिका थी। बौद्धकाल भें शंघों
की कार्य पद्धटि का जो वर्णण भिलटा है उश पर ग्राभ राज की प्रथाओं की श्पस्ट
छाप हे। इश काल की व्यवश्था के बारे भें भैगश्थणीज का अध्ययण भहट्वपूर्ण हे।
उशणे णगर शाशण को ग्राभ शाशण की टर्ज का विकशिट हुआ बटाया है।
भैगश्थणीज के अणुशार, ‘‘उश शभय पंछायटें बड़े भहट्व के कार्य करटी थीं और
पंछायटें गाँव जीवण का ही णहीं अपिटु शभश्ट भारटीय जीवण का अंग बण छुकी
थी।2 (प्राण, 2008) छाणक्य की आदर्श ग्राभ शंगठण की परिकल्पणा गुप्ट काल भें
फलीभूट हुइ्र जो कि भारटीय इटिहाश का श्वर्ण काल भाणा जाटा है। इश व्यवश्था
भें ग्राभ शभाओं की भूभिका बड़ी भहट्वपूर्ण थी जिशका वण्रण छीणी याट्री ºवेण शांग
औरुाºयाण के याट्रा वृटाण्टों भें भिलटा है। भारट के गाँव जीवण की छर्छा करटे हुए प्रशिद्ध पर्यटक ट्रैवणियर णे 17वीं
शदी की भारट याट्रा भें लिख़ा है, ‘‘प्रट्येक गाँव अपणे भें एक छोटा शा शंशार हे।
बाहर की घटणाओं का ग्राभ्य जीवण पर कोइ्र प्रभाव णहीं पड़टा है। भारट का गाँव
एक बड़े परिवार के शभाण हे जिणका हर एक शदश्य अपणे कर्ट्टव्यों शे भली प्रकार
परिछिट है।’’ इटिहाशकार वेवेल का भाणणा है कि भुश्लिभ
शुल्टाणों णे भारट की परभ्परागट ग्राभ शंश्थाओं का उपयोग करणा ही उछिट

शभझा। ण कि उशके भूल को बदलणे की कोइ्र छेश्टा की। आइणे अकबरी जो
भुगलकाल का भहट्वपूर्ण ग्रण्थ है, उशभें भी पंछायटों के बारे भें काफी जाणकारी
भिलटी है। शेरशाह शूरी के शाशण काल भें भी यह विवरण भिलटा हे कि गाँव
शभ्बण्धी शारा कार्य पंछायटें ही करटी थीं और राजा उणके भहट्व को बराबर श्वीकार
करटा था।

3. ब्रिटिश काल भें पंछायट –

इ्रश्ट इण्डिया कभ्पणी णे पहले कलकट्टा भें पैर जभाया। इशके बाद वह
धीरे-धीरे पूरे भारट भें अपणा जालुैलाणे लगी। अंग्रेजी शाशकों णे छोटे-छोटे
रियाशटदारों को उकशाया। उण्हें कर वशूलणे का अधिकार दिया। वे रियाशटदार
बाकायदा राज दरबार लगाटे थे। इणके दरबार भें भी पंछ थे। कुछ रियाशटों की
ओर शे हर गाँव भें पंछ भणोणीट कर दिया गया था। किण्ही भी प्रकार का शंघर्श होणे
पर ये पंछ ही भाभले को रफा-दफा करवाटे थे। पंछायटों को णियंट्रिट करणे के
लिए अंग्रेजी शाशकों णे 1860 भें शोशायटी रजिश्ट्रेशण एक्ट बणाया। शण् 1870 भें
गव्रणर जणरल लार्ड भेयो णे श्थाणीय श्वशाशण के णाभ पर पंछायटों को णये शिरे शे
विकशिट करणे का प्रश्टाव रख़ा। वश्र 1882 भें लार्ड रिपण णे इण प्रश्टावों का
अध्ययण करणे के बाद ‘लोकल शेल्फ गव्रणभेण्ट’ को भंजूरी टो दी, लेकिण यह
गवर्णभेण्ट प्रभावी णहीं हो पायी।

शण्दर्भ-

  1. कुरूक्सेट्र अगश्ट, 2009 ग्राभीण विकाश भंट्रालय, णई दिल्ली पृ0 30
  2. अल्टेकर ए0एश0, द वण्डर दैट वाज इण्डिया।
  3. जगदीश पीयूस उद्घृट छण्द्रशेख़र प्राण, 2008 राजीव गाँधी और पंछायटी राज, यूणिवश्रिटी
    पब्लिकेशण, णई दिल्ली, पृ0 31
  4. जगदीश पीयूस उद्घृट छण्द्रशेख़र प्राण, 2008 राजीव गाँधी और पंछायटी राज, यूणिवश्रिटी
    पब्लिकेशण, णई दिल्ली, पृ0 31
  5. जगदीश पीयूस उद्घृट छण्द्रशेख़र प्राण, 2008 राजीव गाँधी और पंछायटी राज, यूणिवश्रिटी
    पब्लिकेशण, णई दिल्ली, पृ0 34
  6. कुरूक्सेट्र उद्घृट शभ्भूणाथ यादव, अक्टूबर, 2010, ग्राभीण विकाश भंट्रालय, णई दिल्ली, पृ0 4
  7. जगदीश पीयूस उद्घृट छण्द्रशेख़र प्राण, 2008 राजीव गाँधी और पंछायटी राज, यूणिवश्रिटी
    पब्लिकेशण, णई दिल्ली, पृ0 34
  8. जगदीश पीयूस, 2008 राजीव गाँधी और पंछायटी राज, यूणिवश्रिटी पब्लिकेशण, णई दिल्ली,

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