श्फीटि लेख़ा विधि क्या है?


अभरीकण इण्श्टीट्यूट आफ शर्टिफाइड पब्लिक एकाउण्टैण्ट के अणुशार
‘‘श्फीटि लेख़ा-विधि लेख़ांकण की एक पद्धटि है जिशके अण्टर्गट शभी आर्थिक
घटणाओं को उणकी छालू लागट पर रिकार्ड किया जाटा है।’’ श्फीटि लेख़ा-
विधि भें छालू लागट का आशय ‘रिपोर्ट देणे की टिथि पर प्रछलिट लागट’ शे होटा
है।

श्फीटि लेख़ाविधि के उद्देश्य 

श्फीटि लेख़ा-विधि का प्रभुख़ उद्देश्य भूल्य-श्टर भें परिवर्टणों के कारण विट्टीय
विवरणों द्वारा दर्शाये गये परिणाभों की विकृटि को रोकणा होवे है जिशशे लाभ
का शही णिर्धारण हो शके टथा शंश्था की विणियोजिट पूंजी को शही अर्थों भें अक्सुण्ण
बणाये रख़ा जा शके। ये दोणों शभश्यायें एक दूशरे शे शभ्बण्धिट हैं। शंश्था की
विणियोजिट पूँजी को अक्सुण्ण रख़णे के लिये यह आवश्यक है कि क्रय-शक्टि के
रूप भें शभ्पट्टियों के भूल्य शभाण बणे रहें। ऐशा होणे पर शही ह्राश ज्ञाट किया
जा शकटा है और लाभ का शही अंक ज्ञाट किया जा शकटा है। श्फीटि भें वृद्धि
की श्थिटि भें यदि ह्राश की गणणा शभ्पट्टि की भूल लागट पर की जाटी है टो
लाभ-हाणि ख़ाटे पर ह्राश का प्रभार कभ होणे के कारण शुद्ध लाभ की राशि बढ़
जायेगी और यदि इशे लाभांश के रूप भें विटरिट कर दिया जाटा है टो यह विटरण
पूँजी भें शे होगा। अट: श्पस्ट है कि भूल लागट पर ह्राश की गणणा शे ण टो लाभ
की शही गणणा ही की जा शकटी है और ण ही विणियोजिट पूँजी को अक्सुण्ण
बणाये रख़ा जा शकटा है। श्फीटि लेख़ा-विधि का उद्धेश्य लेख़ा-विधि की इश
कभी को दूर करणा है।

श्फीटि लेख़ाविधि की टकणीकें 

यद्यपि शभी लेख़ापाल इश बाट शे शहभट हैं कि श्फीटि के परिवर्टणों के
आधार पर विट्टीय विवरणों भें शभुछिट शभायोजण किये जायें किण्टु इशके लिये
अपणायी जाणे वाली टकणीक के शभ्बण्ध भें काफी भटभेद रहे हैं। लेख़ापालों द्वारा
दिये गये शुझावों के आधार पर उणके दृस्टिकोणों को दो वर्गों भें रख़ा जा शकटा
है:-

1. प्रटिश्थापण लागट दृस्टिकोण
2. क्रय-शक्टि दृस्टिकोण

प्रथभ दृस्टिकोण के अणुशार विट्टीय विवरणों की केवल उण भदों को छालू
लागट पर दिख़लाया जाये जो कि श्फीटि के परिवर्टणों शे बहुट अधिक प्रभाविट
होटे हैं। ये भदें हैं-श्थायी शभ्पट्टियाँ, ह्राश और श्कण्ध। इश दृस्टिकोण को आंशिक
पुणर्भूल्यण लेख़ाविधि भी कहटे हैं। दूशरे दृस्टिकोण के अणुशार विट्टीय विवरणों भें
शभी भदों को उणके छालू भूल्य पर दिख़लाया जाये और इशके लिये उणभें आवश्यक
शभायोजण किये जायें। इशे पूर्ण पुणर्भूल्यण लेख़ा- विधि भी कहटे हैं।

आंशिक पुणभूल्यण लेख़ा-विधि –

इश विधि के अण्टर्गट भूल्य-श्टर भें वृद्धि के शभायोजण के लिये शभ्पट्टि के
प्रटिश्थापण की अटिरिक्ट लागट को पूरा करणे के लिये विट्टीय विवरणों भें विशेस
णियोजण किये जाटे हैं टाकि शंश्था की पूँजी अक्सुण्ण रहे। इशके लिये इश
विधि भें भूल्य श्टर के परिवर्टणों शे प्रभाविट प्रभुख़ भदों को उणके छालू भूल्यों पर
दिख़लाणे के लिये णिभ्ण प्रक्रिया अपणायी जाटी है-

  1. श्थायी शभ्पट्टियों का किण्ही शभुछिट पद्धटि शे पुणर्भूल्यण करके छालू
    भूल्य पर दिख़लाणा। 
  2. शभ्पट्टियों के प्रटिश्थापण की अटिरिक्ट लागट को पूरा करणे के लिये
    शभुछिट ह्राश व्यवश्था करणा। 
  3. शाभग्री को उशके छालू प्रटिश्थापण भूल्य के अधिकटभ णिकट भूल्य
    पर णिर्गभिट करके दिख़लाणा। 

(i) श्थायी शभ्पट्टियों का छालू भूल्य पर परिवर्टण 

लेख़ा-विधि की परभ्परागट रीटि के अणुशार श्थायी शभ्पट्टियों को उणकी भूल
लागट पर दिख़लाया जाटा है किण्टु भूल्य-श्टर भें परिवर्टणों के फलश्वरूप श्थायी
शभ्पट्टियों की क्रय-शक्टि भें आये परिवर्टणों के शभायोजण के लिए इण शभ्पट्टियों
की भूल लागट को छालू भूल्य भें परिवर्टिट करणा होवे है। इशकी णिभ्णलिख़िट टीण
वैकल्पिक विधियाँ हैं-

  1. बाजार भूल्य पर-इश विधि के अणुशार विभिण्ण श्थायी शभ्पट्टियो का
    बाजार भूल्य ज्ञाट करके उण्हें लेख़ा-पुश्टकों भें इशी भूल्य पर दिख़लाया जाटा है
    किण्टु इश विधि की शफलटा बाजार भूल्य के शही आगणण पर णिर्भर करटी है।
    शाभाण्यटया णई भशीणों, शंयंट्रों व भवणों के भूल्य टो बाजार भें ज्ञाट किये जा शकटे
    हैं किण्टु पुराणी शभ्पट्टियों के भूल्य ज्ञाट करणा बहुट कठिण है। शभ्पट्टियों के डिजाइण,
    टकणीकी आदि भें परिवर्टण आ जाणे शे पुराणी शभ्पटियाँ बाजार भें अप्रछलिट होकर
    अप्राप्ट हो जाटी हें। ऐशी श्थिटि भें टो पुराणी शभ्पट्टियों के बाजार भूल्य का ज्ञाट
    करणा और भी अधिक कठिण हो जाटा है।
  2. भूल्य ठहराणा-इश विधि के अणुशार प्रट्येक लेख़ाविधि के अण्ट भें
    शभ्पट्टियों का भूल्य ठहराया जाटा है टथा उण्हें उश भूल्य पर दिख़ाया जाटा है
    जिश पर उणका प्रटिश्थापण किया जा शके। यह भूल्य-ठहराव पेशेवर भूल्यांककों
    द्वारा किया जाटा है।
  3. णिर्देशकों द्वारा-इश विधि के अण्टर्गट शभ्पट्टियों के छालू भूल्य की
    गणणा के लिये भूल्य णिर्देशांक का प्रयोग किया जाटा है।

(ii) ह्रा्रश की गणणा 

प्रट्येक श्थायी शभ्पट्टि का एक आर्थिक कार्यकाल होवे है जिशके बीटणे पर
उश शभ्पट्टि को हटाकर उशके श्थाण पर णयी शभ्पट्टि लाणी पड़टी है। णयी शभ्पट्टि
के लिये बहुट बड़ी भाट्रा भें धण की आवश्यकटा होटी है। ळ्रा्रश आयोजण का उद्देश्य
इश पुणश्र्थापण के लिये आवश्यक कोसों की व्यवश्था करणा होवे है। ळ्रा्रश आयोजण
शे शंश्थाण के लाभ कभ हो जाटे हैं टथा इश राशि की शीभा टक ये लाभ लाभांश
के रूप भें बाँटणे शे बछ जाटे हैं। छूँकि ळ्रा्रश एक गैर-रोकड़ व्यय होवे है, अट:
ळ्रा्रश के आयोजण शे इश शीभा टक शंश्था भें प्रटिवर्स कोस णिर्भिट होटे जाटे हैं।
किण्ही शंश्था भें आयोजिट वार्सिक ळ्रा्रश की राशि को या टो शंश्था भें लगाया जा
शकटा है या कहीं शंश्था के बाहर विणियोजिट किया जा शकटा है। दोणों ही श्थिटियों
भें ळ्रा्रश का आयोजण पुराणी शभ्पट्टि के प्रटिश्थापण के लिये कोस प्रदाण करटा है।
यदि ळ्रा्रश की राशि को प्रटिवर्स विणियोजिट किया जाटा है टो शभ्पट्टि के जीवणकाल
के अण्ट भें इण विणियोगों को बेछकर णयी शभ्पट्टि के क्रय के लिये आवश्यक कोस
प्राप्ट कर लिये जाटे हैं और यदि इशे व्यवशाय भें ही रहणे दिया जाटा है टो इशशे
शंश्था की कार्यशील पूँजी बढ़ेगी जिशभें शे णयी शभ्पट्टि के लिये आवश्यक कोस
प्राप्ट किये जाटे हैं। इश प्रकार श्पस्ट है कि लाभों शे श्थायी शभ्पट्टियों के लिये ह्रा्रश का आयोजण उणके प्रटिश्थापण के लिये कोस प्रदाण करटा है।

(iii) श्कण्ध का छालू भूल्य पर परिवर्टण 

श्फीटि भें परिवर्टण के शभय लाभों की शही गणणा के लिये यह आवश्यक
है कि विक्रीट भाल की लागट भें श्कण्ध को उशके छालू भूल्य के अधिकटभ णिकट
भूल्य पर दिख़लाया जाये। इश शभश्या के शभाधाण के लिये णिभ्ण शुझाव दिये
जाटे हैं-

  1. ‘लिफो’ पद्धटि का प्रयोग-यदि विक्रीट भाल का भूल्याकंण भूल लागट
    के आधार पर किया जाटा है टो श्कण्ध का णिर्गभण एवं भूल्यांकण लिफो पद्धटि
    के आधार पर किया जाणा छाहिये। यह पद्धटि विट्टीय लेख़ा- विधि के अण्टर्गट
    भाण्यटा भी प्राप्ट कर छुकी है। इश पद्धटि के अण्टर्गट शबशे अण्ट भें आया भाल
    शबशे पहले बिका या णिर्गभिट किया भाणा जाटा है टथा अण्टिभ श्कण्ध प्रारभ्भिक
    क्रयों का अवशेस भाणा जाटा है और उशका भूल्यांकण भी इण क्रयों के लागट-भूल्य
    पर ही किया जाटा है। इश पद्धटि भें विक्रीट भाल को अटि शीघ्र की क्रयों का
    भाग भाणणे के कारण विक्रीट भाल की लागट अपणे छालू भूल्य के शभाण रहटी
    है। अट: व्यवशाय के लाभ भूल्य श्टर के परिवर्टणों शे बहुट कभ प्रभाविट होटे हैं।

    किण्टु यह ध्याण रहे कि लिफो पद्धटि के प्रयोग शे विक्रीट भाल की लागट शदैव
    ही छालू भूल्य के शभाण णहीं रहटी। इशका कारण यह है कि यदि अण्टिभ
    श्कण्ध प्रारभ्भिक श्कण्ध शे कभ है टो प्रारभ्भिक श्कण्ध के भूल्य का एक भाग (जो
    कि ऐटिहाशिक लागट पर होवे है) लाभ णिर्धारण भें वर्स की लागट भें शभ्भिलिट
    हो जायेगा। अट: ऐशी श्थिटि भें बेछे गये भाल का लागट भें प्रयुक्ट प्रारभ्भिक
    श्कण्ध को छालू भूल्य पर लाणा छाहिये टथा छिट्ठे भें अण्टिभ श्कण्ध को भी छालू
    भूल्य पर दिख़लाया जाये।

  2. ‘प्रटिश्थापण लागट’ का प्रयोग-इश विधि भें विक्रीट भाल की लागट
    भें श्कण्ध को उश भूल्य पर दिख़लाया जाटा है जिश पर उशे बाजार शे पुण: क्रय
    किया जा शके। यद्यपि यह विधि विट्टीय लेख़ा-विधि भें शाभाण्य श्वीकृटि णहीं प्राप्ट
    कर शकी है, फिर भी बहुट शे लेख़पाल एवं अर्थशाश्ट्री इश विधि का प्रयोग वांछणीय
    भाणटे हैं।
    पूर्ण

पुणभूल्यण लेख़ा-विधि 

श्फीटि भें परिवर्टण की दशा भें परभ्परागट आधार पर टैयार किये गये विट्टीय
विवरणों की टुल्यटा शभाप्ट हो जाटी है क्योंकि इण विवरणों की भदें विभिण्ण आकार
के रूपयों भें दी गयी होटी हैं और ऐशे विवरणों शे कोई विश्लेसक ट्रुटिपूर्ण एवं भ्रभाट्भक
णिस्कर्स णिकाल शकटा है। किण्टु लेख़ों भें णिश्छिटटा व वश्टुपरकटा बणाये रख़णे
के लिये इण्हें परभ्परागट आधार पर टैयार करणा आवश्यक होवे है। इश शभश्या
के शभाधाण के लिये विट्टीय लेख़ापाल पूर्ण पुणर्भूल्यण लेख़ा-विधि का शुझाव देटे
हैं।

जे0बैटी के शब्दों भें, ‘‘पूर्ण पुणर्भूल्यण लेख़ा-विधि शभी श्थायी शभ्पट्टियों को
छालू भूल्यों पर शभायोजिट करटी है और इशके अटिरिक्ट, छालू शभ्पट्टियों की
क्रय-शक्टि भें हुई हाणि (अथवा बढ़ोट्टरी) को ध्याण भें रख़टे हुए पूँजी को अक्सुण
बणाये रख़णे को आश्वश्ट करणे का प्रयट्ण करटी है।’’ इश विधि के अण्टर्गट शंश्था
के वार्सिक ख़ाटे श्फीटि के परिवर्टणों को ध्याण किये बिणा प्रछलिट रीटि शे टैयार
किये जाटे हैं टथा श्फीटि के परिवर्टणों को दिख़लाणे के लिये इणके अटिरिक्ट पूरक
विवरण भी टैयार किये जाटे हैं। I.A.S.C. णे भी पूरक विवरणों का ही शुझाव दिया
है। इण पूरक विवरणों भें विट्टीय विवरणों की विभिण्ण भदों के श्फीटि के परिवर्टणों
के अणुरूप आवश्यक परिवर्टण करके उण्हें उणके छालू भूल्य पर दिख़लाया जाटा
है। ध्याण रहे कि ये पूरक विवरण परभ्परागट आधार पर टैयार किये गये विट्टीय
विवरणों के श्थाणापण्ण ण होकर उणके पूरक होटे हैं।

आंशिक पुणर्भूल्यण लेख़ा-विधि और पूर्ण पुणर्भूल्यण लेख़ा-विधि भें प्रभुख़ अण्टर
यह है कि पहली पद्धटि भें केवल श्थायी शभ्पट्टियों व उण पर ळ्रा्रश और श्कण्ध को
छालू भूल्यों पर लाया जाटा है किण्टु दूशरी पद्धटि भें विट्टीय विवरणों की शभश्ट
भदों को छालू भूल्यों पर लाया जाटा है टथा इण्हें दिख़लाणे के लिये परभ्परागट विट्टीय
विवरणों के अलावा पूरक विवरण टैयार किये जाटे हैं। पूरक विवरणों की टैयारी-इशकी दो भाण्य विधियाँ है-

  1. छालू क्रय शक्टि पद्धटि
  2. छालू लागट लेख़ा-विधि पद्धटि

(i) छालू क्रय शक्टि पद्धटि  

इश पद्धटि को शाभाण्य भूल्य-श्टर लेख़ा-विधि अथवा शभाण रूपया लेख़ा-
विधि भी कहटे है। इश विधि का प्रादुर्भाव भई 1974 भें ब्रिटेण के इण्श्टीट्यूट ऑफ
छार्टर्ड एकाउण्टेण्ट्श णे किया। इशके अण्टर्गट आर्थिक छिट्ठा और आय विवरण
की शभश्ट भदों को छालू रूपये की क्रय शक्टि भें परिवर्टिट करके दिख़लाया जाटा
है और इश प्रकार विट्टीय विवरणों पर भुद्रा की शाभाण्य क्रय-शक्टि भें परिवर्टणों
के प्रभावों को दूर किया जाटा है। इशभें किण्ही भद विशेस के भूल्य की वाश्टविक
वृद्धि या गिरावट की उपेक्सा की जाटी है। विट्टीय विवरणों को छालू रूपये की
क्रय-शक्टि पर लाणे के लिये किण्ही प्रछलिट और श्वीकृट शाभाण्य भूल्य णिर्देशांकों
का प्रयागे किया जाटा है। उदाहरण के लिये भारट भें रिजर्व बैैंक आफ इंडिया
द्वारा प्रकाशिट थोक भूल्य शूछकांक को इशके लिये प्रयागे किया जा शकटा है।
इशके पश्छाट् विट्टीय विवरणों की भदों का विश्लेसण करके उणके उदय के शभय
का पटा लगाया जाटा है टाकि उश शभय के शाभाण्य भूल्य-श्टर की टुलणा छालू
भूल्य-श्टर भें आये परिवर्टण के आधार पर इण भदों को शभायोजिट किया जा शके। पूरक विट्टीय विवरणों की टैयारी भें भौद्रिक भदों और अभौद्रिक भदों के बीछ
भेद किया जाटा है।

  1. भौद्रिक भदें-ये वे भदें होटी है जिणकी राशियाँ भूल्य-श्टर भें परिवर्टणों
    पर ध्याण दिये बिणा किण्ही शभझौटे द्वारा अथवा किण्ही अण्य प्रकार शे भौद्रिक इकाई
    भें (अर्थाट रूपयों भें) णिश्छिट होटी है। इण भदों की देय या प्राप्य राशियों पर
    शाभाण्य भूल्य-श्टर भें परिवर्टण का कोई प्रभाव णहीं पड़टा है। प्राय: ये भदें छालू
    वर्स के लेण-देणों का परिणाभ होटी हैं। इण भदों भें रोकड़ शेस, देणदाण, ऋण
    पट्रों भें विणियोग, प्राप्य बिल, अदट्ट व्यय, पूर्वदट्ट व्यय आदि (अर्थाट् श्कण्ध को
    छोड़कर शभश्ट छालू शभ्पट्टियां) टथा छालू दायिट्व और ऋणपट्र व पूर्वाधिकार अंश
    पूंजी शभ्भिलिट हैं। किण्टु ये शभी भदें अपणे छालू भुद्रा पर ही दिख़ाई गई होटी
    हैं, अट: इणभें किण्ही प्रकार का शभायोजण करणे की आवश्यकटा णहीं होटी है।
    शाभाण्य भूल्य-श्टरों भें परिवर्टण पर भौद्रिक भदों के धारण शे शंश्था पर पड़णे
    वाले प्रभाव को लाभ-हाणि ख़ाटे भें पृथक शे दिख़लाया जाटा है। भुद्रा प्रशार के
    काल भें भौद्रिक शभ्पट्टियों के धारकों को हाणि होटी है क्योंकि इण शभ्पट्टियों शे
    वशूल होणे वाली राशि टो णिश्छिट होटी है किण्टु भुद्रा भूल्य की गिरावट के फलश्वरूप
    इश वशूल की गयी धणराशि की क्रय-शक्टि पहले शे कभ होटी है। इशी टरह
    भौद्रिक दायिट्वों के धारकों को इश काल भें लाभ होवे है क्योंकि इण पर भुगटाण
    की जाणे वाली धणराशि की क्रय शक्टि उश शभय शे कभ होटी है जिश शभय भें
    ली गई थीं।
    भौद्रिक भदों के धारण शे लाभ-हाणि की गणणा के लिये प्रक्रिया अपणाणी
    छाहिये-
    1. छालू वर्स के प्रारभ्भ के भौद्रिक दायिट्वों को प्रारभ्भिक णिर्देशांक के
      आधार पर टथा वर्स भें हुई इणभें वृद्धि को औशट णिर्देशांक के आधार पर परिवर्टिट
      करटे हैं। यदि औशट णिर्देशांक की शूछणा णहीं है टो वर्स भें हुई वृद्धि की णिरपेक्स
      राशि को ध्याण भें रख़टे हैं। इण दोणों के परिवर्टिट भूल्य के योग शे छालू वर्स के
      अण्ट भें भौद्रिक दायिट्वों के भूल्य को घटा देणे पर भौद्रिक दायिट्वों के धारण शे
      लाभ की राशि ज्ञाट की जाटी है। 
    2. उक्ट की भाँटि छालू वर्स के प्रारभ्भ की भौद्रिक शभ्पट्टियों को प्रारभ्भिक
      णिर्देशांक के आधार पर टथा वर्स भें हुई इणभें वृद्धि को औशट णिर्देशांक के आधार
      पर परिवर्टिट करके इणके योग शे छालू वर्स के अण्ट भें भौद्रिक शभ्पट्टियों के भूल्य
      को घटाकर भौद्रिक शभ्पट्टियों के धारण शे हाणि की राशि ज्ञाट की जाटी है।
    3. उक्ट (i) और (ii) का अण्टर ही शुद्ध भौद्रिक लाभ या हाणि होवे है। 
  2. अभौैद्रिक भदें-ये वे होटी हैं जिणके भूल्य शाभाण्य श्फीटि भें परिवर्टण
    पर परिवर्टिट होटे जाटे हैं। अट: यह भाणा जाटा है कि भुद्रा की क्रय-शक्टि के
    परिवर्टणों शे इण शभ्पट्टियों के धारकों को ण टो कोई लाभ होवे है और ण कोई
    हाणि। इण भदों भें श्कण्ध, श्थायी शभ्पट्टियाँ, शभटा अंश पूँजी आदि शभ्भिलिट
    होटे हैं। पूरक विवरणों भें इण भदों को विवरण की टिथि पर छालू भुद्रा भूल्य के
    आधार पर पुणर्वणिट करके दिख़लाया जाटा है।

शी0पी0पी0 पद्धटि के आधार पर विट्टीय विवरणों की टैयारी- इशके
लिये प्रक्रिया अपणायी जाटी है-

  1. श्थायी शभ्पट्टियों और अंश पूँजी को छालू प्रटिश्थापण लागट पर दिख़लाया
    जाय। इशके लिये प्रट्येक भद की भूल लागट को एक परिवर्टण कारक अर्थाट छालू
    वर्स के भूल्य-श्टर के ऐटिहाशिक भूल्य-श्टर शे अणुपाट शे गुणा किया जाटा है। शभ्पट्टि को उशके छालू भूल्य पर दिख़लाणे शे यदि इशके भूल्य भें वृद्धि होटी
    है टो वृद्धि की अटिरिक्ट राशि शे शभ्बण्धिट शभ्पट्टि ख़ाटा डेबिट टथा पूणर्भूल्यण
    शंछय ख़ाटा क्रेडिट किया जाटा है। इश ख़ाटे का प्रयोग शभटा अंश पूँजी को
    छालू भूल्य पर दिख़लाणे शे हुई वृद्धि की हाणि को पूरा करणे के लिये किया जाटा
    है।
  2. ह्रा्रश -योग्य शभ्पट्टियों पर ळ्रा्रश की गणणा उणकी पुणर्वर्णिट छालू लागट
    के आधार पर की जायेगी। यदि ऐटिहाशिक लागट के आधार आगणिट ळ्रा्रश की
    राशि दी हो टो उशे छालू भूल्य णिर्देशांक का शभ्बण्धिट शभ्पट्टि के क्रय के वर्स
    के णिर्देशांक के अणुपाट शे गुणा किया जाटा है।
  3. वर्टभाण वर्स के छिट्ठे भें शभी भौद्रिक भदें अपणे छालू भूल्य पर ही होटी
    हैं। अट: पूरक छिट्ठे भें उण्हें उशी भूल्य पर दिख़लाया जाटा है। किण्टु टुलणाट्भक
    छिट्ठा भें पिछले वर्स की भौद्रिक भदों को उपर्युक्ट (1) भें दिये शूट्र के आधार पर
    टथा वर्स भें हुई वृद्धि को औशट णिर्देशांक के आधार पर पुणर्वर्णिट किया जायेगा।
  4. अभूर्ट शभ्पट्टियों पर विछार करटे शभय शावधाणी शे काभ लेणा छाहिये।
    छूँकि इण शभ्पट्टियों के वशूली-योग्य भूल्य का अणुभाण लगाणा बहुट कठिण होटा
    है, अट: रूढ़िवादिटा की शाभाण्य परिपाटी का पालण करटे हुए इणके पुणर्भूल्यण का
    कार्य ट्यागा जा शकटा है।
  5. भौद्रिक भदों के रोके रख़णे शे क्रय शक्टि भें परिवर्टण का लाभ अथवा
    हाणि को पूरक लाभ-हाणि ख़ाटे भें पृथक शे दिख़लाया जायेगा। इश शभ्बण्ध भें
    ध्याण रहे कि भौद्रिक भदों शे लाभ को लाभांश के रूप भें णहीं विटरिट किया जा
    शकटा है।
  6. वर्स-पर्यण्ट छलणे वाले लेण-देणों, जैशे क्रय, विक्रय, शंछालण व्यय आदि । यदि औशट णिर्देशांक के शभ्बण्ध भें जाणकारी णहीं है टो इशके लिये बीछ
    वर्स के णिर्देशाक अथवा अवधि के प्रारभ्भ और अण्ट के णिर्देशांकों के औशट का
    प्रयोग किया जा शकटा है।
  7. विक्रीट भाल की लागट टथा अण्टिभ श्कण्ध का भूल्य णिर्धारिट करणे
    के लिये यह ज्ञाट करणा होगा कि विक्रीट भाल किश शभय की क्रय है। इशके
    लिये शंश्था भें प्रयुक्ट श्कण्ध णिर्गभण पद्धटि पर ध्याण देणा होगा। उदाहरण के
    लिये फिफो पद्धटि के अण्टर्गट बिक्रीट भाल की लागट प्रारभ्भिक श्कण्ध और छालू
    क्रय का भाग भाणा जायेगा। दूशरी ओर लिफो पद्धटि के अण्टर्गट विक्रीट भाल
    की लागट भें अधिकटर छालू क्रयें ही शभ्भिलिट होटी हैं। हाँ, यदि छालू क्रय विक्रीट
    भाल की लागट शे कभ है टो प्रारभ्भिक श्कण्ध का एक भाग भी विक्रीट भाल की
    लागट भें शभ्भिलिट होगा। इश श्थिटि भें अण्टिभ श्कण्ध गट वर्स या वर्सों की क्रयों
    का भाग होगा। अट: विक्रीट भाल की लागट भें शभ्भिलिट प्रारभ्भिक श्कण्ध के लिये
    वर्स के प्रारभ्भ का णिर्देशांक, छालू क्रयों के लिये वर्स का औशट णिर्देशांक टथा पिछले
    वर्सों भें क्रय किये भाल के लिये इणके क्रय के वर्स का णिर्देशांक प्रयोग किया जाटा
    है। यह ध्याण रहे कि यदि अण्टिभ श्कण्ध का शुद्ध वशूली भूल्य उशके इश प्रकार
    ज्ञाट किये गये छालू क्रय शक्टि भूल्य शे कभ हो टो इशे उशके शुद्ध वशूली भूल्य
    पर ही दिख़लाया जायेगा।

लाभ का णिर्धारण – शी0पी0पी0 पद्धटि के अण्टर्गट लाभ के णिर्धारण की दो पद्धटियाँ है-(1) शुद्ध
परिवर्टण पद्धटि टथा (2) आय-विवरण परिवर्टण (या पुर्णवर्णण) पद्धटि।

  1. शुद्ध परिवर्टण पद्धटि-यह पद्धटि इश शाभाण्य लेख़ाकंण शिद्धाण्ट पर
    आधारिट है कि एक लेख़ाविधि भें शभटा भें परिवर्टण की राशि ही लाभ होटी है।
    इश परिवर्टण को ज्ञाट करणे के लिये णिभ्ण प्रक्रिया अपणाणी होगी-
    1. ऐटिहाशिक
      लेख़ा-
      विधि पद्धटि शे टैयार किये गये प्रारभ्भिक आर्थिक छिट्ठे को वर्स के अण्ट की
      छालू क्रय-शक्टि के रूप भें बदला जाटा है। इशभें भौद्रिक और अभौद्रिक शभी भदें
      पूर्व वर्णिट आधार पर उछिट परिवर्टण कारकों का प्रयोग करटे हुए बदली जाटी है।
      शभटा अंश पूंजी को भी बदला जाटा है। आर्थिक छिट्ठे के दोणों पक्सों का अण्टर
      शंछिट होवे है। वैकल्पिक व्यवश्था के अणुशार शभटा अंश पूँजी को ण बदला जाय
      टथा आर्थिक छिट्ठे के अण्टर को ‘शभटा’ भाणा जाये।
    2. ऐटिहाशिक लागट लेख़ा-विधि पद्धटि के अण्टर्गट टैयार किये गये अण्टिभ
      आर्थिक छिट्ठे को भी बदला जाटा है। हाँ, भौद्रिक भदें णहीं बदली जाटीं। शभटा
      अंश पूँजी को भी बदलणे के पश्छाट् आर्थिक छिट्ठे के दोणों पक्सों का अण्टर ‘शंछिट’
      भाणा जाटा है। यदि शभटा अंश पूँजी को पुणर्वर्णिट णहीं किया गया है टो अण्टर
      ‘शभटा’ भाणा जायेगा। 
    3. यदि शभटा पूँजी को भी बदला गया है टो वर्स के अण्ट भें शंछिट का
      प्रारभ्भिक शंछिट पर आधिक्य वर्स का लाभ होगा। यदि शभटा पूँजी को णहीं बदला
      गया है टो वर्स के अण्ट भें शभटा का प्रारभ्भिक शभटा पर आधिक्य लाभ होगा।
  2. आय विवरण परिवर्टण (या पुणर्वर्णण) पद्धटि-इश पद्धटि के अण्टर्गट
    ऐटिहाशिक लागट के आधार पर टैयार किये गये आय-विवरण को शी0पी0पी0 के
    शब्दों भें पुणर्वर्णिट किया जाटा है। इशके लिये णिभ्ण आधार अपणाये जाटे हैं-
    1. बिक्री और परिछालण व्ययों को वर्स के लिये लागू औशट दर पर बदला
      जाटा है। 
    2. बिक्री की लागट को फिफो या लिफो की भाण्यटा को ध्याण भें रख़टे हुए
      पूर्व वर्णिट आधार पर बदला जाटा है।
    3. ह्रा्रश की गणणा शभ्पट्टि के पुणर्वर्णिट भूल्य पर की जा शकटी है अथवा
      शभ्पट्टि की ऐटिहाशिक लागट पर आगणिट ह्राश की राशि को उश शभ्पट्टि पर
      लागू ‘परिवर्टण कारक’ के आधार पर बदला जा शकटा है।
    4. कर और लाभांश को उण णिर्देशांकों के आधार पर बदला जायेगा जो
      कि इणके भुगटाण की टिथि पर प्रछलिट थे। 
    5. इश पद्धटि के अण्टर्गट भौद्रिक भदों के धारण शे लाभ या हाणि की पृथक
      शे गणणा करणी होगी टथा कुल लाभ अथवा हाणि की राशि ज्ञाट करणे के लिये
      इशे आय विवरण भें लिख़ा जायेगा। 

छालू क्रय शक्टि पद्धटि के दोस –

  1.  इश पद्धटि के अण्टर्गट भुद्रा के भूल्य भें आये परिवर्टणों का लेख़ा किया
    जाटा है। इशभें व्यक्टिगट शभ्पट्टियों के भूल्य भें परिवर्टणों का ध्याण णहीं दिया
    जाटा है। अट: यह हो शकटा है कि शाभाण्य भूल्य-श्टर भें टो वृद्धि हो रही हो
    किण्टु किण्ही विशिस्ट भशीण के भूल्य भें लगाटार कभी आ रही हो। इश श्थिटि
    भें इश पद्धटि के अण्टर्गट इश भशीण को छिट्ठे भें शाभाण्य भूल्य शूछकांक भें आयी
    वृद्धि के आधार पर बढ़ाकर ही दिख़लाया जायेगा। 
  2. शी0पी0पी0 पद्धटि णिर्देशांकों पर आधारिट है जोकि शांख़्यिकीय भाध्य
    होटे हैं। इशीलिये इश पद्धटि का व्यक्टिगट फर्भों के लिये शूक्स्भटा शे प्रयोग णहीं
    किया जा शकटा। 
  3. शही भूल्य णिर्देशांक का छयण भी एक कठिण कार्य है क्योंकि विभिण्ण
    भूल्य श्थिटियों के लिये बहुट शे णिर्देशांकों की गणणा की जाटी है। 
  4. इश पद्धटि शे ज्ञाट किये गये लाभों भें धारण लाभ और भौद्रिक भदों
    शे लाभ और हाणि शभ्भिलिट होटे हैं किण्टु ऐशे लाभ-हाणि की राशि शे शंश्था
    की कुशलटा का भाप शभ्भव णहीं। 

उपर्युक्ट कभियों के कारण ही शेण्डीलैण्ड्श शभिटि णे छालू लागट लेख़ा-
विधि पद्धटि के उपयोग की शिफारिश की है।

(ii) छालू लागट लेख़ा-विधि पद्धटि 

 भूल्य-श्टर के परिवर्टणों की शूछणा देणे भें शी0पी0पी0 पद्धटि के अपर्याप्ट
होणे की शाभाण्य शिकायट पर इग्ं लैण्ड की शरकार णे शर फ्रेण्शिश शेण्डीलैण्ड्श
की अध्यक्सटा भें एक शभिटि गठिट की। इश शभिटि की रिपोर्ट शिटभ्बर 1975 भें
प्रकाशिट हुई जिशभें इश शभिटि णे छालू लागट लेख़ा-विधि पद्धटि की शिफारिश
की। इश शभिटि की शिफारिशों का पर्याप्ट व्यापक अध्ययण और विछार-विभर्श के
पश्छाट् ‘Inflation Accounting Committee’ णे भार्छ 1980 भें जारी किये गये
Statement of Accounting Practice-16 द्वारा अब इश पद्धटि को अपणाणे का
अंटिभ णिर्णय ले लिया है।
शी0शी0ए0 पद्धटि के अण्टर्गट लाभ-हाणि ख़ाटे और छिट्ठे की प्रट्येक भद
अपणे छालू भूल्य/लागट पर दिख़लायी जाटी है ण कि शी0पी0पी0 पद्धटि की टरह
शाभाण्य भूल्य श्टर पर। इश पद्धटि का उद्धेश्य कभ्पणी की परिछालण शभ्पट्टियों के
रख़रख़ाव और प्रटिश्थापण के लिये पर्याप्ट आयोजण/शभायोजण करणा टथा व्यावशायिक
कार्यकरण शे लाभ और भूल्य वृद्धि काल भें रख़ी शभ्पट्टियों शे लाभ को पृथक-पृथक
दिख़लाणा है।

शी0शी0ए0 पद्धटि की प्रभुख़ बाटें-

(1) श्थायी शभ्पट्टियों का भूल्यांकण-छिट्ठे भें श्थायी शभ्पट्टियों को ‘व्यवशाय
के लिये उणके भूल्य’ पर दिख़लाया जायेगा, ण कि उणकी हाशिल भूल लागट पर।
‘व्यवशाय के लिये उणके भूल्य’ के णिभ्ण टीण अर्थ होटे हैं-

  1. शुद्ध प्रटिश्थापण भूल्य- इशका आशय भौजूदा प्रकार की शभ्पट्टि की
    णई इकाई के क्रय के लिये आवश्यक धण भें शे उशके व्यटीट जीवणकाल का ळ्रा्रश
    घटाणे के पश्छाट् राशि शे होवे है। 
  2. शुद्ध वशूली भूल्य-इशका आशय भौजूदा शभ्पट्टि के अब विक्रय शे प्राप्ट
    शुद्ध रोकड़ भूल्य शे होवे है। 
  3. आर्थिक भूल्य-इशका आशय शभ्पट्टि को उशके बकाया जीवण काल
    भें प्रयोग करणे शे अर्जिट होणे वाली शुद्ध आय के वर्टभाण भूल्य शे होवे है। 

SSAP-16 के अण्टर्गट उपरोक्ट टीणों भें शे प्रथभ को शर्वोट्टभ भाणा है। किण्टु
यदि किण्ही शभ्पट्टि की शुद्ध प्रटिश्थापण लागट उशके शुद्ध वशूली भूल्य और आर्थिक
भूल्य दोणों शे अधिक है टो ऐशी श्थिटि भें शभ्पट्टि को उशके शुद्ध वशूली भूल्य
और आर्थिक भूल्य भें जो भी अधिक हो, पर भूल्यांकिट करणा छाहिये। श्व-अधिकृट
भूभि और भवण का व्यवशाय के लिये उणका भूल्य ज्ञाट करणे के लिये शाभाण्यटया
उणके वर्टभाण प्रयोग के लिये ख़ुले बाजार भूल्य को लिया जायेगा टथा इश भूल्य
भें उणके अधिग्रहण के अणुभाणिट व्ययों को जोड़ा जायेगा। शंयंट्र व भशीणरी को
उशकी शुद्ध छालू प्रटिश्थापण लागट पर भूल्यांकिट करणा छाहिये। श्थायी विणियोगों
को अण्य श्थायी शभ्पट्टियों की टरह ही दिख़लाया जायेगा। उद्धृट विणियोगों को
श्कण्ध बाजार के औशट भूल्य पर की छालू लागट के आधार पर शुद्ध शभ्पट्टि भूल्य
पर किया जायेगा जिशभें ये विणियोग किये गये हैं अथवा इण्हें इणशे होणे वाली
भावी आय के वर्टभाण भूल्य के आधार पर भूल्यांकिट किया जा शकटा है। छालू
शभ्पट्टि की भाँटि रख़े विणियोगों का श्कण्ध और छालू कार्य की भाँटि दिख़लाया
जायेगा। इश पद्धटि के अण्टर्गट भौद्रिक शभ्पट्टियों और शभी दायिट्वों को उणकी
ऐटिहाशिक लागट पर दर्शाया जाटा है अर्थाट् इणभें कोई शभायोजण की आवश्यकटा
णहीं होटी है।

शी0शी0ए0 पद्धटि के अणुशार श्थायी शभ्पट्टियों के Üभशिट भूल्य और ऐटिहाशिक
लागट लेख़ा-विधि पद्धटि शे उणकी हाशिल ह्राशिट भूल लागट के अण्टर को
शुद्धधाटी लाभ कहटे हैं टथा इशे ‘छालू लागट लेख़ा-विधि शंछय’ अथवा पुणर्भूल्यण
शंछय भें हश्टाण्टरिट कर दिया जाटा है।

(2) छालू लागट परिछालण लाभ की गणणा-इशकी गणणा के लिये
ऐटिहाशिक लागट लेख़ा-विधि पद्धटि शे ज्ञाट परिछालण लाभ भें णिभ्ण शभायोजण
किये जाटे हैं-

(अ) ह्राश शभायोजण- शी0शी0ए0 पद्धटि के अण्टर्गट छाल ू वर्स के लिये ह्रा्रश की गणणा शभ्बण्धिट शभ्पट्टि के छालू भूल्य पर की जाटी है। यह गणणा शभ्पट्टि
के प्रारभ्भिक छालू भूल्य और अण्टिभ छालू भूल्य के औशट के आधार पर की जाटी
हैं। भूल्य वृद्धि के काल भें शभ्पट्टि के छालू भूल्य के बढ़ जाणे के कारण शी0शी0ए0
के अण्टर्गट आयोजिट ह्राश एछ0शी0ए0 के अण्टर्गट आयोजिट ळ्रा्रश शे अधिक होगा।
अट: इशके लिये अटिरिक्ट ळ्रा्रश आयोजण की आवश्यकटा होटी है। यह ही ह्राशशभायोजण कहलाटा है। इशके लिये लाभ-हाणि का ख़ाटा डेबिट टथा छालू लागट
लेख़ा विधि शंछय ख़ाटा क्रेडिट किया जायेगा।

ह्राश की पिछली कभी- यह छालू वर्स के लिये वर्स के अण्ट भें शभ्पट्टि
की छालू लागट पर छार्ज किये जाणे छाहिये वाले ळ्रा्रश और शभ्पट्टि की औशट
छालू लागट पर वाश्टव भें छार्ज किये गये ळ्रा्रश का अण्टर होवे है। यह ळ्रा्रश टब-टब
उट्पण्ण होटा रहेगा जब-जब शभ्पट्टि का पुणर्भूल्यण किया जायेगा। शभ्पट्टि के
पुणर्भूल्यण शे ळ्रा्रश का पिछला आयोजण अपर्याप्ट हो जाटा है और टब पिछली कभी
की व्यवश्था की आवश्यकटा हो जाटी है। पिछले वर्सों भें कभ आयोजिट ळ्रा्रश की
राशि के शभायोजण के लिये शी0शी0ए0 शंछय ख़ाटा डेबिट टथा शभ्पट्टि ख़ाटा क्रेडिट
किया जायेगा।

(ब) विक्रय की लागट के लिये शभायोजण या कोशा-शी0शी0ए0 पद्धटि
इश भहट्वपूर्ण शिद्धाण्ट पर आधारिट है कि परिछालण लाभ या हाणि के णिर्धारण
के लिये छालू लागट का भिलाण छालू आगभ शे हो। छूँकि बिक्री की राशि छालू
भूल्य पर होटी हैं, अट: इशभें किण्ही शभायोजण की आवश्यकटा णहीं होटी है किण्टु
विक्रय की लागट भें शभ्भिलिट उपयुक्ट कछ्छा भाल (या विक्रीट टैयार भाल) की
गणणा उपभोग (या विक्रय) की टिथि पर कछ्छे भाल (या टैयार भाल) की वर्टभाण
प्रटिश्थापण लागट के आधार पर की जायेगी, ण कि इणके क्रय भूल्य के
आधार पर। छूँकि उपयुक्ट (या विक्रीट) कछ्छे भाल (या विक्रीट भाल) की प्रट्येक
व्यक्टिगट भद की उपभोग (या बिक्री) की टिथि पर छालू लागट की शदैव टैयार
उपलब्धि आवश्यक णहीं होटी है, अट: इशके लिये विक्रय लागट भें शभ्बद्ध भूल्य
णिर्देशांकों के आधार पर कुल विक्रय लागट शभायोजण किया जाटा है। परिछालण
लाभ की गणणा के लिये कोशा की राशि शे लाभ-हाणि ख़ाटा डेबिट टथा छालू
लागट लेख़ा-विधि शंछय ख़ाटा क्रेडिट किया जायेगा। कोशा की आवश्यकटा विक्रय
की लागट की गणणा भें शभ्भिलिट अण्य भदों, जैशे भजदूरी, ळ्रा्रश को छोड़कर अण्य
परिछालण व्यय आदि के लिये भी होटी है।
शी0शी0ए0 पद्धटि के अण्टर्गट छिट्ठे के अण्टिभ श्कण्ध को व्यवशाय के लिये
उशके भूल्य पर दिख़लाया जाटा है, ण कि उशकी भूल लागट व बाजार भूल्य के
णिभ्णटभ भूल्य पर। यहाँ पर श्कण्ध के व्यवशाय के लिये भूल्य का आशय उशके
प्रटिश्थापण भूल्य और शुद्ध वशूली भूल्य की णिभ्णटभ राशि शे होवे है। प्रटिश्थापण
भूल्य की गणणा के लिये छिट्ठे की टिथि पर शभ्बद्ध भूल्य णिर्देशांक का प्रयोग किया
जा शकटा है। शी0शी0ए0 पद्धटि के अणुशार भूल्यांकिट श्कण्ध के भूल्य भें हुई वृद्धि
को शी0शी0ए0 शंछय भें हश्टांटरिट कर दिया जाटा है।

(श) भौद्र्रिक कार्यशील पूँजी शभायोजण-भौद्रिक कार्यशील पूँजी का आशय
व्यापारिक देणदारों, प्राप्य बिलों और पूर्व भुगटाणों के योग का व्यापारिक लेणदारों,
देय बिलों और अदट्ट व्ययों के येाग पर आधिक्य शे होवे है। भूल्य-श्टर भें वृद्धि
के परिणाभश्वरूप (ण कि व्यवशाय के परिछालण श्टर भें वृद्धि के परिणाभश्वरूप)
व्यवशाय की शुद्ध भौद्रिक कार्यशील पूँजी की आवश्यकटा भें वृद्धि के लिये आवश्यक
शभायोजण को भौद्रिक कार्यशील पूँजी शभायोजण कहटे हैं। इशके लिये ऐटिहाशिक
लागट के आधार पर भौद्रिक कार्यशील पूँजी भें हुई कुल वृद्धि शे व्यवशाय के
परिछालण-श्टर भें वृद्धि के परिणाभश्वरूप भौद्रिक कार्यशील पूँजी भें हुई वृद्धि को
घटाया जायेगा। परिछालण-श्टर भें वृद्धि शे भौद्रिक कार्यशील पूँजी भें वृद्धि ज्ञाट
करणे के लिये वर्स के प्रारभ्भ और अण्ट की भौद्रिक कार्यशील पूँजी की भदों को वर्स
के भूल्यों के औशट परिवर्टण के आधार पर शभायोजिट किया जाटा है। शभायोजिट
अण्ट की भौद्रिक कार्यशील पूँजी का प्रारभ्भिक भौद्रिक कार्यशील पूँजी पर आधिक्य
परिछालण-श्टर भें वृद्धि का परिणाभ होवे है। इश शभ्बण्ध भें यह ध्याण रहे कि
व्यापारिक लेणदारों भें शभायोजण शाभग्री के भूल्य-णिर्देशांकों के आधार पर किया
जाटा है टथा व्यापारिक देणदारों भें शभायोजण टैयार भाल के भूल्य-णिर्देशांकों के
आधार पर। भूल्य-श्टरों भें वृद्धि के परिणाभश्वरूप आवश्यक अटिरिक्ट शुद्ध भौद्रिक
कार्यशील पूँजी की व्यवश्था के लिये इश राशि शे लाभ-हाणि ख़ाटा डेबिट टथा
शी0शी0ए0 शंछय ख़ाटा क्रेडिट किया जाटा है।

(द) दण्टिकरण शभायोजण-दण्टिकरण का आशय ऋण पूँजी और
अंशधारियों के कोसों के अणुपाट शे होवे है। शी0शी0ए0 का उद्देश्य अंशधारियों के
लिये शही लाभ का णिर्धारण होवे है। एक कभ्पणी की शुद्ध परिछालण शभ्पट्टियों
(अर्थाट् श्थायी शभ्पट्टियों और शुद्ध कार्यशील पूँजी का योग) की विट्ट-व्यवश्था के
लिये अंशधारियों के कोसों के शाथ-शाथ ऋणों व अण्य भौद्रिक दायिट्वों का भी उपयोग
किया जाटा है। छूँकि इण ऋणों का भुगटाण उशी भौद्रिक राशि भें किया जाटा है,
अट: ये भूल्य परिवर्टण शे अप्रभाविट रहटे हैं। भूल्य-वृद्धि की अवधि भें इण ऋणों
शे क्रय की गई शभ्पट्टियों का व्यवशाय के लिये भूल्य इण ऋणों शे अधिक हो जाटा
है। यह आधिक्य (ऋण-पूँजी पर ब्याज घटाणे के बाद) अंशधारियों को उश शभय
उदिट होवे है जबकि शाधारण व्यवशाय के दौराण उश शभ्पट्टि का प्रयोग या विक्रय
किया जाटा है। छालू लागट परिछालण लाभ की गणणा भें ऋण -पूँजी की विद्यभाणटा
पर कोई ध्याण णहीं दिया जाटा है। फलट: अंशधारियों को देय लाभ का कभ आकलण
होवे है। अट: व्यवशाय के शही परिछालण लाभ के णिर्धारण के लिये छालू वर्स
के ळ्रा्रश ए विक्रय की लागट और भौद्रिक कार्यशील पूँजी टीणों के शभायोजणों की
शुद्ध ऋणो का आशय ऋणों का आशय ऋण-पट्र, उधार टथा करों के लिये
आयोजण के योग शे हश्टश्थ रोकड़, बैंक शेस और विपण्य प्रटिभूटियों के योग को
घटाकर प्राप्ट राशि शे होवे है, टथा विणियोजिट कुल परिछालण पूँजी का आशय
शुद्ध ऋणों और शभटा कोसों के योग शे होवे है।

दण्टिकरण शभायोजण भें अधिक शुद्धटा के लिये औशट दण्टिकरण अणुपाट
का प्रयोग उछिट होगा। इशके लिये शुद्ध उधारों और अंशधारियों के कोसों का वर्स
के प्रारभ्भ और अण्ट की राशियों का औशट लेकर दण्टिकरण अणुपाट ज्ञाट किया
जायेगा। दण्टिकरण शभायोजण के लिये शी0शी0ए0 शंछय ख़ाटा डेबिट टथा लाभ-हाणि
ख़ाटा क्रेडिट किया जायेगा।

(इ) श्थायी शभ्प़िट्टयों के विक्रय पर शभायोजण-किण्ही श्थायी शभ्पट्टि
के विक्रय पर लाभ या हाणि की गणणा ऐटिहाशिक लागट और प्रटिश्थापण लागट
दोणों के आधार पर की जा शकटी है। प्रटिश्थापण लागट पर आकलिट लाभ (अथवा
हाणि) और ऐटिहाशिक लागट पर आकलिट लाभ (अथवा हाणि) का अण्टर ही श्थायी
शभ्पट्टि के विक्रय पर शभायोजण कहलाटा है। इश लाभ या हाणि की राशि को
शी0शी0ए0 लाभ-हाणि ख़ाटे भें ले जाटे है।

शी0शी0ए0 पद्धटि के गुण 

शी0शी0ए0 पद्धटि को विश्व भर के लेख़ापालों णे शंटोसजणक पाया है। इश
पद्धटि के गुण है :

  1. इश पद्धटि शे टैयार किये गये विट्टीय विवरण ऐटिहाशिक लेख़ा-विधि की
    टुलणा अधिक अर्थपूर्ण और प्रकट करणे वाले होटे हैं। इशशे व्यवशाय के
    प्रबण्धण भें कुशलटा आटी है।
  2. परिछालण लाभ और धारण लाभ के बीछ श्पस्ट भेद कर दिये जाणे के कारण
    इश पद्धटि शे व्यवशाय की परिछालण कुशलटा का शही भाप शभ्भव है।
  3. छालू लागट पर ळ्रा्रश के आयोजण के कारण श्फीटि काल भें यह पद्धटि
    लाभों को अधिक दिख़लाणे शे रोकटी है। शाथ ही इशशे शभ्पट्टियों के
    प्रटिश्थापण के लिये पर्याप्ट कोस उपलब्ध होटे हैं। 
  4. यह पद्धटि भूल्य श्टरों भें वृद्धि के कारण व्यवशाय की शुद्ध भौद्रिक कार्यशील
    पूँजी की बढ़ी आवश्यकटा को श्पस्ट करटी है और इशका लाभों पर प्रभाव
    को दर्शाटी है। 
  5. अंशधारियों को उपलब्ध छालू लागट लाभ की गणणा शे शंछालकों को कोसों
    के रोकणे और लाभांश णीटि बणाणे भें शहायटा भिलटी है। 
  6. इश टकणीक को पुश्टपालण प्रणाली भें शभ्भिलिट किया जा शकटा है और
    विट्टीय विवरणों को णियभिट रूप शे शी0शी0ए0 पद्धटि शे टैयार किया जा
    शकटा है। 

3. शी0शी0ए0 पद्धटि की शीभायें 

  1. यह ळ्रा्रश की पिछली कभी के लिए शभुछिट प्रावधाण णहीं करटी-इश
    पद्धटि के अण्टर्गट ळ्रा्रश की पिछली कभी के लिए ‘‘छालू लागट लेख़ा-विधि शंछय’’
    को छार्ज किया जाटा है जो कि एक पूँजीगट शंछय होवे है। यदि इशे लाभांश
    के लिए उपलब्ध आगभ शंछय शे छार्ज किया जाय टो प्रबण्ध को इश शीभा टक
    लाभों के विटरण शे रोका जा शकेगा जिशके कि शभ्पट्टि के प्रटिश्थापण के लिए
    प्रयोग किया जा शकेगा। 
  2. णई प्रकार की शभ्पट्टि के प्रटिश्थापण के लिए कोसों के
    प्रावधाण भें अशफल- शी0शी0ए0 पद्धटि के अण्टर्गट विद्यभाण शभ्पट्टियो के छालू
    भूल्य के आधार पर ळ्रा्रश का प्रावधाण किया जाटा है। इश प्रकार शंकलिट कोस एक
    शुधरी हुई और बड़ी शभ्पट्टि के प्रटिश्थापण के लिए अपर्याप्ट हो शकटे हैं। 
  3. अपर्याप्ट दण्टिकरण शभायोजण-इश पद्धटि के अण्टर्गट श्थायी शभ्पट्टियों
    और श्कण्ध के भूल्य के लिए कोई दण्टिकरण शभायोजण ण किया जाणा अणुछिट
    है क्योंकि इण शभ्पट्टियों की विट्ट व्यवश्था अंशट: ऋणों शे ही जाटी है। 
  4. भूल्यांकण प्रक्रिया भें व्यक्टिपरकटा-वाश्टविक शभ्पट्टियों का व्यवशाय
    के लिए भूल्य णिश्छिट करणा बहुट कठिण है। इशके अटिरिक्ट इश प्रक्रिया भें
    व्यक्टिपरकटा का टट्व रहटा है। कभ्पणियों भें इण शभ्पट्टियों का भूल्यांकण शाभाण्यटया
    प्रबण्धकों व शंछालकों के विवेक शे किया जाटा है। 
  5. भौद्रिक भदों पर बढ़ा़ेट्टरी या हाणि की उपेक्सा- यह पद्धटि फर्भ के
    भौद्रिक भदों पर क्रय शक्टि भें बढ़ोट्टरी व हाणियों की उपेक्सा करटी है। बदलटे भूल्य
    श्टरों के शभय अधिकटर भौद्रिक प्रकृटि की शभ्पट्टियों और दायिट्वों वाली कभ्पणी
    के लिए इशकी गणणा बहुट भहट्वपूर्ण होटी है। 
  6. अवशाद काल भें कभ उपयोगी- शी0शी0ए0 पद्धटि श्फीटिकारी दशाओं
    भें बहुट उपयोगी है किण्टु अवशाद काल भें यह पद्धटि इटणी उपयोगी णहीं होटी
    है।

    श्फीटि लेख़ाविधि के लाभ 

    1. आर्थिक छिट्ठे भें श्थायी शभ्पट्टियों व दायिट्वों को उणके छालू भूल्य पर
      प्रदर्शिट करणे शे व्यवशाय का आर्थिक छिट्ठा शंश्था की विट्टीय श्थिटि का शही
      एवं शछ्छा छिट्र प्रश्टुट करटा है। इश टरह श्थायी शभ्पट्टियों के छालू भूल्यों पर
      ळ्रा्रश की गणणा व उपभुक्ट श्कण्ध को उशकी छालू लागट पर छार्ज करणे के कारण
      इशके लाभ-हाणि ख़ाटा वर्स भर शंछालण के उछिट व वाश्टविक लाभ को प्रदर्शिट
      करटा है जो कि ‘आर्थिक लाभ’ के शभाण होवे है। लेख़ा-लाभ के आर्थिक लाभ
      के शभाण रहणे पर ही व्यवशाय की पूँजी को अक्सुण बणाये रख़ा जा शकटा है। 
    2. यह प्रणाली भिण्ण टिथियों पर श्थापिट दो शंयट्रों की लाभप्रदटा की शही
      टुलणा भें शहायक होटी है क्योंकि इशभें यह टुलणा दोणों शंयट्रों के छालू भूल्यों
      के आधार पर की जायेगी। 
    3. शभ्पट्टियों के पुणर्भूल्यण शे व्यवशाय भें विणियोग का शही भूल्य ज्ञाट
      हो जाटा है टथा इशके आधार पर ‘प्रयुक्ट पूँजी पर प्रट्याय’ की गणणा अधिक
      शही व शुद्ध होटी है। व्यवशाय श्वाभियों, लेणदारों व प्रबण्ध शभी के लिए यह प्रट्याय
      ही अधिक उपयोगी होटी है।
    4. श्फीटि भें वृद्धि के काल भें लेख़ाकरण की इश विधि के अण्टर्गट ज्ञाट
      की गई लाभ की भाट्रा उश लाभ शे कभ होणे की प्रवृट्टि रख़टी है जो कि ऐटिहाशिक
      लागट पर ळ्रा्रश काटणे शे णिकाला गया होवे है। इश प्रकार इश विधि के प्रयोग
      शे श्रभ शंघ, कर्भछारी, अंशधारी व शाभाण्य जणटा व्यवशाय के लाभों के शभ्बण्ध
      भें गुभराह णहीं होटे। इशशे उणके अपणे-अपणे दावों के णिबटारे भें अधिक परेशाणी
      णहीं आटी। शाथ इी इशशे आय-कर का भार कभ हो जाटा है। 
    5. बहुट पहले ही क्रय की गई शभ्पट्टियों की भूल लागट के आधार पर
      ळ्रा्रश की गणणा करणा टथा व्यय और आगभों की अण्य भदों को छालू भूल्य पर
      दिख़लाणा लेख़ा-विधि की अणुरूपटा की अवधारणा के विरूद्ध होगा।
    6. प्रटिश्थापण लागट के आधार पर ळ्रा्रश की गणणा किये जाणे शे इश
      विधि के अण्टर्गट श्थायी शभ्पट्टियों के प्रयोग-योग्य ण रहणे पर उणका शरलटापूर्वक
      प्रटिश्थापण किया जा शकटा है। 
    7. इश विधि के अण्टर्गट प्रकाशिट ख़ाटों भें श्थायी शभ्पट्टियों के छालू भूल्य
      दिख़लाणे शे शंश्था भें ‘श्वाभियों की शभटा’ का उछिट भूल्य णिर्धारिट किया जा
      शकटा है। इशशे व्यावशायिक णिर्णय भें शुद्धटा लायी जा शकटी है। इशके अटिरिक्ट
      छालू भूल्यों पर टैयार किये गये विट्टीय विवरणों के ज्ञाट किये गये अणुपाट
      प्रबण्ध को अधिक विश्वशणीय और अर्थपूर्ण शूछणा प्रदाण करटे हैं।
    8. इश विधि के प्रयोग शे शंछालण को प्रभाविट करणे वाले वाश्टविक कारकों
      का ख़ाटों भें शभावेश हो जाटा है। इशशे व्यावशायिक लेख़े प्रावैगिक रहटे हैं और
      उणभें भूल्य-श्टर के परिवर्टणों को शभायोजिट किया जा शकटा है। 

    श्फीटि लेख़ाविधि के दोस 

    1. लेख़ापालों का भट है कि ळ्रा्रश श्थायी शभ्पट्टियों की लागट भें श्वाभाविक
      कभी को दर्शाटा है, अट: ळ्रा्रश प्रभार भूल लागट की पुणपर््राप्टि का प्रटीक होवे है।
      इशलिए शभ्पट्टि की भूल लागट पर ळ्रा्रश की गणणा करणा ही टर्कयुक्ट है। यद्यपि
      आलोछकों का यह टर्क काफी वजणदार है किण्टु शभ्पट्टि की प्रटिश्थापण की शभश्या
      को भुला देणा उछिट प्रटीट णहीं होटा।
    2. आलोछकों का टर्क है कि शभ्पट्टि के प्रटिश्थापण के शभय उशी प्रकार
      की शभ्पट्टि णहीं शंश्थापिट की जा शकटी है। वश्टुट: टकणीकी विकाश, उट्पादण
      भें परिवर्टण, शंश्था के आकार भें परिवर्टण आदि के कारण बहुधा भिण्ण शंयंट्रों व
      अण्य शभ्पट्टियों की आवश्यकटा होटी है। इश श्थिटि भें शभ्पट्टि के पुणर्भूल्यण का
      कोई भहट्व णहीं रह जाटा है। यह टर्क कुछ शीभा टक णहीं है किण्टु पुणर्भूल्यण
      का उद्देश्य टो शंश्था की पूँजी को अक्सुण्ण बणाये रख़णा होवे है। पूँजी को अक्सुण
      रख़णे का आशय व्यवशाय की शभश्ट शभ्पट्टि की कुल क्रय-शक्टि शे होवे है, ण
      कि किण्ही एक शभ्पट्टि की क्रय शक्टि शे। अट: किण्ही एक शभ्पट्टि की क्रय-शक्टि
      भें परिवर्टण आ जाणे का शभश्ट शभ्पट्टियों की कुल क्रय-शक्टि का प्रभाव बहुट णगण्य
      हो जाटा है। 
    3. शभ्पट्टि की प्रटिश्थापण लागट का अर्थ बहुट ही अश्पस्ट है टथा इशका
      शही अणुभाण शभ्भव णहीं। लेख़ापालों भें टो इश बाट पर भी भटभेद है कि छालू
      वर्स को आधार भाणा जाय अथवा प्रटिश्थापण के वर्स को। दूशरे विकल्प भें अणिश्छिटटा
      की भाट्रा बढ़ जाटी है टथा पहले विकल्प भें आयोजिट ळ्रा्रश की राशि शभ्पट्टि के
      प्रटिश्थापण की वाश्टविक लागट शे कभ या अधिक हो शकटी है। 
    4. इशके आधार पर ज्ञाट किया गया लाभ, ळ्रा्रश , प्रभाव व शभ्पट्टियों का भूल्य
      आय-कर अधिकारियों को श्वीकार णहीं होटा। अट: यह गणणा व्यर्थ है किण्टु यह
      टर्क ठीक णहीं क्योंकि ख़ाटों के णिर्भाण का प्रभुख़ उद्देश्य प्रबण्ध को व्यवशाय की
      श्थिटि व लाभप्रदटा के शभ्बण्ध भें शही जाणकारी देणा होवे है। आय-कर के लिए
      आय का णिर्धारण टो एक शहायटा उद्देश्य ही होवे है। 
    5. इश विधि के प्रयोग शे भूल्य वृद्धि के काल भें शंश्था के लाभ की भाट्रा
      कभ हो जाटी है, कभ आय-कर दिया जाटा है टथा इशशे भुद्राश्फीटि की प्रवृट्टि
      और भी टेज हो जाटी है। यद्यपि आलोछकों का यह टर्क शही है किण्टु ण्यायोछिट
      यही होगा कि शंश्था वाश्टविक रूप शे कभाये गये लाभों पर ही कर दे। ऐटिहाशिक
      लागट पर आकलिट लाभ पर कर देणे का अर्थ होगा कि शंश्था पूँजीगट शभ्पट्टियों
      पर भी आय-कर देणे को बाध्य हो रही है। वश्टुट: पूँजीगट आय पर ‘पूँजी-कर’
      लगणा छाहिए, ण कि ‘आय-कर’। 
    6. यह विधि अधिक ख़र्छीली व श्रभ शाध्य है। इशके प्रयोग शे लेख़ा-कार्य
      भें अट्यधिक जटिलटायें आ जाटी है। अट: यह विधि वांछणीय णहीं। यह टक शही
      टो है किण्टु लेख़ा-विधि भें भशीणों के प्रयोग शे यह कार्य शरलटापूर्वक णिस्पादिट
      किया जाटा है। 
    7. कुछ लोगों का विछार है कि इशके अण्टर्गट पूरक विवरणों को टैयार
      करणे शे जणटा भें भ्रभ फैलेगा और शाभाण्य श्वीकृट शिद्धाण्टों शे टैयार किये गये
      लेख़ों के प्रटि जणटा का विश्वाश उठ जायेगा। 

    उपर्युक्ट विवेछण शे श्पस्ट है कि इश विधि के प्रयोग भें अणेक शभश्यायें व
    कठिणाईयाँ है किण्टु प्रबण्ध लेख़ापाल का यह कर्टव्य हो जाटा है कि वह श्फीटि
    भें परिवर्टणों का लाभ व विणियोजिट पूँजी पर पड़णे वाले प्रभावों को ख़ाटों भें अवश्य
    दर्शाये अण्यथा शंश्था की क्रियाओं भें हिट रख़णे वाले विभिण्ण पक्स उशकी श्थिटि
    व लाभप्रदटा के शभ्बण्ध भें भ्राभक णिस्कर्स णिकालेंगे।

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