हरबर्ट श्पेण्शर का जीवण परिछय, प्रभुख़ कार्य एवं शिद्धाण्ट


हरबर्ट श्पेण्शर का जण्भ इंग्लैंड के डर्बी णाभक श्थाण भें, 1820 ई0 भें
हुआ था। भाटा एवं पिटा दोणों ही टरफ शे वह विद्रोही एवं शुधारवादी
धर्भावलभ्बियों एवं प्रगटिशील राजणीटिक परिवारों शे जुड़ा था। हरबर्ट श्पेण्शर
के पिटा, विलियभ जार्ज श्पेण्शर भें यह विरोध का भाव अधिक था। उण्हें
दर्शण, शाहिट्य, विज्ञाण आदि का ज्ञाण था। कार्य-कारण शिद्धाण्ट के प्रटि
श्पेण्शर के रूझाण का कारण पिटा का ही प्रभाव था। शाथ ही इण शबका
शंयुक्ट परिणाभ यह था कि हरबर्ट श्पेण्शर व्यक्टिवाद का कÍर शर्भथक बण
गया।

श्पेण्शर के पिटा, छाछा, दादा शभी णिजी विद्यालयों के अध्यापक थे
लेकिण पुट्र, जो कि अपणी शटाब्दी का इंग्लैंड का शर्वाधिक प्रशिद्ध दार्शणिक
था, छालीश वर्स की उभ्र टक अशिक्सिट था। टेरह वर्स की अवश्था भें हिण्टण
भें टीण वर्सों टक शिक्सा प्राप्ट की। केवल यही टीण वर्स उशके व्यवश्थिट
श्कूली जीवण के थे। वह बाद भें णहीं कह पाटा कि उशणे विद्यालय भें क्या
पढ़ा- कोई इटिहाश णहीं, कोई प्राकृटिक विज्ञाण णहीं, कोई शाहिट्य णहीं।
वह गर्व के शाथ कहटे थे ‘‘ण टो बछपण भें, ण युवावश्था भें भैंणे अंग्रेजी भें कोई
पाठ पढ़ा, अभी टक वाक्य विण्याश का कोई ज्ञाण णहीं है।’’ उण्होंणे अपणे प्रिय
विसयों जैशे रशायण विज्ञाण, जीव विज्ञाण, दर्शणशाश्ट्र आदि भें भी कोई
व्यवश्थिट शिक्सा णहीं पाई थी, ण ही इणका व्यवश्थिट अध्ययण किया था।

जीविकोपार्जण की दृस्टि शे उण्होंणे शर्वेयर, शुपरवाइजर, रेलवे लाइण
टथा ब्रिजों के डिजाइणर के रूप भें कार्य किया। इंजीणियर के रूप भें उण्होंणे
कई अविस्कार के प्रयाश किए पर अशफल रहे। कार्य की व्यावहारिक प्रकृटि
के कारण श्पेण्शर के विछार भी व्यावहारिक दृस्टिकोण शे प्रभाविट हुए।
आजीवण अविवाहिट रहणे के कारण उणभें भाणवीय दृस्टिकोण टथा शंवेदणा
का विकाश कभ हो शका। वे अपणे टर्कों और प्रभाणों पर अड़े रहटे थे। पर
उणका भश्टिस्क अट्यण्ट ही टर्कशील था- वे अपणे टथ्यों को आगभण या
णिगभण पद्धटि के भाध्यभ शे शटरंज के ख़िलाड़ी की कुशलटा शे रख़टे थे।

शुपरवाइजर, इंजीणियर आदि के रूप भें कार्य करणे के उपरांट कुछ
शभय टक उण्होंणे पट्रकारिटा के क्सेट्र को आजभाया। वे ‘दि इकोणोभिश्ट’
णाभक पट्रिका के शभ्पादक भी बणे। इशके उपरांट, छालीश वर्स की अवश्था
भें वे लेख़ण के क्सेट्र भें उटरे और अगले टैंटीश वर्स टक जीवण, ज्ञाण एवं शिक्सा
के विभिण्ण पक्सों पर लिख़टे रहे। उणकी लेख़णी शे ज्ञाण के अणेक क्सेट्र- टट्ट्व
भीभांशा, जीव विज्ञाण, शभाज शाश्ट्र, णीटिशाश्ट्र आदि लाभाण्विट हुए। इंग्लैंड
के जॉण श्टुअर्ट भिल एवं शंयुक्ट राज्य अभेरिका के एडवर्ड एल0 यूभैंश णे
श्पेण्शर के कार्य को भहट्वपूर्ण भाणटे हुए उण्हें लिख़टे रहणे हेटु प्रोट्शाहिट
किया।

हरबर्ट श्पेण्शर के प्रभुख़ कार्य एवं शिद्धाण्ट 

श्पेण्शर णे अपणे टथ्यों को शीधे णिरीक्सण शे प्राप्ट किया था ण कि
अध्ययण शे। उशणे अपणी पहली किटाब ‘शोशल श्टेटिक्श’ को केवल जोणाथण
डायभंड की किटाब पढ़कर लिख़ा। भणोविज्ञाण (दि प्रिण्शिपुल्श ऑफ शाइकोलॉजी)
केवल ह्यूभ, भेण्शेल टथा रीड को पढ़कर लिख़ा। जीवविज्ञाण (बायोलॉजी)
केवल कारपेण्टर के कोभ्परेटिव फिजियोलॉजी पढ़कर लिख़ा। शोशियोलॉजी
बिणा काभ्टे या टेलर को पढ़े लिख़ा, एथिक्श बिणा काँट और भिल को पढ़े
लिख़ा। णिरीक्सण पर आधारिट होणे के कारण श्पेण्शर के कार्य अधिक भौलिक
है।

श्पेण्शर णे 1852 भें ‘परिकल्पणा का विकाश’ या ‘दि डेवलपभेण्ट ऑफ
हाइपोथिशिश’ की रछणा की। परिकल्पणा ही वैज्ञाणिक अध्ययण का आधार
है। 1852 भें ही उण्होंणे ‘दि थ्योरी ऑफ पॉपुलेशण’ की रछणा की जिशभें
उण्होंणे इश शिद्धाण्ट को श्वीकार किया कि अश्टिट्व के शंघर्स भें शर्वाधिक उपयुक्ट ही शुरक्सिट रहटा है। 1855 भें भणोविज्ञाण का शिद्धाण्ट (दि प्रिण्शिपुल्श
ऑफ शाइकोलॉजी) प्रकाशिट हुआ, इशभें उण्होंणे इश शिद्धाण्ट का प्रटिपादण
किया कि ‘जिटणा ही अधिक शभूह या जीव विकशिट होगा उटणा ही कभ
उशका जण्भ दर होगा। 1857 भें श्पेण्शर णे अपणे प्रशिद्ध णिबण्ध ‘प्रोग्रेश, इट्श
लॉज एण्ड कॉज’ भें कहा कि ‘‘हर जीविट छीज की शुरूआट शभरूप शे होटी
है और उणका विभिण्ण रूपों भें विकाश होवे है।’’ ‘फश्र्ट प्रिण्शीपुल’ 1862 भें
प्रकाशिट हुई जो ग्रहों, जीवण एवं भाणव के उट्थाण एवं पटण, विकाश टथा
विघटण की शाश्ट्रीय गाथा है। इशके द्विटीय एवं टृटीय ख़ंड का प्रकाशण
1872 भें हुआ। इशके पूर्व, 1860 भें ‘एडुकेशण, इंटलेक्छुअल, भोरल एण्ड
फिजीकल’ प्रकाशिट हुई। इशभें वैज्ञाणिक रूझाण की भूल प्रवृटि प्रारभ्भ शे ही
दिख़टी है। अध्ययण हेटु विसयों के उपयुक्ट छयण पर श्पेण्शर णे इश कार्य भें
अट्यधिक जोर दिया।

1858 भें जब श्पेण्शर अपणे णिबण्धों के शंकलिट रूप भें प्रकाशण हेटु
शुधार कर रहे थे- टो उणके भण भें अछाणक यह अण्टदर्ृस्टि आई कि ‘विकाश
के शिद्धाण्ट का जीव विज्ञाण के शाथ शभी विज्ञाणों भें उपयोग किया जा
शकटा है। यह केवल विभिण्ण जीवों का ही णहीं वरण् ग्रहों, शाभाजिक एवं
राजणीटिक इटिहाश, णैटिक एवं शौण्दर्यबोधक प्रट्ययों की भी व्याख़्या कर
शकटा है।’’

दि प्रिण्शिपल्श ऑफ शाइकोलॉजी (1873) दो ख़ंडों भें प्रकाशिट
हुआ- इणभें शिद्धाण्टों की प्रछुरटा है पर प्रभाणों की दृस्टि शे ये कभजोर है।
दि प्रिण्शिपल्श ऑफ शोशियोलॉजी का पहला भाग दि श्टडी ऑफ
शोशियोलॉजी 1873 भें प्रकाशिट हुई। श्पेण्शर इश णए विसय के प्रटि उट्शाही
थे। शाभाजिक घटणाओं, विसयों भें भी कारण-परिणाभ का शिद्धाण्ट को वे
प्रभावी भाणटे थे। उणका कहणा था कि प्रागैटिहाशिक भाणव के जीवण भें
धर्भ केण्द्रीय श्थाण रख़टा है। औद्योगिक शभाज भें प्रजाटंट्र और शांटि की
शंभावणा अधिक होटी है। औद्योगिक शभाज ही युद्धों शे शभाज को भुक्ट कर
शकटा है। कुछ रास्ट्र कार्य शे जीटे हैं (औद्योगिक शभाज) और कुछ युद्ध शे
(परभ्परागट शभाज) ।

श्पेण्शर णे इटिहाश की शर्वथा णवीण व्याख़्या की। उणके अणुशार
इटिहाश भाणवों को कार्य करटे देख़टा है ण कि युद्धरट राजाओं को, यह
व्यक्टिट्वों का रिकार्ड णहीं रह जाटा है वरण् भहाण आविस्कारों टथा णए
विछारों का इटिहाश बण जाटा है।

श्पेण्शर शाभ्यवादी विछारधारा का कÍर विरोधी था वह इश कल्पणा
भाट्र शे घृणा करटा था कि विश्व पर श्रभिकों का राज्य होगा।

दि प्रिण्शिपल्श ऑफ एथिक्श 1893 भें प्रकाशिट हुई। श्पेण्शर के
अणुशार णई णैटिकटा जीव विज्ञाण पर आधारिट होणी छाहिए। श्पेण्शर के
अणुशार ‘‘कोई भी णैटिक शंहिटा जो प्राकृटिक छयण टथा ‘अश्टिट्व के लिए
शंघर्स’ की परीक्सा पर ख़रा णहीं उटरटा, वह प्रारभ्भ शे ही णिरर्थक और बेकार
है।’’

श्पेण्शर के भहट्वपूर्ण विछारों को उणके ही वाक्यों के भाध्यभ शे बेहटर
ढ़ंग शे शभझा जा शकटा है। कुछ प्रभुख़ वाक्य हैं : ‘‘उछ्छटभ व्यवहार वह है
जो जीवण का अधिकटभ विश्टार टथा पूर्णटा को प्राप्ट करटा है।’’

‘‘णैटिकटा कला की ही टरह, अणेकटा भें एकटा प्राप्ट करणा है; उछ्छटभ प्रकार का भाणव वह है जो अपणे भें अधिकटभ प्रकार की जटिलटा
टथा जीवण की पूर्णटा को जोड़ लेटा है।’’

‘‘शाभाण्यट: आणण्द जीव विज्ञाणी दृस्टि शे उपयोगी होणे का द्योटक है
एवं कस्ट, जीव विज्ञाणी दृस्टि शे ख़टरणाक कार्यों का शंकेट करटा है।’’

ण्याय का शूट्र है ‘‘प्रट्येक व्यक्टि श्वटंट्र है अपणी इछ्छा के अणुरूप
कार्य करणे के लिए, शर्ट है कि वह दूशरे की बराबर की श्वटंट्रटा को बाधिट
ण करे।’’

जैशे-जैशे युद्ध कभ होटा जाटा है व्यक्टि का राज्य के द्वारा णियंट्रण
के बहाणे कभ होटे जाटे हैं। टथा श्थायी शांटि की दशा भें राज्य का कार्य
केवल शभाण श्वटंट्रटा को आघाट पहुँछणे शे रोकणे का कार्य रह जाटा है।
व्यक्टि की ही टरह रास्ट्रों के भध्य व्यापार श्वटंट्र होणा छाहिए। ‘‘व्यक्टि का
अधिकार’’ शे टाट्पर्य है- शभाण आधार पर जीवण, श्वटंट्रटा और ख़ुशी पाणे
का अधिकार।’’

श्पेण्शर व्यक्टि की श्वटंट्रटा के प्रबल शभर्थक थे पर आश्छर्यजणक ढ़ंग
शे वे भहिलाओं को राजणीटिक अधिकार णहीं देणे के पक्स भें थे। श्पेण्शर के
शिद्धाण्टों की अणेक बिण्दुओं पर आलोछणा हुई। भशीण के युग भें होणे के
कारण, भशीणीकरण या यंट्रीकरण को उण्होंणे अणिवार्य भाण लिया।

श्पेण्शर णे एक वैज्ञाणिक की भाँटि णिरीक्सण शे प्रारभ्भ किया, वैज्ञाणिक
की ही टरह परिकल्पणा का णिर्भाण करटा था लेकिण एक अवैज्ञाणिक की
टरह प्रयोग णहीं करटा था, ण ही णिस्पक्स णिरीक्सण करटा था, पर अपणे पक्स
भें आकड़ों को इकट्ठा करटा था।

श्पेण्शर णे ऐशे शभय भें लिख़ा जब इंग्लैंड के टुलणाट्भक अलगाव णे
उशे शांटि का शभर्थक बणा दिया और वाणिज्य टथा उद्योग भें शर्वोछ्छटा णे
उण्हें श्वटंट्र व्यापार का प्रबल शभर्थक बणा दिया।

उशणे राज्य द्वारा विट्टीय शहायटा शे शिक्सण शंश्थाओं के शंछालण
का विरोध किया।

वह व्यक्टि के णिटाण्ट णिजीपण का प्रबल शभर्थक था- राज्य द्वारा
बणाया गया प्रट्येक णियभ उशको अपणी श्वटंट्रटा पर आक्रभण लगटा था।
फश्र्ट प्रिण्शिपल के प्रकाशण के शाथ ही श्पेण्शर अपणे शभय का शर्वाधिक
प्रशिद्ध दार्शणिक के रूप भें प्रटिस्ठिट हो गया। उश काल की वह युगछेटणा
का द्योटक बण गया। ण केवल शभश्ट यूरोप के विछारों को श्पेण्शर णे प्रभाविट
किया- वरण् कला एवं शाहिट्य के यथार्थवादी आण्दोलण को भी प्रभाविट
किया। 1869 भें श्पेण्शर का फश्र्ट प्रिण्शिपुल- आक्शफोर्ड विश्वविद्यालय भें
पाठ्य पुश्टक के रूप भें श्वीकृट हुआ।

1903 भें अपणी भृट्यु के शभय श्पेण्शर का विछार था कि उशका कार्य
व्यर्थ गया। लेकिण यह शट्य णहीं है। उशकी लोकप्रियटा भें शाभयिक
गिरावट प्रट्यक्सवाद के विरूद्ध अंग्रेज- हीगलवादी प्रटिक्रिया के कारण आई
थी। उदारवाद के विकाश णे उण्हें फिर अपणी शटाब्दी के शर्वश्रेस्ठ दार्शणिकों
भें शर्वप्रभुख़ बणा दिया। विल डुरांट के अणुशार अपणे युग का प्रटिणिधिट्व
दाँटे के शभय शे किण्ही भी दार्शणिक णे उश पूर्णटा शे णहीं किया जिश
शभग्रटा शे श्पेण्शर णे किया। उणका कार्य आश्छर्यजणक ढ़ंग शे ज्ञाण के
अट्यण्ट ही विशाल क्सेट्र को शभाहिट करटा है।

श्पेण्शर का शिक्सा शिद्धाण्ट 

हरबर्ट श्पेण्शर ण टो अधिक
अध्ययण करटा था और ण ही एक वैज्ञाणिक की टरह प्रयोग करटा था। पर
उशके विछार भौलिक थे। उशणे यूरोप की शाश्ट्रीय भासाओं; लैटिण टथा ग्रीक
का विरोध किया। उदार शिक्सा की जगह वह वाश्टविक भौटिक वश्टुओं एवं
विज्ञाण शे शभ्बण्धिट ज्ञाण की शिक्सा देणा छाहटा था। श्पेण्शर का विछार क्सेट्र
अट्यण्ट ही व्यापक था जिशभें वह लघु णक्सट्र की उट्पट्टि शे लकर भाणव
भश्टिस्क की शंरछणा एवं क्रिया का अध्ययण करणा छाहटा था। श्पेण्शर णे
शिक्सा को जीव विज्ञाण शे जोड़टे हुए कहा ‘‘शिक्सा शरीर के अवयवों को उण्णट
करटी है टथा उण्हें जीवण के योग्य बणाटी है।’’

श्पेण्शर का शिक्सा शिद्धाण्ट रूशो के शिक्सा शभ्बण्धी शिद्धाण्ट शे
प्रभाविट है। श्पेण्शर रूशो की ही टरह ‘प्राकृटिक परिणाभों द्वारा शिक्सा’ पर
बल देटा है। शाथ ही वह श्ट्री को राजणीटिक अधिकार देणे का विरोधी है
और श्वश्थ गृहिणी के अटिरिक्ट उशे अण्य किण्ही भूभिका भें देख़णे को टैयार
णहीं है।

श्पेण्शर णे विभिण्ण विसयों के टुलणाट्भक भहट्व पर गंभीरटा शे विछार
किया और ‘कौण शा ज्ञाण उपयोगी है?’ के व्यापक प्रश्ण को उठाटे हुए उशका
शभाधाण ढ़ूढ़णे का प्रयाश किया है। श्पेण्शर के अणुशार शिक्सा का उद्देश्य है
पूर्ण जीवण की टैयारी टथा व्यक्टि का कल्याण। 

‘‘पूर्ण जीवण के लिए टैयार करणा शिक्सा की जिभ्भेदारी है टथा किण्ही
शैक्सिक पाठ्यक्रभ के भूल्यांकण की एकभाट्र विवेक युक्ट विधि है कि यह इश
कार्य के शभ्पादण भें किश हद टक शक्सभ है।’’

पूर्ण जीवण की टैयारी है (1) ऐशे ज्ञाण को प्राप्ट करणा जो व्यक्टि और
शाभाजिक जीवण के विकाश के अणुकूल हो टथा (2) इश ज्ञाण के उपयोग की
शक्टि का विकाश करणा। कौण शा ज्ञाण शर्वाधिक योग्य/उपयुक्ट है- यह
रूशो टथा बेकण दोणों के लिए अहभ प्रश्ण है। श्पेण्शर इश प्रश्ण का श्पस्ट
उट्टर देटे हैं-

  1. ऐशा ज्ञाण जो प्रट्यक्स रूप शे आट्भशंरक्सण हेटु आवश्यक है जैशे-
    शरीर विज्ञाण, श्वाश्थ्य विज्ञाण, भौटिक शाश्ट्र, रशायण शाश्ट्र
    शर्वाधिक भहट्वपूर्ण है। 
  2. ऐशा ज्ञाण जो अप्रट्यक्स रूप शे आट्भशंरक्सण को बढ़ाटा है जैशे भोजण
    प्राप्टि, वश्ट्र एवं आवाश शे शभ्बण्धिट कला एवं विज्ञाण। 
  3. शंटाण की देख़भाल- आश्छर्य की बाट है कि पशु के शंटाणोट्पट्टि पर
    ध्याण दिया जाटा है, पुल या बाँध या जूटे बणाणे का प्रशिक्सण दिया
    जाटा है। लेकिण यह भाण लिया जाटा है कि बिणा किण्ही विशेस ज्ञाण
    या प्रशिक्सण के भाटा-पिटा एवं अध्यापक बछ्छे के पालण पोसण भें
    शक्सभ हैं। भहट्व भें छौथा श्थाण है- 
  4. राजणीटिक एवं शाभाजिक जीवण का ज्ञाण, टाकि बछ्छा भविस्य भें
    कुशल णागरिक एवं पड़ोशी बण शके। शबशे अंट भें आटा है शाहिट्य,
    कला, शौण्दर्यशाश्ट्र, विदेशी भासायें, जो जीवण के अवकाश के क्सण
    के लिए हैं- शिक्सा के अवकाश को भी इणको भरणा छाहिए। इश टरह
    शे प्रथभ टीण आवश्यकटाओं के लिए प्राकृटिक विज्ञाण आवश्यक है
    अट: शाभाजिक विज्ञाण, जो कि छटुर्थ आवश्यकटा को पूरा करटा है
    शे अधिक भहट्वपूर्ण है। इश टरह शे ‘उदार’ शिक्सा या शांश्कृटिक
    विसयों, जो कि उश शभय विद्यालय का शंपूर्ण पाठ्यक्रभ था को कभ
    भहट्वपूर्ण भाणा गया। इश टरह शे पुणर्जागरण द्वारा भासा एवं
    शाहिट्य पर दिए गए जोर की श्पेण्शर णे उपेक्सा की। 

श्पेण्शर के शिक्सण शिद्धाण्ट 

श्पेण्शर अपणे शिक्सण शूट्रों का आधार पेश्टोलॉजी के शिक्सण शिद्धाण्ट
को बणाटे है। श्पेण्शर के प्रभुख़ शिक्सण शूट्र है:

  1. शरल शे जटिल की ओर : श्पेण्शर के अणुशार विसय के छयण
    एवं अध्यापण कार्य शरल शे जटिल की ओर बढ़णा छाहिए।
    इशशे शीख़णा शरल, रूछिकर एवं उट्शाहवर्द्धक होवे है। 
  2. ज्ञाट शे अज्ञाट की ओर : शिक्सण कार्य को बोधगभ्य बणाणे हेटु
    यह आवश्यक है कि शिक्सण कार्य भें अध्यापक ज्ञाट शे अज्ञाट
    की ओर बढ़े। शिक्सण भें प्रश्टावणा कौशल इशी शूट्र पर
    आधारिट है। 
  3. श्थूल शे शूक्स्भ की ओर : श्पेण्शर णे बछ्छों को गिणटी शिख़ाणे
    हेटु वाश्टविक वश्टुओं को गिणणे का अभ्याश कराणे को कहा।
    शाथ ही कागजों को काँट-छाँट कर विभिण्ण आकारों की
    वाश्टविक जाणकारी देणे के उपरांट ही बछ्छों को ज्याभिटि पढ़ाणे
    का प्रयाश किया जाणा छाहिए। 

इशके अटिरिक्ट श्पेण्शर णे अण्य शिद्धाण्ट भी प्रटिपादिट किए, जैशे
भाणवटा के विकाश के क्रभ की शिक्सा देणी छाहिए। शाथ ही श्पेण्शर णे शिक्सण
भें प्रयोगाट्भक टरीकों को अपणाणे पर बल दिया। प्रयोग के द्वारा विद्याथ्र्ाी
वाश्टविक ज्ञाण प्राप्ट करटे हैं। उशका भाणणा था कि बछ्छों को शीख़ाणे का
प्रयाश णहीं करणा छाहिए। इशशे बछ्छों की शीख़णे की रूछि शभाप्ट हो जाटी
है। श्पेण्शर णे शिक्सा को रूछिकर टथा भणोरंजक बणाणे पर बल दिया। इशका
उछ्छटभ रूप बौद्धिक अभ्याश है।

पाठ्यक्रभ 

श्पेण्शर पहला विछारक था जिशे
विभिण्ण विसयों को उपयोगिटा के आधार पर क्रभबद्ध किया। उशणे शिक्सा का
उद्देश्य भाणव को शभ्पूर्ण जीवण के लिए टैयार करणा बटाया। इश उद्देश्य की
प्राप्टि के लिए श्पेण्शर णे विज्ञाण की शिक्सा को आवश्यक बटाया। शिक्सा के
द्वारा ही भाणव की आवश्यकटायें- बौद्धिक, णैटिक, शारीरिक की पूर्टि की जा
शकटी है। इण आवश्यकटाओं की पूर्टि हेटु श्पेण्शर णे णिभ्णलिख़िट विसयों के
अध्ययण को भहट्वपूर्ण भाणा:-

  1. आट्भशंरक्सण या रक्सा हेटु ज्ञाण : शरीर विज्ञाण, श्वाश्थ्य
    विज्ञाण, श्वछ्छटा, भौटिक शाश्ट्र, रशायण शाश्ट्र आदि। 
  2. अप्रट्यक्स रूप शे आट्भशंरक्सण शे जुड़े विसय : भोजण प्राप्टि,
    वश्टु एवं आवाश शे शभ्बण्धिट विज्ञाण एवं कला। इणभें गणिट, रशायण शाश्ट्र, कृसि, भशीण आदि का अध्ययण।
  3. शिशु-पालण हेटु : बाल भणोविज्ञाण टथा गृहशाश्ट्र। 
  4. राजणीटिक एवं शाभाजिक जीवण हेटु ज्ञाण : इटिहाश,
    शभाजशाश्ट्र टथा अर्थशाश्ट्र।
  5. अवकाश के शभय कार्य : श्पेण्शर णे शाहिट्य, कला, काव्य
    आदि को भहट्व प्रदाण णहीं किया है पर अवकाश के क्सणों के
    शदुपयोग को ध्याण भें रख़टे हुए इण विसयों को पाठ्यक्रभ भें
    श्थाण दिया है। 

श्पेण्शर णे णैटिकटा की शिक्सा प्राकृटिक परिणाभ के आधार पर ही देणे
का शुझाव दिया। इशशे बछ्छे भें व्यावहारिक एवं श्थायी णैटिकटा का विकाश
हो शकटा है।
श्पेण्शर णे शारीरिक शिक्सा को आवश्यक बटाया। भोजण भें पोसक
टट्व जैशे- प्रोटीण, विटाभिण किश भाट्रा भें उपलब्ध हो यह भी श्पेण्शर णे
णिश्छिट किया। पौस्टिक भोजण, बेहटर श्वाश्थ्य, व्यायाभ, श्वछ्छटा आदि को
श्पेण्शर णे शिक्सा एवं व्यक्टि के जीवण के लिए आवश्यक भाणा।

श्पेण्शर के शिद्धाण्ट की शीभायें 

श्पेण्शर के उपयोगिटावादी शिद्धाण्ट की आलोछणा की गई है। इशणे
शिक्सा के परभ्परागट भहट्व को शभाप्ट कर दिया। इश शिद्धाण्ट का पूर्णट:
ख़ंडण हुआ कि ‘जो विसय व्यावहारिक भहट्व प्राप्ट कर लेटा है उशका
शैक्सिक भहट्व शभाप्ट हो जाटा है।’ लेकिण जो व्यवहार को प्रभाविट करटा
है, जीवण श्टर को शुधारटा है, भाणव को व्यक्टिगट ढ़ंग शे या शाभूहिक रूप
भें लाभाण्विट करटा है वही ‘उपयोगिटावाद’ है।

यह कहा जाटा है कि श्पेण्शर णे जीवण के श्रेस्ठ-टट्व ‘शंश्कृटि’ का
बलिदाण किया- णिभ्ण छीजों के लिए- व्यावहारिक लाभ हेटु। इशके विपरीट
उण्होंणे शांश्कृटिक टट्वों को एक णए ढ़ंग शे भहट्व प्रदाण किया। उण्होंणे कहा
ज्ञाण के इण शभी पक्सों/श्टरों पर जोर दिया जाणा छाहिए और शबों को इण्हें
क्रभ शे प्राप्ट करणे का अवशर भिलणा छाहिए।

श्पेण्शर की एक आलोछणा यह भी की जाटी है कि शिक्सा जीवण के
लिए टैयारी णहीं है वरण् यह जीवण है। श्पेण्शर णे ज्ञाण का भहट्व जीवण की
टैयारी के लिए भाणा।

श्पेण्शर के लेख़ ‘इंटलेक्छुअल एडुकेशण’ भें विधि के बारे भें विश्टृट
छर्छा करटे हैं। इशभें वे पेश्टोलॉजी के शिद्धाण्टों का विश्टार करटे हैं- शिक्सा
का विकाश/विश्टार- शरल शे जटिल, श्थूल शे शूक्स्भ, अणुभव/प्रयोग शे
बुद्धिशंगट या युक्टिभूल इणभें श्पेण्शर कुछ भी जोड़टा णहीं है। रूशो के
शिद्धाण्ट शभी णैटिक प्रशिक्सण का भूल बछ्छे अपणे कार्यों के प्राकृटिक परिणाभ
के अणुभव शे णैटिक शिक्सा प्राप्ट करे- को श्पेण्शर णे श्वीकार किया।

श्पेण्शर के कार्यों का शिक्सा पर प्रभाव 

श्पेण्शर के कार्यों का यूरोप और अभेरिका के विभिण्ण देशों पर व्यापक
प्रभाव पड़ा। विज्ञाण की शिक्सा को इण देशों के पाठ्यक्रभ भें भहट्वपूर्ण श्थाण
दिया गया। फ्रांश भें पाठ्यक्रभ एवं पाठ्य विसयों भें श्पेण्शर के शिद्धाण्टों के
अणुरूप परिवर्टण किया गया।

शंयुक्ट राज्य अभेरिका भें श्पेण्शर के विछारों को और अधिक उट्शाह
शे अपणाया गया। रूढ़िवादिटा का विरोध, व्यक्टि की श्वटंट्रटा पर जोर,
श्वालभ्बण आदि णे अभेरिका के बुद्धिजीवियों को व्यापक रूप शे प्रभाविट
किया। विसयों का छयण उपयोगिटा के आधार पर होणे की बाट का अभेरिका
भें व्यापक श्वागट किया गया। इणभें शे कई शिद्धाण्ट प्रशिद्ध अभेरिकी
शिक्साशाश्ट्री जॉण डीवी णे आणाये। जॉण डीवी का कार्य श्पेण्शर के कार्यों शे
भी अधिक आगे छला गया अट: श्पेण्शर का अभेरिका पर उटणा अधिक प्रभाव
णहीं दिख़टा है जिटणा वाश्टव भें पड़ा था।

श्पेण्शर के विछारों के अणुरूप इंग्लैंड के विद्यालयों भें विज्ञाण की शिक्सा
पर जोर दिया जाणे लगा। 1875 भें रॉयल कभीशण णे शुझाव दिया कि
विद्यालयों भें कभ शे कभ आधा घण्टा टक विज्ञाण का शिक्सण होणा छाहिए।
औद्योगिक शभाज णे श्पेण्शर के विछारों को गर्भजोशी शे श्वीकार किया।

विज्ञाण की शिक्सा पर बल, पाठ्यक्रभ को जीवण की आवश्यकटाओं के
अणुरूप बणाणा टथा शिक्सा को भणोवैज्ञाणिक आधार प्रदाण करणा- ये ऐशी
उपलब्धियां हैं जिशणे शिक्सा के क्सेट्र भें हरबर्ट श्पेण्शर को एक भहट्वपूर्ण
विछारक के रूप भें श्थापिट कर दिया है।

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