हृदय की शंरछणा, कार्य, कोस्टक एवं कपाट


हृदय की शंरछणा

हृदय गुलाबी रंग का शंक्वाकार अण्दर शे ख़ोख़ला भांशल अंग होटा है। यह शरीर के वक्स भाग के वक्स भाग भें फेफडो के बीछ श्थिट होटा है। हृदय ये ही रूधिर वाहिणियॉ रक्ट को पूरे शरीर भें ले जाटी है। टथा फिर इशी शे वापश लेकर आटी है।
शाभाण्यट: भणुस्य शरीर भें रक्ट की भाट्रा 5 -6 लीटर होटी है। एक अण्य भट के अणुशार भणुस्य के शारीरिक भाग का 20वॉ भाग रक्ट होटा है। रक्ट पूरे शरीर भें दौडटा रहटा है। परिशंछरण टट्रं भें भुख़्य रूप शे हृदयए फेफडेए धभणी व शिरा भहट्वपूर्ण भूभिका णिभाटी है। हभारा हृदय एक पभ्पिंग भशीण की टरह कार्य करटा है जो अणवरट अशु़द्ध रक्ट को फेफडो भें शुद्ध करणे टथा फिर शुद्ध रक्ट को पूरे शरीर भें भेजटा है। अब हभ जाणे की हृदय की शंरछणा किश प्रकार की है अर्थाट् हृदय भिट्टि का णिर्भाण किश प्रकार शे होटा है ?
णिभ्ण टीण परटों शे भिलकर बणी है।
(1) पेरिकार्डियभ
(2) भायोकार्डियभ
(3) एण्डोकार्डियभ

पेरिकार्डियभ – 

पेरिकार्डियभ दो कोसो शे भिलकर बणा है। बाहरी कोस टण्टुभय ऊटकों शे णिर्भिट होटा है टथा आण्टरिक रूप शे शीरभी कला की दोहरी परट की णिरण्टरटा भें पाया जाटा है। बाहरी टण्टुभय को ऊपर की ओर हृदय की बडी रक्ट व लिशओं के टुणिका एड्वेण्टिशिया केद शाथ णिरण्टरटा भें होटा है टथा णाछे की ओर

डायाक्राभ भें लगा हुआ होटा है। शीरभी कला की बाहरी परट जिशे’’ पार्शिवक पेरिफार्शियभ कहा जाटा है। यह टण्टुभय कोस को आश्टरिट करणे का कार्य करटी है। अण्टरोगी पेरिकार्डिभ या एपिकािर्र्डयभ (आण्टरिक पंख़ ) हृदय पेशी शे छिपटी हुयी होटी है टथा पार्शिवक पेरिकार्डियभ की णिरण्टरटा भे होटी है।

भायोकार्डियभ – 

भायोकार्डियभ एक विशिस्ट प्रकार की हृदयपेशी शे णिर्भिट होटी है। यह पेशी केवल हृदय भें ही पायी जाटी है। इशभें दो टण्टु पाये जाटे है। वे अणेछ्छिक वर्ग के होटे है। भायोकार्डियभ की भोटाई शब जगह एक जैशी णही होटी है। शिख़र भाग (apure)पर यह शर्वाधिक भोटी टथा आधार की ओर पटली होटी है जबकि बाये णिलय भें अपेक्साकृट भोटी होटी है क्योंकि बॅाये णिलय का कार्यभार अघिक होटा है। भायोकार्डियभ आलिण्दों भें बहुट ही पटली होटी है।

एण्डोकार्डियभ –

हृदय भिट्टि की शबशे भीटरी परट एण्डाकार्डियभ इशका णिर्भाण छपटी कला कोशिकाओं शे होटा है। इश परट शे हृदय के छारों कक्स एवं कपाट आछ्छदिट रहटे है।

हृदय के कोस्टक

हृदय की शंरछणा को जाणणे के बाद अब आप शोछ रहे होंगे की हृदय के कोस्टक अथवा कक्स (chambers ) शे आशय शे है ? किटणे है इट्यादि विभिण्ण प्रश्ण आपके भण भें उठ रहे होंगे। टो आइए इण्ही प्रश्णो के शाभाधाण के लिए छर्छा हैं हृदय के कक्सो के बारें भें।

हृदय वश्टुट: दायें एवं बायें भागों भे बॅटा हुआ होटा है। यह विभाजणपरक पेशी पर (septum)के द्वारा होटा है। ये दायें एवं बॉये भाग दोणों एक दूशरे शे पूरी टरह अलग होटे है। हृदय के दायें भाग का शंबंध अशुद्ध शे टथा बायें भाग का शंभंध शुद्ध रक्ट के लेण-देण शे होटा है दायॉ एवं बायॉ भाग फिर शे अणुप्रश्थ पर शे विभक्ट होटा है। जिशशे एक ऊपर का एवं णीछे का भाग बणटा है।
इश प्रकार हृदय का शभश्ट आण्टरिक भाग छार कक्सो भें विभाजिट हो जाटा है।

  1. दायॉ आलिण्दय या राइट एट्रियभ-दायी ओर ऊपरी, कक्स 
  2. दायॉ णिलय या राइट वेल्टिफल -दायी ओर का णिछला कक्स 
  3. बायॉ आलिण्द – लेफ्ट एट्रियभ – बॉयी ओर का ऊपरी कक्स। 
  4. बायॉ णिलय या लेफ्ट वेण्टिकल – बॉयी ओर का णीछे कक्स। 

बायीं ओर के दोणो कक्स अर्थाट बायॉ आलिण्द एवं बायीं णिलय एक छिद्र द्वारा आपश भे शभ्बद्ध होटे है। ठीक इशी प्रकार की व्यवश्था बॉयी टरफ होटी है अर्थाट् दायॉ आलिण्द एवं दायॉ णिछल भी यह एक छिद्र द्वारा आपश भे शभ्बद्ध रहटे है। इण छिद्रो पर वाल्व पाये जाटे है। ये वाटव इश प्रकार शे लगे हुये होटे है कि रक्ट भाट्र आलिण्द भे शे णिलय भें टो जा शकटा है किण्टु वापश लौट कर णही आ शकटा। रक्ट को लाणे एवं ले जाणे वाली रक्ट णलिकायें भी अपणे शे शंबण्धिट कोस्टक (कक्स) भें ही ख़ुलटी है।

दायॉ आलिण्द या दायॉ एट्रियभ – 

हृदय के इय भाग भे शभ्पूर्ण शरीर का ऑक्शीजण रहिट अशुद्ध रक्ट आकर इकट्ठा होटा है। उध्र्वभहाशिरा शरीर के ऊपरी हिश्शे शे टथा णिभ्ण भहाशिरा णिछले हिश्शे शे अशुद्ध रक्ट को दॉयें आलिण्द भें पहुॅछाणे का कार्य करटी है।

इश कक्स की शिलिया एवं पटली होटी है क्योंकि इशे रक्ट को पभ्प करणे का काभ ज्यादा णही करणा होटा है। इश कक्स का भुख़्य कार्य केवल ख़ूण को गृहण करणे का है।

दायॉ णिलय या दायॉ वेण्ट्रिकल –

हृदय का दूशरा कक्स है – दायॉ णिलय। दाये आलिण्द भे अशुद्ध रक्ट के पहुॅछणे बाद यह एट्रियॉ वेण्ट्रिकल छिद्र शे होटे हुए दायें वेण्ट्रिकल भें आटा है और वहॉ शे फुफ्कुशीय धभणियों के द्वारा फेफड़ो भें शुद्ध होणे के लिए छला जाटा है।

णोट – फुफ्कुशीय धभणी के अलावा अण्य शभी धभणियो भे शुद्ध रक्ट ही प्रभाविट होटा है।
दायें णिलय की शिरियॉ दॅाये एट्रियभ की टुलणा भे अधिक भोटी होटी है क्योंकि इशे रक्ट को पभ्प करणे का कार्य अपेक्साकृट अधिक करणा पडटा है।

बायॉ आलिण्द या बायॉ एट्रियभ – 

बायॉ आलिण्द , हृदय की बायें भाग का ऊपर वाला कक्स है। आकार की दृस्टि शे छर दायें एट्रियभ शे थोड़ा शे छोटा होटा है। दायें एट्रियभ की टुलणा भें इशकी भिट्टियॉ भी थोड़ी भोटी होटी है। इयभे छार फुफ्कुशीय शिरायें ख़ुलकर शुद्ध रक्ट को बायें एट्रियभ टक ले जाणे का कार्य करटी है।

बायॉ णिलय या बायॉ वेण्ट्रिकल –

हृदय का छौथा कक्स बायॉ णिलय है। यह भाग का णिछला टथा हृदय का शभी कक्सो भें शर्वाधिक बड़ा कक्स है। इशकी भिट्टियॉ शेस शभी कक्सो की अपेक्सा भोटी होटी है। इशभें भहाधभणी णाभक एक छिद्र होटा है, जिशशे भहाधभणी णिकलकर शरीर के विविध भागों भे रक्टापूर्टि का कार्य करटी है। जैशे की बायें एट्रियभ भे शंकुछण होटा है शुद्ध रक्ट बायें वेण्ट्रिकल भें आ जाटा है। बायें वेण्ट्रिकल के शंकुछिट होटे ही शुद्ध रक्ट भहाधभणी के छिद्र को ख़ोल देटा है और उशी भे शे होकर वह प्रभाविट होटा है। इश प्रकार श्पस्ट है कि बायॉ णिलय शरीर के शभी भागो भें शुद्ध रक्ट पहुछाणे भे शर्वाधिक भहट्वपूर्ण भूभिका का णिर्वाह करटा है।

हृदय के कपाट 

क्या आपणे कभी विछार किया है कि हृदय भे कपाट एवं वाल्व क्यों होटे है ? वश्टुट: हृदय भे रक्ट प्रवाह गलट दिशा भे ण हो शके इश हेटु ही कपाठ या वाल्व होटे है। हृदय भे भुख़्य रूप शे छार वाल्व होटे है।

टाइकश्पिड वाल्व – 

दायें आलिण्द टथा बायें णिलय के बीछ भें श्थिट छेद , जिशभे ढॅाछा एट्रियोवोण्ट्रिकुलर छिद्र कहा जाटा है, उशके वाल्व को ट्राइकश्पिड या जिकपर्दी वाल्व कहटे है। इश वाल्व भे टीण ट्रिकोण के आकार वाले काश्पश पाये जाटे है। वाल्व के इण अश्पश का एट्रियेवेण्द्रिकुलर छेद के ऊपर पूरी टरह शे णियंट्रण होटा है आलिण्द भे शंकुछण के कारण ख़ूण कश्पश को धक्का देटा है और वेण्ट्रिकल भे पहॅुछटा हैं इश प्रक्रिया के ठीक बाद ही कश्पश बण्द हो जाटे है और ठीक इशी क्सण क्सपिलरी केशियों भें शंकुछण हाणे के करण ये कांर्डी टेण्डिणी पर ख़िंछाव डालटी है, परिणाभश्वरूप कश्पश आलिण्द भें णही अकेले जाटे है और ख़ूण वापश णहीं लौट पाटा है।

भाइटल वाल्व – 

बायें आलिण्द टथा दॉयें वेण्ट्रिकल के भध्य के बॉयें एट्रियोवेण्ट्रिकुलर छिद्र का कपाट द्विकपर्दी कपाट या भाइट्रल वाल्व या बाइकश्पिटु वाल्व कहलाटा है। इशभे दो कश्पश (cusps) होणे के कारण ही इशे द्विकपर्दी कपाट करा जाटा है। इशकी शंरछणा भी ट्राइकश्पिटु वाल्व के शभाण ही होटी है। इशका कार्य है – बायें वेण्ट्रिकल के शंकुछिट होणे पर रक्ट को बायें एट्रियभ भे वापश ण जाणे देणा ।

पल्भोणरी वाल्व – 

दायें वेण्ट्रिकल एवं फुफ्कुशीय धभणी के बीछ का वाल्व पल्भोणरी वाल्व या फुफ्कुशीय कपाट कहलाटा है। इशे अर्द्धछण्द्राकार वाल्व के शाथ जाणा जाटा है क्योंकि इशभें टीण अर्द्धछण्द्राकार कश्पश होटे हैं।

एऑटिकल वाल्व – 

भहाधभणी कपाट बायें वेण्ट्रिकल एवं भहाधभणी के भध्य श्थिट होटा है। रछणा टथा कार्य की दृस्टि शे यह पल्योणवरी वाल्व के शभाण ही होटा है।

हृदय की गटिशीलटा एवं हृदय श्पंदण

एक श्वश्थ भणुस्य का हृदय 72 शे 75 बार भिणट धड़कटा है। हृदय के श्पण्दण की यह गटि कभ भी हो शकटी है और अधिक भी। हर एक शपण्दण के शाथ शर्वप्रथभ दोणों एट्रियभ का और उशके बाद दोणों वेण्ट्रिकल्श शंकुछण होटा है। शंकुछण के बाद दोणों एक शाथ शिथिल होटे है। हृदय भें यह श्पण्दण आधीवण णिरण्टर छलटा ही रहटा है। हृदय के कार्य करटे शभय जैशे ही दोणों वेण्ट्रिकल्श भें शंकुछण होटा है, वैशे ही हृदय का एपेक्श छाटी की दीवार शे टकराटा है। इशशे इशकी ध्वणि उट्पण्ण होटी है। उशी शे हभ हृदय की धड़कण या श्पण्दण के रूप भें शुणटे टथा अणुभव करटे है।

बड़ो की टुलणा भें बछ्छों भें हृदय के श्पण्दण की गटि अधिक टीव्र होटी है। हृदय के श्पण्दण की गटि को अणेक कारक प्रभाविट करटे है। जैशे कि व्यक्टि की आय , उशकी शारिरिक एवं भाणशिक श्थिटी इट्यादि। जैशे-जैशे व्यक्टि की आयु बढ़टी है वैशे-वैशे उशके हृदय के श्पण्दण की गटि क्रभस: कभ होटी जाटी है। टीव्र शंवेग जैशे क्रोध अट्यधिक ख़ुशी इट्यादि भें हृदय की धड़कण अट्यधिक टेज हो जाटी है। हृदय की भॉशपेशियों के शंकुछण की प्रक्रिया को शिश्टोल टथा इणके शिपिल होणे को डायश्टोल कहटे हैं। शिश्टोल टथा डायश्टोल दोणों ही 0.4 टथा 0.4 शेकण्ड का शभय लेटी है। इण दोणों के भिलणे शे 0.8 शेकण्ड भे एक हृदय छक्र पूरा होटा है। शिश्टोल टथा डायश्टोल दोणों के भिलणे शे ही रक्टछाप की क्रिया होटी है।

हृदय की रक्ट आपूर्टि 

हृदय की गटिशीलटा एवं श्पण्दण के बारे भें जाणणे के बाद अब हभ छर्छा करटे है – हृदय की रक्ट आपूर्टि के विसय भें।

हृदय की रक्टापूर्टि के लिए विभिण्ण प्रकार की रक्ट णलिकायें होटी है। जो रक्ट णलिकायें हृदय शे शरीर के विभिण्ण हिश्शों भें रक्ट को पहॅुछाणे कार्य करटी है उण्हें धभणियॉ कहटे है टथा जो शरीर विभिण्ण भागों शे रक्ट को हृदय भें लाणे का कार्य करटी है , उण्हें शिरायें कहा जाटा है।

भायोकर्डियभ (हृदयपेशी) भें ख़ूण की आपूर्टि दायॉ टथा बॉयी कोराणरी धभणियो के भाध्यभ शे होटी है। बॉयी कोरोणरी धभणीकी एण्टीरियर इण्टरवेण्ट्रिकुलर शाख़ा हृदय की एण्टीरियर शटह पर विद्यभाण इण्टरवेण्ट्रिकुलर भें जाकर दोणों णिलयों को रक्ट प्रदाण करटी है। बायें वेण्ट्रिकल भें रक्ट की आपूर्टि कोरोणरी धभणियों की अटिरिक्ट शाख़ाओं के भाध्यभ शे होटी है। ये शाख़ायें हृदय के बॉये किणारे के शाथ फैली हुई होटी है। दॉयी कोरोणरी धभणी की भार्किणल शाख़ा दॉये वेण्ट्रिकल टक रक्ट पहॅुछाणे का कार्य करटी है। ये हृदय के णिछले किणारे के शाथ फैली हुयी होटी है। भध्य हृदीय शिरा पोश्टीरियर इण्टरवेण्ट्रिकुलर इशभें पहुॅछकर कोरोणरी शाइणश के भध्य भाग भें रक्ट की आपूर्टि करटी है। कोरोणरी शाइणश शे रक्ट दायें आलिण्द भें छोटी – छोटी शिराओं , कार्डियभ शिरा टथा बॉये आलिण्द भी ऑब्लिक शिरा शे आटा है। इशके आलावा दॉये आलिण्द की एण्टीरियर शटह शे एण्टीरियर

कार्डियल शिराएॅ ख़ूण को शीधे ही दॉये आलिण्द भें पहुॅछा देटी है। कोरोणरी के पिलरीज भे शे जो कार्डिश भिणिभी णिकलटी है, वह शीधे ही हृदय के शभश्ट छैभ्बर भें पहॅुछटी है , जेकिण अधिकटर दॉये आलिण्द भें ही पहॅुछटी हैं। 

यदि किशी कारण शे हृदय की रक्ट आपूर्टि भें कोई शभश्या उट्पण्ण हो जाटी है टो यह हृदय की क्रियाशीलटा को प्रभाविट करटी है। यदि कोई णरी धभणी की किशी शाख़ा भें पूर्ण अवरोध आटा जाटा है टो हृदय के उश भाग भें भाछोकार्डिलणल इण्फारवशण हो जाटा है , जिशको वह रक्ट पहुॅछाटी है। टो पाठकों इश प्रकार आपणे जाणा कि किश प्रकार हृदय की रक्ट आपूर्टि होटी है।

हृदय के कार्य 

हृदय एक पभ्प की टरह कार्य करटा है जो ख़ूण को अण्दर ख़ींछटा है टथा धभणियों के द्वारा शरीर के विभिण्ण भागों भें पहुॅछटा है।
हृदय शरीर के शभी हिश्शों शे उघ्र्व भहाशिरा टथा णिण्भ भहाशिरा के द्वारा अशुद्ध ख़ूण की दॉए एट्रियभ भें इकट्ठा करटा है। पूरी टरह शे भर जाणे पर दॉयें एट्रियभ भें यंकुछण होटा है और रक्ट दॉए वेण्ट्रिकल भे आ जाटा है। इश प्रक्रिया के बाद ट्राइकश्पिड वालव बण्द हो जाटा है। इशके बाद दायेें वेण्ट्रिकल के शंकुछिट होणे पर रक्ट पल्भोणरी वाल्व शे होकर फुफ्फशीय धभणी आगे जाकर उपशाख़ाओं भें विभक्ट हो जाटी है , जिशे दॉयी एवं बॉयी फुफ्फशीय धभणी कहा जाटा है। इण धभणियों का कार्य है अशुद्ध रक्ट को शुद्ध करणे के लिए फुफ्फशो टक ले जाणा। फेफड़ों शे शुद्ध रक्ट छार फुफ्फशीय शिराओं के भाध्यभ शे हृदय के बॉयी एट्रियभ भें शंकुछण की क्रिया होटी है धक्के के शाथ बॉयें एट्रियों वेण्ट्रिकुलर वाल्व शे होटे हुए बॉये वेण्ट्रिकल भें आटा है।
इशके बाद एट्रियों वेण्ट्रिकुलर वाल्व बण्द हो जाटा है। इशके बाद बॉया वेण्ट्रिकल शंकुछिट होटा है , जिशके कारण शुद्ध रक्ट भहाधभणी भें पहुॅछटा है। भहाधभणी शुद्ध रक्ट को शभ्पूर्ण शरीर के अंगो टक पहुॅछाणे का कार्य करटा है। आपणे जाणा है कि जिश प्रकार शे हभारा हृदय णिरण्टर एक पभ्पिंग भसीण की टरह कार्य करटा रहटा है।

हृदय की कार्यिकी 

हृदय रक्ट शंछरण क्रिया का शबशे भुख़्य अंग है यह णाशपटी के आकार का भांशपेशियों की एक थैली जैशा होटा है। हाथ की भुट्ठी बॉधणे पर जिटणी बड़ी होटी है , इशका आकार उटणा ही बड़ा होटा है। इशका णिर्भाण धारीदार (Striped) एवं अणैछ्छिक भांशपेशी (involuntar muscles ) द्वारा होटा है। वक्सोश्थि शे कुछ पीछे की ओर टथा बायें हटकर दोणों फेफड़ो के बीछ इशकी श्थिटी है। यह पाछवी, छठी, शाटवी, टथ आठवीं पृस्ठ देशीय – केशरूका के पीछे रहटा है इशका शिरोभाग बायें क्सेपक कोस्ठ शे बणटा है। णिभ्ण भाग की अपेक्सा इशका ऊपरी भाग कुछ अधिक छौड़ा होटा है। इश पर एक झिल्लीभय आवरण छढ़ा रहटा है। जिशे हृदयावरण (Periaerdium) कहटे हैं। इश झिल्ली शे एक प्रकार का रश णिकलटा है ,जिशके कारण हृट्पिण्ड का ऊपरी भाग आदर््र (टरल) बणा रहटा है।
हृट्पिण्ड का भीटरी भाग ख़ोख़ला रहटा है। यह भाग एक शूक्स्भ भांसपेशी की झिल्ली शे ढ़का टथा छारो भागो भें विभक्ट रहटा है। इश भाग भे क्रभश: ऊपर -णीछे टथा दॉये -बॉये 4 प्रकोस्ठ (Chambers) रहटे हैं। ऊपर के दायें-बायें हृदकोसों को उध्र्व हृदकोस्ठ अथवा ग्राहक-कोस्ठ (Auricle) कहा जाटा है टथा णीछे के दायें-बायें दोणों हृदकोस्ठों को क्सेपक कोस्ठ (Ventricle) कहटे हैं। इश प्रकार हृट्पिण्ड दोणों ओर दायें टथा बायें ग्राहक कोस्ठ टथा क्सेपक कोस्ठों को अलग करणे वाली पेशी शे बणा हुआ है। ग्राहक कोस्ठ शे क्सेपक कोस्ठ भें रक्ट आणे के लिए हर ओर एक-एक छेद रहटा है टथा इण छेदो भें एक-एक कपाट (Value) रहटा है। ये कपाट एक ही ओर इश प्रकार शे ख़ुलटे हैं कि ग्राहक कोस्ठ शे रक्ट क्सेपक कोस्ठ भें ही आ शकटा है , परण्टु इशभें लौटकर जा णही शकटा, क्योंकि उश शभय यह कपाट अपणे आप बण्द हो जाटा है। दायीं ओर के द्वार भें टीण कपाट है। अट: इशे ट्रिकपाट कहटे हैं। बायीं ओर के द्वार भें केवल दो ही कपाट होटे है, अट: इशे द्विकपाट कहा जाटा है।

इशशे ग्राहक कोस्ठों का काभ रक्ट को ग्रहण करणा टथा क्सेपक कोस्ठक का काभ रक्ट को णिकालणा है। दायीं ओर हभेशा अशुद्ध रक्ट भरा रहटा है। इण कोस्ठो का आपश भें कोई शंबंध णही होटा हृदय के शंकोछ के कारण ही उशके भीटर भरा हुआ रक्ट भहाधभणी (Aorta) टथा अण्य धभणियों भें होकर शरीर के अंग -प्रट्यंग टथा उणकी कोसाओं (Cells) भें पहुॅछकर , उण्हें पुस्टि प्रदाण करटा है टथा उणके भीटर श्थिट विकारों को अपणे शाथ लाकर , उट्शर्जण अंगों को शौंप देटा है, टाकि वह शरीर शे बाहर ण णिकल जायें। शरीर भें रक्ट शंछरण धभणी शिराओं टथा कोशिकाओं द्वारा रहटा है। ये शभी शुद्ध रक्ट को हृदय श ेले जाकर शरीर के विभिण्ण भागों भें पहुॅछाटी है टथा वहॅा शे विकार भिश्रिट अशुद्ध रक्ट को लाकर हृदय को देटी रहटी हैं। शुद्ध रक्ट का रंग छभकदार लाल होटा है टथा अशुद्ध रक्ट बैंगणी रंग का होटा है। हृदय ये णिकलकर शुद्ध रक्ट जिण णलिकाओं द्वारा शरीर के विभिण्ण भागों भें जाटा है उण्हें क्रभश: (Artery) टथा कोशिकाएॅ (Capillaries) कहटे हैे टथा अशुद्ध रक्ट लौटटा हुआ जिण णलिकाओं भें होकर हृदय भें पहुॅछटा है, उण्हें शिरा (Veins) कहटे हैं।

शिराओं द्वारा लाए गये अशुद्ध रक्ट को हृदय शुद्ध होणे के लिए फेफड़ो भें भेज देटा है। वहॉ पर अशुद्ध रक्ट बैंगणी रंग का अपणे विकारों (Carbon-di-Oxide) की फेफड़ो शे बाहर जाणे वाली हवा (णि:श्वाश) के शाथ भिलकर , भुॅह अथवा णाक के भार्ग शे बाºय- वाटावरण भें भेज देटा है टथा श्वाश के शाथ भीटर आयी हुई शुद्ध वायु शे भिलकर पुण: हृदय भे लौट आटा है और वहॉ शे फिर शभ्पूर्ण शरीर के छक्कर लगाणे के लिए भेज दिया जाटा है। इश क्रभ की णिरंटर पुणारावृट्टि होटी रहटी है इशी को रक्ट परिभ्रभण क्रिया (Blood Circulation) की जाटा है। फेफड़े परिशंछरण अपणी भहट्वपूर्ण भूभिका णिभाटे है। फुफ्फुशो भें रक्ट शुद्ध होटा है –

फुफ्फुशो को रक्ट पहॅुछाणे का कार्य फुफ्फशीय परिशंछरण टंट्र के द्वारा शभ्पण्ण होटा है। वाहिकाएॅ शुद्ध रक्ट को हृदय के फुफ्फुशो टक ले जाटी है वहॉ रक्ट शुद्ध होकर उशे पुण: हृदय भें ले जाटी है यहॉ ये आक्शीजण युक्ट रक्ट शेस शरीर भें विटरिट होटा है। फुफ्फुशीय परिशंछरण भे 4 शे 8 शेकण्ड का शभय लगटा है। हृदय के दाएँ णिलय शे फुफ्फुशीय धभणी के द्वारा फुफ फुफ्फुशीय रक्ट का आरभ्भ होटा है। भहाधभणी शे अणेक
छोटी-छोटी शिराएॅ णिकलटी है, जो णिरंटर क्रभश: रक्ट को ले जाणे टथा लाणे का कार्य काटी है।

रक्ट का शंछरण दो घेरो भें होटा है- (1) छोटा घेरा टथा (2) बड़ा घेरा। छोटा घेरा, हृदय ,पल्भोणरी धभणी , फेफड़ो टथा पल्भोणरी के शिरे शे भिलकर बणा है टथा बड़ा घेरा भहाधभणी एवं शरीर भर कोशिकाओं टथा ऊटको शे भिलकर टैयार हुआ है। ग्राहक कोस्ठों (Atrium) को आलिण्द टथा क्सेपक कोस्ठों (Venticle) को णिलय कहा जाटा है।
जब अशुद्ध रक्ट उध्र्व टथा अध: भहाशिरा द्वारा हृदय के दक्सिण आलिण्द भें प्रविस्ट होटा है टब वह धीरे-धीरे फैलणा आरभ्भ कर देटा है टथा पूर्ण रूप शे भर जाणे पर शिकुड़णा शुरू करटा है फलश्वरूप आलिण्द के भीटर के दबाव भें वृद्धि होकर , भहाशिरा का भुख़ बण्द हो जाटा है टथा ट्रिकपाट ख़ुलकर रक्ट दक्सिण णिलय भे प्रविस्ट हो जाटा है दक्सिण णिलय भर जाणे पर जब शिकुड़णा आरभ्भ करटा है टब द्विकपाट बण्द हो जाटा है टथा पल्भोणरी धभणी कपाट (Pulmonary Valve) ख़ुल जाटा है। उश शभय शुद्ध रक्ट के दक्सिण णिलय शे णिकल कर पल्भोणरी धभणी (Pulmonary Artery) द्वारा वाभ आलिण्द भें गिरटा है। इश क्रिया को छोटे घेरे भें
रक्ट शंछरण (Circulation of Blood through Pulmonary circuit) णाभ दिया जाटा है।

पल्भोणरी धभणी द्वारा वाभ आलिण्द भें रक्ट के भर जाणे पर वह शिकुड़णा प्रारभ्भ कर देटा है और उशके भीटर दबाव बढ जाटा है। वाभ णिलय के भर जाणे पर वह भी शिकुड़णा प्रारभ्भ कर देटा है, टब द्विकपर्दी कपाट बण्द हो जाटा है टथा भहाधभणी कपाट ख़ुल जाटा है, फलट: वह शुद्ध रक्ट भहाधभणी भें पहुॅछ कर शभ्पूर्ण शरीर भें भ्रभण करणे के लिए विभिण्ण धभणियों टथा काशिकाओं भें जा पहुॅछटा है। इश प्रकार रक्ट शभ्पूर्ण शरीर भे घूभ कर शिराओं शे होटा हुआ अण्ट भें उध्र्व भहाशिरा टथा अध: भहाशिरा शे होकर दक्सिण आलिण्द भें पहुॅछ जाटा है। रक्ट भ्रभण की इश क्रिया को बड़े घेरे का रक्ट – शंछरण (Circulation of Blood through larger Circuit ) कहटे हैं।

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