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वायुमंडल में पाई जाने वाली प्रमुख गैस

वायु अनेक प्रकार की गैसों जैसे – नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बनडाइऑक्साइड, जल वाष्प, अन्य गैसों तथा धूल, आदि का मिश्रण है। ऑक्सीजन को श्वास लेने के दौरान लिया जाता है और विभिन्न जीवन प्रक्रियाओं हेतु ऊर्जा प्राप्त करने के लिए ग्लूकोज को खंडित करने हेतु उपयोग किया जाता है। परिणामस्वरूप, कार्बनडाइऑक्साइड श्वास द्वारा बाहर आती है;… Read More »

वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 का विवरण

वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 (Act No. 14 of 1981) के निर्माण की पृष्ठभूमि जून 1972 में राष्ट्र संघ द्वारा स्टॉकहोम (स्वीडन) में ‘मानव पर्यावरण’ सम्बन्धी वही अन्तर्राश्ट्रीय कान्फ्रेन्स रही है जिसमें मानव जीवन के लिए उसे प्रदूषण से मुक्त रखने की बात स्वीकार की गई थी। बढ़ते औद्योगीकरण के कारण पर्यावरण में… Read More »

वामपंथी आंदोलन क्या है?

भारत में वामपंथी आंदोलन का उद्भव बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में हुआ। सन् 1917 ई. में हुई रूस की साम्यवादी राज्यक्रांति की सफलता ने भारतीय उग्र राष्ट्रवादियों की भावना को समाजवाद की आरे मोड़ दिया। असहयोग आंदोलन की असफलता ने उनके इस विचार को दृढ़ता प्रदान की। प्रथम महायुद्ध के पश्चात् बढ़ती हुई मंहगाई और… Read More »

वाणिज्यवाद क्रांति के प्रमुख लक्षण, महत्व, परिणाम और दोष

व्यापारिक क्रांति ने एक नवीन आर्थिक विचारधारा को जन्म दिया। इसका प्रारंभ सोलहवीं सदी में हुआ। इस नवीन आर्थिक विचारधारा को वाणिज्यवाद, वणिकवाद या व्यापारवाद कहा गया है। फ्रांस में इस विचारधारा को कोल्बर्टवाद और जर्मनी में केमरलिज्म कहा गया। 1776 ई. में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एडम स्मिथ ने भी अपने ग्रथ ‘वेल्थ ऑफ नेशस में… Read More »

वाकाटक राजवंश का इतिहास

तीसरी शताब्दी ई0 के मध्य से छठीं शताब्दी ई0 के आरम्भ तक दकन एवं मध्य भारत पर शासन करने वाले वाकाटक राजवंश की गणना प्राचीन भारत के अत्यन्त शक्तिशाली साम्राज्यों में की जाती है। वाकाटकों के इतिहास का ज्ञान मुख्य रूप से उनके अभिलेखों के माध्यम से होता है। सन् 1836 ई0 में प्रवरसेन द्वितीय… Read More »

वसा के मुख्य स्रोत एवं शरीर में वसा के कार्य

वसा किन्हीं एक एल्कोहल जैसे- सिसदीन तथा ग्लिसरॉल तथा एक वसीय अम्ल के संयोजन से बनते हैं। वसीय अम्लों में कार्बन तथा हाइड्रोजन अधिक मात्रा में तथा आक्सीजन अपेक्षाकृत कम मात्रा में उपस्थित होने से सभी वसाओं की ज्वलनशक्ति बहुत अधिक होती है। वसाओं में ऑक्सीजन तथा कार्बन- हाइड्रोजन का अनुपात भिन्न होने के कारण… Read More »

वर्ण व्यवस्था क्या है?

वर्ण व्यवस्था के अन्तर्गत समाज का चार भागों में कार्यात्मक विभाजन किया जा सकता है, यथा ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्र। यह कार्यात्मक विभाजन मूलत: मनुष्य की चार स्वाभाविक इच्छाओं यथा ज्ञान, रक्षा, जीविका एवं सेवा की पूर्ति के लिये किया गया। साधारणतया लोग वर्ण एवं जाति को एक ही मान लेते हैं और एक… Read More »

भारत के वनों का वर्गीकरण

जलवायु तथा उच्चावचन की भिन्नताओं के कारण भारत में प्राकृतिक वनस्पति की बहुत विविधता मिलती हैं। ‘‘ धरातल पर पाये जाने वाले पेड़, पौधे, घास, झाड़िया एवं लताओं का समूह वन कहलाता हैं।’’ सन् 1999 के आंकड़ों के अनुसार 6.37 करोड़ हैक्टेयर भूमि अर्थात 19.39 प्रतिशत भाग में फैला हुआ हैं। भारत के वनों का… Read More »

वंशागति के सिद्धांत एवं विविधता

एक मनुष्य का बच्चा मनुष्य की ही तरह क्यों दिखाई देता है और माता-पिता, दादा दादी या चचेरे भाई या चाचा-चाची के सदृश मिलता जुलता ही दिखाई देता है? एक बिल्ली का बच्चा छोटी बिल्ली की तरह क्यों दिखाई देता है? क्यों एक अंकुर अपने जन्मदाता पौधे की समान, पत्तियां, तना या फूल अधिग्रहण करता… Read More »

लोहा के प्रकार

लोहा के प्रकार लोहा के प्रकार मेग्नेटाइट- यह सबसे उत्तम कोटि का अयस्क हैं। इसमें धातु अंश 70 प्रतिशत पायी जाती हैं। इसका रंग काला होता हैं।  हैमेटाइड- यह लाल,कत्थर्इ, रंग का होता हैं। इसमें लोहांश 60 से 70 प्रतिशत पायी जाती हैं।  लिमोनाइट- इसका रंग पीला या भूरा होता हैं। इसमें लोहांश की मात्रा… Read More »