Category Archives: अंतर्राष्ट्रीय राजनीति

अंतरराष्ट्रीय राजनीति का अर्थ, परिभाषा एवं स्वरूप

साधारण शब्दों में अंतर्राष्ट्रीय राजनीति का अर्थ है राज्यों के मध्य राजनीति करना। यदि राजनीति के अर्थ का अध्ययन करें तो तीन प्रमुख तत्व सामने आते हैं – (i) समूहों का अस्तित्व; (ii) समूहों के बीच असहमति; तथा (iii) समूहों द्वारा अपने हितों की पूर्ति। इस आशय को यदि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आकलन करें तो… Read More »

अंतरराष्ट्रीय राजनीति के सिद्धांत एवं उपागम

आदर्शवादी उपागम फ्रांसी क्रांति (1789) व अमेरिकी क्रान्ति (1776) को आदर्शवादी दृष्टिकोण की प्रेरणा माना गया है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कौण्डरसैट के ग्रंथ की 1795 में विश्व समाज की रचना को आधार माना गया है। इसके प्रमुख समर्थक रहे हैं – कौण्डरसैट, वुडरो विल्सन, बटन फिल्ड, बनार्ड रसल आदि। इनके द्वारा एक आदर्श विश्व की… Read More »

राष्ट्रीय हित क्या है?

राष्ट्रीय हित अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति के अध्ययन की महत्वपूर्ण धारणाओं में से एक है। राष्ट्र हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए क्रिया तथा प्रतिक्रिया करते हैं। राष्ट्रीय हित विदेश नीति के निर्माण का आधार बनते हैं। विदेशों से सम्बन्ध भी राष्ट्रीय हित को सम्मुख रख कर ही बनाए जाते हैं। प्रत्येक… Read More »

राष्ट्रीय शक्ति के तत्व एवं सीमाएँ

साधारण शब्दों में व्यक्ति के संदर्भ में शक्ति से अभिप्राय है जब एक व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह दूसरे व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह को नियन्त्रित करने और उनसे मनचाहा व्यवहार कराने और उन्हें अनचाहा व्यवहार करने से रोकने की सामर्थ्य या योग्यता से है। जब यही बात सभी व्यक्ति मिलकर राष्ट्र के बारे में… Read More »

नई अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था क्या है?

नई अन्तर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की स्थापना का प्रमुख उद्देश्य वर्तमान भेदभावपूर्ण आर्थिक सम्बन्धों का निर्धारण नए सिरे से करना है। नई अन्तर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के समर्थक देशों का मानना है कि विकसित और विकासशील देशों में गहरी आर्थिक असमानता है। वर्तमान व्यवस्था धनी या विकसित देशों के हितों की ही पोषक है। नई अन्तर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का उद्देश्य… Read More »

दक्षिण-दक्षिण सहयोग क्या है?

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद विकासशील देशों के लिए ‘दक्षिण’ शब्द का प्रयोग किया जाने लगा। 1945 के बाद समस्त विश्व राजनैतिक शब्दावली में दो भागों – उत्तर (विकसित) तथा दक्षिण (विकासशील) में बंट गया। उत्तर में सभी साम्राज्यवादी ताकतें या विकसित धनी देश थे। उत्तर में साम्राज्यवादी शोषण के शिकार रहे गरीब देश थे। जब… Read More »

शीत युद्ध के कारण और इसके प्रभाव

शीतयुद्ध की अवधारणा का जन्म द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति के बाद 1945 में हुआ, यह अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्धों की एक सच्चाई है जो अमेरिका तथा सोवियत संघ के पारस्परिक सम्बन्धों को उजागर करती है। यह द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद के अंतर्राष्ट्रीय संबंधों का एक नया अध्याय है। इसे एक नया अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक विकास का नाम भी… Read More »

उत्तर-दक्षिण संवाद का अर्थ

भौगोलिक आधार पर समस्त संसार दो गोलार्द्धों – उत्तरी गोलार्द्ध तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में विभाजित है। उत्तरी गोलार्द्ध में अमेरिका, ब्रिटेन तथा अन्य यूरोप के विकसित व धनी देश आते हैं तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में लैटिन अमेरिका, अफ्रीका तथा एशिया के अविकसित, पिछड़े हुए, गरीब तथा विकासशील देश शामिल हैं। राजनीतिक शब्दकोष में विकसित देशों… Read More »

राष्ट्रीय शक्ति का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं, महत्व, प्रकार

दूसरो को प्रभावित कर सकने की क्षमता का नाम ही शक्ति हैं। जब कोई व्यक्ति दूसरों को प्रभावित करके उनसे अपना वांछित कार्य करा लेता है तथा अवांछित से उन्हें रोकता है तो ऐसे व्यक्ति को हम शक्ति सम्पन्न कहते हैं। यदि शक्ति को व्यक्तिगत संदर्भ में न लेकर राष्ट्रीय संदर्भ में ले तो इसे… Read More »

राष्ट्रीय सुरक्षा क्या है?

राष्ट्रीय सुरक्षा एक मान्यता है जिसे प्रत्येक देश प्राप्त करने का प्रयत्न करना है। परन्तु प्रश्न यह है कि राष्ट्रीय सुरक्षा किन खतरों के विरूद्ध प्राप्त करेन चाहिए या उससे किन मान्यताओं की रक्षा करनी होती है अथवा किस प्रकार की सामाजिक व्यवस्था का विकास करना हैं विज्ञान की प्रगति से विश्व अधिक निकट आ… Read More »