अक्सर विण्याश का अर्थ, भहट्व एवं अशुद्धियाँ

अक्सर-विण्याश अथवा वर्टणी की शुद्धटा भासा का अणिवार्य अंग है। अभिव्यक्टि भें विछारों की क्रभिकटा एवं शुशभ्बद्धटा किटणी ही शुव्यवश्थिट क्यों ण हो परण्टु यदि विछारों को व्यक्ट करणे वाली भासा शद्ध णहीं हो टो उशका अशर णगण्य होकर रह जाएगा। भासा की शुद्धटा टो भुख़्यट: शुद्ध अक्सर-विण्याश पर णिर्भर करटी है। शुद्ध वाक्य विण्याश […]