Category Archives: अनुसूचित जाति

अनुसूचित जाति का अर्थ, परिभाषा व समस्याएं

हमारे देश का दुर्भाग्य है कि इस देश की जनसंख्या का एक बहुत बड़ा भाग सदियों से न केवल पिछड़ा है, बल्कि समाज द्वारा पीड़ित, उपेक्षित व अवहेलना के बोझ से कुण्ठित रहा है। इस कारण ये लोग न केवल गंभीर समस्याओं से पीड़ित रहे हैं। बल्कि अमानवीय जीवन भी जीते रहे है। सामान्य तौर… Read More »

जाति का अर्थ, परिभाषा एवं विशेषताएं

जाति का अर्थ अंग्रेजी भाषा का शब्द ‘caste’ स्पेनिश शब्द ‘casta’ से लिया गया है। ‘कास्टा’ शब्द का अर्थ है ‘नस्ल, प्रजाति अथवा आनुवंशिक तत्वों या गुणों का संग्रह’। पुर्तगालियों ने इस शब्द का प्रयोग भारत के उन लोगों के लिए किया, जिन्हें ‘जाति’ के नाम से पुकारा जाता है। अंग्रेजी शब्द ‘caste’ मौलिक शब्द… Read More »

जाति-व्यवस्था की उत्पत्ति के सिद्धान्त

जाति-व्यवस्था की ठीक उत्पत्ति की खोज नहीं की जा सकती। इस व्यवस्था का जन्म भारत में हुआ, ऐसा कहा जाता है। भारत-आर्य संस्कृति के अभिलेखों में इसका सर्वप्रथम उल्लेख मिलता है तथा उन तत्वों का निरन्तर इतिहास भी मिलता है, जिनसे जाति-व्यवस्था का निर्माण हुआ। जिन लोगों को भारत-आर्य कहा जाता है, वे भाषाशास्त्रीय दृष्टि… Read More »

जाति व्यवस्था के गुण एवं दोष

समय-समय पर भारतीय जाति-व्यवस्था की विभिन्न लेखकों द्वारा आलोचना की गई है। समाज में जितनी बुराइयां हैं, उन सबके लिए जाति-व्यवस्था को दोषी ठहराया गया है। परन्तु एक मात्र यही तथ्य कि इतने आक्षेपों के बावजूद भी यह पहले की भांति अभी तक चल रही है, इस बात का प्रमाण है कि यह व्यवस्था इतनी… Read More »

अनुसूचित जातियों का अर्थ, परिभाषाएँ एवं उत्पत्ति के कारक

हिन्दू जाति व्यवस्था एक सामाजिक व्यवस्था है। यह वर्ण व्यवस्था का परिवर्तित रूप है। वर्ण चार थे और इनका आधार श्रम विभाजन था। प्रथम तीन वर्ण-ब्राह्मण, क्षत्रिय तथा वैश्य द्विज कहलाते थे तथा चौथा वर्ण शूद्र था। शूद्रों का कार्य द्विजों की सेवा करना था। प्राचीन हिन्दू धर्म ग्रंथों के अध्ययन से यह ज्ञात होता… Read More »