Category Archives: अर्थव्यवस्था

अर्थव्यवस्था किसे कहते हैं?

प्रत्येक अर्थव्यवस्था का मुख्य उद्देश्य अपने देश में उपलब्ध सीमित साधनों के प्रयोग से मानव की असीमित आवश्यकताओं की संतुष्टि है। मनुष्य की आवश्यकताएं वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन से संभव है। उत्पादन के पश्चात् जिसे व्यक्ति उपभोग करता है। उत्पादन के साधन आर्थिक गतिविधियों द्वारा उत्पादन की प्रक्रिया पूर्ण करते है। आर्थिक गतिविधियों के… Read More »

भारत की पंचवर्षीय योजनाएँ

भारत की पंचवर्षीय योजनाएँ भारत में आथिर्क नियोजन के लगभग छ: दशक पूरे हो चुके है। इन वर्षों में नियोजन के अन्तगर्त कितना आर्थिक विकास हुआ, क्या विकास के दर पयार्प्त है।? क्या विकास उचित दिशा में हो रहा है? इत्यादि बातों का अध्ययन हम यहां करेगें। प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-56) यह योजना 1 अप्रैल,… Read More »

सामाजिक सुरक्षा का अर्थ, परिभाषा एवं आवश्यक तत्व

‘सामाजिक सुरक्षा’ शब्द का उद्गम औपचारिक रूप से सन् 1935 से माना जाता है, जबकि प्रथम बार अमरीका में सामाजिक सुरक्षा अधिनियम पारित किया गया। इसी वर्ष बेरोजगारी, बीमारी तथा वृद्धावस्था बीमा की समस्या का समाधान करने के लिए सामाजिक सुरक्षा बोर्ड का गठन किया गया। तीन वर्ष बाद सन् 1938 में ‘सामाजिक सुरक्षा’ शब्द… Read More »

भारतीय अर्थव्यवस्था की मुख्य विशेषताएं

भारतीय अर्थव्यवस्था की मुख्य विशेषताएं  कृषि पर निर्भरता :- भारत की लगभग 70 प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर आधारित है। कृषि का कुल राष्ट्रीय आय में 30 प्रतिशत का योगदान है। विकसित देशों में राष्ट्रीय आय में योगदान 2 से 4 प्रतिशत है। वर्षा कृषि के लिये जल का प्रमुख स्त्रोत है। अधिकांश क्षेत्रों में पुरानी… Read More »

शून्य आधार बजट क्या है?

शून्य आधार बजट ऐसी नियोजन एवं बजट प्रक्रिया है जिसमें यह अपेक्षा की जाती है कि प्रत्येक प्रबन्धक को शून्य आधार से अपनी सम्पूर्ण बजट माँग को विस्तारपूर्वक न्यायसंगत ठहराना पड़ता है एवं वह मांग किये गये धन को क्यों व्यय करेगा, इसके औचित्य को भी सिद्ध करने का भार प्रत्येक प्रबन्धक पर डाल दिया… Read More »

औद्योगिक नीति का अर्थ, महत्व एवं औद्योगिक नीति का विकास

(iv) प्रशुल्क एवं कर नीति-इस नीति के अन्तर्गत सरकार की प्रशुल्क नीति अनावश्यक विदेशी स्पर्द्धा को रोकने की होगी जिससे कि उपभोक्ता पर अनुचित भार डाले बिना विदेशी साधनों का उपयोग किया जा सके। पूँजीगत विनियोग करने, बचत में वृद्धि करने एवं कुछ व्यक्तियों के हाथों में सम्पित्त का केन्द्रीयकरण रोकने के लिए कर-प्रणाली में आवश्यक… Read More »

राजकोषीय नीति का अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य, महत्व एवं उपकरण

राजकोषीय नीति के अभिप्राय, साधारणतया, सरकार की आय, व्यय तथा ऋण से सम्बन्धित नीतियों से लगाया जाता है। प्रो0 आर्थर स्मिथीज ने राजकोषीय नीति को परिभाषित करते हुए लिखा है कि- ‘‘राजकोषीय नीति वह नीति है जिसमें सरकार अपने व्यय तथा आगम के कार्यक्रम को राष्ट्रीय आय, उत्पादन तथा रोजगार पर वांछित प्रभाव डालने और… Read More »

आर्थिक सुधार की आवश्यकता एवं क्षेत्र

सार्वजनिक क्षेत्र का विस्तार करने की पहले की नीतियों ने सार्वजनिक क्षेत्र को अकुषल बना दिया था तथा इस क्षेत्र में बहुत अधिक हानि हो रही थी। लाइसेंस और नियंत्रण प्रणाली ने निजी क्षेत्र द्वारा निवेश पर रोक लगा दिया तथा इसके कारण विदेषी निवेषक भी हतोत्साहित हो रहे थे। अत: विकास के पहले चार… Read More »

आर्थिक प्रणाली का अर्थ, परिभाषा एवं प्रकार

आर्थिक प्रणाली किसी भी देश में आर्थिक क्रियाओं के संगठन पर प्रकाश डालती है। उत्पादन के साधनों का स्वामित्व निजी व्यक्तियों के हाथों में, सरकार के पास या फिर दोनों के हाथों में होता है। अब स्वामित्व अधिकतर निजी 62 व्यक्तियों के हाथों में हो तो ऐसी आर्थिक व्यवस्था को पूंजीवादी आर्थिक व्यवस्था कहते है।… Read More »

अर्थव्यवस्था की मूलभूत समस्याएं

अर्थव्यवस्था एक मानव निर्मित संगठन है जिसके माध्यम से लोग समाज की बेहतरी और विकास के लिये परस्पर सहयोग करते है। सभी आर्थिक गतिविधियों का लक्ष्य मानवीय आवश्यकताओं की संतुष्टि से होता है। अर्थव्यवस्था में एक उत्पादन एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसमें उत्पादक को बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं का… Read More »