Category Archives: अर्थशास्त्र

पूर्ति तथा पूर्ति का नियम

पूर्ति शब्द का अर्थ किसी वस्तु की उस मात्रा से लगाया जाता है, जिसे को विक्रेता ‘एक निश्चित समय’ तथा ‘एक निश्चित कीमत’ पर बाजार में बेचने के लिए तैयार रहते हैं। उदाहरण के लिए, यदि यह कहा जाये कि बाजार में गेहू की पूर्ति 1,000 क्विटंल की है, तो यह कथन उचित नहीं है,… Read More »

शून्य आधार बजट क्या है?

शून्य आधार बजट ऐसी नियोजन एवं बजट प्रक्रिया है जिसमें यह अपेक्षा की जाती है कि प्रत्येक प्रबन्धक को शून्य आधार से अपनी सम्पूर्ण बजट माँग को विस्तारपूर्वक न्यायसंगत ठहराना पड़ता है एवं वह मांग किये गये धन को क्यों व्यय करेगा, इसके औचित्य को भी सिद्ध करने का भार प्रत्येक प्रबन्धक पर डाल दिया… Read More »

कौटिल्य अर्थशास्त्र क्या है?

आचार्य कौटिल्य द्वारा विरचित अर्थशास्त्र नामक ग्रन्थ राजनीति और अर्थशास्त्र का ऐसा महत्वपूर्ण ग्रन्थ है जिसमें ईसा से तीन शताब्दी पूर्व के एतद्विषयक भारतीय चिन्तन की पराकाष्ठा के दर्शन होते हैं। हमारे प्राचीन चिन्तन के बारे में पाश्चात्त्य विद्वानों का सामान्यत: यही मानना था कि भारत ने विचार क्षेत्रा में तो प्रगति की है, लेकिन… Read More »

अर्थशास्त्र की परिभाषा एवं शाखाएं

अर्थशास्त्र एक अत्यंत विशाल विषय है। इसलिये अर्थशास्त्र की कोई निश्चित परिभाषा अथवा अर्थ देना आसान नहीं है क्योंकि इसकी सीमा तथा क्षेत्र, जो इसमें सम्मिलित हैं, अत्यंत विशाल हैं। जिस समय से यह सामाजिक विज्ञान के अध्ययन की एक पृथक शाखा के रूप में उभर कर आया है, विभिन्न विद्वानों तथा लेखकों ने इसका… Read More »

आर्थिक प्रणाली का अर्थ, परिभाषा एवं प्रकार

आर्थिक प्रणाली किसी भी देश में आर्थिक क्रियाओं के संगठन पर प्रकाश डालती है। उत्पादन के साधनों का स्वामित्व निजी व्यक्तियों के हाथों में, सरकार के पास या फिर दोनों के हाथों में होता है। अब स्वामित्व अधिकतर निजी 62 व्यक्तियों के हाथों में हो तो ऐसी आर्थिक व्यवस्था को पूंजीवादी आर्थिक व्यवस्था कहते है।… Read More »

समष्टि अर्थशास्त्र क्या है?

सन् 1929-30 की विश्वव्यापी आर्थिक मंदी की स्थिति और प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों के पूर्ण रोजगार के सिद्धान्त की असफलता के कारण प्रो जे एम. कीन्स ने ‘सामान्य सिद्धान्त’ की रचना की थी। प्रो. कीन्स के अनुसार– “राष्ट्रीय तथा विश्वव्यापी आर्थिक समस्याओं का अध्ययन समष्टि अर्थशास्त्र के अंतर्गत किया जाना चाहिए।” इस प्रकार समष्टि अर्थशास्त्र में अर्थव्यवस्था का… Read More »

भुगतान शेष का अर्थ एवं परिभाषा

भुगतान शेष का अर्थ देश के समस्त आयातों एवं निर्यातों तथा अन्य सेवाओं के मूल्यों के संपूर्ण विवरण से होता है। जो कि एक निश्चित अवधि के लिए बनाया जाता है इसके अंतर्गत लेनदेन को दो पक्ष होते है। एक और लेन दारियों का विवरण होता है जिसे धनात्मक पक्ष कहते है और दूसरी और… Read More »

व्यष्टि अर्थशास्त्र का अर्थ, परिभाषा, प्रकार एवं विशेषताएं

अर्थशास्त्र को अध्ययन के दृष्टिकोण से कई भागों में विभक्त किया गया। आधुनिक अर्थशास्त्र का अध्ययन एवं विश्लेषण दो शाखाओं के रूप में किया जाता है- प्रथम, व्यष्टि अर्थशास्त्र तथा द्वितीय समष्टि अर्थशास्त्र । व्यष्टि अर्थशास्त्र के अंतर्गत वैयक्तिक इकाइयों जैसे- व्यक्तियों, परिवारों फर्माें उद्योगों एवं अनेक वस्तुओं व सेवाओं की कीमतों इत्यादि का अध्ययन… Read More »

व्यष्टि अर्थशास्त्र और समष्टि अर्थशास्त्र में अंतर

व्यष्टि अर्थशास्त्र तथा समष्टि अर्थशास्त्र आर्थिक समस्याओं तथा विश्लेषण के दो मार्ग हैं। पहले का संबंध व्यक्तिगत आर्थिक इकाइयों के अध्ययन से है, जबकि दूसरे का समस्त अर्थव्यवस्था के अध्ययन से। रेगनर प्रिफश (Ragner Frisch) पहला व्यक्ति था जिसने 1933 में अर्थशास्त्र में व्यष्टि तथा समष्टि शब्दों का प्रयोग किया था। व्यक्तियों और व्यक्तियों के… Read More »