मुद्रा की परिभाषा एवं कार्य

मुद्रा वह सर्वमान्य और सर्व-स्वीकार्य वस्तु है जिसे वस्तु और सेवाओं के विनिमय में और ऋण के शोधन में सभी व्यक्तियों द्वारा बेरोक-टोक आरै नि:सकेांच स्वीकार किया जाता है।”  मुद्रा की परिभाषा विभिन्न अर्थशास्त्रियों ने मुद्रा को अलग-अलग दृष्टिकोण से परिभाषित किया है विभिन्न दृष्टिकोणों को वर्गीकृत किया सकता है। प्रो माशर्ल -’’मुद्रा के अन्तर्गत […]

पूर्ति का अर्थ, परिभाषा, प्रकार एवं नियम

पूर्ति शब्द का अर्थ किसी वस्तु की उस मात्रा से लगाया जाता है, जिसे को विक्रेता ‘एक निश्चित समय’ तथा ‘एक निश्चित कीमत’ पर बाजार में बेचने के लिए तैयार रहते हैं।  उदाहरण के लिए, यदि यह कहा जाये कि बाजार में गेहूँ की पूर्ति 1,000 क्विटंल की है, तो यह कथन उचित नहीं है, […]

मुद्रा की परिभाषा एवं कार्य

मुद्रा वह सर्वमान्य और सर्व-स्वीकार्य वस्तु है जिसे वस्तु और सेवाओं के विनिमय में और ऋण के शोधन में सभी व्यक्तियों द्वारा बेरोक-टोक आरै नि:सकेांच स्वीकार किया जाता है।”  मुद्रा की परिभाषा विभिन्न अर्थशास्त्रियों ने मुद्रा को अलग-अलग दृष्टिकोण से परिभाषित किया है विभिन्न दृष्टिकोणों को वर्गीकृत किया सकता है। प्रो माशर्ल -’’मुद्रा के अन्तर्गत […]

भुगतान शेष का अर्थ एवं परिभाषा

भुगतान शेष का अर्थ भुगतान शेष का अर्थ देश के समस्त आयातों एवं निर्यातों तथा अन्य सेवाओं के मूल्यों के संपूर्ण विवरण से होता है। जो कि एक निश्चित अवधि के लिए बनाया जाता है इसके अंतर्गत लेनदेन को दो पक्ष होते है। एक और लेन दारियों का विवरण होता है जिसे धनात्मक पक्ष कहते […]

व्यष्टि अर्थशास्त्र का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, विशेषताएं

व्यक्तियों और व्यक्तियों के छोटे ग्रुपों की आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन व्यष्टि अर्थशास्त्र है। व्यष्टि अर्थशास्त्र का अर्थ हिन्दी भाषा का शब्द ‘व्यष्टि अर्थशास्त्र‘ अगेंज्री भाषा के शब्द माइक्रो (Micro), ग्रीक भाषा के शब्द ‘माइक्रोस’ (Micros) का हिन्दी रूपान्तरण है। व्यष्टि से अभिप्राय है- अत्यतं छोटी इकाई अथार्त् व्यष्टि अर्थशास्त्र का संबंध अध्ययन की सबसे […]

शून्य आधार बजट क्या है?

शून्य आधार बजट क्या है? शून्य आधार बजट ऐसी नियोजन एवं बजट प्रक्रिया है जिसमें यह अपेक्षा की जाती है कि प्रत्येक प्रबन्धक को शून्य आधार से अपनी सम्पूर्ण बजट माँग को विस्तारपूर्वक न्यायसंगत ठहराना पड़ता है एवं वह मांग किये गये धन को क्यों व्यय करेगा, इसके औचित्य को भी सिद्ध करने का भार […]

समष्टि अर्थशास्त्र क्या है? व्यष्टि और समष्टि अर्थशास्त्र में अंतर

Macroeconomics is concerned with the economy as a whole or large segments of it. In macroeconomics attention is focussed on such problems as the level of unemployment, the rate of inflation, the nation’s total output and other matters of economywide significance.”– 1. जटिल समस्याओं का अध्ययन- आधुनिक अथर्व्यवस्था अत्यतं जटिल है, क्योकि अनेक आर्थिक तत्व […]

आर्थिक प्रणाली का अर्थ, परिभाषा, मूल तत्व, कार्य एवं प्रकार

आर्थिक प्रणाली किसी भी देश में आर्थिक क्रियाओं के संगठन पर प्रकाश डालती है। उत्पादन के साधनों का स्वामित्व निजी व्यक्तियों के हाथों में, सरकार के पास या फिर दोनों के हाथों में होता है। अब स्वामित्व अधिकतर निजी 62 व्यक्तियों के हाथों में हो तो ऐसी आर्थिक व्यवस्था को पूंजीवादी आर्थिक व्यवस्था कहते है। […]

मांग का अर्थ, प्रकृति, निर्धारक, आवश्यक तत्व, प्रकार, नियम

मानवीय आवश्यकताओं की संपूर्ति सभी उत्पादक आर्थिक गतिविधियों का मूल ध्येय और लक्ष्य होता है। इच्छा तो उपभोक्ता की किसी वस्तु को पाने की कामना मात्र है। यदि उस कामना के साथ-साथ उपभोक्ता की क्रय क्षमता और उसकी खरीदने की तत्परता का भी संयोग हो जाए तभी वह इच्छा एक ’’आवश्यकता’’ का रूप धारण करती […]

कौटिल्य का अर्थशास्त्र क्या है?

कौटिल्य का अर्थशास्त्र क्या है? आचार्य कौटिल्य द्वारा विरचित अर्थशास्त्र नामक ग्रन्थ राजनीति और अर्थशास्त्र का ऐसा महत्वपूर्ण ग्रन्थ है जिसमें ईसा से तीन शताब्दी पूर्व के एतद्विषयक भारतीय चिन्तन की पराकाष्ठा के दर्शन होते हैं। हमारे प्राचीन चिन्तन के बारे में पाश्चात्त्य विद्वानों का सामान्यत: यही मानना था कि भारत ने विचार क्षेत्र में […]