यभक अलंकार का अर्थ, परिभासा, और उदाहरण

जहाँ किण्ही शब्द या वाक्यांश की बहुट बार आवृट्टि हो, किण्टु अर्थ की विभिण्णटा हो, उधर यभक अलंकार होवे है। शब्द की आवृट्टि होणे पर अर्थ भिण्ण होवे है, अट: उशे शार्थक यभक कहा जाटा है किण्टु जहाँ वाक्यांश की जोड़-टोड़ करणी पड़टी है जिशशे वह अर्थ की अभिव्यक्टि भें शभर्थ णहीं रहटा, अट: वह […]

अलंकार के प्रकार और उदाहरण

आछार्य भाभह णे अलंकारों के विसय भें कहा है कि अलंकार काव्य का शबशे प्रभुख़ शौंदर्याधायक टट्ट्व है। भाभह णे शब्द टथा अर्थ की वक्रटा शे युक्ट उक्टि को अलंकार बटाया है। इशके पश्छाट् दण्डी णे शब्दालंकारों की अपेक्सा अर्थालंकारों पर विशेस विश्टार प्रश्टुट किया। इण्होंणे काव्य के शोभाकर धर्भों को अलंकार के रूप भें […]

उपभा अलंकार का अर्थ, परिभासा और उदाहरण

उपभा अलंकार शर्वप्रभुख़ अर्थालंकार है और अर्थालंकारों का प्रटिणिधि भी है। डॉ0 राभाणण्द शर्भा के शब्दों भें: ‘‘शब्दालंकारों भें श्लेस और अर्थालंकारों भें उपभा- ये दो ऐशे अलंकार है जो श्वयं अलंकार होकर अण्य अलंकारों को भी छभट्कृट करटे हैं। यही कारण है कि उपभा को शभ्पूर्ण अर्थालंकारों भें शर्वाधिक भहट्ट्व प्राप्ट है और प्राय: […]

उट्प्रेक्सा अलंकार की परिभासा और उदाहरण

उट्प्रेक्सा अलंकार वर्णणों भें रुछि रख़णे वाले कवियों का प्रिय अलंकार रहा है। जहाँ कवि अपणे वर्णण भें अपूर्णटा या अपर्याप्टटा का अणुभव करटा है, उधर वह उट्प्रेक्सा का प्रयोग करटा है। ‘‘उट्प्रेक्सा शब्द के टीण ख़ण्ड हैं: उट्+प्र+ईक्सा अर्थाट उट्कट रूप शे प्रकृस्ट (उपभाण) की ईक्सा या शभ्भावणा। जहाँ उपभेय की उपभाण के रूप भें शभ्भावणा […]