Category Archives: आयुर्वेद

आयुर्वेद में योग, प्राणायाम, ध्यान एवं समाधि

जीवन में सदैव स्वस्थ रहने के लिए मनुष्य को मन, वचन तथा कर्म की पवित्रता आवश्यक होती है। अत: प्रत्येक मनुष्य के लिए स्वस्थ वृत्त के पालन का उपदेश चरक ने किया है। चरक का वचन है कि सौम्य बुद्धि, मधुर वचन, सुखकारक कर्म, निर्मल तथा पापरहित बुद्धि, विवेक, तप तथा यम-नियम प्राणायाम आदि योग… Read More »

आयुर्वेद का अर्थ, परिभाषा एवं प्रकार

आयु का मान पुरुष की प्रकृति, विकृति धातु, मांस, मज्ज़, अस्थि आदि से शरीर की बनावट, अनुकूलता, मन:स्थिति, आहार-शक्ति, व्यायाम-शक्ति देखकर उसके दीर्घायु या अल्पायु होने का आकलन किया जाता है। सामान्यत: घृत, दुग्ध, तैल, मांसरस के नित्य सेवन से व्यक्ति बलवान् होवे है। कफ, पित्त, वात और मध्यायु से युक्त वाले व्यक्ति अल्पायु होते… Read More »