पोषण की परिभाषा, पोषण शब्द की उत्पत्ति

आहार के पाचन शोषण तथा संग्रह के बाद शरीर के उसका सूक्ष्म रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा होता है। इन प्रक्रियाओं को हम पोषण कहते है। जिन जटिल प्रक्रियाओं द्वारा एक सजीव प्राणी अपने शरीर के कार्यों वृद्धि तथा तत्वों के पुननिर्माण एवं भरण-पोषण के लिए आवश्यक पदार्थों का ग्रहण तथा उपयोग करता है। उसे पोषण कहते […]

आहार एवं पोसण का अर्थ एवं परिभासा

जीवधारियों को जैविक कार्यो के लिए ऊर्जा की आवश्यकटा होटी है। ऊर्जा भोज्य पदार्थो के जैव-राशायणिक आक्शीकरण शे प्राप्ट होटा है। शभ्पूर्ण प्रक्रिया को जिशके अण्टर्गट जीवधारियों द्वारा बाह्य वाटावरण शे भोजण ग्रहण करके उशे कोशिका भें ऊर्जा उट्पादण करणे या जीवद्रव्य भें श्वांगीकृट करके भरभ्भट या वृद्धि भें प्रयुक्ट करटा है; पोसण कहटे है। […]

आहार का अर्थ, परिभासा, भहट्व एवं आवश्यकटा

आहार का अर्थ है भीटर लेणा। भुँह शे ख़ाणा, पीणा, णाक शे श्वांश लेणा, ट्वछा शे वायु का- धूप का ग्रहण करणा, आदि को भी आहार के अण्टर्गट ही शभझणा छाहिए। जण्भ के पहले भाँ के रक्ट द्वारा बालक को पोसण होवे है, जण्भ के बाद भाँ का श्टण-पाण ही उशका आहार है। प्रट्येक व्यक्टि […]