Category Archives: आहार

आहार के स्रोत और कार्य

मानव आहार प्राणी आहार माँस,मछली, अण्डा, दूध वनस्पति आहार अनाज, दाल, शर्करा, सब्जियाँ, फल, सूखेफल, मसाले आपके मन में यह जानने की जिज्ञासा उत्पन्न हो रही होगी कि आहार के स्रोत से हमारा क्या आशय है? वस्तुत: आहार के स्रोत से हमारा आशय यह है कि हमें आहार कहाँ-कहाँ से प्राप्त होता है। जिन भी… Read More »

आहार का पाचन

सर्वप्रथम भोजन को मुँह से चबाते है तत्पश्चात निगलते है भोजन अमाशय में नलीनुमा संरचना (ग्रासनली) द्वारा जाता है , फिर छोटी आंत एवं बडी आंत में पहुंचता है। मुख्य रूप से छोटी आंत में भोजन का पाचन होता है एवं शरीर के लिये उपयेागी सरल पोषक तत्त्वों को आहार से यकृत में प्रतिहारिणी शिरा… Read More »

उपचारात्मक पोषण क्या है?

उपचारात्मक पोषण आहार का बीमारी से बहुत महत्वपूर्ण संबंध होता है। रोग, रोग की गम्भीरता, रोगी के पोषण स्तर के अनुसार आहार को सुधारा जा सकता है। अत: एक साधारण, स्वस्थ्य व्यक्ति द्वारा लिये जाने वाले आहार में कुछ विशेष बदलाव लाकर उसे रोग की आवश्यकतानुसार सुधारा जा सकता है। आहार में बदलाव या सुधार… Read More »

आहार आयोजन क्या है?

गर्भावस्था में निम्नलिखित क्रियाओं के कारण पोषण आवश्यकताएँ बढ़ जाती है। गर्भ में भ्रूण के वृद्धि और विकास के लिये- भ्रूण अपनी वृद्धि और विकास के लिये सभी पोषक तत्वों को माँ से ग्रहण करता है। अत: माँ और भ्रूण दोनों की आवश्यकता की पूर्ति के लिए पोषक आवश्यकताएँ बढ़ जाती है। इस समय यदि… Read More »

संतुलित आहार क्या है?

हम जो भोजन ग्रहण करते हैं। उसे दो श्रेणियों में बाँट सकते हैं। पर्याप्त आहार  संतुलित आहार  पर्याप्त आहार इस आहार से तात्पर्य उस आहार से है, जो भूख तो शांत कर देता है। और व्यक्ति का जीवन चलता रहता है। उसे जीवन जीने लायक ऊर्जा मिलती रहती है। किन्तु इस आहार से न तो… Read More »

उपचारात्मक आहार क्या है?

वह आहार जो रूग्णावस्था में किसी व्यक्ति को दिया जाता है। ताकि वह जल्दी सामान्य हो सके यह सामान्य भोजन का संशोधित रूप होता है। उपचारात्मक आहार कहलाता है। क्योंकि बीमार पड़ने पर व्यक्ति के शरीर को कोई भाग रोग ग्रसित हो जाता है। जिससे उसकी पोषण आवश्यकता में परिवर्तन आ जाता है। जैसे मधुमेह… Read More »

आहार का अर्थ, परिभाषा, महत्व एवं आवश्यकता

आहार का अर्थ है भीतर लेना। मुँह से खाना, पीना, नाक से श्वांस लेना, त्वचा से वायु का- धूप का ग्रहण करना, आदि को भी आहार के अन्तर्गत ही समझना चाहिए। जन्म के पहले माँ के रक्त द्वारा बालक को पोषण होता है, जन्म के बाद माँ का स्तन-पान ही उसका आहार है। प्रत्येक व्यक्ति… Read More »

संतुलित आहार का अर्थ, परिभाषा, महत्व एवं घटक

संतुलित आहार वह भोजन है, जिसमें विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ ऐसी मात्रा व समानुपात में हों कि जिससे कैलोरी खनिज लवण, विटामिन व अन्य पोषक तत्वों की आवश्यकता समुचित रूप से पूरी हो सके। इसके साथ-साथ पोषक तत्वों का कुछ अतिरिक्त मात्रा में प्रावधान हो ताकि अपर्याप्त मात्रा में भोजन मिलने की अवधि में… Read More »