Category Archives: इतिहास

क्रीमिया युद्ध के कारण एवं परिणाम

क्रीमिया युद्ध के कारण 1. नेपोलियन की महत्वाकांक्षा- 1848 ई. में नेपालेयन तृतीय ने फ्रासं के गणतंत्र का अंत करके अपने को सम्राट बना लिया। उसका विश्वास था कि वह अपनी शक्तिशाली विदेश नीति का अनुसरण करके किसी महान युद्ध में विजयी हो सकता था। इसका अवसर उसने पूर्वी समस्या में देखा जिसके संबंध में रूस… Read More »

केम्ब्रिज सम्प्रदाय क्या है?

अनिल सील के शोधा प्रबंध इमरजेंस ऑफ इंडिया नेशनलिज्म (1968) का निर्देशन केम्ब्रिज के जॉन गेलेधर ने किया था। इस शोध ग्रंथ में जॉन गेलेधर की अभिधारणा को ही आगे बढ़ाया गया। अनिल सील के प्रथम पीढ़ी के छात्रों खासतौर पर जुडिथ ब्राउन, जिन्होंने गांधीजी राईज टू पावर (केम्ब्रिज 1972) लिखी, ने भी इस परंपरा… Read More »

कृषि क्रांति क्या है?

बारहवीं सदी में कृषि तकनीक के क्षेत्र में काफी परिवर्तन हुए। पुराने हल्के हल का स्थान भारी हल ने ले लिया जो कि गहराई तक जमीन में जुताई कर सकता था। पहले जुए को बैल के सींगों पर बाँधा जाता था, परंतु अब हल के जुए को सींगों के स्थान पर बैल के कंधों पर… Read More »

तुलनात्मक साहित्य का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, आवश्यकता एवं महत्व

तुलना मानव की सहज प्रवृत्ति है। तुलना विकसित मस्तिष्क की पिपासा से परिनित ज्ञान-यात्रा है। मानक हिंदी कोश में ‘तुलना’ शब्द के अर्थ दिए हैं- ‘‘) काँटे, तराजू आदि पर रखकर तौला जाना। ) दो या अधिक वस्तुओं के गुण, मान आदि के एक-दूसरे से घट या बढ़कर होने का विचार।) तारतम्य, बराबरी, समता, उपमा… Read More »

गुरु गोविंद सिंह का जीवन परिचय एवं रचनाएँ

सिक्खों के दसवें और अन्तिम गुरू, गुरु गोविंद सिंह का जन्म संवत् 1723 विक्रमी की पौष सुदी सप्तमी अर्थात् 22 दिसम्बर, 1666ई0 को भारतीय संस्कृति की उस प्राचीन पवित्र पटना नगरी में हुआ जिसका नाम कभी पाटलीपुत्र था।  यह जन्म गुरु गोविंद सिंह के शरीर का नहीं अपितु उस परम आत्मा और दिव्य ज्योति का… Read More »

चेतना का अर्थ, परिभाषा, स्वरूप एवं महत्व

चेतना समझने की वस्तु है उसे पारिभाषित करना सरल नहीं है। व्यक्ति चेतना कारण ही क्रियाशील रहता है। चेतना रूप अत्यन्त सूक्ष्म और जटिल है। इसकी व्याख्या नियंत्रित शब्दों में नहीं की जा सकती है। फिर भी विचारकों ने अपने-अपने दृष्टिकोण से चेतना की व्याख्या करने का प्रयास किया है। ‘चेतना’ शब्द ‘चित’ से सम्बन्धित… Read More »

श्रीलंका का इतिहास

श्रीलंका का इतिहास ‘पूर्व का मोती’ नाम से प्रख्यात श्रीलंका, भारत के दक्षिण में हिन्द महासागर में स्थित एक छोटा सा द्वीप है, जो पाक जलडमरूमध्य के द्वारा के द्वारा भारत से जुड़ा हुआ है। नाशपाती के आकार का यह द्वीप मानचित्र के पटल पर 5° 55’ और 9° 50’ अक्षांशों तथा 79° 42’ और… Read More »

भूटान का इतिहास

भूटान हिमालय की गगनचुंबी पहाड़ियों और घाटियों में स्थित उन्नत लाभाओं का देश है। भूटान का अपना एक प्राचीन इतिहास है। शायद भूटान ही एक मात्र ऐसा देश है जिसके पास अपनी अविरल ऐतिहासिक किवदन्तियाँ जनश्रुतियाँ,, ऐतिहासिक कथायें, धार्मिक दृष्टान्त के लिए बहुत ही कम और अपर्याप्त सामग्री है। भूटान का अपना एक प्रमाणिक इतिवृत्त… Read More »

नासिरा शर्मा का जीवन परिचय, व्यक्तित्व, कृतित्व और उपलब्धियाँ

लेखिका नासिरा  विख्यात लेखिका नासिरा शर्मा का जन्म 22 अगस्त 1948 में उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले के मुस्तफाबाद गाँव के सैयद खानदान में हुआ था। नासिरा जी अपने परिवार की ऐसी संतान थी जिसे बड़ी नजाकत और नफ़ासत से पाला गया। नासिरा शर्मा की शिक्षा नासिरा जी आरंभ से ही पढ़ाई में अच्छी थी।… Read More »

तुगलक वंश का साम्राज्य विस्तार और विद्रोह दमन

तुगलक वंश का संस्थापक गाजी मलिक था । वह 1320 ई. में गयासुद्दीन तुगलक शाह के नाम से गद्दी पर बैठा था ।गयासुद्ददीन तुगलक ने सुल्तान अलाउद्दीन खलजी के शासन काल में महत्वपूर्ण पद प्राप्त कर लिया था । वह दीपालपुर का हाकिम था । उसने सफलतापूर्वक सीमाओं की रक्षा की। उसने मंगोलों के विरूद्ध… Read More »