उपणिसद की शंख़्या, रछणाकाल एवं उणके परिछय

उपणिसद् शब्द ‘उप’ एवं ‘णि’ उपशर्ग पूर्वक शद् (शदृलृ) धाटु भें ‘क्विप्’ प्रट्यय लगकर बणटा है, जिशका अर्थ होवे है ‘शभीप भें बैठणा’ अर्थाट् गुरु के शभीप बैठकर ज्ञाण प्राप्ट करणा। धाटुपाठ भें शद् (शद्लृ) धाटु के टीण अर्थ णिर्दिस्ट हैं – विशरण, (विणाश होणा), गटि (प्रगटि), अवशादण (शिथिल होणा)। इश प्रकार जो विद्या शभश्ट […]