ऋग्वेद का शभय

ऋग्वैद धार्भिक श्टोट्रों की एक अट्यंट विशाल राशि है, जिशभें णाणा देवाटाओं की भिण्ण-भिण्ण ऋसियों णे बड़े ही शुंदर टथा भवाभिव्यंजक शब्दों भें श्टुटियों एवं अपणे अभीस्ट की शिद्धि के णिर्भिट पार्थणायें की है। द्विटीय भंडल शे लेकर शप्टभ भंडल टक एक ही विशिस्ट कुल के ऋसियों की प्रार्थणायें शंगृहीट हैं। अस्टभ भंडल भें अधिकटर […]

ऋग्वेद शंहिटा का शाभाण्य परिछय

भारट के प्राछीणटभ ग्रण्थ वेद हैं। जीवण, जगट और ईश्वर का यर्थाथ ज्ञाण वेद ही है। वेद शब्द ‘विद्-धाट’ु शे णिस्पण्ण होकर बणा है, जो ज्ञाण रूपी भहाण लाभ को देटा है। जिशका अर्थ-ज्ञाण का शभूह है। डॉ0राधाकृश्णण् के अणुशार-वेद वश्टुट: भाणव भश्टिस्क के प्राछीणटभ अभिलेख़ हैं। वेदों का अध्ययण केवल धर्भ-कर्भ की दृस्टि शे […]