Category Archives: कृषि

कृषि का अर्थ, परिभाषा एवं प्रकार

कृषि शब्द की व्युत्पत्ति विज्ञान के अनुसार कृषि का अभिप्राय कर्षण से या खींचने से होता है। कृषि का अंग्रेजी पर्याय Agriculture लेटिन भाषा के दो शब्दों को मिलाकर बना है। Ager ( agerfiels or soil) तथा Culture (cultura- the care of tillingh) से मिलकर बना है। Culture का हिन्दी अर्थ संस्कृति होता है। तात्पर्य जीवन जीने की एक विशेष कला है। इस प्रकार… Read More »

कृषि के प्रकार, महत्व एवं विशेषताएं

भारत एक कृषि प्रधान देश हैं। अति प्राचीन काल से ही कृषिकार्य किया जाता हैं। जब संसार के अधिकांश मानव असभ्य थे, उस समय भारतवासी कृषि में निपुण थे। इस बात का इतिहास साक्षी हैं। आर्य युग में जुता सिंचा, कटा, निदा, आदि कार्य किया जाता था। कृषि के साथ पशुपालन व्यवसाय संलग्न हैं। वर्तमान… Read More »

भारत की प्रमुख फसलें

भारत में लगभग हर प्रकार की फसलें होती है। क्या आप सोच सकते हैं, क्यों? यदि हम कश्मीर से कन्याकुमारी और गुजरात के पश्चिमी तट से अरुणाचल प्रदेश के चरम उत्तर-पूर्वी भागों को ध्यान में रखें तो यहाँ सैकड़ों प्रकार की फसलें मिलती है। भारत की प्रमुख फसलें  इन सभी प्रकार की फसलों को हम… Read More »

कृषि विपणन क्या है?

सामान्यत: कृषि उपज के विपणन या बिक्री से तात्पर्य उन समस्त क्रियाओं से लगाया जाता है जिसके द्वारा कृषि उपज उपभोक्ताओं तक पहुँचती है। प्रो0 जोल एवं प्रो0 खुसरो के अनुसार ‘‘खाद्यान्न विपणन के अन्तर्गत उन क्रियाओं को शामिल किया जाता है जो खाद्यान्नों को उत्पादकों से उपभोक्ताओं तक पहुँचाने के लिए समय (भण्डारण), स्थान… Read More »

कृषि वित्त या कृषि साख क्या है?

कृषि वित्त एवं कृषि साख से तात्पर्य उस वित्त (साख) से होता है जिसका उपयोग कृषि से संबंधित विभिन्न कार्यों को पूरा करने के लिए होता है। कृषि वित्त की आवश्यकता सामान्यत: भूमि पर स्थायी सुधार करने, बीज, खाद, कीटनाशक, कृषि यंत्रा पर क्रय करने, सिंचाई की व्यवस्था करने, मालगुजारी देन, विपणन से सम्बद्ध कार्य… Read More »

हरी खाद क्या है

हरी खाद से अभिप्राय उन फसलों से तैयार की जाने वाली खाद से है जिन्हें केवल खाद बनाने के उद्देश्य से ही लगाया जाता है तथा इन पर फल-फूल आने से पहले ही इन्हें मिट्टी में दबा दिया जाता है। ये फसलें सूक्ष्म जीवों द्वारा विच्छेदित होकर भूमि में ह्यूमस तथा पौधों की वृद्धि के… Read More »

फार्मर फील्ड विद्यालय का अर्थ

छोटे कृषकों की उत्पादकता में सुधार लाने के उद्देश्य से हरित क्रांति आरंभ की गई थी। जल, संवर्धित किस्मों तथा अन्य इनपुटों तक पहुंच में सुधार करके हरित क्रांति ने 1960 और 1990 के दशकों की अवधि के बीच औसत चावल पैदावार को दोगुना करने में सहायता की। 1970 के दशक के दौरान यह निरंतर… Read More »

गोबर से खाद बनाने की विधियाँ

गोबर से खाद बनाने की कई विधियाँ प्रचलन में हैं जिनमें सर्वाधिक लोकप्रिय है- इन्दौर विधि, बंगलौर विधि, श्री पुरुषोत्तम राव विधि, श्री प्रदीप तापस विधि, तथा नाडेप विधि। इनमें से सर्वाधिक लोकप्रिय तथा उपयोगी विधि ‘‘नाडेप विधि’’ के प्रमुख विवरण निम्नानुसार हैं- खाद बनाने की नाडेप विधि कम से कम मात्रा में गोबर का उपयोग करके… Read More »

वर्मी कम्पोस्ट (केंचुआ खाद) क्या है?

खाद बनाने की विभिन्न विधियों में से सर्वाधिक उपयोगी विधि है वर्मी कम्पोस्टिंग। वस्तुत: वर्मी कम्पोस्टिंग वह विधि है जिसमें कूड़ा कचरा तथा गोबर को केंचुओं तथा सूक्ष्म जीवों की सहायता से उपजाऊ खाद अथवा ‘‘वर्मीकास्ट’’ में बदला जाता है यही वर्मी कम्पोस्ट अथवा केंचुआ खाद कहलाती है। वर्मी कम्पोस्ट के लाभ  वर्मी कम्पोस्ट अन्य… Read More »

सफेद मूसली की खेती कैसे करें?

सफेद मूसली को मानव मात्र के लिए प्रकृति द्वारा प्रदत्त अमूल्य उपहार कहा जाए तो शायद अतिश्योक्ति नहीं होगी। अनेकों आयुर्वेदिक एलोपैथिक तथा यूनानी दवाईयों के निर्माण हेतु प्रयुक्त होने वाली इस दिव्य जड़ी-बूटी की विश्वभर में वार्षिक उपलब्धता लगभग 5000 टन है जबकि इसकी माँग लगभग 35000 टन प्रतिवर्ष आँकी गई है। यह औषधीय… Read More »