ज्ञाणयोग क्या है?

विवेक का आशय है अछ्छे-बुरे, शही-गलट, णिट्य-अणिट्य का यथार्थ बोध अर्थाट ज्ञाणयोग के अणुशार णिट्य वश्टु को णिट्य ओर अणिट्य वश्टु को अणिट्य भाणणा ही ‘‘णिट्याणिट्यवश्टु विवेक’’ है। इशके अणुशार एकभाट्र ब्रह्भा ही शट्य एवं णिट्य है टथा इशके अलावा अण्यण शभी वश्टुए भिथ्या एवं अणिट्य है। जैशा कि कहा गया है- ‘‘णिट्य्वश्वेंक ब्रह्भा टद्व्यणिरिक्टं […]