Category Archives: तुलनात्मक राजनीति

तुलनात्मक राजनीति का विकास

तुलनात्मक राजनीति केवल आधुनिक युग की देन नहीं है, बल्कि इसका गौरवपूर्ण अतीत है। तुलनात्मक राजनीति के विकास की गाथा अरस्तु से प्रारम्भ होती है। अरस्तु ने ही सर्वप्रथम 158 देशों के संविधानों का तुलनात्मक अध्ययन करके राज्य सम्बन्धी सिद्धान्तों की नींव रखी। अरस्तु के बाद अनेक विचारक सदैव यही बात सोचते रहे हैं कि… Read More »

संविधानवाद का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं, तत्व एवं विकास

संविधानवाद का इतिहास भी उतना ही पुराना है, जितना राजनीतिक संस्थाओं का इतिहास। राजनीतिक संस्थाओं और राजनीतिक शक्ति के प्रादुर्भाव ने मानव को इनकी निरंकुशता के बारे में सोचने को बाध्य किया है। शक्ति मनुष्य को भ्रष्ट करती है और जब इसका सम्बन्ध राजनीतिक संस्थाओं या राजनीति से जुड़ जाता है तो इसके पथभ्रष्ट व… Read More »

राजनीतिक संस्कृति का अर्थ, परिभाषा, प्रकार , प्रकृति व विशेषताएं

राजनीतिक संस्कृति की अवधारणा राजनीति विज्ञान के क्षेत्र में बिल्कुल नई संकल्पना है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद राजनीतिक विश्लेषकों ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि समान राजनीतिक संरचनात्मक ढांचे वाली राजनीतिक व्यवस्था में अन्तर क्यों आ जाता है तथा राजनीतिक विकास की दिशाएं भी अलग-अलग क्यों हो जाती है। इसके लिए राजनीतिक… Read More »

राजनीतिक समाजीकरण का अर्थ, परिभाषा, प्रकार एवं विशेषताएं

विश्व की राजनीतिक व्यवस्थाओं का अवलोकन करने से जो महत्वपूर्ण बात हमारे सामने आती है, वह राजनीतिक व्यवहार की विभिन्नता है। इसका प्रमुख कारण राजनीतिक संस्कृतियों में पाए जाने वाले अन्तर को माना जाता है। राजनीतिक संस्कृति की विभिन्नता के कारण ही भारत और ब्रिटेन में संसदीय व्यवस्थाओं का कार्य-व्यवहार आपस में काफी प्रतिकूल है।… Read More »

राजनीतिक संचार का अर्थ, परिभाषा, अभिकरण व संरचनाएं

संचार साधनों के विकास ने मनुष्य को न केवल सामाजिक बल्कि राजनीतिक मानव भी बना दिया है। संचार साधनों की आवश्यकता को ध्यान में रखकर ही राजनीति विज्ञान में राजनीतिक संचार की संकल्पना का विकास किया गया है। आज राजनीतिक संचार राजनीति विज्ञान की वह महत्वपूर्ण अवधारणा बन चुका है जिसके बिना किसी राजनीतिक व्यवस्था… Read More »

राजनीतिक दल का अर्थ, परिभाषा एवं विशेषताएं

आधुनिकता और राजनीतिक चेतना के प्रतीक दल लोकतन्त्रीय और निरंकुश सभी प्रकार की शासन-व्यवस्थाओं मेंं महत्व रखते हैं। जनता और सरकार में कड़ी का काम करके राजनीतिक दल ही किसी राजनीतिक व्यवस्था रूपी गाड़ी को गति देते हैं। जनता को शिक्षा देना व राजनीतिक चेतना का विकास करने, जनमत को तैयार करने, सरकार पर नियन्त्रण… Read More »

प्रतिनिधित्व का अर्थ, परिभाषा, प्रकार एवं सिद्धान्त

कोई भी समूह या गुट आज आवश्यक निर्णय लेने तथा आवश्य बातचीत के लिए अपने बड़े आकार के कारण प्रत्येक अवसर पर अपने सभी सदस्यों को एकत्रित नहीं कर सकते। इसके लिए वे अपने कुछ प्रतिनिधि सदस्यों का चुनाव कर लेते हैं, जो भविष्य में प्रत्येक निर्णय में भागीदार बनते हैं और समूह या गुट… Read More »

राजनीतिक अभिजन का अर्थ, प्रकृति, प्रकार एवं सिद्धान्त

राजनीतिक अभिजन की अवधारणा राजनीति विज्ञान की आधुनिक व प्रमुख धारणा है, यद्यपि इस धारणा के बीज प्लेटो व अरस्तु के समय में भी मौजूद थे। यह धारणा इस मान्यता पर आधारित है कि शासन करने के गुण थोड़े से व्यक्तियों में ही होते हैं। इसी कारण इसे सामाजिक डार्विनवाद का रूप माना जाता है।… Read More »

नौकरशाही का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, विशेषताएं

औद्योगिक क्रान्ति के तुरन्त बाद सामाजिक व राजनीतिक ढांचे में आए परिवर्तनों ने संगठन की जिस प्रणाली को वह जन्म दिया, वह नौकरशाही ही है। सामाजिक आर्थिक परिवर्तन के दौर में परम्परागत समाज को संतुलित, व्यवस्थित और विकसित होने हेतु नौकरशाही जैसे तन्त्र की अत्यधिक आवश्यकता महसूस की गई। यद्यपि विशिष्ट वर्ग के रूप में… Read More »

कानून के शासन का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं एवं विचार

आधुनिक समय में लोकतन्त्रीय आस्थाओं, नागरिकों के अधिकारों व स्वतन्त्रओं की रक्षा करने के लिए कानून के शासन से बढ़कर कोई अन्य विकल्प नहीं है। कानून का शासन इस मान्यता पर आधारित है कि कानून के सामने सब समान हैं। यह मान्यता राजनीतिक शक्ति को निरंकुश बनने से रोकती है और समाज में सुव्यवस्था भी… Read More »