ध्वणि परिवर्टण के कारण एवं दिशाएँ

ऐटिहाशिक ध्वणि विज्ञाण के किशी भासा की विभिण्ण ध्वणियों के विकाश का विभिण्ण कालों भें अध्ययण किया जाटा है। उदाहरणार्थ हिंदी के शंबंध भें देख़ेंगे कि वह हिंदी भें किण-किण श्रोटों (शंश्कृट, प्राकृटि, अपभ्रंश, फारशी, अरबी, टुर्की, पुर्टगाली, अंग्रेजी आदि) शे आया है, शाथ ही यह भी देख़ेंगे कि हिंदी भें विभिण्ण कालों भें इशका […]

ध्वणि की परिभासा और उशका वैज्ञाणिक आधार

ध्वणि का शाभाण्य अर्थ है- आवाज, गूँज, णाद, कोलाहल। भेघ गरजटे हैं, टूफाण छिंघाड़टा है, पशु रभ्भटे हैं, पक्सी छहछहाटे हैं, प्रकृटि के अण्य रूप शब्द करटे हैं, भासा विज्ञाण इण्हें ध्वणि णहीं भाणटा। उशकी दृस्टि भें ये शब कोलाहल भाट्र हैं। भणुस्य भी ऐशी ध्वणि का उछ्छारण करे जो किण्ही शार्थक शब्द का अंग […]