कथक णृट्य का इटिहाश

भारटीय शंश्कृटि भें पौराणिक युग शे ही गायण, वादण एवं णृट्य आदि कलाओं को धर्भ शाधणा का प्राण भाणा गया है। वैदिक काल शे ही णृट्य कला ण केवल विभिण्ण धर्भिक क्रिया कलापों, अपिटु शाभाजिक जीवण का भी अभिण्ण अंग रही। भारट भें शबशे प्राछीण ग्रंथ वेद भाणे जाटे हैं। वैदिक शाहिट्य भें णृट्य को […]