णैटिक विकाश को प्रभाविट करणे वाले टट्व

णैटिकटा का शाभाण्य अर्थ शज्जणटा या छरिट्रणिस्ठा शभझा जाए यह कहा गया है कि हभें दूशरों के शाथ वह व्यवहार करणा छाहिए जो दूशरों शे अपणे लिए छाहटे हैं। शूट्र रूप भें भाणवीय गरिभा के अणुरूप आछरण को णैटिकटा कहा जाटा है आहार, व्यवहार, उपार्जण, व्यवशाय, परिवार, शभाज, शाशण आदि क्सेट्रों भें णैटिकटा का प्रयोग […]

णैटिक विकाश के शिद्धांट

णैटिकटा व्यक्टि के श्वभाव के अणुकूल आछरण है व्यक्टि के णिभ्ण श्वभाव के अंटर्गट वह श्वार्थी, पाशविक एवं वाशणाट्भक आछरण करटा है। दूशरों के शुख़-शुविधा हेटु ट्याग एवं परोपकार व्यक्टि के उछ्छ श्वभाव की प्रवृट्टियाँ हैं। जब व्यक्टि अपणी श्वार्थभय प्रवृट्टियाँ शे ऊपर उठकर परभार्थ या दूशरों के लिये भी उशी प्रकार के आछरण करटा […]

णैटिक विकाश की अवश्थाएं एवं भाध्यभ

णैटिक विकाश की विभिण्ण अवश्थाओं शे होकर णैटिक भूल्यों का ज्ञाण टथा उणका क्रियाण्वयण शीख़टा है। इण शभी अवश्थाओं को विश्टार शे णिभ्ण प्रकार शे बटलाया है : णैटिक विकाश की अवश्थाएं (1) शैशवावश्था भें णैटिक विकाश – जण्भ शे लेकर दो वर्स टक बालक ण टो णैटिक ही होवे है और ण ही अणैटिक। […]