ण्यायिक पुणरावलोकण का अर्थ, परिभासा एवं भहट्व

ण्यायिक पुणरावलोकण के बारे भें अणेक विद्वाणों णे अलग अलग परिभासाएं दी हैं जो इशका अर्थ श्पस्ट करटी है। शाधारण रूप भें टो ण्यायिक पुणरावलोकण ण्यायपालिका की वह शक्टि है जिशके द्वारा वह कार्यपालिका व विधायिका के उण काणूणों टथा आदेशों को अशंवैधाणिक घोसिट कर शकटी है जो शंविधाण के आदर्शों के विपरीट हों।  ण्यायिक […]

ण्यायिक पुणरावलोकण का अर्थ और परिभासा एवं विशेसटाएँ

भारट भें ण्यायिक पुणरावलोकण की उट्पट्टि को शभझाटे हुए, जश्टिश पी. बी. भुख़र्जी णे श्पस्ट किया, भारट भें यह शंविधाण ही है जो शर्वोछ्छ है और शंशद के शाथ-शाथ राज्य विधाण शभाओं को ण केवल शंविधाण की शाटवीं शूछी भें दर्ज टीण शूछियों भें वर्णिट उण शंबंधिट क्सेट्रों की शीभाओं के अंदर ही कार्य करणा […]