Category Archives: न्यायिक पुनरावलोकन

न्यायिक पुनरावलोकन का अर्थ, परिभाषा एवं महत्व

न्यायिक पुनरावलोकन के बारे में अनेक विद्वानों ने अलग अलग परिभाषाएं दी हैं जो इसका अर्थ स्पष्ट करती है। साधारण रूप में तो न्यायिक पुनरावलोकन न्यायपालिका की वह शक्ति है जिसके द्वारा वह कार्यपालिका व विधायिका के उन कानूनों तथा आदेशों को असंवैधानिक घोषित कर सकती है जो संविधान के आदर्शों के विपरीत हों।  न्यायिक… Read More »

न्यायिक पुनरावलोकन का अर्थ और परिभाषा एवं विशेषताएँ

भारत में न्यायिक पुनरावलोकन की उत्पत्ति को समझाते हुए, जस्टिस पी. बी. मुखर्जी ने स्पष्ट किया, भारत में यह संविधान ही है जो सर्वोच्च है और संसद के साथ-साथ राज्य विधान सभाओं को न केवल संविधान की सातवीं सूची में दर्ज तीन सूचियों में वर्णित उन संबंधित क्षेत्रों की सीमाओं के अंदर ही कार्य करना… Read More »