Category Archives: पंचायती राज

भारत में पंचायती राज की स्थिति व सुदृढ़ीकरण के प्रयास

स्वतन्त्रता पूर्व पंचायतों की मजबूती व सुदृढ़िकरण हेतु विशेष प्रयास नहीं हुए इसके विपरीत पंचायती राज व्यवस्था लड़खड़ाती रही। मध्य काल में मुस्लिम राजाओं का शासन भारत के विभिन्न हिस्सों में फैल गया। यद्यपि स्थानीय शासन की संस्थाओं की मजबूती के लिए विशेष प्रयास नहीं किये गये परन्तु मुस्लिम शासन ने अपने हितों में पंचायतों… Read More »

विकेन्द्रीकरण का अर्थ, आवश्यकता एवं महत्व

आज विश्व स्तर पर विकेन्द्रीकरण की सोच को विषेश महत्व दिया जा रहा है। प्रशासन एवं अभिशासन में आम जन की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विकेन्द्रीकरण की व्यवस्था को अपनाना वर्तमान समय की बहुत बड़ी आवश्यकता है। भारत के सन्दर्भ में विकेन्द्रीकरण की व्यवस्था सम्पूर्ण शासन प्रणाली के समुचित संचालन के लिए बहुत… Read More »

स्थानीय स्वशासन का अर्थ और पंचायतें

सत्ता का विकेन्द्रीकरण क्या है ? स्थानीय स्वशासन कैसे मजबूत होगा ? स्थानीय स्वशासन व ग्रामीण विकास के बीच संबंध नीचें से ऊपर की ओर विकास के नियोजन की प्रक्रिया। पंचायत में सुयोग्य प्रतिनिधियों का चयन हो। स्थानीय स्वशासन और ग्रामीण विकास एक दूसरे के पूरक है।  स्थानीय संसाधनों पर स्थानीय सामुदायिक संगठनों व ग्रामीणों… Read More »

ग्राम पंचायत का गठन, चुनाव प्रणाली, कार्य, एवं शक्तियां

क्र.सं. जिम्मेदारी मुख्य कार्य  1      कृषि एवं कृषि विस्तार • कृषि एवं बागवानी का विकास और प्रोन्नति।• बंजर भूमि और चारागाह भूमि का विकास और उसके अनाधिकृत अतिक्रमण एवं प्रयोग की रोकथाम करना। 2 भूमि विकास, सुधार का कार्यान्वयन और चकबन्दी • भूमि विकास, भूमि सुधार, चकबन्दी और भूमि संरक्षण में सरकार तथा अन्य एजेन्सियों… Read More »

जिला पंचायत का गठन, चुनाव प्रणाली, अधिकार एवं शक्तियां

तिहत्तरवें संविधान संशोधन के अन्र्तगत त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था में जिला स्तर पर जिला पंचायत के गठन का प्रावधान किया गया है। प्रत्येक जिले के लिए एक जिला पंचायत होगी जिसका नाम उस जिले के नाम पर होगा। जिला पंचायत पूरे जिले से आयी प्राथमिकताओं व लोगों की जरूरतों का समेकन कर एक जिला योजना तैयार… Read More »

पंचायत की समितियां

पंचायती राज संस्थाओं को ग्रामीण समुदाय के आर्थिक विकास व सामाजिक न्याय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी प्रदान की गयी है। इन जिम्मेदारियों को पूर्ण करने हेतु पंचायत को 29 विषयों से सम्बन्धित विभिन्न कार्य सौंपे गये हैं। पंचायत तीनों स्तरों पर विभिन्न कार्यों के नियोजन और संचालन हेतु विभिन्न समितियों के निर्माण की व्यवस्था संविधान में… Read More »

74वां संविधान संशोधन अधिनियम – नगर निकायों के संदर्भ में

सत्ता विकेन्द्रीकरण की दिशा में संविधान का 73वां और 74वां संविधान संशोधन एक महत्वपूर्ण और निर्णायक कदम है। 74वां संविधान संशोधन नगर निकायों में सत्ता विकेन्द्रीकरण का एक मजबूत आधार है। अत: इस अध्याय का उद्देश्य 74वें संविधान संशोधन की आवश्यकता और 74वें संविधान संशोधन में मौजूद उपबंधों और नियमों को स्पष्ट करना है। भारत… Read More »

73वें संविधान संशोधन की मुख्य विशेषताएं

स्वतन्त्रता पश्चात देश को सुचारू रूप से चलाने के लिये हमारे नीति निर्माताओं द्वारा भारतीय संविधान का निर्माण किया गया। इस संविधान में नियमों के अनुरूप व एक नियत प्रक्रिया के अधीन जब भी कुछ परिवर्तन किया जाता है या उसमें कुछ नया जोड़ा जाता है अथवा हटाया जाता है तो यह संविधान संशोधन अधिनियम… Read More »

ग्राम सभा किसे कहते हैं ?

नयी पंचायत व्यवस्था के अन्र्तगत ग्राम सभा को एक महत्वपूर्ण इकाई के रूप में माना गया है। एक आदर्श पंचायत की नींव ग्राम सभा होती है। अगर नींव मजबूत है तो सारी व्यवस्था उस पर टिकी रह सकती है अगर नींव ही कमजोर या ढुलमुल है तो व्यवस्था किसी भी समय ढहनी निश्चित है। अत:… Read More »

विकास का अर्थ, परिभाषा, समझ एवं स्पष्टता

परिवर्तन प्रकृति का नियम है। परिवर्तन सकारात्मक व नकारात्मक दोनों ही हो सकते हैं। किसी भी समाज, देश, व विश्व में कोई भी सकारात्मक परिवर्तन जो प्रकृति और मानव दोनों को बेहतरी की ओर ले जाता है वही वास्तव में विकास है। अगर हम विश्व के इतिहास में नजर डालें तो पता चलता है कि… Read More »