Category Archives: परामर्श

परामर्श की प्रक्रिया के अंग, चरण, लक्ष्य एवं सिद्धांत

परामर्श प्रक्रिया के आवश्यक तत्व मिस ब्रेगडन ने इन परिस्थितियों के उत्पन्न होने पर परामर्श की आवश्यकता को इंगित किया है- वह परिस्थिति जब कि व्यक्ति न केवल सही सूचनायें चाहता है वरन् अपने व्यक्तिगत समस्याओं का भी समाधान चाहता है। जब विद्यार्थी अपने से अधिक बुद्धिमान श्रोता चाहता है जिससे वह अपनी समस्याओं का… Read More »

परामर्श के प्रकार

परामर्श के प्रकार कुछ विद्वानों ने परामर्श के तीन प्रकारों का उल्लेख किया है यथा- निदेशात्मक परामर्श-इस प्रकार के परामर्श में परामर्शक ही सम्पूर्ण प्रक्रिया का निर्णायक होता है। प्रत्याशी परामर्शदाता के ओदशों के अनुकूल अपने को ढालता है। इसे कभी-कभी आदेशात्मक परामर्श भी कहते हैं। इस क्रिया के मूल में परामर्शक ही रहता है।  अनिदेशात्मक… Read More »

परामर्श का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं एवं सिद्धांत

‘परामर्श’ शब्द अंग्रेजी के ‘counselling’ शब्द का हिन्दी रुपान्तर है,जो लैटिन के ‘Consilium’ से बना है जिसका शब्दिक अर्थ है सलाह लेना या परामर्श लेना। अत: परामर्श एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें परामर्श प्रार्थी अपने से अधिक अनुभवी, योग्य व प्रशिक्षित व्यक्ति के पास जाकर पूछताछ, विचार-विमर्श, तर्क-वितर्क तथा विचारों का विनिमय करता है। इस… Read More »

निदेशात्मक परामर्श क्या है?

निदेशात्मक परामर्श विधि में परामर्शदाता की अहम भूमिका होती है, तथा प्रार्थी गौण रूप से इसमें सम्मिलित होता है। परामर्शदाता अपने विभिन्न अनुभवों तथा कौशलों की सहायता से प्रार्थी की समस्याओं को सुलझाने का प्रयास करता है। नेडरिक थार्न के अनुसार, परामर्शदाता की यह प्रयास प्रार्थी के व्यक्तिगत विभवों के व्युत्व्मानुपाती होता है। परामर्शदाता इस… Read More »

समन्वित परामर्श अथवा समाहारक परामर्श क्या है?

जो परामर्शदाता निदेशात्मक या अनिदेशात्मक विचारधाराओं से असहमत हैं उन्होंने उपबोधन (परामर्श) के एक अन्य प्रकार की तकनीक को विकसित किया है, जिसे ‘समन्वित परामर्श अथवा ‘समाहारक परामर्श’ कहा जाता है। समन्वित परामर्श एक प्रकार से दोनों उपबोधनों के मध्य का परामर्श है, इसे मध्यमार्गीया’ के नाम से भी सम्बोधित किया जा सकता है। समाहारक… Read More »

व्यक्तिगत परामर्श क्या है?

व्यक्तिगत परामर्श, परामर्श की एक प्रविधि है जिसमें व्यक्ति विशेष को उसकी समस्याओं या भावनाओं को बहुत निकटता से सुना व समझा जाता है। व्यक्तिगत परामर्श का मानव जीवन में अधिक महत्व है। शिक्षा के उपरान्त व्यक्तिगत परामर्श ही ऐसी प्रक्रिया है जो व्यक्ति के विकास एवं प्रगति हेतु सर्वाधिक सहायक होती है। इसमें सन्देह… Read More »

सामूहिक परामर्श क्या है?

समस्याओं का उत्पन्न होना व्यक्ति के लिए कोई नयी बात नहीं है। व्यक्ति के सम्मुख समस्याएं आती रहती हैं। समस्याओं की गम्भीरता और स्वरूप में अन्तर हो सकता है। लेकिन कोई भी व्यक्ति समस्या समाधान की प्रक्रिया के उपरान्त ही आगे बढ़ पाता है। इन समस्याओं के समाधान सहायता प्रदान करने की दिशा में निर्देशन… Read More »

परामर्श का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएँ, आवश्यकता एवं लक्ष्य

परामर्श एक प्राचीन शब्द है और शब्द को परिभाषित करने के प्रयास प्रारम्भ से ही किए गए हैं। वैबस्टर शब्दकोष के अनुसार-’’परामर्श का आशय पूछताछ, पारस्परिक तर्क वितर्क अथवा विचारों का पारस्परिक विनिमय है।’’ इस शाब्दिक आशय के अतिरिक्त परामर्श के अन्य पक्ष भी हैं जिनके आधार पर परामर्श का अर्थ स्पष्ट हो सकता है।… Read More »

परामर्शदाता के गुण और कार्य

विशिष्ट एवं सुनिश्चित परिस्थितियों में ही परामर्श प्रदान किया जाता है तथा इसके लिए परामर्श देने वाले व्यक्ति में विभिन्न प्रकार की योग्यताओं एवं कौशलों का होना आवश्यक होता है। पूर्णतया प्रशिक्षित, व्यवसाय के प्रति निष्ठावान व्यक्ति ही इस प्रक्रिया को सम्पन्न कर सकता है उपबोधय में अपना विश्वास उत्पन्न करके उसे सहज और नि:संकोच… Read More »

अनिदेशात्मक परामर्श क्या है?

अनिदेशात्मक परामर्श विधि पूर्ण रूप से प्रार्थी केन्द्रित होती है। इस विधि में परामर्शदाता एक ऐसा सहयोगपूर्ण वातावरण तैयार करता है, जिससे प्रार्थी अपने अंदर छिपी गूढ़ भावनाओं व मनोविकारों को पूर्ण रूप से वार्तालाप के द्वारा बाहर प्रदर्शित करता है, वह भी बिना किसी भय अथवा दबाव के यहा पर परामर्श संबंधी सभी उनरदायित्व… Read More »