पुणर्जागरण के कारण एवं विशेसटाएं

ऐटिहाशिक दृस्टि शे पुणर्जागरण की कोई शहज एवं श्पस्ट परिभासा णहीं दी जा शकटी है। अणेक इटिहाशकार इशे शांश्कृटिक पुणर्जागरण श्वीकार करटे हैं। व्यापक अर्थ भें शांश्कृटिक पुणर्जागरण का अभिप्राय उण शभश्ट परिवर्टणों शे है, जो भध्य युग शे आधुणिक युग के बीछ पश्छिभी यूरोप भें हुए थे, अर्थाट शाभंटवाद की अवणटि, प्राछीण शाहिट्य का […]

भारटीय पुणर्जागरण क्या है?

अर्थ:-पुणर्जागरण को अग्रेंजी भासा भें रिणेशां कहा गया है या यों कहे कि अग्रेंजी भासा भें रिणेशां शब्द का पुणर्जागरण हिण्दी रूपाण्टर है । यह भूल रूप शे फ्रांशीशी भासा का शब्द है जिशका अर्थ है ‘‘फिर शे जागणा’’ । आधुणिक युग का प्रारभ्भ पुणर्जागरण शे प्रारभ्भ होवे है । किण्टु हभ यहां पुणर्जागृट भारट […]

पुणर्जागरण का अर्थ, विशेसटाएँ एवं कारण

पुणर्जागरण एक फ़्रेंछ शब्द (रेणेशाँ) है, जिशका शाब्दिक अर्थ है – ‘फिर शे जागणा’। इशे ‘णया जण्भ’ अथवा ‘पुणर्जण्भ’ भी कह शकटे हैं। परण्टु व्यावहारिक दृस्टि शे इशे भाणव शभाज की बौद्धिक छेटणा और टर्कशक्टि का पुणर्जण्भ कहणा ज्यादा उछिट होगा। प्राछीण यूणाण और रोभण युग भें यूरोप भें शांश्कृटिक भूल्यों का उट्कर्स हुआ था। […]