Category Archives: पुराण

उपपुराण के नाम एवं संख्या

पुराणों की भांति उपपुराणों की भी गणना की गयी है। विद्वानों का विचार है कि पुराणों के बाद ही उपपुराणों की रचना हुई है, पर प्राचीनता अथवा मौलिकता के विचार से उपपुराणों की महत्ता पुराणों के समान है। उपपुराणों में स्थानीय सम्प्रदाय तथा पृथक् पृथक् सम्प्रदायों की धार्मिक आवश्यकता पर अधिक बल दिया गया है।… Read More »

पुराणों की संख्या

पुराण शब्द की व्युत्पत्ति पाणिनि, यास्क तथा स्वयं पुराणों ने भी दी है। ‘पुराभवम्’ (प्राचीन काल में होने वाला) इस अर्थ में ‘सायं चिरंप्राºवे प्रगेSव्ययेभ्यश्टयुट्युलो तुट् च’ पाणिनी के इस सूत्र से ‘पुरा’ शब्द से ‘ट्यु’ प्रत्यय करने तथा ‘तुट्’ के आगमन होने पर ‘पुरातन’ शब्द निष्पन्न होवे है परन्तु स्वयं पाणिनि ने ही अपने… Read More »