Category Archives: पूरक चिकित्सा

एक्यूप्रेशर का अर्थ, परिभाषा एवं महत्व

अंगुलियों या किसी कृन्द (तीखी) वस्तु द्वारा किसी बिन्दु पर उपचार देने की पद्धति को एक्यूप्रेशर कहते है, इसमें किसी विशेष स्थान पर पे्रशर देकर चिकित्सा की जाती है, प्रेशर देने से अवरूद्ध चेतना संचार होने लगता है। एक्यूप्रेशर दो शब्दों से मिलकर बना है, ACUS+PRESSURE- जिसमें ACUS लैटिन भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ… Read More »

एक्यूपंक्चर के सिद्धान्त एवं एक्यूपंक्चर द्वारा रोग निदान विधि

एक्युपंक्चर विज्ञान एक निश्चित नियमों एवं सिद्धान्तों पर आधारित है। इनमें प्रथम सिद्धान्त है – यिन-यांग की चिकित्सा का। यिन-यांग सिद्धान्त चायनीज एक्युपंक्चर के अनुसार सम्पूर्ण बह्माण्ड का संतुलन स्थूल रुप से दो परस्पर विरोधी स्वरुप के होते हुए भी एक दूसरे के पूरक बलों पर आधरित है। इसे यिन यांग की संज्ञा दी है।… Read More »

संगीत चिकित्सा क्या है?

ध्वनि चिकित्सा के जितने भी रूप है, उनमें संगीत चिकित्सा सर्वाधिक लोकप्रिय है। यदि हम गहराई से अनुभव करें तो पायेंगे कि ब्रह्माण्ड की सम्पूर्ण संरचना ही संगीतमय है। सृष्टि के आदि में भी सर्वप्रथम अनाहत नाद अर्थात् ऊँकार की ध्वनि ही उत्पन्न हुयी थी और उसके बाद फिर सृष्टि रचना का क्रम आरींा हुआ।… Read More »

पिरामिड चिकित्सा क्या है?

क्या आप जानते है कि ग्रीक भाषा में पायरा का अर्थ होता है – ‘अग्नि’ तथा मिड का अर्थ है – ‘केन्द्र’ । इस प्रकार पिरामिड शब्द का अर्थ है – ‘केन्द्र में अग्नि वाला पात्र‘। जैसा कि हम सभी जानते है कि प्राचीन काल से ही अग्नि को ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।… Read More »

मूत्र चिकित्सा का अर्थ, लाभ और प्रभाव

शाब्दिक रुप से देखने पर मूत्र चिकित्सा का अर्थ स्वत: ही स्पष्ट हो जाता है-’’ मूत्र द्वारा विविध रोगों की चिकित्सा करना मूत्र चिकित्सा कहलाता है। इसके अन्तर्गत प्रमुख रुप से स्वमूत्र एवं गौमूत्र द्वारा चिकित्सा करने का वर्णन आता है। मूत्र चिकित्सा को प्राचीन शास्त्रों में शिवाम्बु कल्प का नाम देते हुए कहा गया… Read More »

स्वाध्याय चिकित्सा का अर्थ, प्रक्रिया एवं महत्व

कुछ लोग स्वाध्याय का अर्थ पुस्तकों का अध्ययन मात्र करना समझते हे, किन्तु इस प्रकार के अध्ययन को हम स्वाध्याय की संज्ञा नहीं दे सकते। स्वाध्याय की अवधारणा अत्यन्त व्यापक है। कुछ भी पढ़ लेने का नाम स्वाध्याय नहीं है, वरन् स्वाध्याय की सामग्री केवल वही ग्रन्थ, पुस्तक का विचार हो सकता है, जो किसी… Read More »

यज्ञ चिकित्सा क्या है?

‘यज्ञ’ का भावार्थ-परमार्थ एवं उदार-कृत्य है। ‘यज्ञ’ शब्द पाणिनीसूत्र ‘यजयाचयतविच उप्रक्चरक्षो नड़्’’ में नड़् प्रत्यय लगाने पर बनता है अर्थात् यज्ञ शब्द ‘यज्’ धातु से बना है, यज् धातु के तीन अर्थ हैं- देवपूजन, दान और संगतिकरण। इस प्रकार हवि या हवन के द्वारा देवताओं का पूजन का नाम ‘यज्ञ’ है। ईश्वरीय दिव्य शक्तियों की आराधना,… Read More »

एक्यूप्रेशर के सिद्धान्त, एक्यूप्रेशर देने की विधि

एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति का मुख्य सिद्धान्त यह है कि शरीर के विभिन्न भागो में अवरूद चेतना का संचार करना प्राण व रक्त के प्रवाह में गति लाना, दाब बिन्दुओं में प्रेशर देकर रोगी को रोगमुक्त करना। इस चिकित्सा पद्धति के कई लाभ है। एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति किसी भी तरह से बहुत कठिन य बहुत जटिल… Read More »

एक्यूपंक्चर का अर्थ, परिभाषा, लाभ एवं सीमाएँ

एक्युप्रेशर में शरीर के कुछ बिन्दुओं पर दबाव देकर उपचार करते हैं। इन बिन्दुओं को Acupoints कहते हैं। इन्हीं बिन्दुओं पर जब सुई डालकर उपचार किया जाता है तो उसे एक्यूपंक्चर (Acupuncture) कहते है। इन्हीं बिन्दुओं पर जब मेथी दाना और अन्य seed लगाकर उपचार करते हैं तो इसे Seed therapy कहते हैं। इन्हीं बिन्दुओं… Read More »

पूरक चिकित्सा क्या है?

क्या आप जानते हैं कि पूरक चिकित्सा को दूसरे विभिन्न नामों से भी जाना जाता है। जैसे-वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति, समग्र चिकित्सा पद्धति, पारम्परिक चिकित्सा पद्धति इत्यादि। आपकी जानकारी के लिये इस तथ्य को भी स्पष्ट कर देना अति आवश्यक है कि जब किसी रोगी को आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ पारम्परिक चिकित्सा भी दी जाती है,… Read More »