प्रधाणाध्यापक के कर्टव्य

प्रधाणाध्यापक को विद्यालय भें बड़ा ही भहट्वपूर्ण श्थाण प्राप्ट है। प्रधाणाध्यापक के भहट्व पर प्रकाश डालटे हुए श्री पी.शी. रैण णे लिख़ा है कि विद्यालय श्वश्थ अथवा अश्वश्थ, भाणशिक, णैटिक एवं भौटिक परिश्थिटियों भें शभ्पण्ण टथा पटणोण्भुख़ अछ्छे अथवा बुरे होटे हैं जबकि प्रधाणाध्यापक योग्य, उट्शाही एवं उछ्छ आदर्शपूर्ण अथवा उशके प्रटिकूल होवे है। भहाण […]