Category Archives: प्राचीन भारत का इतिहास

हड़प्पा सभ्यता की विशेषताएं

इस सभ्यता के लिये साधारण: तीन नामो का प्रयोग होता है- सिन्धु सभ्यता, सिंधु घाटी की सभ्यता और हड़प्पा सभ्यता। इन तीनों शब्दों को एक ही अर्थ है। इनमें से प्रत्येक शब्द की एक विशिष्ट पृष्ठभूमि है। प्रारंभ में 1921 में जब पश्चिमी पंजाब के हड़प्पा स्थल पर इस सभ्यता का पता चला है और… Read More »

हड़प्पा सभ्यता के पतन के कारण

भारत में कांस्य युगीन सभ्यता सिंधु घाटी और इसके अगल-बगल के क्षेत्रों में विकसित हुई। इसे इसके सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण शहरों में से एक शहर हड़प्पा के नाम से हड़प्पा सभ्यता कहते हैं; इसे विस्तृत सिन्धु घाटी सभ्यता भी कहा जा सकता है। इस सभ्यता के नगर 1920 के दशक में तब प्रकाश में आए, जब… Read More »

सातवाहन वंश का इतिहास

सातवाहन वंश का संस्थापक ‘सिमुक’ था। सिमुक के बाद उसका छोटा भाई कन्ह (कृष्ण) राजा बना क्योंकि सिमुक पुत्र शातकर्णि अवयस्क था। कृष्ण के पश्चात सिमुक का अवयस्क पुत्र श्री शातकर्णि (प्रथम शातकर्णि) शासक हुआ। शातकर्णि प्रथम प्रारम्भिक सातवाहन नरेशो  में सबसे महान था। उसने अंगीय कुल के महारठी त्रनकयिरों की पुत्री नागविका के साथ… Read More »

हड़प्पा सभ्यता की खोज किसने की?

हड़प्पा की सभ्यता, जिसे सिंधु घाटी की सभ्यता भी कहते हैं। हड़प्पा की सभ्यता की खोज 1920.22 में की गई थी, जब इसके दो बहुत ही महत्त्वपूर्ण स्थलों पर खुदाई की गई थी। ये स्थान थे, रावी नदी के किनारे बसा हड़प्पा और सिंधु नदी के किनारे बसा मोहनजोदड़ो। पहले स्थान की खुदाई की गई… Read More »

पुरापाषाण काल का इतिहास

लुबाक ने सर्वप्रथम पाषाण युग के भिन्न-भिन्न कालों को विभाजित किया, इनके अनुसार प्रथम पुरापाषाण काल (Palaeolithic Age) तथा द्वितीय नवपाषाण काल (Nealithic Age) था। इन्होंने यह विभाजन पाषाण उपकरणों के प्रकार तथा तकनीकी विशेषताओं आधार पर किया। 1970 में लारटेट ने पुरापाषाण काल को तीन भागों में विभाजित किया। (i) पूर्व पुरापाषाण काल (ii)… Read More »

नवपाषाण काल की विशेषताएँ

नवपाषाण शब्द उस काल को सूचित करता है जब मनुष्य को धातु के बारे में जानकारी नही थी। परन्तु उसने स्थायी निवास, पशु-पालन, कृषि कर्म, चाक पर निर्मित मृदभांड बनाने शुरू कर दिए थे। इस काल की जलवायु लगभग आज कल के समान थी इसलिए ऐसे पौधे पैदा हुए जो लगभग आज के गेंहू तथा… Read More »

वैदिक काल का इतिहास

वेदों से प्राप्त समाज एवं उनकी आर्थिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक जीवन को हम दो प्रमुख भागों में बांट सकते है। प्रथम ऋग्वैदिक संस्कृति का भाग है प्रारिम्भक वैदिक संस्कृति, जिसकों जानने का स्त्रोत ऋग्वेद है जोकि आर्यो का प्राचीनतम ग्रंथ है। उतरवैदिक संस्कृति का ज्ञान हमें यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद इत्यादि से होता है। परन्तु सर्वप्रथम… Read More »