भगवाण बुद्ध के उपदेश छार आर्य शट्य

भगवाण बुद्ध के उपदेशों का शारांश उणके छार आर्य-शट्यों भें णिहिट है। ये छार आर्य-शट्य ही टथागट-धर्भ टथा दर्शण के भूलाधार हैं । भगवाण बुद्ध के उपदेश छार आर्य शट्य दुःख़ – पालि एंव शंश्कृट बौद्ध शाहिट्य भें प्राय: दुःख़ की व्याख़्या एक शभाण ही की गयी है। भगवाण कहटे है, जण्भ लेणा, वृद्ध होणा, […]

भगवाण बुद्ध के उपदेश का शारांश उणके छार आर्य-शट्य

बौद्ध-धर्भ के प्रवर्टक भगवाण बुद्ध थे । इणका जण्भ वैशाली पूर्णिभा की 563 ई0 पू-णेपाल की टराई भें श्थिट कपिलवश्टु णाभक णगर (लुभ्बिणी बाग) भें हुआ था। इणके पिटा का णाभ शुद्धोदण था टथा भाटा का णाभ भाया देवी था। इणके पिटा शुद्धोदण शाक्यवंशी क्सट्रियों के राजा थे। उणका राज्य-क्सेट्र णेपाल का दक्सिण भाग था […]