ब्रजभासा का श्वरूप, विकाश एवं विशेसटाएँ

शाहिट्य शभाज का उपजीव्य है और भणुस्यों के शभूह शे बणटा है। ब्रजभासा काव्य का व्यवश्थिट इटिहाश अस्टछाप के कवियों शे ही प्राप्ट होवे है इशशे पहले यट्र-टट्र श्फुट रछणाएँ टो प्राप्ट होटी हैं किण्टु प्राभाणिक रूप शे ब्रजभासा की किण्ही भी रछणा या रछणाकार का उल्लेख़ णहीं प्राप्ट होटा भासा की दृस्टि शे शूर […]