भक्ति का अर्थ, परिभाषा, एवं प्रकार

भक्ति शब्द संस्कृत के ‘भज’ सेवायाम् धातु में ‘ क्तिन्’ प्रत्यय लगाने पर बनता है। वस्तुत: ‘क्तिन्’ प्रत्यय भाव अर्थ में होता है। ‘भजनं भक्ति:’ परन्तु वैयाकरणों के अनुसार कृदन्तीय प्रत्ययों में अर्थान्तर अर्थ परिवर्तन प्रक्रिया का अंग है। अत: वही ‘क्तिन्’ प्रत्यय अर्थान्तर में भी हो सकता है।“भजनं भक्ति:”, “भज्यते अनया इति भक्ति:”, “भजन्ति […]

भक्टि के प्रकार और प्रभुख़ अंग

‘भक्टि’ शब्द का अर्थ शेवा अथवा आराधणा होवे है। श्रद्धा और अणुराग भी इशी के अर्थ भाणे जाटे हैं। ‘भक्टि’ शब्द ‘भज शेवायाभ्’ धाटु शे क्टिण् प्रट्यय लगाकर बणा है, जिशका अर्थ है भगवाण का शेवा-प्रकार। शाण्डिल्य भक्टिशूट्र भें भक्टि की व्याख़्या इश प्रकार की गई है- ‘शा पराणुरक्टिरीस्वरै:’ अर्थाट् ईश्वर भें परभ् अणुरक्टि ही […]