Category Archives: भक्ति

भक्ति के प्रकार और प्रमुख अंग

‘भक्ति’ शब्द का अर्थ सेवा अथवा आराधना होता है। श्रद्धा और अनुराग भी इसी के अर्थ माने जाते हैं। ‘भक्ति’ शब्द ‘भज सेवायाम्’ धातु से क्तिन् प्रत्यय लगाकर बना है, जिसका अर्थ है भगवान का सेवा-प्रकार। शाण्डिल्य भक्तिसूत्र में भक्ति की व्याख्या इस प्रकार की गई है- ‘सा परानुरक्तिरीष्वरै:’ अर्थात् ईश्वर में परम् अनुरक्ति ही… Read More »