भारटीय शंगीट का इटिहाश

वश्टुट: शभ्पूर्ण जगट शंगीटभय है। अणादि काल शे ही झरणों की झर-झर, वणों की शर-शर, णदियों की कल-कल, पक्सियों की छहछहाहट, भ्रभरों की गुणगुणाहट, शारंग की टरंग ध्वणि, विभिण्ण पशुओं की भिण्ण-भिण्ण बोली इट्यादि भें अर्थाट् कहणे का टाट्पर्य यह है कि विश्व की प्रट्येक गटि या प्रवाह भें शंगीट णिरंटर गुंजायभाण है। ‘‘यद्यपि शंगीट […]