Category Archives: भारत का इतिहास 1756 से 1857

प्रथम, द्वितीय, तृतीय का महत्व और परिणाम कर्नाटक का द्वितीय

कर्नाटक अपनी धन सम्पदा के लिये प्रसिद्ध था। दिल्ली के सैय्द बन्धुओं के प्रभाव से मुगल सम्राट ने मराठों को कर्नाटक से चौथ वसूल करने का अधिकार दे दिया था। जब मराठों ने कर्नाटक के नवाब दोस्त अली से चौथ की धनराषि मांगी और उसने यह धनराषि नहीं दी तो मराठों ने 1740 ई. में… Read More »

प्लासी का युद्ध के कारण, महत्व और परिणाम

प्लासी युद्ध के कारण प्लासी का युद्ध भारतीय इतिहास में अंग्रेजों के प्रभुत्व के प्रसार की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। जिसके कारण हैं – 1. सिराजुद्दौला की अलोकप्रियता – सिराजुद्दौला का चारित्रिक बुराईयों से परिपूर्ण था। वह क्रूर, अत्याचारी, चंचल प्रकृति, हठी और अति विलासी व्यक्ति था। उसने अपने स्वभाव से अपने ही संबंधियों और… Read More »

बक्सर का युद्ध के कारण, परिणाम और महत्व

बक्सर युद्ध के कारण बंगाल में प्रभुत्व की समस्या  अंग्रेजों से हुए समझौते के अनुसार मीरकासिम ने अपने वचनों को पूरा कर दिया था। उसने अंग्रेजों को धन और जिले दिये, ऋण भी चुकाया, सेना का शेश वेतन भी दिया और आर्थिक सुधारों से अपनी स्थिति को सुदृढ़ भी कर किया। अब वह योग्य एवं… Read More »

आंग्ल सिक्ख युद्ध के कारण एवं परिणाम

प्रथम आंग्ल-सिक्ख युद्ध (1845 ई.) के कारण रानी झिन्दन की कूटनीति- रणजीतसिंह की मृत्यु के बाद सिक्ख सेना के अधिकारियों ने उत्तराधिकारी-युद्ध में और दरबार के षड्यंत्रो में अत्यन्त सक्रियता से भाग लिया। उनकी शक्ति और उच्छृंखलता इतनी बढ़ गयी थी कि शासन और राज परिवार के लागे उनसे आतंकित हो गये थे। उन्हें नियंत्रित करना… Read More »

आंग्ल-मराठा युद्ध के कारण एवं परिणाम

प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध (1772 ई. से 1784 ई.) 1761 ई. में पनीपत के तृतीय युद्ध के कुछ समय बाद ही पेशवा बालाजी बाजीराव की मृत्यु हो गयी। उसके पशचात् उसका पुत्र माधवराव पेशवा बना। उसने थोड़े समय में ही मराठा शक्ति ओर साम्राज्य को पुन: बढ़ा लिया और महादजी सिंधिया ने मुगल सम्राट शाहआलम को… Read More »

1857 का विद्रोह के कारण एवं परिणाम

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन भारतीयों द्वारा स्वत्रतंता प्राप्ति के लिए किये गये संग्राम का इतिहास है। यह संग्राम ब्रिटिश सत्ता की गुलामी से मुक्ति पाने के लिए भारतीयों द्वारा संचालित एवं संगठित आंदोलन है। विद्रोह का स्वरूप भारतीय स्वतंत्रता का प्रथम संग्राम 1857 ई. में ब्रिटिश सत्ता के विरूद्ध भारतीयों द्वारा पहली बार संगठित एवं हथियार… Read More »