Category Archives: भाषा विज्ञान

ध्वनि विज्ञान या स्वन विज्ञान क्या है?

भाषा की लघुत्तम इकाई स्वन है। इसे ध्वनि नाम भी दिया जाता है। ध्वनि के अभाव में भाषा की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। भाषा विज्ञान में स्वन के अध्ययन संदर्भ को ‘स्वनविज्ञान’ की संज्ञा दी जाती है। ध्वनि शब्द ध्वन् धातु में इण् (इ) प्रत्यय के योग से बना है। भाषा विज्ञान… Read More »

रूपिम का अर्थ, परिभाषा, स्वरूप एवं वर्गीकरण

रूपिम को रूपग्राम और पदग्राम भी कहते हैं। जिस प्रकार स्वन-प्रक्रिया की आधारभूत इकाई स्वनिम है, उसी प्रकार रूप प्रक्रिया की आधारभूत इकाई रूपिम है। रूपिम वाक्य-रचना और अर्थ-अभिव्यक्ति की सहायक इकाई है। स्वनिम भाषा की अर्थहीन इकाई है, किन्तु इसमें अर्थभेदक क्षमता होती है। रूपिम लघुतम अर्थवान इकाई है, किन्तु रूपिम को अर्थिम का… Read More »

वाक्य की परिभाषा, रूपान्तरण के नियम एवं परिवर्तन के कारण

भाषा का मुख्य कार्य अभिव्यक्ति है। भाव की पूर्ण अभिव्यक्ति वाक्य के माध्यम से होती हैं। वाक्य के अभाव में भाव या विचार की स्थिति संदिग्ध हो जाएगी। वास्तव में भाव मन में अव्यक्त वाक्य के रूप में विद्यमान होते हैं, ध्वनि-प्रतीकों या लिपि-चिह्मों का आधार पाने पर वाक्य का व्यक्त रूप सामने आता है।… Read More »

भाषा विज्ञान की परिभाषा, क्षेत्र एवं अध्ययन के लाभ

भाषा के वैज्ञानिक अध्ययन के विषय में इतनी जानकारी प्राप्त होने के बाद इस बात की आवश्यकता प्रतीत होती है कि इसे निश्चित शब्दों में परिभाषाबद्ध किया जाए तथा साथ ही विभिन्न विद्वानों ने इसकी क्या-क्या परिभाषाएँ की हैं, उनका भी अवलोकन कर लिया जाए। डॉ0 श्याम सुन्दर दास ने अपने ग्रन्थ भाषा रहस्य में… Read More »

वाक्य विज्ञान का स्वरूप, परिभाषा, एवं प्रकार

वाक्य भाषा का सबसे महत्त्वपूर्ण अंग है। मनुष्य अपने विचारों की अभिव्यक्ति वाक्यों के माध्यम से ही करता है। अत: वाक्य भाषा की लघुतम पूर्ण इकाई है। वाक्य विज्ञान का स्वरूप वाक्य विज्ञान के अन्तर्गत निम्नलिखित बातों का विचार किया जाता है- वाक्य की परिभाषा, वाक्यों और भाषा के अन्य अग् का सम्बन्ध, वाक्यों के… Read More »

अनुवाद एवं भाषाविज्ञान

अनुवाद एक भाषिक कला है। सामान्य अर्थ में, एक भाषा में कही गई बात को दूसरी भाषा में कहना ‘अनुवाद’ है। यहाँ कथन या अभिव्यक्ति का माध्यम है ‘भाषा’। स्पष्ट है कि अनुवाद क्रिया पूर्णत: भाषा पर आधारित है। कदाचित इसीलिए भोलानाथ तिवारी जी ने अनुवाद को ‘भाषान्तर’ कहा है। एक भाषिक क्रिया होने के… Read More »

मानक भाषा का अर्थ, परिभाषा एवं प्रकार

मानक भाषा को कई नामों से पुकारते हैं। इसे कुछ लोग ‘परिनिष्ठित भाषा’ कहते हैं और कई लोग ‘साधु भाषा’। इसे ‘नागर भाषा’ भी कहा जाता है । अंग्रेजी में इसे Standard Language’ कहते हैं। मानक का अर्थ होता है एक निश्चित पैमाने के अनुसार गठित। मानक भाषा का अर्थ होगा, ऐसी भाषा जो एक… Read More »

भाषा संरचना क्या है?

भाषा संरचना का मूलाधार संरचनात्मक पद्धति है जिस प्रकार भवन रचना में ईट, सीमेंट, लोहा, शक्ति अर्थात् मजदूर और कारीगर की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार भाषा-संरचना में ध्वनि, शब्द, पद, वाक्य, प्रोक्ति और अर्थ की अपनी-अपनी भूमिका होती है। ध्वनि -संरचना सामान्यत: किन्हीं दो या दो से अधिक वस्तुओं के आपस में टकराने से… Read More »

भाषा विज्ञान की परिभाषा, स्वरूप एवं व्याप्ति

भाषा के वैज्ञानिक अध्ययन को भाषा विज्ञान कहते हैं। प्राचीन काल में भाषा विषयक अध्ययन निरुक्त्त, शब्दानुशासन, निर्वसन-शास्त्र, व्याकरण और प्रतिशाख्य आदि में होता रहा है। आधुनिक भाषा विज्ञान की प्रक्रिया शुरू हुए दो शताब्दी हो चुकी है। भाषा विज्ञान के लिए समय-समय पर अनेक नाम दिए गए हैं। सर्वप्रथप इसके तुलनात्मक अध्ययन को देखते… Read More »

भारतीय आर्य भाषा का उद्भव और विकास

भारतीय आर्यभाषा का महत्व संसार की सभी भाषाओं में सार्वाधिक है। ये भाषाएं समृद्ध साहित्य व्याकरण के सम्मत रूप और प्रयोग आधार पर अपनी पहचान के साथ सामने आई है। भारतीय आर्यभाषा का विभाजन भारतीय आर्यभाषा की पूरी श्रृंखला को 3 भागों में विभाजित किया जाता है- प्राचीन भारतीय आर्यभाषाएं (प्रा0 भा0 आ0) – 1500… Read More »