Category Archives: मनोरोग

मनोरोग के प्रकार

अधिकतर शारीरिक स्थितियों को हेतुकी एवं संरचात्मक विकृति के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है। कुछ सामान्य चिकित्सकीय स्थितियों जैसे माइग्रेन,ट्राईजेमिनल न्यूरालजिया को अभी तक इस प्रकार से वर्गीकृत नहीं किया जा सका है, जिसके कारण उनका वर्गीकरण केवल लक्षणों के आधार पर ही किया गया है। मानसिक विकार मुख्य रूप से इस दूसरे… Read More »

सामान्यीकृत चिंता विकार के लक्षण, कारण एवं उपचार

जब अधिक चिंता दीर्घकाल तक बनी रहती है तो वह सामान्यीकृत चिंता विकार का रूप ले लेती है। बहुत से मनोवैज्ञानिकों ने सामान्यीकृत चिंता विकार को परिभाषित किया है इन परिभाषाओं के अवलोकन से हम सामान्यीकृत चिंता विकार के संप्रत्यय को भली भॉंति समझ सकते हैं। प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक रोनाल्ड जे कोमर ने अपनी पुस्तक ‘फण्डामेंटल्स… Read More »

मनोरोग की परिभाषा एवं मनोरोग के स्वरूप

जिस प्रकार व्यक्ति विभिन्न प्रकार के शारीरिक रोगों से ग्रस्त रहता है, उसी प्रकार वह अनेक प्रकार के मनोरोगों से भी ग्रसित रहता है और ये मनोरोग शारीरिक रोगों की तुलना में व्यक्ति, परिवार तथा समाज के लिये अधिक कष्टकारी होते है। अब प्रश्न यह उठता है कि मनोरोग क्या है? व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य… Read More »

फोबिया के कारण, लक्षण एवं प्रकार

दुर्भीति जिसे अंग्रेजी के फोबिया शब्द से जाना जाता है, वस्तुत: चिंता विकृति के प्रमुख प्रकारों में गिना जाता है। चिंता एक संवेग है जिसमें अविवेकपूर्ण नकारात्मक विचारों की श्रृंखला चलती है, तथा व्यक्ति अपने साथ कुछ बुरा होने की नकारात्मक भययुक्त आशंका से ग्रस्त रहता है। जब तक यह अविवेकपूर्ण डर व्यक्ति के नियंत्रण… Read More »

तनाव का अर्थ, परिभाषा, प्रकार एवं विशेषताएँ

तनाव एक मानसिक रोग न होकर मानसिक रोगों का मूल कारण है। तनाव को यदि हम कुछ सटीक शब्दों में स्पष्ट करना चाहें तो कह सकते हैं कि मन:स्थिति एवं परिस्थिति के बीच संतुलन का अभाव ही तनाव की अवस्था है। कहने का तात्पर्य यह है कि जब व्यक्ति के सामने कोई ऐसी समस्या या… Read More »

व्यक्तित्व विकार का अर्थ, परिभाषा, लक्षण, कारण एवं प्रकार

व्यक्तित्व विकृति एक प्रकार से अपरिपक्व व्यक्तित्व विकास का परिणाम होता है। इसमें ऐसे लोगों को सम्मिलित किया जाता है, जिनके व्यक्तित्व के शीलगुण तथा उनका विकास इतने अपरिपक्व एवं विकृत ढंग से होता है कि ये अपने वातावरण की प्राय: प्रत्येक वस्तु, घटना, परिस्थिति, व्यक्ति के बारे में एक दोषपूर्ण प्रत्यक्षण एवं चिन्तन करते… Read More »

मानसिक स्वास्थ्य का अर्थ, परिभाषा एवं महत्व

मानसिक स्वास्थ्य से तात्पर्य वैसे अधिगमित व्यवहार से होता है जो सामाजिक रूप से अनुकूली होते हैं एवं जो व्यक्ति को अपनी जिन्दगी के साथ पर्याप्त रूप से सामना करने की अनुमति देता है।’ दूसरे शब्दों में मानसिक स्वास्थ्य व्यक्ति की उस स्थिति की व्याख्या है जिसमें वह समाज व स्वयं के जीवन की परिस्थितियों… Read More »

अवसाद का अर्थ, लक्षण, कारण एवं प्रकार

मनोदशा विकृतियों में अवसाद एक प्रमुख रोग है। विषाद या अवसाद से आशय मनोदशा में उत्पन्न उदासी से होता है अथवा यह भी कहा जा सकता है कि अवसाद से तात्पर्य एक नैदानिक संलक्षण से है, जिसमें सांवेगिक अभिप्रेरणात्मक, व्यवहारात्मक, संज्ञानात्मक एवं दैहिक या शारीरिक लक्षणों का मिश्रित स्वरूप होता हे। इसे ‘‘ नैदानिक अवसाद’’… Read More »

कुंठा (Frustration) का अर्थ, परिभाषा एवं लक्षण

कई बार व्यक्ति के रास्ते में अनेक प्रकार की बाधाएँ आती है जिस कारण वह कुंठित रहने लगता है। कुंठा का अर्थ हताशा और निराशा है। कुंठा का प्रमुख कारण मूल्यों का विघटन माना जाता है। ‘कुंठा’ को अंग्रेजी में ‘Frustration’ भी कहा जाता है। कुंठा का शिकार प्रत्येक उम्र के व्यक्ति हैं। हर उम्र… Read More »