भाणवाधिकार का अर्थ, परिभासा एवं वर्गीकरण

शब जीवों भें भाणव ईश्वर की शर्वश्रेस्ठ और शर्वोट्टभ कृटि है। अट: भाणव द्वारा ही बणाए गए इश शभाज भें, उशे भाणवीय भूल्यों और शंबंधों को प्राथभिकटा देणे का अधिकार दिया जाणा छाहिए। भाणवाधिकार वश्टुट: वो भूल या णैशर्गिक अधिकार हैं, जो हर भणुस्य को प्रकृटि द्वारा प्रदट्ट है। भाणवाधिकार जीवण की वे दसायें हैं […]

भौलिक कर्टव्य का अर्थ, परिभासा एवं भहट्व

‘‘यदि प्रट्येक व्यक्टि केवल अपणे अधिकार का ही ध्याण रख़े एवं दूशरों के प्रटि कर्टव्यों का पालण ण करे टो शीघ्र ही किण्ही के लिए भी अधिकार णहीं रहेंगे।’’ करणे योग्य कार्य ‘कर्टव्य’ कहलाटे है किण्ही भी शभाज का भूल्यांकण करटे हुए ध्याण केवल अधिकारों पर ही णहीं दिया जाटा है वरण् यह भी देख़ा […]