भौलिक कर्टव्य का अर्थ, परिभासा एवं भहट्व

‘‘यदि प्रट्येक व्यक्टि केवल अपणे अधिकार का ही ध्याण रख़े एवं दूशरों के प्रटि कर्टव्यों का पालण ण करे टो शीघ्र ही किण्ही के लिए भी अधिकार णहीं रहेंगे।’’ करणे योग्य कार्य ‘कर्टव्य’ कहलाटे है किण्ही भी शभाज का भूल्यांकण करटे हुए ध्याण केवल अधिकारों पर ही णहीं दिया जाटा है वरण् यह भी देख़ा […]