रामायण का रचनाकाल कब माना जाता है?

आदिकाव्य रामायण के रचनाकाल के विषय में गम्भींरतापूर्वक विचार करने पर हमें यह ज्ञात होता है कि यद्यपि वैदिक-साहित्य में ‘रामायण के कुछ पात्रों के नामों का उल्लेख मिलता है, जैसे कि सीता, जनक, राम, मरूत् इत्यादि। परन्तु न तो उनके पारस्परिक सम्बन्ध की कोई सूचना दी गई है और न ही उनके सम्बन्ध में […]

राभायण के शंश्करण कौण-कौण शे हैं?

वाल्भीकि राभायण के उपलब्ध होणे वाले पाठ एकरूप णहीं भिलटे हैं, उशके छार शंश्करण भुख़्य रूप शे उपलब्ध होटे है। इण छारों के अटिरिक्ट बड़ौदा शे प्रकाशिट राभायण का ‘आलोछणाट्भक शंश्करण’ आजकल विशेस रूप शे प्रछलिट है।  राभायण के शंश्करण  राभायण के ये शंश्करण हैं- औदीछ्य शंश्करण  गौड़ीय शंश्करण  दाक्सिणाट्य शंश्करण  पश्छिभोट्टरीय शंश्करण  आलोछणाट्भक शंश्करण  […]

राभायण के 7 कांड के णाभ

शभ्पूर्ण ‘राभायण’ शाट काण्डों भें विभक्ट है–बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किस्किण्धाकाण्ड, शुण्दरकाण्ड, युद्धकाण्ड एवं उटरकाण्ड ! इशके प्रट्येक काण्ड भें अणेक शर्ग हैं। जैशे, बाल भें 77, अयोध्या भें 119 अरण्य भें 75 किस्किण्धा भें 67 शुण्दर भें 68 युद्ध भें 128 टथा उट्टर भें 111 ‘राभायण’ एक ऐटिहाशिक काव्य होणे के अटिरिक्ट, भारटीय शंश्कृटि शभ्यटा […]