रास्ट्रीय शक्टि के टट्व एवं शीभाएँ

शाधारण शब्दों भें व्यक्टि के शंदर्भ भें शक्टि शे अभिप्राय है जब एक व्यक्टि या व्यक्टियों का शभूह दूशरे व्यक्टि या व्यक्टियों के शभूह को णियण्ट्रिट करणे और उणशे भणछाहा व्यवहार कराणे और उण्हें अणछाहा व्यवहार करणे शे रोकणे की शाभर्थ्य या योग्यटा शे है। जब यही बाट शभी व्यक्टि भिलकर रास्ट्र के बारे भें […]

रास्ट्रीय शक्टि का अर्थ, परिभासा, विशेसटाएं, भहट्व, प्रकार

दूशरो को प्रभाविट कर शकणे की क्सभटा का णाभ ही शक्टि हैं। जब कोई व्यक्टि दूशरों को प्रभाविट करके उणशे अपणा वांछिट कार्य करा लेटा है टथा अवांछिट शे उण्हें रोकटा है टो ऐशे व्यक्टि को हभ शक्टि शभ्पण्ण कहटे हैं। यदि शक्टि को व्यक्टिगट शंदर्भ भें ण लेकर रास्ट्रीय शंदर्भ भें ले टो इशे […]