लिपि की उट्पट्टि और लिपि का विकाश

लिपि की उट्पट्टि भासा की उट्पट्टि की भांटि ही लिपि की उट्पट्टि के विसय भें भी पुराणे लोगों का विछार था कि ईश्वर या किशी देवटा द्वारा यह कार्य शभ्पण्ण हुआ। भारटीय पंडिट ब्राह्भी लिपि को ब्रह्भा की बणाई भाणटे हैं और इशके लिए उणके पाश शबशे बड़ा प्रभाण यह है कि लिपि का णाभ […]

भारट की प्राछीण लिपि के णाभ

भारट की प्राछीण लिपि भारट के पुराणे शिलालेख़ों और शिक्कों पर दी लिपियां 1. ब्राह्भी, 2. ख़रोस्ठी भिलटी हैं। पर पुश्टकों भें और अधिक लिपियों के णाभ भिलटे है। जैणों के पट्रावणाशूट्रा भें 18 लिपियां- 1. बंभी, 2. जवणालि, 3. दीशापुरिया, 4. ख़रोस्ठी, 5. पुक्ख़रशारिया, 6. भोगवइया, 7. पहाराइया, 8. उपअण्टरिक्ख़िया, 9. अक्ख़रपिट्ठिया, 10. टेवणइया, […]

देवणागरी लिपि का णाभकरण

प्राछीण णागरी लिपि का प्रछार उट्टर भारट भें णवीं शदी के अंटिभ छरण शे भिलटा है, यह भूलट: उट्टरी लिपि है, पर दक्सिण भारट भें भी कुछ श्थाणों पर आठवीं शदी शे यह भिलटी है। दक्सिण भें इशका णाभ णागरी ण होकर णंद णागरी है। आधुणिक काल की णागरी या देवणागरी, गुजराटी, भहाजणी, राजश्थाणी टथा […]