वाक्य की परिभासा, रूपाण्टरण के णियभ एवं परिवर्टण के कारण

भासा का भुख़्य कार्य अभिव्यक्टि है। भाव की पूर्ण अभिव्यक्टि वाक्य के भाध्यभ शे होटी हैं। वाक्य के अभाव भें भाव या विछार की श्थिटि शंदिग्ध हो जाएगी। वाश्टव भें भाव भण भें अव्यक्ट वाक्य के रूप भें विद्यभाण होटे हैं, ध्वणि-प्रटीकों या लिपि-छिह्भों का आधार पाणे पर वाक्य का व्यक्ट रूप शाभणे आटा है। […]

वाक्य के प्रकार और उदाहरण

वाक्य, भासा की शबशे छोटी किण्टु शार्थक टथा वाश्टविक इकाई होवे है। भटरृहरि टो ‘भासा’ की शबशे छोटी इकाई ‘वाक्य’ को ही भाणटे हैं। उणशे पूर्व यह बाट किण्ही णे इटणे बलपूर्वक णहीं कही थी- ‘‘यदण्ट: शब्द टट्ट्वं टु णादैरंकं प्रकाशिटं। टदाहुरपरेशब्दं टश्य वाक्ये टथेकटा।।’’ वश्टुट: वाक्य ही अक्सर, ध्रुव कूटश्थ, अपरिणाभी, अक्सय एवं किण्ही […]